मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे MCQ (Muslim Pirs, Mosques, Dargahs, Minarets, Tombs) – Part 5
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में नेहर खाँ की मीनार कोटा, बीबी जरीना का मकबरा धौलपुर, ऊषा मस्जिद' बयाना (भरतपुर), पंजाब शाह का उर्स अजमेर, अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे
- कुल प्रश्न: 20
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81. किस सुफी संत ने शेख हमीदुद्दीन नागौरी के मलफुजात (प्रवचन या उपदेश) को 'सुरूर-उस-सुदूर' के नाम से संकलित किया?
- (A) शेख अजीजुद्दीन नागौरी
- (B) शेख फरीदुद्दीन महमूद
- (C) काजी हम्मीदुद्दीन नागौरी
- (D) शेख हम्मीदुद्दीन सवाली
शेख हमीदुद्दीन नागौरी के उपदेशों और प्रवचनों को शेख फरीदुद्दीन महमूद ने सुरूर-उस-सुदूर नाम से संकलित किया। यह ग्रंथ सूफी विचारधारा और नागौरी परंपरा को समझने में महत्वपूर्ण है। इसमें आध्यात्मिक मार्गदर्शन और भाईचारे का संदेश प्रमुखता से मिलता है।
82. अजमेर की विख्यात दरगाह शरीफ पर 1 रुपये का डाक टिकट कब जारी किया गया था?
- (A) 13 फरवरी, 2004
- (B) 13 फरवरी, 1992
- (C) 13 फरवरी, 1974
- (D) 13 फरवरी, 1989
अजमेर शरीफ दरगाह पर 1 रुपये का डाक टिकट 13 फरवरी, 1989 को जारी किया गया था। यह टिकट ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के महत्व और दरगाह की ऐतिहासिक महत्ता को सम्मानित करने के उद्देश्य से निकाला गया। यह टिकट आज भी फिलेटली के क्षेत्र में विशेष स्थान रखता है।
83. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के लिए मुगल बादशाह अकबर द्वारा व्यवस्थार्थ दिए गए गाँवों की संख्या है?
- (A) 22
- (B) 18
- (C) 20
- (D) 25
मुगल बादशाह अकबर ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की व्यवस्थाओं के लिए 18 गाँव प्रदान किए थे। अकबर का अजमेर दरगाह के प्रति विशेष लगाव था और वह दरगाह में मन्नतें भी मांगने आते थे। इन गाँवों की आय से दरगाह की व्यवस्थाएँ चलती थीं।
84. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को 'सुल्तान-उल-हिन्द' की उपाधि किसने दी थी?
- (A) अकबर
- (B) मोहम्मद गौरी
- (C) मोहम्मद गजनवी
- (D) बलबन
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को 'सुल्तान-उल-हिन्द' की उपाधि मोहम्मद गौरी ने दी थी। यह उपाधि उनके प्रभाव, लोकप्रियता और आध्यात्मिक शक्ति के सम्मान में दी गई थी। उनके उपदेशों और करुणामयी स्वभाव ने उन्हें भारतीय उपमहाद्वीप में "गरीब नवाज़" बना दिया।
85. नेहर खाँ की मीनार कहाँ है?
- (A) अजमेर
- (B) जोधपुर
- (C) कोटा
- (D) सलूम्बर
नेहर खाँ की मीनार कोटा में स्थित है। यह मीनार स्थापत्य कला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है और कोटा की ऐतिहासिक धरोहरों में गिनी जाती है। नेहर खाँ का योगदान कोटा की सांस्कृतिक पहचान में महत्वपूर्ण रहा है।
86. डूंगरपुर का गलियाकोट का उर्स हिजरी सन् के किस मास की 27वीं तारीख को मनाया जाता है?
- (A) मुहर्रम
- (B) रमज़ान
- (C) रज्जब
- (D) सब्बाल
डूंगरपुर के गलियाकोट में प्रसिद्ध उर्स मुहर्रम माह की 27वीं तारीख को मनाया जाता है। यहाँ दाऊदी बोहरा सम्प्रदाय के संत फखरूद्दीन की मजार है, जिसे "मजार-ए-फखरी" कहा जाता है। इस दिन यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं।
87. बीबी जरीना का मकबरा कहाँ पर स्थित है?
- (A) ब्यावर
- (B) अजमेर
- (C) धौलपुर
- (D) उदयपुर
बीबी जरीना का मकबरा धौलपुर में स्थित है। यह मकबरा धौलपुर की प्राचीन धरोहरों में से एक है और स्थापत्य कला की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बीबी जरीना की मजार स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है।
88. ऊषा मस्जिद' कहां स्थित है?
- (A) गलियाकोट
- (B) सलूम्बर
- (C) सांभर
- (D) बयाना
ऊषा मस्जिद' बयाना (भरतपुर) में स्थित है। इसका निर्माण मूल रूप से ऊषा मंदिर के रूप में हुआ था, जिसका जीर्णोद्धार 936 ई. में लक्ष्मण सेन की पुत्री चित्रलेखा ने करवाया। बाद में 1224 ई. में इसे मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। इसके बाद महाराजा सूरजमल ने इसका पुनर्निर्माण करवाया।
89. शेख हमीदुद्दीन नागौरी किस सूफी सिलसिले के थे?
- (A) सुहरावर्दी
- (B) मगरिबी
- (C) चिश्ती
- (D) कादरी
शेख हमीदुद्दीन नागौरी चिश्ती सिलसिले से संबंधित थे। वे ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रमुख शिष्य थे और नागौर में रहकर उन्होंने सूफी मत का प्रचार-प्रसार किया। वहीं, काजी हमीदुद्दीन नागौरी सुहरावर्दी सिलसिले से जुड़े हुए थे। इसीलिए परीक्षा में इन दोनों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
90. पंजाब शाह का उर्स कहाँ मनाया जाता है?
- (A) अलवर
- (B) हनुमानगढ़
- (C) अजमेर
- (D) गंगानगर
पंजाब शाह का उर्स अजमेर के अढ़ाई दिन का झोपड़ा परिसर में मनाया जाता है। यह आयोजन अजमेर दरगाह से गहराई से जुड़ा हुआ है। यहाँ हर साल बड़ी संख्या में जायरीन आते हैं और यह उर्स साम्प्रदायिक सौहार्द और भक्ति का प्रतीक है।
91. सूफी ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह, अजमेर का निर्माण किसके द्वारा करवाया गया?
- (A) कुतुबुद्दीन ऐबक
- (B) इल्तुतमिश
- (C) शाहजहाँ
- (D) गयासुद्दीन खिलजी
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह का निर्माण इल्तुतमिश द्वारा प्रारंभ करवाया गया था। मुख्य गुम्बद का निर्माण गयासुद्दीन खिलजी ने करवाया और इसे हुमायूँ ने पूर्ण करवाया। दरगाह के अन्य हिस्सों जैसे निजाम गेट (निजाम मीर उस्मान अली), बड़ी देग (अकबर), छोटी देग (जहाँगीर) व महफिल खाना (बशीरूद्दौला) बाद में बने।
92. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के गुरु का नाम बताइए?
- (A) ख्वाजा उस्मान हारूनी
- (B) अब्दुल कादिर जिलानी
- (C) ख्वाजा कुतुबुद्दीन
- (D) निजामुद्दीन औलिया
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के गुरु का नाम ख्वाजा उस्मान हारूनी था। वे चिश्ती सिलसिले के प्रमुख संत थे। हारूनी साहब ने ही मोइनुद्दीन चिश्ती को आध्यात्मिक शिक्षा दी। उनकी प्रेरणा से ख्वाजा साहब ने अजमेर को अपनी कर्मस्थली बनाया और "गरीब नवाज़" कहलाए।
93. सूफी संत मुईनुद्दीन चिश्ती किसके शासनकाल में राजस्थान आए थे?
- (A) पृथ्वीराज चौहान
- (B) महाराणा प्रताप
- (C) राणा सांगा
- (D) राणा कुम्भा
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती राजस्थान पृथ्वीराज चौहान तृतीय के शासनकाल में आए थे। वे मुहम्मद गौरी के साथ भारत आए और अजमेर को अपनी कर्मस्थली बनाया। उनकी शिक्षाओं के कारण वे "सुल्तान-उल-हिन्द" और "गरीब नवाज़" कहलाए।
94. ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की "दरगाह" पर आने वाला पहला सुल्तान कौन था?
- (A) कुतुबुद्दीन ऐबक
- (B) इल्तुतमिश
- (C) मुहम्मद बिन तुगलक
- (D) अलाउद्दीन खिलजी
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर आने वाला पहला सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक था। उसने 1332 ई. में अजमेर दरगाह की यात्रा की। यह घटना इस दरगाह के राजनीतिक और धार्मिक महत्व को दर्शाती है।
95. अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह में स्थित बड़ी देग किस मुगल सम्राट द्वारा भेंट की गई?
- (A) हुमायूँ
- (B) जहाँगीर
- (C) शाहजहाँ
- (D) अकबर
अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह में बड़ी देग मुगल बादशाह अकबर द्वारा 1567 ई. में भेंट की गई थी। वहीं छोटी देग 1613 ई. में जहाँगीर ने भेंट की। ये देगें आज भी दरगाह की पहचान हैं और उर्स के अवसर पर इनका विशेष महत्व होता है।
96. अजमेर शरीफ़ किस प्रसिद्ध सूफी संत की दरगाह है?
- (A) निजामुद्दीन औलिया
- (B) शेख हमीदुद्दीन
- (C) मोइनुद्दीन चिश्ती
- (D) शेख सलीम चिश्ती
अजमेर शरीफ़ की दरगाह ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की है, जिन्हें "गरीब नवाज़" कहा जाता है। दरगाह का निर्माण इल्तुतमिश ने प्रारंभ करवाया था और हुमायूँ ने इसे पूर्ण करवाया। 1464 ई. में गयासुद्दीन खिलजी ने मुख्य गुम्बद का निर्माण कराया। अकबर और जहाँगीर ने भी देग भेंट की। यह दरगाह साम्प्रदायिक सौहार्द्र और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है।
97. स्थल 'गलियाकोट' किस नदी के किनारे स्थित है?
- (A) परवन
- (B) माही
- (C) साबरमती
- (D) सोम
गलियाकोट (डूंगरपुर) माही नदी के किनारे स्थित है। यह दाऊदी बोहरा सम्प्रदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहाँ संत सैय्यद फखरूद्दीन की मजार है, जिसे "मजार-ए-फखरी" कहा जाता है। मोहर्रम की 27वीं तारीख को यहाँ उर्स आयोजित होता है।
98. गलियाकोट में किस सम्प्रदाय का उर्स आयोजित होता है?
- (A) सुहरावर्दी सम्प्रदाय
- (B) दाऊदी बोहरा सम्प्रदाय
- (C) नक्सलवादी सम्प्रदाय
- (D) चिश्ती सम्प्रदाय
गलियाकोट (डूंगरपुर) में संत सैय्यद फखरूद्दीन की मजार पर उर्स दाऊदी बोहरा सम्प्रदाय का आयोजित होता है। यह उर्स मोहर्रम की 27वीं तारीख को मनाया जाता है और देशभर से बोहरा समाज के लोग यहाँ आते हैं। यह स्थल बोहरा समाज की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है।
99. निम्नलिखित में से किस स्थान पर बोहरा समुदाय का प्रमुख उर्स लगता है?
- (A) अजमेर में ख्वाजा साहब की दरगाह
- (B) फतेहपुर सीकरी में शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर
- (C) गलियाकोट में बाबा फखरूद्दीन की दरगाह पर
- (D) दिल्ली में ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर
बोहरा समुदाय का प्रमुख उर्स गलियाकोट (डूंगरपुर) में संत सैय्यद फखरूद्दीन की मजार पर लगता है। इसे "मजार-ए-फखरी" कहा जाता है और यह माही नदी के किनारे स्थित है। यहाँ हर साल मोहर्रम की 27वीं तारीख को उर्स आयोजित होता है, जो बोहरा समाज की आस्था का सबसे बड़ा पर्व है।
100. सूफी संत मिठे साहब की दरगाह निम्न में से किस दुर्ग में स्थित है?
- (A) गागरोन
- (B) चितौड़गढ़
- (C) कुम्भलगढ़
- (D) भानगढ़
सूफी संत मिठे साहब, जिन्हें "पीर मीठे महाबली" कहा जाता है, की दरगाह गागरोन दुर्ग (झालावाड़) में स्थित है। यह दरगाह धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। गागरोन दुर्ग यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और यहाँ संत मिठे शाह की दरगाह श्रद्धा का बड़ा केंद्र है।
मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे MCQ – सभी भाग:
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