राजस्थान की जनजातियाँ MCQ (2026) | Most Expected Questions for Exam
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की जनजातियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें भील, सहरिया, गरासिया, मीणा, सांसी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, Fireman, Woman Superwiser, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की जनजातियाँ
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- Content Type: Updated MCQ Practice Set
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1. राजस्थान की कौनसी जनजाति भारत सरकार द्वारा आदिम जनजाति समूह में शामिल है?
- (A) भील
- (B) सहरिया
- (C) गरासिया
- (D) मीणा
सहरिया जनजाति राजस्थान की एकमात्र जनजाति है जिसे आदिम जनजाति समूह (PVTG) में शामिल किया गया है। यह समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर माना जाता है और इनके विकास के लिए विशेष योजनाएँ चलाई जाती हैं। सहरिया जनजाति मुख्य रूप से जंगल क्षेत्रों में निवास करती है।
2. राजस्थान के किस जिले में सहरिया जनजाति केन्द्रित है?
- (A) सिरोही
- (B) डूंगरपुर-बांसवाड़ा
- (C) उदयपुर-चित्तौड़गढ़
- (D) बारां
सहरिया जनजाति मुख्य रूप से बारां जिले में केंद्रित है, खासकर शाहबाद और किशनगंज तहसीलों में। यह राजस्थान की आदिम जनजाति मानी जाती है। कुछ आबादी कोटा और झालावाड़ जिलों में भी पाई जाती है। बारां क्षेत्र इनकी संस्कृति और सामाजिक जीवन का मुख्य केंद्र है।
3. राजस्थान में किस तहसील में सहरिया जनजाति का घनत्व अधिकतम है?
- (A) धरियाबाद
- (B) किशनगंज
- (C) छबरा
- (D) मांगरोल
सहरिया जनजाति का घनत्व बारां जिले की किशनगंज तहसील में सबसे अधिक पाया जाता है। यह क्षेत्र उनकी पारंपरिक बसावट का प्रमुख केंद्र है। सहरिया समुदाय वाल्मीकि को अपना आदि गुरु मानता है और सीताबाड़ी मेला इनके लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
4. डामोर जनजाति का मुख्य व्यवसाय क्या है?
- (A) खेती करना
- (B) शिकार
- (C) फल इकट्ठा करना
- (D) मछली पालन
डामोर जनजाति का मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। यह समुदाय मुख्य रूप से दक्षिणी राजस्थान में पाया जाता है। पुरुषों द्वारा आभूषण पहनना इसकी विशेष सांस्कृतिक पहचान है। खेती पर आधारित जीवनशैली के कारण ये लोग ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रूप से बसे हुए मिलते हैं।
5. धारी संस्कार राजस्थान की किस जनजाति में प्रचलित है?
- (A) गरासिया
- (B) मीणा
- (C) सहरिया
- (D) भील
धारी संस्कार सहरिया जनजाति में प्रचलित एक विशेष परंपरा है। इसमें मृतक की राख और अस्थियाँ आंगन में रखकर संकेत देखे जाते हैं और बाद में कपिलधारा में प्रवाहित की जाती हैं। यह संस्कार पुनर्जन्म की मान्यता और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है।
6. हेलरू संस्था संबद्ध है –
- (A) गरासिया
- (B) सहरिया
- (C) भील
- (D) मीणा
हेलरू गरासिया जनजाति की सहकारी संस्था मानी जाती है। यह सामूहिक सहयोग और सामाजिक कार्यों से जुड़ी व्यवस्था है। गरासिया समाज में सामूहिक कृषि और सामाजिक सहयोग की परंपराएँ मजबूत हैं, जो उनकी सामुदायिक जीवनशैली को दर्शाती हैं।
7. ‘फाइरे-फाइरे’ किस जनजाति का रणघोष है?
- (A) भील
- (B) गरासिया
- (C) डामोर
- (D) मीणा
‘फाइरे-फाइरे’ भील जनजाति का रणघोष है। संकट या आपदा के समय यह पुकार देकर समुदाय के लोग तीर-कमान लेकर एकत्र हो जाते थे। यह उनकी एकता और सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का प्रतीक है, जो पारंपरिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
8. गरासिया जनजाति में गांव के मुखिया को क्या कहा जाता है?
- (A) तदवी
- (B) सहलोत
- (C) मुखी
- (D) पटेल
गरासिया जनजाति में गांव के मुखिया को सहलोत कहा जाता है। यह व्यक्ति सामाजिक निर्णय लेने और समुदाय का नेतृत्व करने का कार्य करता है। अलग-अलग जनजातियों में मुखिया के नाम अलग होते हैं, जैसे डामोर में मुखी और भील में गमेती।
9. कनजारा-खाड़लिया भूत लोकनाट्य किस जनजाति का प्रसिद्ध है?
- (A) गरासिया
- (B) भील
- (C) मीणा
- (D) सहरिया
कनजारा-खाड़लिया लोकनाट्य भील जनजाति की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। भील समुदाय में लोकनाट्य, नृत्य और गीतों के माध्यम से परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। यह लोकनाट्य धार्मिक विश्वास, लोककथाओं और सामाजिक संदेशों को प्रस्तुत करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इसे उत्सवों और विशेष अवसरों पर किया जाता है।
10. राजस्थान में सर्वाधिक मीणा जाति के लोग कहाँ निवास करते हैं?
- (A) जोधपुर
- (B) उदयपुर
- (C) जयपुर
- (D) बांरा
राजस्थान में मीणा जनजाति की आबादी सबसे अधिक उदयपुर जिले में पाई जाती है। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उदयपुर के बाद जयपुर और प्रतापगढ़ में भी इनकी संख्या अधिक है। मीणा समाज कृषि और स्थानीय प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। उनकी सांस्कृतिक पहचान, लोकदेवताओं में आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाज राजस्थान की जनजातीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
11. मीणा जनजाति के प्रसिद्ध पाँच कबीलों को किस नाम से जाना जाता है?
- (A) पाँच सितारे
- (B) पंचलड़ा
- (C) पंचवाड़ा
- (D) पंचायत
मीणा जनजाति में कई उपसमूह या कबीले पाए जाते हैं, जिनमें पाँच प्रमुख कबीलों को सामूहिक रूप से पंचवाड़ा कहा जाता है। यह नाम उनके सामाजिक संगठन और पारंपरिक पहचान को दर्शाता है। इन कबीलों के माध्यम से विवाह, सामाजिक नियम और पारंपरिक व्यवस्थाएं तय की जाती हैं। मीणा समाज में यह व्यवस्था सामाजिक एकता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
12. ‘फला’ किसे कहते हैं?
- (A) भीलों के घरों का समूह
- (B) मीणाओं के घरों का समूह
- (C) आदिवासियों की महापंचायत
- (D) भीलों के कुल देवता
भील जनजाति में घरों के छोटे समूह को ‘फला’ कहा जाता है। यह सामान्यतः एक ही परिवार या रिश्तेदारी से जुड़े लोगों का निवास क्षेत्र होता है। फला सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण इकाई होती है, जहाँ लोग आपसी सहयोग और सामूहिक जीवन शैली का पालन करते हैं। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में आज भी इस प्रकार की बसावट देखने को मिलती है।
13. मीणा का शाब्दिक अर्थ क्या है?
- (A) मछली
- (B) माँ
- (C) तीर चलाने वाला
- (D) जनजाति
‘मीणा’ शब्द का शाब्दिक अर्थ मछली माना जाता है। कई इतिहासकारों के अनुसार इसका संबंध प्राचीन मत्स्य जनपद से जोड़ा जाता है। इस जनजाति का इतिहास राजस्थान की प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ा हुआ है। मीणा समाज अपनी विशिष्ट संस्कृति, लोकदेवताओं और परंपराओं के कारण राजस्थान की प्रमुख जनजातियों में गिना जाता है।
14. भील जनजाति विवाह में मंडप की सजावट किस वृक्ष की पत्तियों से की जाती है?
- (A) नीम
- (B) अशोक
- (C) आम
- (D) बबूल
भील जनजाति विवाह के अवसर पर मंडप की सजावट आम के पत्तों से करती है। आम को शुभ माना जाता है और इसे मंगल कार्यों में उपयोग किया जाता है। विवाह समारोह में प्राकृतिक तत्वों का प्रयोग भील समाज की प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली को दर्शाता है।
15. भील जनजाति द्वारा पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली स्थानांतरित कृषि कहलाती है?
- (A) दजिया
- (B) चिमाता
- (C) दिप्पा
- (D) दहिया
पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली भीलों की स्थानांतरित कृषि को चिमाता कहा जाता है। इसमें जंगल साफ करके अस्थायी खेती की जाती है। यह पारंपरिक कृषि पद्धति प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार विकसित हुई है और जनजातीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
16. ‘बीजा’ व ‘माला’ किस जनजाति की शाखाएँ हैं?
- (A) सांसी
- (B) डामोर
- (C) सहरिया
- (D) कंजर
बीजा और माला सांसी जनजाति की दो प्रमुख उपशाखाएँ हैं। सांसी समुदाय को घुमक्कड़ और खानाबदोश प्रवृत्ति वाला माना जाता है। राजस्थान में यह समुदाय मुख्य रूप से भरतपुर और झुंझुनूं जिलों में पाया जाता है।
17. राजस्थान में सर्वाधिक प्रतिशत वाली जनजाति कौनसी है?
- (A) भील
- (B) मीणा
- (C) गरासिया
- (D) भील मीणा
मीणा जनजाति राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है और कुल जनजातीय आबादी में इसका प्रतिशत सबसे अधिक है। यह समुदाय मुख्य रूप से उदयपुर, जयपुर और प्रतापगढ़ क्षेत्रों में पाया जाता है। सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी मीणा जनजाति का महत्वपूर्ण स्थान है।
18. ‘धारी संस्कार’ किस आदिवासी जनजाति में प्रचलित है?
- (A) सहरिया
- (B) गरासिया
- (C) भील
- (D) मीणा
धारी या बेलपत्ती संस्कार सहरिया जनजाति की एक विशेष परंपरा है। इसमें मृतक की अस्थियाँ और राख कुछ समय तक आंगन में रखी जाती हैं और बनने वाले चिह्नों को अगले जन्म का संकेत माना जाता है। बाद में इन्हें पवित्र स्थान पर विसर्जित किया जाता है। यह संस्कार सहरिया समाज की धार्मिक मान्यताओं और पुनर्जन्म की आस्था को दर्शाता है।
19. निम्नलिखित में से कौनसा कथन राजस्थान की सहरिया जनजाति के बारे में सही नहीं है?
- (A) इनमें चौहान, डोडिया आदि गोत्र होते हैं।
- (B) सहरिया जादू-मंतर और देवी-देवताओं में विश्वास करते हैं।
- (C) सहरिया समुदाय में लट्ठमार होली की परंपरा प्रचलित है।
- (D) सहरिया जनजाति के मुखिया को तपाड़ा कहा जाता है।
सहरिया जनजाति राजस्थान की प्रमुख आदिम जनजातियों में से एक है। इनके समाज में गोत्र व्यवस्था, लोकदेवताओं में आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाज मिलते हैं। लेकिन “तपाड़ा” शब्द इनके मुखिया के लिए प्रचलित नहीं है, इसलिए यह कथन गलत माना जाता है। यह प्रश्न सहरिया जनजाति की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक विशेषताओं की समझ को जांचता है।
20. ‘छेड़ा फाड़ना’ से संबंधित है?
- (A) आदिवासी जनजाति में तलाक की परम्परा
- (B) कपड़े का टुकड़ा करना
- (C) परिवार से अलग होना
- (D) युद्ध में मारे जाना
छेड़ा फाड़ना आदिवासी समाज में तलाक से जुड़ी एक पारंपरिक प्रथा है। इसमें पति-पत्नी के संबंध समाप्त होने का प्रतीकात्मक संकेत दिया जाता है। यह प्रक्रिया सामाजिक मान्यता के साथ की जाती है ताकि भविष्य में विवाद न हो। जनजातीय समाज में ऐसे रीति-रिवाज सामाजिक संतुलन और सामुदायिक सहमति बनाए रखने का माध्यम माने जाते हैं।
21. आदिवासियों में सामूहिक सहयोग की परम्परा कहलाती है?
- (A) हीड़ा
- (B) हांडा
- (C) हलमा
- (D) उपर्युक्त सभी
आदिवासी समाज में सामूहिक सहयोग की परंपरा को हलमा, हांडा या हीड़ा जैसे नामों से जाना जाता है। जब किसी परिवार को घर बनाना हो, खेती का काम करना हो या अन्य सहायता की जरूरत हो, तब पूरा समुदाय मिलकर मदद करता है। यह परंपरा सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को मजबूत बनाती है और जनजातीय जीवन की खास पहचान मानी जाती है।
22. ‘काट्टा’ क्या है?
- (A) भीलों का अन्तिम संस्कार
- (B) भीलों का मृत्युभोज
- (C) मीणाओं का मृत्युभोज
- (D) सांसी जनजाति का शिकार
भील जनजाति में मृत्युभोज की परंपरा को ‘काट्टा’ कहा जाता है। यह आयोजन मृतक की स्मृति में किया जाता है, जिसमें रिश्तेदार और समुदाय के लोग शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य सामाजिक एकता बनाए रखना और परिवार को सांत्वना देना होता है। जनजातीय समाज में ऐसे आयोजन सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं।
23. आदिवासियों के कुम्भ के नाम से प्रसिद्ध बेणेश्वर मेला कब भरता है?
- (A) कार्तिक पूर्णिमा
- (B) माघ पूर्णिमा
- (C) चैत्र शुक्ल तृतीया
- (D) आश्विन पूर्णिमा
बेणेश्वर मेला राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों का सबसे बड़ा धार्मिक मेला माना जाता है और इसे आदिवासियों का कुम्भ भी कहा जाता है। यह मेला माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होता है। भील और अन्य जनजातियाँ यहाँ बड़ी संख्या में एकत्रित होकर धार्मिक अनुष्ठान, स्नान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेती हैं। यह मेला आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है।
24. भील पुरुषों की तंग धोती को क्या कहा जाता है?
- (A) ढेपाड़ी
- (B) ढेपाड़ा
- (C) मिलाला
- (D) माट्टा
भील पुरुषों के पारंपरिक वस्त्रों में तंग धोती को ढेपाड़ा या टेपाड़ा कहा जाता है। यह पहनावा उनके दैनिक जीवन और कामकाज के अनुकूल होता है। इसके साथ फेंटा और अन्य वस्त्र भी पहने जाते हैं। पारंपरिक वेशभूषा भील संस्कृति की पहचान मानी जाती है और त्योहारों तथा सामाजिक आयोजनों में आज भी इसका उपयोग किया जाता है।
25. भील पुरुषों द्वारा सिर को ढकने का सफेद वस्त्र क्या कहलाता है?
- (A) पोत्या
- (B) पगड़ी
- (C) अंगोछा
- (D) ढेपाड़ा
भील पुरुषों द्वारा सिर ढकने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सफेद कपड़ा ‘पोत्या’ कहलाता है। यह गर्मी और धूल से बचाव के साथ-साथ सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक पहनावे का अभी भी महत्व है। पोत्या पहनना सामाजिक पहचान और परंपरा को दर्शाने का एक तरीका माना जाता है।
26. भील स्त्रियों द्वारा शादी के अवसर पर पहना जाने वाला पीले रंग का लहंगा क्या कहलाता है?
- (A) ढारिया
- (B) पिरिया
- (C) पुलाव
- (D) बोलावा
भील महिलाओं का पारंपरिक पहनावा रंग-बिरंगा और आकर्षक होता है। शादी जैसे विशेष अवसरों पर वे पीले रंग का लहंगा पहनती हैं, जिसे पिरिया कहा जाता है। यह वस्त्र शुभता और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ चोली, ओढ़नी और अन्य आभूषण भी पहने जाते हैं, जो भील संस्कृति की सुंदरता और परंपरा को दर्शाते हैं।
27. ‘सिंदूरी’ है?
- (A) हरे रंग की साड़ी
- (B) लाल रंग की साड़ी
- (C) वृद्ध महिला
- (D) उच्च गोत्र
भील महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली लाल रंग की साड़ी को सिंदूरी कहा जाता है। यह विशेष रूप से पारंपरिक और सांस्कृतिक अवसरों पर पहनी जाती है। लाल रंग को शुभ और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। भील समाज में वस्त्रों के अलग-अलग नाम उनकी संस्कृति और जीवनशैली की पहचान को दर्शाते हैं।
28. ‘ढालिया’ कहलाता है?
- (A) भीलों के घर का बाहरी बैठक बरामदा
- (B) मीणा जनजाति के घर
- (C) जानवर बांधने का स्थल
- (D) शादी का मंडप
भील घरों में बाहरी बैठक या बरामदे को ढालिया कहा जाता है। यह स्थान मेहमानों के बैठने और सामाजिक बातचीत के लिए उपयोग में आता है। ग्रामीण जीवन में ऐसे स्थान सामुदायिक संबंधों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। ढालिया पारंपरिक घरों की संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
29. होली के अवसर पर भील कौनसा नृत्य करते हैं?
- (A) हाथीमना
- (B) गैर
- (C) गवरी
- (D) राई
होली के अवसर पर भील जनजाति द्वारा गैर नृत्य किया जाता है। यह सामूहिक नृत्य होता है जिसमें पुरुष और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हैं। ढोल और लोकवाद्यों की धुन पर किया जाने वाला यह नृत्य उत्साह और सामाजिक एकता का प्रतीक है। राजस्थान की लोकसंस्कृति में गैर नृत्य का विशेष स्थान है।
30. राजस्थान में भीलों के गाँवों के समूह के मुखिया को क्या कहते हैं?
- (A) मुखिया
- (B) गमेती
- (C) फलावी
- (D) फला
भील समाज में प्रशासनिक व्यवस्था पारंपरिक रूप से संगठित होती है। गाँवों के समूह के मुखिया को गमेती कहा जाता है, जबकि एक गाँव के मुखिया को अलग नाम से जाना जाता है। गमेती सामाजिक विवादों का समाधान और समुदाय का नेतृत्व करता है। यह पद जनजातीय समाज में सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है।
31. भीलों द्वारा कन्या का मूल्य चुकाने की प्रथा कहलाती है?
- (A) दापा
- (B) ढारिया
- (C) गमेती
- (D) नतारा
भील जनजाति में विवाह के समय कन्या पक्ष को दिया जाने वाला मूल्य दापा कहलाता है। यह परंपरा सामाजिक स्वीकृति के साथ निभाई जाती है और विवाह संबंध को औपचारिक रूप देती है। इसका उद्देश्य आर्थिक सहयोग और सामाजिक मान्यता देना होता है। जनजातीय समाज में ऐसी परंपराएँ लंबे समय से चली आ रही हैं।
32. भीलों द्वारा पहाड़ी भाग में की जाने वाली कृषि क्या कहलाती है?
- (A) दजिया
- (B) वालरा
- (C) चिमाता
- (D) झूमिंग
भील जनजाति पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष प्रकार की कृषि करती है, जिसे चिमाता कहा जाता है। यह स्थानीय परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के अनुसार विकसित खेती की पद्धति है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर खेती की जाती है। यह पद्धति जनजातीय जीवन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने का उदाहरण है।
33. ऐसे विवाह जिनमें लड़का लड़की के माता-पिता के घर रहकर सेवा करता है?
- (A) सेवा विवाह
- (B) हरण विवाह
- (C) हठ विवाह
- (D) परीवीक्षा विवाह
सेवा विवाह जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित एक विशेष विवाह पद्धति है। इसमें लड़का विवाह से पहले या बाद में लड़की के परिवार के साथ रहकर उनकी सेवा करता है। यह परंपरा आपसी समझ और परिवार की सहमति पर आधारित होती है। इससे दोनों परिवारों के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ता है।
34. निम्नलिखित में से कौनसी राजस्थान की जनजाति नहीं है?
- (A) खटीक
- (B) भील
- (C) मीणा
- (D) डामोर
खटीक राजस्थान की जनजाति नहीं मानी जाती, जबकि भील, मीणा और डामोर प्रमुख जनजातियों में शामिल हैं। जनजातियों की पहचान उनके पारंपरिक जीवन, संस्कृति और सामाजिक ढांचे से होती है। राजस्थान में विभिन्न जनजातियाँ अपनी अलग संस्कृति और रीति-रिवाजों के लिए जानी जाती हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं।
35. ‘भाखर बावजी’ किस जनजाति के संरक्षक माने जाते हैं?
- (A) गरासिया
- (B) भील
- (C) मीणा
- (D) सहरिया
भाखर बावजी को गरासिया जनजाति का संरक्षक और आदिपुरुष माना जाता है। सिरोही क्षेत्र का भाखर इलाका गरासिया समाज का मूल क्षेत्र माना जाता है। इस समुदाय में भाखर बावजी के प्रति गहरी आस्था है और धार्मिक अवसरों पर उनकी पूजा की जाती है। यह परंपरा गरासिया समाज की सांस्कृतिक पहचान और इतिहास से जुड़ी हुई है।
36. राजस्थान में किस जनजाति की जनसंख्या सर्वाधिक है?
- (A) मीणा
- (B) भील
- (C) गरासिया
- (D) सहरिया
राजस्थान में जनसंख्या की दृष्टि से मीणा जनजाति सबसे बड़ी मानी जाती है। यह जनजाति मुख्य रूप से पूर्वी राजस्थान के जिलों में अधिक पाई जाती है। मीणा समाज कृषि, सामाजिक नेतृत्व और स्थानीय प्रशासनिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाता है। उनकी सांस्कृतिक परंपराएँ और लोकदेवताओं में आस्था राजस्थान की जनजातीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
37. निम्न में से कौनसा वृक्ष भील जनजाति का पवित्र वृक्ष है?
- (A) पीपल
- (B) खेजड़ी
- (C) महुआ
- (D) बरगद
महुआ वृक्ष भील जनजाति के लिए अत्यंत पवित्र और उपयोगी माना जाता है। इसके फूलों से पेय पदार्थ, भोजन और कई घरेलू चीजें तैयार की जाती हैं। भील समाज का जीवन जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा हुआ है, इसलिए महुआ का धार्मिक और आर्थिक दोनों महत्व है। त्योहारों और पारंपरिक अनुष्ठानों में भी इसका विशेष स्थान होता है।
38. निम्न में से असंगत है?
- (A) भील – बाँसवाड़ा
- (B) गरासिया – सिरोही
- (C) सहरिया – जयपुर
- (D) डामोर – डूंगरपुर
सहरिया जनजाति मुख्य रूप से बारां, कोटा और झालावाड़ क्षेत्रों में पाई जाती है, इसलिए सहरिया – जयपुर का संयोजन असंगत माना जाता है। अन्य विकल्प सही क्षेत्रीय संबंध दर्शाते हैं। राजस्थान की प्रत्येक जनजाति का अपना भौगोलिक क्षेत्र और सांस्कृतिक आधार होता है, जो उनकी पहचान और जीवनशैली को प्रभावित करता है।
39. राज्य में सर्वाधिक सहरिया जनजाति के लोग किस जिले में रहते हैं?
- (A) कोटा
- (B) बारां
- (C) झालावाड़
- (D) उदयपुर
सहरिया जनजाति राजस्थान में सबसे अधिक बारां जिले की शाहबाद और किशनगंज तहसीलों में निवास करती है। यह जनजाति आदिम जनजातियों में गिनी जाती है और जंगलों के निकट रहने वाली जीवनशैली अपनाती है। इनके अलावा कोटा और झालावाड़ जिलों में भी इनकी उपस्थिति मिलती है। बारां क्षेत्र इनके सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
40. किस जनजाति में मरे हुए व्यक्ति के मुँह में शराब की बूंदे डालने का रिवाज है?
- (A) भील
- (B) गरासिया
- (C) सहरिया
- (D) कंजर
कंजर जनजाति में मृत्यु से जुड़े कुछ विशेष पारंपरिक रीति-रिवाज पाए जाते हैं। इनमें मृतक के मुँह में शराब की बूंदें डालने की परंपरा भी शामिल है, जिसे धार्मिक आस्था और सम्मान से जोड़ा जाता है। जनजातीय समाजों में ऐसे संस्कार उनके विश्वासों और लोक परंपराओं को दर्शाते हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक मान्यताओं का हिस्सा है।
41. घोटिया अम्बा का प्रसिद्ध भील मेला किस जिले में लगता है?
- (A) डूंगरपुर
- (B) बाँसवाड़ा
- (C) उदयपुर
- (D) जालौर
घोटिया अम्बा का मेला भील जनजाति का प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो बाँसवाड़ा जिले में आयोजित होता है। इस मेले में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय भाग लेते हैं। यहाँ धार्मिक पूजा के साथ लोकनृत्य, गीत और पारंपरिक गतिविधियाँ भी होती हैं। यह मेला सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
42. जनजातियों के संबंध में ‘कू’ से तात्पर्य है?
- (A) भीलों के घरों का छोटा समूह
- (B) गरासिया का घर
- (C) भील जनजाति का घर
- (D) गाँव का मुखिया
भील जनजाति अपने घर को ‘कू’ या ‘टापरा’ कहती है। यह घर सामान्यतः स्थानीय सामग्री से बनाया जाता है और प्राकृतिक वातावरण के अनुसार ढाला जाता है। जनजातीय जीवन में घर केवल रहने का स्थान नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियों का केंद्र होता है। कू शब्द भील संस्कृति की पारंपरिक जीवन शैली को दर्शाता है।
43. सहरिया जनजाति में मुखिया को क्या कहते हैं?
- (A) गमेती
- (B) प्रधान
- (C) मेठ
- (D) कोतवाल
सहरिया जनजाति में मुखिया को कोतवाल कहा जाता है। यह व्यक्ति सामाजिक पंचायतों में निर्णय लेने और विवादों का समाधान करने का कार्य करता है। कोतवाल समुदाय में अनुशासन और परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जनजातीय समाज में ऐसे पद सामाजिक व्यवस्था और सामूहिक निर्णय प्रणाली को मजबूत बनाते हैं।
44. गरासिया जनजाति द्वारा अन्न भंडार की कोठियाँ क्या कहलाती हैं?
- (A) मोहरी
- (B) सोहरी
- (C) कोठरी
- (D) माट्टा
गरासिया जनजाति में अन्न भंडारण के लिए बनाई गई पारंपरिक कोठियों को सोहरी कहा जाता है। ये कोठियाँ अनाज को सुरक्षित रखने के लिए बनाई जाती हैं ताकि लंबे समय तक भोजन की व्यवस्था बनी रहे। ग्रामीण और जनजातीय जीवन में अन्न भंडारण का विशेष महत्व होता है। यह व्यवस्था उनकी आत्मनिर्भर जीवनशैली और पारंपरिक ज्ञान को दर्शाती है।
45. किस जनजाति को भारत सरकार द्वारा आदिम जनजाति समूह में रखा गया है?
- (A) सहरिया
- (B) गरासिया
- (C) भील
- (D) कथौड़ी
सहरिया जनजाति को भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से कमजोर आदिम जनजाति समूह (PVTG) में शामिल किया गया है। यह जनजाति सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी मानी जाती है। सरकार द्वारा इनके विकास के लिए विशेष योजनाएँ चलाई जाती हैं। जंगलों पर निर्भर जीवन और सीमित संसाधनों के कारण इन्हें संरक्षण और सहायता की आवश्यकता होती है।
46. सहरिया जनजाति की कुल देवी है?
- (A) आमजा माता
- (B) कोडिया देवी
- (C) शीलता माता
- (D) छींच माता
सहरिया जनजाति की कुल देवी कोडिया देवी मानी जाती हैं। सहरिया समाज में देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था होती है और धार्मिक अनुष्ठानों में कुल देवी की पूजा विशेष महत्व रखती है। यह पूजा सामाजिक एकता और परंपराओं को बनाए रखने का माध्यम होती है। जनजातीय संस्कृति में कुल देवी का स्थान परिवार और समुदाय दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
47. किस जनजाति के लोग मेलों में अपना जीवनसाथी चुनते हैं?
- (A) सहरिया
- (B) गरासिया
- (C) कंजर
- (D) सांसी
गरासिया जनजाति में मेलों के दौरान जीवनसाथी चुनने की परंपरा प्रसिद्ध है। यह विवाह प्रणाली सामाजिक स्वीकृति के साथ अपनाई जाती है और युवाओं को अपनी पसंद का साथी चुनने का अवसर देती है। इस समाज में प्रेम विवाह और विधवा विवाह जैसी प्रथाएँ भी प्रचलित हैं। यह परंपरा गरासिया समाज की सामाजिक स्वतंत्रता को दर्शाती है।
48. राज्य में सहरिया जनजाति का प्रमुख स्थान कौनसा है?
- (A) अलवर
- (B) बाँसवाड़ा
- (C) जयपुर
- (D) बारां (शाहबाद-किशनगंज)
राजस्थान में सहरिया जनजाति का मुख्य निवास क्षेत्र बारां जिले की शाहबाद और किशनगंज तहसीलें हैं। यहाँ इनकी आबादी सबसे अधिक पाई जाती है। जंगलों के निकट रहने वाली यह जनजाति पारंपरिक जीवन शैली अपनाती है। इन क्षेत्रों में उनकी संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक व्यवस्था आज भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
49. राजस्थान में कौनसी जनजाति सांप पकड़ने का कार्य करती है?
- (A) कथौड़ी
- (B) कालबेलिया
- (C) सांसी
- (D) कंजर
कालबेलिया जनजाति सांप पकड़ने और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान के लिए प्रसिद्ध है। इनका जीवन सांपों के साथ जुड़ा रहा है और इसी कारण इनकी पहचान पूरे देश में बनी है। कालबेलिया नृत्य भी विश्व प्रसिद्ध है, जो उनकी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह जनजाति लोककला और पारंपरिक जीवनशैली के लिए जानी जाती है।
50. कौनसी जनजाति के लोग ‘हाकम राजा का प्याला’ पीकर झूठ नहीं बोलते?
- (A) सहरिया
- (B) कंजर
- (C) गरासिया
- (D) डामोर
कंजर जनजाति में ‘हाकम राजा का प्याला’ एक पारंपरिक मान्यता से जुड़ा है। इसे पीने के बाद झूठ न बोलने की शपथ मानी जाती है। इस समाज में अपराध या महत्वपूर्ण निर्णय से पहले ईश्वर से अनुमति लेने की परंपरा भी मिलती है। यह विश्वास उनकी सामाजिक नैतिकता और धार्मिक आस्था को दर्शाता है।
51. रावत मीणा राजस्थान में सर्वाधिक किस जिले में निवास करते हैं?
- (A) अजमेर
- (B) जोधपुर
- (C) जयपुर
- (D) नागौर
रावत मीणा समुदाय राजस्थान के विभिन्न भागों में पाया जाता है, लेकिन अजमेर जिले में इनकी संख्या अधिक मानी जाती है। यह समुदाय मीणा समाज का महत्वपूर्ण उपसमूह है और अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान रखता है। कृषि और ग्रामीण जीवन से जुड़ा यह समुदाय सामाजिक और धार्मिक परंपराओं का पालन करता है।
52. माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान कहाँ है?
- (A) जयपुर
- (B) जोधपुर
- (C) उदयपुर
- (D) जालौर
माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान उदयपुर में स्थित है। इसकी स्थापना 2 जनवरी 1964 को जनजातीय समाज के अध्ययन और विकास के उद्देश्य से की गई थी। यह संस्थान जनजातीय संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े शोध कार्य करता है। राजस्थान की जनजातीय नीतियों में इसका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
53. मीणा जनजाति को कितने खांपों में बांटा गया है?
- (A) 21
- (B) 22
- (C) 23
- (D) 24
मीणा जनजाति को पारंपरिक रूप से 24 खांपों में विभाजित किया गया है। ये खांप सामाजिक पहचान और विवाह संबंधी नियमों को निर्धारित करते हैं। खांप व्यवस्था समाज में अनुशासन और पारिवारिक संबंधों को संतुलित बनाए रखने का माध्यम है। यह व्यवस्था मीणा समाज की प्राचीन सामाजिक संरचना को दर्शाती है।
54. राजस्थान की ऐसी जनजाति जो कभी भीख नहीं मांगती?
- (A) सहरिया
- (B) कंजर
- (C) कालबेलिया
- (D) कथौड़ी
सहरिया जनजाति को आत्मसम्मान और मेहनत से जीवन यापन करने वाली जनजाति माना जाता है। पारंपरिक रूप से यह समुदाय श्रम और जंगलों पर निर्भर जीवन जीता है। इनके बारे में कहा जाता है कि यह भीख नहीं मांगते बल्कि मेहनत कर आजीविका कमाते हैं। यह बात उनके स्वाभिमान और सरल जीवनशैली को दर्शाती है।
55. गरासिया जनजाति का मुखिया कहलाता है?
- (A) कोतवाल
- (B) गमेती
- (C) सहलोत
- (D) पटेल
गरासिया जनजाति के मुखिया को सहलोत कहा जाता है। यह व्यक्ति सामाजिक निर्णय लेने और समुदाय का नेतृत्व करने का कार्य करता है। अलग-अलग जनजातियों में मुखिया के नाम अलग होते हैं, जैसे सहरिया में कोतवाल और भील में गमेती। जनजातीय समाज में मुखिया की भूमिका परंपराओं को बनाए रखने और विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण होती है।
56. गरासिया जनजाति की प्रधानता किस जिले में पाई जाती है?
- (A) उदयपुर
- (B) सिरोही
- (C) बारां
- (D) डूंगरपुर
गरासिया जनजाति मुख्य रूप से राजस्थान के सिरोही जिले में पाई जाती है। इसके अलावा उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी इनकी आबादी मिलती है। गरासिया समाज अपनी विशिष्ट विवाह परंपराओं, लोकनृत्य और सामाजिक रीति-रिवाजों के लिए प्रसिद्ध है। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने के कारण इनकी जीवनशैली प्रकृति से जुड़ी हुई दिखाई देती है।
57. सांसी जाति सर्वाधिक कहां पायी जाती है?
- (A) डीग-भरतपुर
- (B) नागौर-बीकानेर
- (C) गंगानगर-हनुमानगढ़
- (D) डूंगरपुर-बाँसवाड़ा
सांसी जाति राजस्थान के पूर्वी भाग में अधिक पाई जाती है, विशेषकर डीग और भरतपुर क्षेत्र में। यह समुदाय पारंपरिक रूप से घुमंतू जीवन शैली से जुड़ा रहा है, लेकिन अब स्थायी निवास भी बढ़ा है। इनकी सामाजिक संरचना और रीति-रिवाज स्थानीय संस्कृति से प्रभावित हैं। क्षेत्रीय पहचान के कारण इनका अधिक संकेंद्रण भरतपुर इलाके में देखने को मिलता है।
58. सहरिया समाज की आस्था का प्रमुख केन्द्र है?
- (A) कपिल मुनि मंदिर (कोलायत)
- (B) महर्षि वाल्मिकी मंदिर (प्रतापगढ़)
- (C) महर्षि वाल्मिकी मंदिर केलवाड़ा (बारां)
- (D) इनमें से कोई नहीं
सहरिया जनजाति की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र केलवाड़ा (बारां) स्थित महर्षि वाल्मिकी मंदिर माना जाता है। सीताबाड़ी क्षेत्र में स्थित वाल्मिकी आश्रम इनके लिए तीर्थ जैसा महत्व रखता है। यहाँ धार्मिक मेलों और पूजा-अर्चना के माध्यम से समुदाय अपनी परंपराओं को बनाए रखता है। यह स्थान उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का मुख्य आधार है।
59. घने वनों में रहने वाले सहरिया परिवार पेड़ों पर मचाननुमा झोपड़ी बनाते हैं, उसे क्या कहा जाता है?
- (A) टोपा
- (B) कोरूआ
- (C) कू
- (D) 1 व 2 दोनों
सहरिया जनजाति का जीवन जंगलों से गहराई से जुड़ा हुआ है। सुरक्षा और वन्य जीवों से बचाव के लिए ये लोग पेड़ों पर मचान जैसी झोपड़ियाँ बनाते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में टोपा या कोरूआ कहा जाता है। ये झोपड़ियाँ सरल सामग्री से बनाई जाती हैं और पारंपरिक ज्ञान का उदाहरण हैं। इससे उनका प्रकृति के साथ संतुलित जीवन दिखाई देता है।
60. किस जनजाति में प्रेम विवाह का प्रचलन सबसे अधिक है?
- (A) गरासिया
- (B) सहरिया
- (C) कथौड़ी
- (D) सांसी
गरासिया जनजाति में प्रेम विवाह की परंपरा काफी प्रचलित मानी जाती है। यहाँ युवक-युवतियां मेलों और सामाजिक आयोजनों में अपना जीवनसाथी चुनते हैं। इस समाज में विधवा विवाह को भी स्वीकार किया जाता है और सामाजिक नियम अपेक्षाकृत लचीले हैं। यही कारण है कि गरासिया समाज को विवाह संबंधी परंपराओं के मामले में अधिक उदार माना जाता है।
61. भीलों के वस्त्रों के संदर्भ में ‘फेंटा’ क्या है?
- (A) पुरुषों का गले का आभूषण
- (B) सिर पर बांधा जाने वाला वस्त्र
- (C) ओढ़ने वाला मोटा लबादा
- (D) बालकों का वस्त्र
भील जनजाति में ‘फेंटा’ सिर पर बांधा जाने वाला पारंपरिक वस्त्र होता है। यह केवल पहनावे का हिस्सा नहीं बल्कि पहचान और सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है। अलग-अलग रंगों और बांधने के तरीकों से सामाजिक स्थिति या अवसर का भी संकेत मिलता है। ग्रामीण और पारंपरिक आयोजनों में आज भी फेंटा पहनने की परंपरा देखी जाती है।
62. भीलों को वनपुत्र किसने कहा?
- (A) डॉ. टेसीतोरी
- (B) कर्नल जेम्स टॉड
- (C) बिलियम बैंटिक
- (D) थॉमसन
कर्नल जेम्स टॉड ने भील जनजाति को “वनपुत्र” कहा था। उन्होंने राजस्थान के इतिहास और जनजातीय जीवन का विस्तृत अध्ययन किया और अपनी रचनाओं में भीलों के साहस, जंगलों से जुड़ाव और स्वतंत्र जीवनशैली का वर्णन किया। भील समुदाय का प्रकृति से गहरा संबंध होने के कारण यह उपाधि उनके जीवन के अनुकूल मानी जाती है।
63. ‘हाथीमना नृत्य’ किस जनजाति द्वारा सर्वाधिक किया जाता है?
- (A) सांसी
- (B) भील
- (C) मीणा
- (D) सहरिया
हाथीमना नृत्य भील जनजाति का प्रमुख पारंपरिक नृत्य है। भील समाज में नृत्य और संगीत सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह नृत्य उत्सवों, मेलों और धार्मिक अवसरों पर सामूहिक रूप से किया जाता है। इसके अलावा गैर, गवरी, नेजा और भगोरिया जैसे अन्य नृत्य भी भील संस्कृति को जीवंत बनाते हैं और सामुदायिक एकता को मजबूत करते हैं।
64. भील जनजाति राज्य के किस भाग में मुख्यतः निवास करती है?
- (A) पूर्वी भाग
- (B) पश्चिमी भाग
- (C) उत्तरी भाग
- (D) दक्षिणी भाग
भील जनजाति राजस्थान के दक्षिणी भाग में सबसे अधिक निवास करती है। बाँसवाड़ा, डूंगरपुर और उदयपुर जैसे जिले इनके प्रमुख क्षेत्र माने जाते हैं। भील समाज जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है तथा अपनी विशिष्ट संस्कृति और लोकनृत्यों के लिए जाना जाता है। यह जनजाति राजस्थान की सबसे प्राचीन और बड़ी जनजातियों में शामिल है।
65. ‘फाइरे फाइरे’ किस जनजाति का रणघोष है?
- (A) कंजर < li>(B) गरासिया
- (C) सहरिया
- (D) भील
‘फाइरे फाइरे’ भील जनजाति का रणघोष माना जाता है। किसी संकट या आपदा की स्थिति में भील समुदाय के लोग इस पुकार के साथ एक स्थान पर एकत्र होते थे और तीर-कमान लेकर सुरक्षा के लिए तैयार रहते थे। यह रणघोष उनकी एकता, साहस और सामूहिक रक्षा प्रणाली का प्रतीक है, जो उनकी पारंपरिक जीवनशैली को दर्शाता है।
66. राजस्थान की वह कौनसी जनजाति है जो अपने मकान के दरवाजे बंद नहीं रखती है?
- (A) सांसी
- (B) कथौड़ी
- (C) कंजर
- (D) डामोर
कंजर जनजाति के बारे में माना जाता है कि वे अपने घरों के दरवाजे बंद नहीं रखते। यह उनकी आपसी विश्वास और खुली सामाजिक व्यवस्था को दर्शाता है। जनजातीय समाज में सामुदायिक जीवन और पारस्परिक सहयोग की भावना मजबूत होती है, जिसके कारण सुरक्षा की भावना सामूहिक रूप से बनी रहती है। यह परंपरा उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानी जाती है।
67. ‘लीला-मोरिया’ क्या है?
- (A) वैवाहिक संस्कार
- (B) जन्म संस्कार
- (C) कृषि प्रकार
- (D) फसल गीत
लीला-मोरिया गरासिया और अन्य जनजातीय समाजों में प्रचलित एक वैवाहिक संस्कार माना जाता है। यह विवाह से जुड़ी पारंपरिक रस्मों का हिस्सा होता है, जिसमें गीत, नृत्य और सामाजिक रीति-रिवाज शामिल होते हैं। इस प्रकार के संस्कार जनजातीय समाज में सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाते हैं और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का माध्यम होते हैं।
68. ‘फड़का’ क्या है?
- (A) पत्थर फेंकने का यंत्र
- (B) भील स्त्रियों की साड़ी शैली
- (C) कथौड़ी की साड़ी पहनने की शैली
- (D) गरासियों का अतिथि गृह
फड़का कथौड़ी जनजाति में महिलाओं द्वारा मराठी अंदाज में साड़ी पहनने की एक विशेष शैली है। यह पहनावा उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपरा को दर्शाता है। जनजातीय समाज में वस्त्र केवल पहनने की चीज नहीं बल्कि सामाजिक पहचान और संस्कृति का प्रतीक भी होते हैं। फड़का शैली विशेष अवसरों पर अधिक दिखाई देती है।
69. ‘गोफना’ क्या है?
- (A) सहरिया की मचाननुमा झोपड़ी
- (B) पत्थर फेंकने का यंत्र
- (C) विवाह भोजन
- (D) विवाह रस्म
गोफना सहरिया जनजाति द्वारा पेड़ों पर बनाई जाने वाली मचाननुमा झोपड़ी को कहा जाता है। यह झोपड़ी सुरक्षा और वन्य वातावरण के अनुकूल रहने के लिए बनाई जाती है। सहरिया समाज की बस्ती को सहराना और उनके घरों को टापरी भी कहा जाता है। यह व्यवस्था उनकी प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन शैली को दर्शाती है।
70. छेला बावसी के मेले में विशेष रूप से कौन भाग लेते हैं?
- (A) डामोर
- (B) गरासिया
- (C) सहरिया
- (D) कथौड़ी
छेला बावसी का मेला डामोर जनजाति का प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। इस मेले में बड़ी संख्या में डामोर समुदाय के लोग भाग लेते हैं और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। मेले के दौरान लोकनृत्य, गीत और पारंपरिक गतिविधियाँ भी आयोजित होती हैं। यह मेला उनकी सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।
71. राजस संघ की स्थापना कब हुई?
- (A) 1975
- (B) 1976
- (C) 1978
- (D) 1977
राजस संघ की स्थापना वर्ष 1976 में की गई थी। इसका उद्देश्य जनजातीय और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देना था। इस प्रकार के संगठन जनजातीय समुदायों की समस्याओं को समझने और उनके विकास के लिए योजनाएँ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक सहयोग इनके मुख्य उद्देश्य रहे हैं।
72. सहरिया क्षेत्र में कपिलधारा का मेला कब लगता है?
- (A) कार्तिक पूर्णिमा
- (B) वैशाख पूर्णिमा
- (C) भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
- (D) भाद्रपद पूर्णिमा
कपिलधारा का मेला सहरिया क्षेत्र में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होता है। यह मेला धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। सहरिया जनजाति के लोग बड़ी संख्या में इसमें भाग लेते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। यह आयोजन उनकी धार्मिक मान्यताओं और सामुदायिक एकता को दर्शाता है।
73. राज्य में सर्वाधिक व न्यूनतम जनजाति जनसंख्या किन जिलों में पायी जाती है?
- (A) उदयपुर – हनुमानगढ़
- (B) बीकानेर – उदयपुर
- (C) उदयपुर – बीकानेर
- (D) बाँसवाड़ा – नागौर
राजस्थान में जनजातीय जनसंख्या सबसे अधिक उदयपुर जिले में पाई जाती है, जबकि न्यूनतम बीकानेर जिले में मानी जाती है। दक्षिणी राजस्थान के जिलों में जनजातियों की संख्या अधिक है क्योंकि यहाँ पहाड़ी और वन क्षेत्र ज्यादा हैं। वहीं शुष्क और रेगिस्तानी क्षेत्रों में जनजातीय आबादी कम देखने को मिलती है।
74. कंजर जाति की कुल देवी है?
- (A) आमजा माता
- (B) लटियाला माता
- (C) चौथ माता
- (D) ज्वाला माता
कंजर जाति की कुल देवी चौथ माता मानी जाती हैं। इस समुदाय में कुल देवी की पूजा विशेष महत्व रखती है और धार्मिक अवसरों पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। कुल देवी में आस्था सामाजिक एकता और पारिवारिक परंपराओं को बनाए रखने का माध्यम होती है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
75. मीणा जनजाति के कितने वर्ग किए गए हैं?
- (A) दो
- (B) तीन
- (C) पांच
- (D) एक
मीणा जनजाति को मुख्य रूप से दो वर्गों में विभाजित किया गया है – जींदार मीणा और चौकीदार मीणा। यह विभाजन पारंपरिक सामाजिक भूमिकाओं और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। दोनों वर्गों की अपनी सांस्कृतिक विशेषताएँ हैं, लेकिन सामाजिक रूप से ये एक ही जनजाति का हिस्सा माने जाते हैं। यह वर्गीकरण समाज की संरचना को समझने में मदद करता है।
76. माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना कब हुई?
- (A) 2 जनवरी 1964
- (B) 2 अक्टूबर 1964
- (C) 8 मार्च 1963
- (D) 4 सितम्बर 1962
माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना 2 जनवरी 1964 को की गई थी। यह संस्थान जनजातीय समाज के अध्ययन, शोध और विकास के लिए कार्य करता है। यहाँ जनजातीय संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक समस्याओं पर शोध किया जाता है। राजस्थान में जनजातीय विकास योजनाओं में इसका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
77. भंगोरिया क्या है?
- (A) भीलों का त्योहार
- (B) विवाह रस्म
- (C) कथौड़ी के घर
- (D) भीलों के झोंपड़े
भंगोरिया भील जनजाति का प्रसिद्ध त्योहार है। इस अवसर पर युवक-युवतियाँ मेलों में भाग लेते हैं और अपना जीवनसाथी चुनते हैं। यह उत्सव रंग, संगीत और नृत्य से भरपूर होता है। भंगोरिया केवल त्योहार ही नहीं बल्कि सामाजिक मेलजोल और पारंपरिक विवाह प्रणाली का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
78. मावलिया नृत्य व होली नृत्य किस जनजाति के प्रमुख नृत्य हैं?
- (A) सांसी
- (B) कथौड़ी
- (C) भील
- (D) कंजर
मावलिया और होली नृत्य कथौड़ी जनजाति के प्रमुख पारंपरिक नृत्य माने जाते हैं। ये नृत्य विशेष रूप से त्योहारों और सामुदायिक आयोजनों में किए जाते हैं। नृत्य के माध्यम से समुदाय अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को जीवित रखता है। संगीत और सामूहिक भागीदारी इनके सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
79. शेखावाटी क्षेत्र के मीणा जनजाति की इष्टदेवी कौनसी है?
- (A) चौथमाता
- (B) जीण माता
- (C) कैला देवी
- (D) शाकम्भरी माता
शेखावाटी क्षेत्र के मीणा समाज की इष्टदेवी जीण माता मानी जाती हैं। इनके मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मीणा समाज में देवी-पूजा की परंपरा काफी मजबूत है और इष्टदेवी को परिवार और समाज की रक्षक माना जाता है। धार्मिक मेलों और त्योहारों में इनकी विशेष पूजा की जाती है।
80. मोरबंधिया, पहरावना, ताणना विवाह किस जनजाति में प्रचलित है?
- (A) सहरिया
- (B) भील
- (C) गरासिया
- (D) कंजर
मोरबंधिया, पहरावना और ताणना विवाह गरासिया जनजाति की विशेष विवाह परंपराएँ हैं। इन रस्मों के माध्यम से विवाह को सामाजिक स्वीकृति और सांस्कृतिक महत्व दिया जाता है। गरासिया समाज में विवाह के कई पारंपरिक रूप देखने को मिलते हैं, जो उनकी सामाजिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं।
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