भक्ति और सूफी आंदोलन
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भक्ति और सूफी आंदोलन
1. भक्ति आंदोलन का प्रारंभ किया गया था-
[U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2001]
(A) आलवार संतों द्वारा
(B) सूफी संतों द्वारा
(C) सूरदास द्वारा
(D) तुलसीदास द्वारा
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भक्ति आंदोलन की शुरुआत दक्षिण भारत में हुई थी, जहां आलवार (वैष्णव संत) और नयनार (शैव संत) इसका प्रचार-प्रसार कर रहे थे।
8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया, जिसने भक्ति आंदोलन की विचारधारा को दिशा दी।
भागवत पुराण के अनुसार, भक्ति द्रविड़ देश में जन्मी, कर्नाटक में विकसित हुई, महाराष्ट्र में समृद्ध हुई और गुजरात में जीर्ण हो गई।
2. भक्ति संस्कृति का भारत में पुनर्जन्म हुआ-
[U.P. P.C.S. (Pre) 1993]
(A) वैदिक काल में
(B) दसवीं शताब्दी ईस्वी में
(C) बारहवीं शताब्दी ईस्वी में
(D) पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी ईस्वी में
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भक्ति आंदोलन का पुनर्जन्म 15वीं-16वीं शताब्दी में हुआ, जब कबीर, नानक, तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई जैसे संतों ने इसे आगे बढ़ाया।
हालांकि, भक्ति परंपरा की जड़ें 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन में पाई जाती हैं।
3. बुद्ध और मीराबाई के जीवन दर्शन में मुख्य साम्य था-
[R.A.S./R.T.S. (Pre) 1992]
(A) अहिंसा व्रत का पालन
(B) निर्वाण के लिए तपस्या
(C) संसार दुःखपूर्ण है
(D) सत्य बोलना
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बुद्ध और मीराबाई दोनों ने संसार को दुःखपूर्ण माना।
बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्यों में पहला सत्य “दुःख” है, जो बताता है कि संसार में जन्म, मृत्यु, बीमारी और मोह दुःख के कारण हैं।
मीराबाई ने भी संसार के मोह को तुच्छ समझकर कृष्ण भक्ति को ही वास्तविक सुख माना।
4. “कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति से उसका धर्म-संप्रदाय या जाति न पूछे।” यह कथन है-
[U.P.P.C.S. (Pre) 2009]
(A) कबीर का
(B) रामानंद का
(C) रामानुज का
(D) चैतन्य का
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संत रामानंद ने जाति-पाति की बाधा को तोड़ते हुए “सबसे पहले भक्ति मार्ग को सभी जातियों के लिए खोला”।
उनके शिष्यों में कबीर (जुलाहा), रैदास (चर्मकार), सेना (नाई), पीपा (राजपूत) जैसे विभिन्न जातियों के लोग शामिल थे।
5. सभी भक्ति संतों के मध्य एक समान विशेषता थी, कि उन्होंने-
[47th B.P.S.C. (Pre) 2005]
(A) अपनी वाणी को उसी भाषा में लिखा, जिसे उनके भक्त समझते थे
(B) पुरोहित वर्ग की सत्ता को नकारा
(C) स्त्रियों को मंदिर जाने को प्रोत्साहित किया
(D) मूर्तिपूजा को प्रोत्साहित किया
View उत्तर & व्याख्या
भक्ति आंदोलन के संतों ने स्थानीय भाषाओं में उपदेश दिए, जिससे उनके विचार आम जनता तक पहुंचे।
- कबीर और दादू ने हिंदी में दोहे रचे।
- गुरु नानक ने गुरुमुखी में उपदेश दिए।
- चैतन्य महाप्रभु ने बंगाली में भक्ति गीत गाए।
- अलवार और नयनार संतों ने तमिल भाषा में भक्ति साहित्य लिखा।
इस कारण क्षेत्रीय भाषाओं का विकास हुआ।
6. मध्ययुगीन भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में सूफी संत निम्नलिखित में से किस तरह के आचरण का निर्वाह करते थे?
[I.A.S (Pre) 2012]
- ध्यानसाधना और श्वास-नियमन
- एकांत में कठोर यौगिक व्यायाम
- श्रोताओं में आध्यात्मिक हर्षोन्माद उत्पन्न करने के लिए पवित्र गीतों का गायन
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 3
(D) 1, 2 और 3
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सूफी संतों ने ध्यानसाधना, श्वास-नियमन और यौगिक क्रियाओं का अभ्यास किया।
वे “समा” (धार्मिक संगीत-संगीतमय भक्ति साधना) के माध्यम से श्रोताओं में आध्यात्मिक उत्साह जगाते थे।
7. कामरूप में वैष्णव धर्म को लोकप्रिय बनाया-
[U.P.P.C.S. (Mains) 2002]
(A) चैतन्य ने
(B) निम्बार्क ने
(C) रामानंद ने
(D) शंकरदेव ने
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शंकरदेव ने असम (कामरूप) में वैष्णव धर्म का प्रचार किया और एकेश्वरवाद पर बल दिया।
उन्होंने भक्ति आंदोलन को असम तक फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
8. सुप्रसिद्ध मध्यकालीन संत शंकरदेव संबंधित थे-
[U.P. P.C.S. (Pre) 2015]
(A) शैव संप्रदाय से
(B) वैष्णव संप्रदाय से
(C) अद्वैत संप्रदाय से
(D) द्वैताद्वैत संप्रदाय से
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शंकरदेव वैष्णव संप्रदाय से संबंधित थे और उन्होंने असम में “सत्संगी परंपरा” की नींव रखी।
9. असम एवं कूच बिहार में वैष्णव धर्म का प्रवर्तन किसने किया?
[U.P.P.C.S. (Mains) 2011]
(A) चैतन्य
(B) मध्व
(C) शंकरदेव
(D) वल्लभाचार्य
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शंकरदेव ने असम एवं कूच बिहार में वैष्णव धर्म का प्रसार किया और “नामघर” (प्रार्थना स्थल) की परंपरा शुरू की।
10. रामानुजाचार्य किससे संबंधित है?
[U.P.P.C.S. (Pre) 1991]
(A) भक्ति
(B) द्वैतवाद
(C) विशिष्टाद्वैत
(D) एकेश्वरवाद
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रामानुजाचार्य ने “विशिष्टाद्वैत” का प्रतिपादन किया।
उन्होंने सगुण भक्ति को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताया और श्रीवैष्णव परंपरा की स्थापना की।
11. ‘शुद्ध अद्वैतवाद’ का प्रतिपादन किया था-
[U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002]
(A) माधवाचार्य ने
(B) वल्लभाचार्य ने
(C) श्रीकांताचार्य ने
(D) रामानुज ने
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वल्लभाचार्य ने “शुद्ध अद्वैतवाद” या पुष्टिमार्ग का प्रतिपादन किया।
उन्होंने रुद्र संप्रदाय के विष्णुस्वामी के मत का विकास किया।
वल्लभाचार्य को वैष्णव भक्ति आंदोलन का प्रमुख प्रचारक माना जाता है और वे अग्नि के अवतार भी कहे जाते हैं।
12. ‘महाप्रभु वल्लभाचार्य’ की जन्मस्थली कहां है?
[Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2015]
(A) शिवरीनारायण
(B) बिलासपुर
(C) रतनपुर
(D) चम्पारण्य
(E) इनमें से कोई नहीं
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वल्लभाचार्य का जन्म विक्रम संवत् 1535 (1479 ई.) वैशाख कृष्ण एकादशी को चम्पारण्य (वर्तमान छत्तीसगढ़) में हुआ था।
वे तेलुगू ब्राह्मण परिवार से थे और कृष्ण भक्ति की पुष्टिमार्ग परंपरा के संस्थापक थे।
13. निम्नलिखित में कौन सुमेलित है?
[U.P.P.C.S. (Mains) 2005]
(A) अद्वैतवाद – रामानुजम
(B) विशिष्टाद्वैतवाद – शंकराचार्य
(C) द्वैतवाद – मध्वाचार्य
(D) द्वैताद्वैतवाद – वल्लभाचार्य
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मध्वाचार्य ने “द्वैतवाद” का प्रतिपादन किया, जिसमें जीव और ब्रह्म को अलग-अलग माना गया।
- अद्वैतवाद – शंकराचार्य
- विशिष्टाद्वैतवाद – रामानुजाचार्य
- शुद्ध अद्वैतवाद – वल्लभाचार्य
- द्वैताद्वैतवाद – निम्बार्काचार्य
14. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सही उत्तर चुनिए-
[U.P. R.O./A.R.O. (Mains) 2017]
सूची-I | सूची-II |
---|---|
(A) वल्लभाचार्य | (1) द्वैतवाद |
(B) रामानुज | (2) पुष्टिमार्ग |
(C) मध्वाचार्य | (3) विशिष्टाद्वैत |
(D) शंकराचार्य | (4) अद्वैतवाद |
(A) 1 3 4 2
(B) 2 4 1 3
(C) 2 3 1 4
(D) 4 1 3 2
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सही सुमेलन:
- वल्लभाचार्य – पुष्टिमार्ग
- रामानुज – विशिष्टाद्वैत
- मध्वाचार्य – द्वैतवाद
- शंकराचार्य – अद्वैतवाद
15. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें-
[U.P.P.C.S. (Pre) 2022]
सूची-I (दार्शनिक) | सूची-II (दर्शन) |
---|---|
(A) रामानुज | (1) शुद्ध अद्वैत |
(B) मध्वाचार्य | (2) द्वैताद्वैत |
(C) निम्बार्क | (3) द्वैत |
(D) वल्लभाचार्य | (4) विशिष्टाद्वैत |
(A) 3 1 4 2
(B) 4 3 2 1
(C) 2 4 1 3
(D) 1 2 3 4
View उत्तर & व्याख्या
सही सुमेलन:
- रामानुज – विशिष्टाद्वैत
- मध्वाचार्य – द्वैतवाद
- निम्बार्क – द्वैताद्वैत
- वल्लभाचार्य – शुद्ध अद्वैत
16. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
[I.A.S. (Pre) 2014]
- ‘बीजक’ संत दादू दयाल के उपदेशों का एक संकलन है।
- पुष्टिमार्ग के दर्शन को मध्वाचार्य ने प्रतिपादित किया।
(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2
View उत्तर & व्याख्या
- ‘बीजक’ संत कबीर के उपदेशों का संकलन है, जो कबीरपंथी संप्रदाय के अनुयायियों का धार्मिक ग्रंथ है।
- पुष्टिमार्ग का प्रतिपादन वल्लभाचार्य ने किया, न कि मध्वाचार्य ने।
17. निम्नलिखित में से किस भक्ति संत ने अपने संदेश के प्रचार के लिए सबसे पहले हिंदी का प्रयोग किया?
[I.A.S. (Pre) 2002]
(A) दादू
(B) कबीर
(C) रामानंद
(D) तुलसीदास
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रामानंद पहले भक्ति संत थे, जिन्होंने हिंदी भाषा में भक्ति आंदोलन का प्रचार किया।
उनके शिष्यों में कबीर, रैदास, पीपा, धन्ना, सेना जैसे विभिन्न जातियों के लोग शामिल थे।
18. मध्यकालीन भारत के निम्नलिखित में से किस संत का जन्म प्रयाग में हुआ था?
[U.P.P.C.S. (Mains) 2010]
(A) कुम्भनदास
(B) रामानंद
(C) रैदास
(D) तुलसीदास
View उत्तर & व्याख्या
रामानंद का जन्म प्रयाग (इलाहाबाद) में हुआ था और उन्होंने वाराणसी में शिक्षा ग्रहण की थी।
वे भगवान राम की भक्ति पर बल देते थे।
19. कबीर शिष्य थे-
[U.P. Lower Sub. (Pre) 2002]
(A) चैतन्य के
(B) रामानंद के
(C) रामानुज के
(D) तुकाराम के
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कबीर संत रामानंद के शिष्य थे।
लोक मान्यता के अनुसार, कबीर का पालन-पोषण जुलाहा परिवार में हुआ था।
20. ‘बीजक’ का रचयिता कौन है?
[M.P.P.C.S. (Pre) 2000]
(A) सूरदास
(B) कबीर
(C) रविदास
(D) पीपाजी
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‘बीजक’ कबीर की रचनाओं का संकलन है।
यह कबीरपंथियों के लिए धार्मिक ग्रंथ है, जिसमें उनके दोहे और साखियाँ संकलित हैं।
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