
राजस्थान के इतिहास के स्रोत MCQ Quiz | Practice Set with Detailed Explanation
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के इतिहास के स्रोत से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें घोसुण्डी शिलालेख, भानु शिलालेख, नांदसा यूप स्तम्भ लेख, मंडोर का शिलालेख, जया बावड़ी की प्रशस्ति- 1675 ई आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, Fireman, Woman Superwiser, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के इतिहास के स्रोत
- Last Updated:
- Content Type: Updated MCQ Practice Set
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(Since 2021)
1. राजस्थान में वैष्णव धर्म का सर्वप्रथम उल्लेख किस शिलालेख में किया गया ?
- (A) घोसुण्डी शिलालेख
- (B) भानु शिलालेख
- (C) नांदसा यूप स्तम्भ लेख
- (D) मंडोर का शिलालेख
राजस्थान में वैष्णव धर्म का सबसे पहला उल्लेख घोसुण्डी शिलालेख में मिलता है। यह शिलालेख चित्तौड़गढ़ के पास घोसुण्डी से प्राप्त हुआ है और इसमें भगवान विष्णु की उपासना से संबंधित जानकारी मिलती है। यह शिलालेख प्राचीन काल में वैष्णव धर्म के प्रसार और उसकी लोकप्रियता का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है, जिससे उस समय की धार्मिक स्थिति का भी ज्ञान होता है।
2. बिजौलिया शिलालेख किस वर्ष का है-
- (A) 973 ई.
- (B) 1170 ई.
- (C) 1230 ई.
- (D) 1267 ई.
यह लेख बिजौलिया के पार्श्वनाथ मन्दिर की उत्तरी दीवार के पास एक चट्टान पर उत्कीर्ण है। जिसको दिगम्बरी जैन श्रावक लोलाक ने मन्दिर और कुण्ड निर्माण की स्मृति में लगवाया था।
3. सिक्कों व रियासतों का निम्न में से असंगत युग्म है?
- (A) ग्यारसंदिया - शाहपुरा
- (B) ढब्बूशाही - मारवाड़
- (C) माधोशाही रूपया- जयपुर
- (D) लल्लूलिया- जैसलमेर
मारवाड़ रियासत में सोजत की टकसाल में बनने वाला सिक्का लल्लूलिया सिक्का कहलाता था।
4. राजा के दैनिक क्रियाकलापों व उनसे मिलने वाले राजनैतिक व्यक्तियों का वर्णन किसमें मिलता है?
- (A) पड़ाखा-बही
- (B) खरीता-बही
- (C) ओहदा-बही
- (D) हकीकत-बही
हकीकत-बही में राजा के दैनिक जीवन, दरबार की गतिविधियों और उनसे मिलने वाले महत्वपूर्ण व्यक्तियों का विस्तृत विवरण मिलता है। इसमें उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों, दरबारी व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों की जानकारी भी दी जाती थी। यह स्रोत इतिहासकारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे तत्कालीन शासन व्यवस्था और सामाजिक जीवन का वास्तविक चित्र सामने आता है।
5. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म सही सुमेलित नहीं है-
- (A) जगन्नाथ प्रशस्ति-1552 ई.
- (B) जया बावड़ी की प्रशस्ति- 1675 ई.
- (C) वैद्यनाथ मंदिर की प्रशस्ति- 1719 ई.
- (D) बेणेश्वर का लेख-1866 ई.
जगन्नाथ प्रशस्ति (उदयपुर) 1652 ई. की है।
6. रणकपुर प्रशस्ति के संबंध में निम्न में से असत्य कथन है?
- (A) प्रशस्तिकार ने इसमें भूलवश गुहिल को बाप्पा का पुत्र लिख दिया है।
- (B) इस प्रशस्ति में बापा और कालभोज दोनों को पृथक-पृथक व्यक्ति बताया गया है।
- (C) इसमें बापा से लेकर कुभ्धा तक की वंशावली दी गई है।
- (D) यह लेख रणकपुर के नेमीनाथ मंदिर के एक स्तम्भ पर उत्कीर्ण है।
1439 ई. के इस लेख की भाषा संस्कृत व लिपि नागरी है। इसमें मेवाड़ के राजवंश, धरणा श्रेष्ठि वंश का तथा उसके शिल्पी का परिचय मिलता है। यह लेख रणकपुर के चौमुखा मंदिर (आदिनाथ) के बाएं स्तम्भ पर उत्कीर्ण है।
7. रैढ़ नामक स्थान से 3075 चाँदी की आहत मुद्रायें मिली है, जो देश में उत्खनन में एक ही स्थान से प्राप्त मुद्राओं की सर्वाधिक संख्या है, उक्त स्थान किस जिले में है?
- (A) जयपुर
- (B) करीली
- (C) टॉक
- (D) भरतपुर
ये भारत की प्राचीनतम मुद्राएँ है। इन सिक्कों का समय छठी शताब्दी ईसा पूर्व से द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व आंका गया है। इन्हे धारण या पण कहा जाता था। जिन पर अलग-अलग ठप्पे से चिह्न लगाये गये हैं।
8. बीकानेर के व्यापारिक मार्गों एवं वाणिज्यिक करों की सूचना निम्न में से किन स्त्रोतों से मिलती है?
- (A) कागदबही
- (B) दस्तूर कोमवार
- (C) अड़सट्टा
- (D) हकीकतबही
कागदबही में परिवहन के साधन, परिवहन शुल्क, कर, हुंडियों, नियमपत्रों, स्थानीय और अंतरप्रांतीय व्यापार, मुद्रा और व्यापारियों को शासकों द्वारा दी गई छूट आदि का विवरण मिलता है।
9. राजपूताने की प्राचीनतम लिपि है?
- (A) महाजनी
- (B) खरोष्ठी
- (C) नागरी
- (D) ब्राह्मी
राजपूताने की प्राचीनतम लिपि ब्राह्मी मानी जाती है। यह लिपि भारत की सबसे पुरानी लिपियों में से एक है और इससे ही बाद में अन्य लिपियों का विकास हुआ। राजस्थान क्षेत्र में प्राप्त प्राचीन अभिलेखों में ब्राह्मी लिपि का प्रयोग देखने को मिलता है, जिससे उस समय की भाषा, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
10. दरगाह रिकॉर्ड, इस्तमरारी रिकॉर्ड व एजेन्सी रिकॉर्ड को राजस्थान राज्य अभिलेखागार के किस रिकॉर्ड में रखा गया है?
- (A) उदयपुर रिकॉर्ड
- (B) अजमेर रिकॉर्ड
- (C) बीकानेर रिकॉर्ड
- (D) जयपुर रिकॉर्ड
राजस्थान राज्य अभिलेखागार के उदयपुर रिकॉर्ड में देवस्थान की बहियाँ, सिलहखाना के कागजात, बक्शीखाना बहियाँ, मेहता संग्रामसिंह के बस्ते, श्यालदास संग्रह के बस्ते आदि महत्त्वपूर्ण है।
11. जयपुर राज्य से संबंधित आय-व्यय, भेंट, उपहार, युद्ध आदि में काम आये व्यक्तियों को दी गयी इज्जत आदि का विवरण प्राप्त होता है ?
- (A) हकीकत बही
- (B) हस्बुल हुक्म
- (C) दस्तूर कौमवार
- (D) ओहदा बही
दस्तूर कौमवार में जयपुर राज्य की आय-व्यय व्यवस्था, भेंट, उपहार, युद्ध में योगदान देने वाले व्यक्तियों को दी गई सम्मान राशि और अन्य प्रशासनिक खर्चों का विस्तृत विवरण मिलता है। यह अभिलेख राज्य की आर्थिक व्यवस्था और सामाजिक सम्मान प्रणाली को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है, जिससे तत्कालीन प्रशासनिक ढांचे और कार्यप्रणाली की स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है।
12. निम्न में से कौनसी प्रशस्ति चौहान शासक विग्रहराज द्वितीय के समय की है?
- (A) बुचकला शिलालेख
- (B) हर्षनाथ की प्रशस्ति
- (C) डुंगरपुर की प्रशस्ति
- (D) बिजौलिया का लेख
हर्षनाथ की प्रशस्ति चौहान शासक विग्रहराज द्वितीय के समय की मानी जाती है। यह प्रशस्ति सीकर जिले के हर्षनाथ मंदिर से प्राप्त हुई है और इसमें चौहान वंश की उपलब्धियों और शासक की वीरता का वर्णन मिलता है। यह अभिलेख उस समय के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
13. झाड़शाही सिक्का राजस्थान की कौनसी रियासत से संबधित है?
- (A) बीकानेर
- (B) जयपुर
- (C) मारवाड़
- (D) मेवाड़
यहाँ के सिक्कों पर 6 टहनियों के झाड़ का चिह्न बना होता था। इसलिए इन्हे झाड़शाही सिक्के कहा जाता था। 1760 ई. से प्रचलित तांबे के सिक्के को पुराना झाड़शाही कहते थे।
14. लाहण बावड़ी की प्रशस्ति (1042 ई.) का संबंध किस जिले से है?
- (A) जोधपुर
- (B) अजमेर
- (C) जालौर
- (D) सिरोही
लाहण बावड़ी की प्रशस्ति 1042 ई. की है और इसका संबंध सिरोही जिले से है। यह प्रशस्ति उस समय के सामाजिक और धार्मिक जीवन पर प्रकाश डालती है। इसमें बावड़ी निर्माण, दान और धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख मिलता है, जिससे उस काल की जनजीवन और जल संरचनाओं के महत्व को समझने में सहायता मिलती है।
15. गंगाशाही सिक्के किस रियासत में प्रचलित थे?
- (A) बीकानेर
- (B) प्रतापगढ़
- (C) भरतपुर
- (D) जोधपुर
गंगाशाही सिक्के बीकानेर रियासत में प्रचलित थे। इन सिक्कों का नाम वहां के शासक गंगासिंह के नाम पर पड़ा। यह सिक्के उस समय की आर्थिक व्यवस्था और व्यापारिक लेन-देन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। इनसे यह भी पता चलता है कि बीकानेर राज्य में मुद्रा प्रणाली कितनी विकसित थी और व्यापार किस स्तर तक फैला हुआ था।
16. समिद्धेश्वर मंदिर अभिलेख राजस्थान के किस जिले में लगा है?
- (A) अजमेर
- (B) डूंगरपुर
- (C) जयपुर
- (D) चितौड़गढ़
चित्तौड़ किले के समिद्धेश्वर / समाधीश्वर मन्दिर के सभा मंडप की पूर्वी दीवार पर 53 पंक्तियों में उत्कीर्ण यह लेख 1428 ई. का है। इस मन्दिर में 1150 ई. का कुमारपाल सोलंकी का एक लेख भी लगा है।
17. जूनागढ़ प्रशस्ति (रायसिंह प्रशस्ति) के रचियता थे?
- (A) नापा
- (B) जड़ता
- (C) जीजा
- (D) गुणभद्र
जूनागढ़ प्रशस्ति, जिसे रायसिंह प्रशस्ति भी कहा जाता है, के रचियता जड़ता थे। यह प्रशस्ति बीकानेर के शासक रायसिंह की उपलब्धियों और उनके शासनकाल के महत्वपूर्ण कार्यों का वर्णन करती है। इसमें उनके द्वारा कराए गए निर्माण कार्य, युद्ध और प्रशासनिक उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख मिलता है, जो इतिहास के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
18. चांदोड़ी सिक्कों का संबंध राजस्थान की किस रियासत से रहा है?
- (A) बीकानेर
- (B) करौली
- (C) मारवाड़
- (D) मेवाड़
मेवाड़ महाराणा भीमसिंह ने अपनी बहिन चन्द्रकुंवरी बाई की स्मृति में चांदोड़ी रूपया, अठन्नी, चवन्नी, दोअन्नी और एक अन्नी चलाई थी। जिन पर फारसी हस्ताक्षर अंकित थे।
19. निम्न में से कौनसा लेख उदयपुर जिले से प्राप्त नहीं हुआ है?
- (A) चीरवा शिलालेख
- (B) जगन्नाथराय प्रशस्ति
- (C) वैद्यनाथ मंदिर प्रशस्ति
- (D) भ्रमर माता का अभिलेख
भ्रमर माता का लेख (490 ई.) प्रतापगढ़ की छोटी सादड़ी के भ्रमर माता मंदिर से प्राप्त हुआ है।
20. किस शिलालेख में चौहानों को 'वत्सगोत्रीय ब्राह्मण' बताया गया है?
- (A) सुंधा पर्वत अभिलेख
- (B) हस्तिकुण्डी शिलालेख
- (C) अपराजित का शिलालेख
- (D) बिजौलिया अभिलेख
बिजौलिया अभिलेख में चौहानों को वत्सगोत्रीय ब्राह्मण बताया गया है। यह अभिलेख चौहान वंश की उत्पत्ति और उनकी सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डालता है। इसमें उनके वंश, परंपरा और गौरवशाली इतिहास का उल्लेख मिलता है, जिससे इतिहासकारों को उस समय की जातीय संरचना और सामाजिक व्यवस्था को समझने में सहायता मिलती है।
21. बड़ली का शिलालेख किसने खोजा था?
- (A) कर्नल टॉड
- (B) जी. एच. ओझा
- (C) मुंशी देवी प्रसाद
- (D) कैप्टन बर्ट
बड़ली का शिलालेख प्रसिद्ध इतिहासकार जी. एच. ओझा द्वारा खोजा गया था। उन्होंने राजस्थान के अनेक प्राचीन अभिलेखों का अध्ययन किया और उन्हें प्रकाश में लाया। इस खोज से राजस्थान के प्राचीन इतिहास, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई, जिससे इतिहास लेखन को नई दिशा मिली।
22. बसन्तगढ़ का शिलालेख किस वंश से संबंधित है?
- (A) गुहिल वंश
- (B) राठौड़ वंश
- (C) देवड़ा वंश
- (D) चावड़ा वंश
सिरोही जिले के बसंतगढ़ में 625 ई. (विक्रम, सं. 682) का एक लेख मिला है, जो चावड़ा वंश के शासक वर्मलात के समय का है। इससे ज्ञात होता है कि उस समय में वर्मलात अर्बुद देश का स्वामी था।
23. किस शिलालेख को पश्चिमी राजस्थान का प्राचीनतम ज्ञात अभिलेख माना जाता है?
- (A) बंसतगढ़ शिलालेख
- (B) मंडोर का शिलालेख
- (C) गोठ मांगलोद का शिलालेख
- (D) ओसियां का लेख
गोठ-मंगलोद (नागौर) के दधिमाता मन्दिर में उत्कीर्ण 608 ई. का यह अभिलेख पश्चिमी राजस्थान का प्राचीनतम ज्ञात अभिलेख है। इस लेख के अनुसार गोठ-मंगलोद के आस-पास का क्षेत्र दाहिमा क्षेत्र कहलाता था।
24. बीजक डूंगरी पर सर्वप्रथम अशोक के शिलालेख की किसने व कब खोज की थी?
- (A) रलचन्द्र अग्रवाल ने 1954 में
- (B) बी. वी. लाल ने 1952 में
- (C) अमलानंद घोष ने 1959 में
- (D) कैप्टन बर्ट ने 1837 में
बीजक डूंगरी पर अशोक के शिलालेख की खोज सर्वप्रथम कैप्टन बर्ट ने 1837 में की थी। यह खोज राजस्थान के प्राचीन इतिहास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे मौर्यकालीन प्रशासन, धर्म और अशोक की नीतियों के बारे में जानकारी मिलती है, जो भारतीय इतिहास के अध्ययन में विशेष स्थान रखती है।
25. किस शिलालेख में मौर्यवंशी राजा धवल का उल्लेख मिलता है?
- (A) कणसवा का लेख
- (B) मानमोरी का शिलालेख
- (C) अपराजिता का शिलालेख
- (D) सामोली शिलालेख
यह लेख कोटा के कणसवा गाँव के शिवालय में लगा हुआ है। जिसमें धवल नाम के एक मौर्यवंशी राजा का उल्लेख है। इस उल्लेख के बाद अन्य किसी मौर्यवंशी राजाओं का राजस्थान में वर्णन नहीं मिलता है।
26. 1150 ई. का कुमारपाल का शिलालेख चित्तौड़ के किस मंदिर में लगा है?
- (A) कुम्भश्याम मन्दिर
- (B) तुलजा भवानी मन्दिर
- (C) सतबीस देवरी मन्दिर
- (D) समीधेश्वर मंदिर
कुमारपाल का 1150 ई. का शिलालेख चित्तौड़गढ़ के समीधेश्वर मंदिर में लगा है। यह मंदिर उस समय जैन धर्म से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान था। इस लेख से यह समझ आता है कि उस दौर में मंदिरों को राजाओं का संरक्षण मिलता था और धार्मिक गतिविधियाँ काफी सक्रिय थीं।
27. रंगमहल नामक स्थान, जहाँ से कुषाणोत्तर काल के सिक्के प्राप्त हुए हैं, किस जिले में स्थित है?
- (A) गंगानगर
- (B) हनुमानगढ़
- (C) भरतपुर
- (D) टोंक
ध्यान रहे रंगमहल नामक स्थान, जहाँ से प्राचीन सभ्यता प्राप्त हुई है, वो स्थान गंगानगर जिले की सूरतगढ़ तहसील में आता है। रंगमहल के नाम से ग्राम पंचायत भी है, जो गंगानगर जिले में ही है। इस रंगमहल गांव से 4 किमी दूर रंगमहल के नाम से रेलवे स्टेशन है, जो हनुमानगढ़ जिले में आता है।
28. श्रृंगी ऋषि का शिलालेख का सम्बन्ध किस जिले से है?
- (A) चित्तौड़
- (B) उदयपुर
- (C) डूंगरपुर
- (D) प्रतापगढ़
श्रृंगी ऋषि का शिलालेख उदयपुर जिले में मिलता है। यह स्थान एकलिंगजी के पास स्थित है। यह लेख महाराणा मोकल के समय 1428 ई. का है और संस्कृत भाषा में लिखा गया है। इससे उस समय की धार्मिक मान्यताओं और राजकीय संरक्षण की झलक मिलती है।
29. वैद्यनाथ मंदिर की प्रशस्ति मेवाड़ के किस महाराणा के समय की है-
- (A) जगतसिंह प्रथम
- (B) संग्राम सिंह प्रथम
- (C) संग्राम सिंह द्वितीय
- (D) जगतसिंह द्वितीय
वैद्यनाथ मंदिर की प्रशस्ति महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय के समय की है। इसमें मंदिर से जुड़े कार्यों और धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख मिलता है। इससे पता चलता है कि उस समय मंदिरों का निर्माण और उनका रखरखाव शासकों की प्राथमिकता में शामिल था।
30. किस शिलालेख में कछवाहा वंश को रघुवंश तिलक कहकर सम्बोधित किया गया है?
- (A) आमेर का शिलालेख
- (B) रसिया की छतरी का शिलालेख
- (C) सुन्धा पर्वत अभिलेख
- (D) किणसरिया का शिलालेख
आमेर के शिलालेख में कछवाहा वंश को रघुवंश तिलक कहा गया है। यह शिलालेख 1612 ई. का है। इसमें मुगल सम्राट जहांगीर का भी उल्लेख मिलता है, जिससे उस समय आमेर और मुगलों के संबंधों का पता चलता है।
31. किस प्रशस्ति में कुम्भा को दानगुरु, राजगुरु व शैलगुरु कहा गया है। इसके साथ ही कुम्भा द्वारा रचित ग्रन्थों चंडीशतक, गीत गोविन्द की टीका, संगीतराज तथा कई नाटकों का उल्लेख है?
- (A) एकलिंग प्रशस्ति
- (B) राज प्रशस्ति
- (C) वैद्यनाथ प्रशस्ति
- (D) कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति
कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति में महाराणा कुम्भा को दानगुरु, राजगुरु और शैलगुरु कहा गया है। इसमें उनके लिखे ग्रंथ जैसे चंडीशतक, गीत गोविन्द की टीका और संगीतराज का भी जिक्र मिलता है, जिससे उनकी विद्वता का पता चलता है।
32. किस शिलालेख से राव सीहा की मृत्यु तिथि का पता चलता है?
- (A) बीटू का लेख
- (B) सच्चियाय माता मंदिर प्रशस्ति
- (C) सांडेराव का लेख
- (D) बुचकला का शिलालेख
राव सीहा की मृत्यु तिथि बीटू के लेख से पता चलती है। इसमें उनके जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य मिलते हैं, जिससे उनके समय को समझने में मदद मिलती है।
33. किस शिलालेख में महाराणा राजसिंह का प्रथम विवाह 12 वर्ष की उम्र में होना, 1660 ई. में औरंगजेब के विरुद्ध जाकर किशनगढ़ की राजकुमारी चारूमति से विवाह तथा औरंगजेब से युद्ध एवं संधि का विवरण दिया गया है?
- (A) जगन्नाथ राय प्रशस्ति
- (B) खमनौर की छतरी का लेख
- (C) राजप्रशस्ति
- (D) वैद्यनाथ मंदिर प्रशस्ति
राजप्रशस्ति में महाराणा राजसिंह के जीवन की कई घटनाओं का वर्णन मिलता है। इसमें उनके कम उम्र में विवाह, चारूमति से विवाह और औरंगजेब से हुए संघर्ष का उल्लेख किया गया है।
34. जया बावड़ी की प्रशस्ति कहाँ पर लगी है?
- (A) मांडल (भीलवाड़ा)
- (B) आहड़ (उदयपुर)
- (C) खमनौर (राजसमंद)
- (D) देबारी (उदयपुर)
जया बावड़ी की प्रशस्ति उदयपुर के देबारी में स्थित है। इसमें बावड़ी के निर्माण से जुड़ी जानकारी मिलती है,
35. अभिलेख, जो प्रतिहार शासक कक्कुक की अभीरों पर विजय का दावा करता है
- (A) घटियाला अभिलेख
- (B) बुचकला अभिलेख
- (C) मण्डोर का शिलालेख
- (D) शंकरघट्टा का लेख
घटियाला अभिलेख में प्रतिहार शासक कक्कुक द्वारा अभीरों पर विजय का उल्लेख मिलता है। इसमें उनके युद्ध और जीत से जुड़ी जानकारी दी गई है,
36. निम्नलिखित में से शिलालेख / प्रशस्ति और उनके उत्कीर्णन वर्ष का कौनसा जोड़ा सुमेलित नहीं है?
- (A) अचलेश्वर शिलालेख - 1285 ई.
- (B) बिजौलिया शिलालेख - 1170 ई.
- (C) चिरवा शिलालेख - 987 ई.
- (D) कुम्भलगढ़ प्रशस्ति- 1460 ई.
चीरवा का शिलालेख 1273 ई. का है।
37. घोसुण्डी शिलालेख की भाषा व लिपि है?
- (A) प्राकृत, आर्मेनियन
- (B) संस्कृत, भाबू
- (C) संस्कृत, ब्राह्मी
- (D) हिन्दी, देवनागरी
घोसुण्डी शिलालेख संस्कृत भाषा में और ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है। यह राजस्थान के प्राचीन शिलालेखों में से एक है, जिसमें धार्मिक विषयों का उल्लेख मिलता है।
38. द्रम, विन्शोपक व रूपक आदि नामों से प्रचलित मुद्राओं का संबंध किन शासकों से है?
- (A) परमार
- (B) चौहान
- (C) गुहिल
- (D) प्रतिहार
द्रम, विन्शोपक और रूपक नाम की मुद्राएँ चौहान शासकों के समय चलती थीं। ये उस समय के लेन-देन में उपयोग होती थीं और व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा थीं।
39. वरली शिलालेख, जो कि अशोक काल से पूर्व का माना जाता है, प्राप्त हुआ है?
- (A) डूंगरपुर जिले में
- (B) भीलवाड़ा जिले में
- (C) व्यावर जिले में
- (D) अजमेर जिले में
वरली शिलालेख अजमेर जिले में मिला है और इसे अशोक काल से पहले का माना जाता है।
40. राजप्रशस्ति शिलालेख का काल है?
- (A) 1576 ई.
- (B) 1476 ई.
- (C) 1676 ई.
- (D) 1776 ई.
राजप्रशस्ति शिलालेख 1676 ई. का है और यह महाराणा राजसिंह के समय से जुड़ा है। इसमें उनके शासनकाल की घटनाओं का उल्लेख मिलता है।
41. घटियाला शिलालेख किस भाषा में लिखा गया था?
- (A) संस्कृत
- (B) प्राकृत
- (C) फारसी
- (D) ऊर्दू
घटियाला शिलालेख राजस्थान के महत्वपूर्ण अभिलेखों में से एक है। यह मुख्यतः संस्कृत भाषा में लिखा गया था, जो उस समय शासकीय और धार्मिक अभिलेखों की प्रमुख भाषा थी। संस्कृत का प्रयोग शासकों की उपलब्धियों और वंशावली को दर्शाने के लिए किया जाता था।
42. राजप्रशस्ति' शिलालेख के संबंध में निम्न में से असत्य कथन है?
- (A) यह प्रशस्ति राजसमंद झील की पाल पर लगी है।
- (B) यह काले रंग के 25 पत्थरों पर संस्कृत भाषा में उत्कीर्ण है।
- (C) इसमें बापा से लेकर महाराणा राजसिंह तक के शासकों की वंशावली व उनकी उपलब्धियों का वर्णन है।
- (D) प्रशस्ति से पता चलता है कि राजसमुद्र का निर्माण महाराणा राजसिंह ने नाडोल विजय की उपलक्ष में करवाया था।
प्रशस्ति से पता चलता है कि राजसमुद्र का निर्माण दुष्काल के समय श्रमिकों के लिए काम निकालने के लिए कराया गया था और उसे पूरा बनने में 14 वर्ष लगे थे।
43. टोंक जिले के नगर कस्बे में मालव जनपद के लगभग 6 हजार ताँबे के सिक्के किसे प्राप्त हुये थे?
- (A) जॉन मार्शल
- (B) ए.सी. एल. कार्लाइल
- (C) कर्नल जेम्स टॉड
- (D) दयाराम साहनी
नगर (टोंक) क्षेत्र से लगभग 6000 तांबे के सिक्के ए.सी. एल. कार्लाइल को प्राप्त हुए थे। इन सिक्कों से यह संकेत मिलता है कि यहां मालव जनपद की टकसाल स्थित थी, जहाँ सिक्कों का निर्माण किया जाता था।
44. राजस्थान में अशोक के अभिलेख कहाँ से प्राप्त हुए है?
- (A) बड़ली
- (B) बरनाला
- (C) बुचकला
- (D) बैराठ
मौर्य सम्राट अशोक के अभिलेख राजस्थान में बैराठ (वर्तमान जयपुर क्षेत्र) से प्राप्त हुए हैं। यहाँ से दो प्रमुख शिलालेख मिले हैं, जो लगभग 250 ईसा पूर्व के हैं और अशोक के धम्म संबंधी विचारों को दर्शाते हैं।
45. जो पत्र राजा द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को भेजे जाते थे, वे कहलाते थे।
- (A) फरमान
- (B) दोवर्की
- (C) परवाना
- (D) खरीता
प्राचीन और मध्यकालीन प्रशासन में राजा द्वारा अपने अधिकारियों को भेजे गए आदेशात्मक पत्रों को परवाना कहा जाता था। यह प्रशासनिक संचार का महत्वपूर्ण माध्यम था और शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में सहायक था।
46. घटियाला अभिलेख से संबंधित निम्नलिखित कथनों में असत्य है-
- (A) अभिलेख में प्रतिहार शासक हरिशचन्द्र एवं उसके वंशजों का विवरण है।
- (B) अभिलेख में 'मग' जातीय ब्राह्मणों का उल्लेख है।
- (C) अभिलेख में नागभट्ट-1 के राजधानी को मंडोर में स्थानांतरित करने का विवरण है।
- (D) यह अभिलेख 4 अभिलेखीय लेखों का एक समूह है।
मंडोर प्रतिहारों की प्रारंभिक राजधानी पहले से ही मंडोर थी। नागभट्ट प्रथम के समय राजधानी को मंडोर से मेड़ता स्थानांतरित किया गया था, इसलिए कथन असत्य है।
47. चितौड़ की टकसाल में मुगल शासकों अकबर व जहाँगीर के समय ढाले गये सिक्के क्या कहलाते थे?
- (A) चांदोली सिक्के
- (B) सिक्का एलची
- (C) गधिया सिक्के
- (D) फदिया सिक्के
चित्तौड़ की टकसाल में अकबर और जहाँगीर के समय जो सिक्के ढाले गए, उन्हें सिक्का एलची कहा जाता था। यह मुगल काल की मुद्रा प्रणाली का महत्वपूर्ण भाग थे और व्यापार में व्यापक रूप से उपयोग होते थे।
48. राजस्थान में प्रचलित रहे 'आदिवराह शैली' के सिक्कों का संबंध किस राजवशं से है?
- (A) गुर्जर प्रतिहार
- (B) राठौड़ राजवंश
- (C) देवड़ा चौहान
- (D) भाटी राजवंश
आदिवराह शैली के सिक्के गुर्जर-प्रतिहार वंश से संबंधित थे। इन सिक्कों पर भगवान विष्णु के वराह अवतार का चित्र अंकित होता था, जो इस वंश की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।
49. 1886 ई. में बूंदी में महाराव रामसिंह के समय किस प्रकार के सिक्के प्रचलन में थे?
- (A) सालिमशाही सिक्के
- (B) झाड़शाही एलची
- (C) स्वरूपशाही सिक्के
- (D) कटारशाही सिक्के
बूंदी राज्य में 1886 ई. में महाराव रामसिंह के समय कटारशाही सिक्के प्रचलित थे। इन सिक्कों पर एक ओर महारानी विक्टोरिया का नाम और कटार का चिन्ह अंकित होता था, जो उस समय की राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है।
50. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म (मुद्राएं- रियासत) सुमेलित नहीं है?
- (A) अखैशाही - जैसलमेर
- (B) मदनशाही- कोटा
- (C) विजयशाही - झालावाड़
- (D) गजशाही-बीकानेर
विजयशाही सिक्के वास्तव में मारवाड़ रियासत में प्रचलित थे, न कि झालावाड़ में। ये सिक्के सोने, चांदी और तांबे के बने होते थे और विभिन्न शासकों के काल में उपयोग में रहे।
51. निम्नलिखित में से कौनसा (अभिलेख / शिलालेख जिला/स्थान) सुमेलित नहीं है?
- (A) बसंतगढ़ - सिरोही
- (B) मानमोरी - चित्तौड़
- (C) घटियाला - जैसलमेर
- (D) चीरवा - उदयपुर
घटियाला अभिलेख जैसलमेर में नहीं बल्कि जोधपुर जिले के फलौदी क्षेत्र में स्थित है। इसलिए यह युग्म असंगत है और परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।
52. बैराठ (कोटपूतली बहरोड़) के पास भीम की डूंगरी के तल पर दो के शिलालेख बैराठ शिलालेख और लघु शिलालेख की खोज की गई है।
- (A) मौखरी शासकों के
- (B) मानसिंह प्रथम
- (C) विष्णुवर्धन
- (D) अशोक
बैराठ क्षेत्र में भीम की डूंगरी के पास मिले शिलालेख सम्राट अशोक से संबंधित हैं। ये शिलालेख उनके धम्म नीति के प्रचार-प्रसार को दर्शाते हैं और मौर्यकालीन इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
53. रसिया की छतरी' अभिलेख पर नाम उत्कीर्ण है?
- (A) नरवर्मा
- (B) महाराणा राजसिंह
- (C) जोगेश्वर चौबीसा
- (D) सामन्त सिंह
रसिया की छतरी' अभिलेख पर नरवर्मा का नाम उत्कीर्ण है। यह अभिलेख राजस्थान के ऐतिहासिक अभिलेखों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और उस समय के शासकों एवं उनके कार्यों की जानकारी प्रदान करता है।
54. घोसुण्डी' का शिलालेख किस जिले से प्राप्त हुआ है?
- (A) ब्यावर
- (B) सलूम्बर
- (C) चित्तौड़गढ़
- (D) डूंगरपुर
चित्तौड़गढ़ के पास स्थित घोसुण्डी गांव से यह शिलालेख प्राप्त हुआ है। यह संस्कृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है तथा प्राचीन राजस्थान के इतिहास के अध्ययन में महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
55. ढ़ींगला, भीडरिया, नाथद्वारिया क्या है?
- (A) मेवाड़ में प्रचलित ओढ़नियाँ
- (B) मेवाड़ के राजस्व करों के नाम
- (C) मेवाड़ में प्रचलित ताँबे के सिक्के
- (D) मेवाड़ में सरदारों की श्रेणियाँ
मेवाड़ क्षेत्र में तांबे के विभिन्न प्रकार के सिक्के प्रचलित थे, जिन्हें ढींगला, भीडरिया, नाथद्वारिया आदि नामों से जाना जाता था। ये स्थानीय मुद्रा प्रणाली का हिस्सा थे और दैनिक लेन-देन में उपयोग किए जाते थे।
56. रियासतों व उनमें प्रचलित सिक्कों का कौनसा युग्म असंगत है?
- (A) रावशाही अलवर
- (B) माणकशाही करौली
- (C) झाड़शाही - मारवाड़
- (D) भीमशाही जोधपुर
झाड़शाही सिक्कों का प्रचलन मारवाड़ में नहीं बल्कि जयपुर रियासत में था। जयपुर के कच्छवाहा शासकों द्वारा इन सिक्कों का प्रचलन किया गया था, इसलिए यह युग्म असंगत है।
57. मुगल शासकों के साथ मैत्री पूर्ण संबंधों के कारण जयपुर के कच्छवाहा शासकों द्वारा जारी किए गए सिक्के कहलाते थे।
- (A) लक्ष्मणशाही
- (B) लल्लूलिया
- (C) माधोशाही
- (D) झाड़शाही
जयपुर के कच्छवाहा शासकों के मुगल शासकों से मैत्रीपूर्ण संबंध थे। इसी कारण उन्होंने झाड़शाही सिक्के जारी किए, जिन पर मुगल प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। यह उस समय की राजनीतिक और सांस्कृतिक निकटता को दर्शाता है।
58. मौखरी यूप अभिलेख (238 ई.) निम्न में से कहाँ से प्राप्त हुए है?
- (A) बरनाला
- (B) बैराठ
- (C) बड़वा
- (D) बड़ली
बारां जिले के बड़वा स्थान से मौखरी यूप अभिलेख प्राप्त हुए हैं। यहाँ से तीन यूप स्तंभ मिले हैं, जिनमें मौखरी वंश के शासकों का प्रारंभिक उल्लेख मिलता है। यह अभिलेख प्राचीन राजस्थान के इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
59. निम्न में से कौनसा शिलालेख सांभर और अजमेर के चौहान राजवंश की वंशावली और उनकी उपलब्धियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराता है?
- (A) किराडू का लेख
- (B) बिजौलिया शिलालेख
- (C) इंगनौड़ा का शिलालेख
- (D) जालौर का लेख
बिजौलिया शिलालेख चौहान वंश के इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसमें सांभर और अजमेर के चौहान शासकों की वंशावली तथा उनकी प्रमुख उपलब्धियों का विस्तृत वर्णन मिलता है, जो इतिहास लेखन में सहायक है।
60. किस स्थान से आहत सिक्के प्राप्त नहीं हुए हैं?
- (A) नोह
- (B) रैढ़
- (C) सांभर
- (D) तिलवाड़ा
पंचमार्क या आहत सिक्के राजस्थान के कई स्थानों जैसे बैराठ, सांभर, रैढ़, नोह आदि से प्राप्त हुए हैं, लेकिन तिलवाड़ा से ऐसे सिक्के प्राप्त नहीं हुए हैं। इसलिए यह सही उत्तर है।
61. निम्नाकिंत में से किस अभिलेख से राजस्थान में मौर्य साम्राज्य के अस्तित्व की जानकारी मिलती है?
- (A) कण्सवा अभिलेख
- (B) बड़ली अभिलेख
- (C) घोसुण्डी अभिलेख
- (D) नान्दसा यूप अभिलेख
कण्सवा अभिलेख से राजस्थान में मौर्य साम्राज्य के प्रभाव और अस्तित्व का प्रमाण मिलता है। यह अभिलेख उस समय की राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है और मौर्य प्रशासन के विस्तार को समझने में महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
62. निम्नलिखित में से किस अभिलेख से बप्पा रावल से महाराणा कुंभा तक की वंशावली की जानकारी मिलती है?
- (A) कुंभलगढ़ अभिलेख
- (B) रणकपुर अभिलेख
- (C) एकलिंग अभिलेख
- (D) कीर्ति स्तम्भ अभिलेख
रणकपुर प्रशस्ति (1439 ई.) में मेवाड़ के शासकों की वंशावली बप्पा रावल से लेकर महाराणा कुंभा तक दी गई है। इसमें कुम्भा की विजयों, युद्धों और प्रशासनिक क्षमता का भी विस्तृत वर्णन मिलता है।
63. मुगल दरबार में राजपूत राज्यों का एक प्रतिनिधि रहता था, जिसे वकील कहा जाता था। इस वकील के माध्यम से मुगल दरबार की गतिविधियों की रिपोर्ट प्राप्त होती रहती थी, जो कहलाती थी?
- (A) मुगल रिपोर्ट
- (B) वकील रिपोर्ट
- (C) महकमा रिपोर्ट
- (D) दैनिक रिपोर्ट
मुगल दरबार में राजपूत राज्यों के प्रतिनिधि को वकील कहा जाता था। यह वकील दरबार की गतिविधियों की जानकारी अपने राज्य को भेजता था, जिसे वकील रिपोर्ट कहा जाता था। इससे राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारी प्राप्त होती थी।
64. मुगल बादशाह द्वारा अपने सामन्तों, शहजादों, विदेशी शासकों तथा प्रजा के नाम भेजे जाने वाले शाही आदेश क्या कहलाते थे?
- (A) सनद
- (B) मन्सूर
- (C) वाकया
- (D) फरमान
मुगल प्रशासन में बादशाह द्वारा जारी किए गए शाही आदेश फरमान कहलाते थे। ये आदेश शासन व्यवस्था के संचालन, नियुक्तियों और विशेष अधिकार देने के लिए जारी किए जाते थे और इनका विशेष महत्व था।
65. बादशाह की मौजूदगी में शहजादे द्वारा जारी किया जाने वाला शाही आदेश कहलाता था ।
- (A) रूक्का
- (B) परवाना
- (C) मन्सूर
- (D) सनद
मुगल काल में शहजादे द्वारा बादशाह की उपस्थिति में जारी आदेश को मन्सूर कहा जाता था। यह आदेश अधिकारिक होता था और विशेष परिस्थितियों में उपयोग किया जाता था।
66. रियासती काल में राजा की दैनिक दिनचर्या का उल्लेख किस बही में मिलता है?
- (A) हकूमत री बही
- (B) हकीकत बही
- (C) दस्तूर री बही
- (D) मुल्की बही
हकीकत बही' में राजा की दैनिक गतिविधियों और दिनचर्या का विवरण मिलता है। यह प्रशासनिक अभिलेखों का महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिससे तत्कालीन शासन व्यवस्था और राजकीय कार्यों की जानकारी मिलती है।
67. प्रजा द्वारा बादशाह को लिखे जाने वाले व शहजादों द्वारा बादशाह को लिखे जाने वाले पत्र कहलाते थे ।
- (A) सयाद हजूर
- (B) परवाना
- (C) अर्जदास्त
- (D) दस्तक
मुगल काल में प्रजा या शहजादों द्वारा बादशाह को भेजे गए निवेदन पत्र अर्जदास्त कहलाते थे। इनमें शिकायतें, अनुरोध या अन्य प्रशासनिक विषयों से संबंधित जानकारी होती थी।
68. एक स्थान से दूसरे स्थान पर सामान को लाने व ले जाने का अनुमति पत्र क्या कहलाता था?
- (A) दस्तक
- (B) निशान
- (C) सनद
- (D) परवाना
दस्तक' वह अनुमति पत्र था, जिसके माध्यम से सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की अनुमति दी जाती थी। यह व्यापार और परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
69. मुगल बादशाह द्वारा अपने किसी अधीनस्थ राजा या सामंत को जागीर प्रदान करने की स्वीकृति कहलाती थी।
- (A) फरमान
- (B) मन्सूर
- (C) रूक्का
- (D) सनद
मुगल काल में किसी राजा या सामंत को जागीर देने की आधिकारिक स्वीकृति सनद कहलाती थी। यह दस्तावेज अधिकार और भूमि प्रदान करने का प्रमाण होता था।
70. बादशाह के परिवार के किसी सदस्य जैसे शहजादों व वेगमों द्वारा मनसबदारों को अपनी मुहर के साथ जारी किए जाने वाले आदेश क्या कहलाते थे?
- (A) अहकाम
- (B) हस्बुल हुक्म
- (C) निशान
- (D) मुल्की
मुगल काल में शहजादों और बेगमों द्वारा अपनी मुहर के साथ जारी आदेश निशान कहलाते थे। ये आदेश प्रशासनिक कार्यों और नियुक्तियों से संबंधित होते थे।
71. जो पत्र एक शासक द्वारा दूसरे शासक को भेजे जाते थे, क्या कहलाते थे?
- (A) खरीता
- (B) परवाना
- (C) फरमान
- (D) अर्जदास्त
इन पत्रों से शासकों की नीति, मुगल-मराठा संबंध तथा राजाओं के गोपनीय समझौतों की जानकारी मिलती है। इनका संग्रह खतूत संग्रह कहलाता है। जयपुर राज्य के राजकीय रिकॉर्ड में फारसी, उर्दू में लिखित खरीता संग्रह को खतूत ए महाराजन कहा जाता है।
72. राज परिवार की दैनिक आवश्यकताओं के खर्च का विवरण मिलता है?
- (A) दस्तूर कौमवार में
- (B) कमठाना बही में
- (C) सयाद हजूर में
- (D) वकील रिपोर्ट में
सयाद हजूर' में राज परिवार की दैनिक आवश्यकताओं और खर्चों का विवरण मिलता था। यह शाही खर्चों का लेखा-जोखा रखने के लिए उपयोग किया जाता था और प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग था।
73. निम्नलिखित बहियों में से किन बहियों में राजकीय भवनों के निर्माण का विस्तृत विवरण मिलता है?
- (A) हकीकत बहियाँ
- (B) कमठाना बहियाँ
- (C) शहर लेखा बहियाँ
- (D) हवाला बहियाँ
कमठाना बहियों में राजकीय भवनों, किलों और महलों के निर्माण तथा उन पर होने वाले खर्च का विस्तृत लेखा-जोखा रखा जाता था। यह निर्माण कार्यों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है।
74. अशोक के अभिलेखों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- (1) अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा में हैं। (2) अधिकांश अभिलेख ब्राह्मी लिपि में हैं उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/है?
- (A) 1 सही है, 2 गलत है।
- (B) 1 और 2 दोनों गलत हैं।
- (C) 1 और 2 दोनों सही हैं।
- (D) 1 गलत है, 2 सही है।
अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा में लिखे गए हैं और इनकी लिपि मुख्यतः ब्राह्मी है। ये अभिलेख जनसाधारण को समझाने के लिए सरल भाषा में लिखे गए थे और धम्म के प्रचार का माध्यम थे।
75. शिलालेख/प्रशस्ति और उनके वर्ष का कौनसा जोड़ा सही नहीं है?
- (A) रसिया की छतरी का लेख- 1274 ई.
- (B) गंभीरी नदी के पुल का लेख 1267 ई.
- (C) चीरवा का शिलालेख 1273 ई.
- (D) श्रृंगी ऋषि शिलालेख 1528 ई.
श्रृंगी ऋषि शिलालेख का सही वर्ष 1428 ई. है, जो महाराणा मोकल के समय का है। इसलिए 1528 ई. का उल्लेख गलत है और यह युग्म असंगत है।
76. निम्न में से कौनसे सिक्के मेवाड़ रियासत में प्रचलित नहीं थे?
- (A) चांदोड़ी सिक्के
- (B) स्वरूपशाही सिक्के
- (C) शाह आलमी सिक्के
- (D) गजशाही सिक्के
गजशाही सिक्के मेवाड़ में नहीं बल्कि बीकानेर रियासत में प्रचलित थे। इन्हें महाराजा गजसिंह ने मुगल अनुमति से जारी किया था, इसलिए यह विकल्प सही है।
77. निम्न में से कौनसा शिलालेख राजस्थान का प्राचीनतम शिलालेख कहलाता है?
- (A) सामोली शिलालेख
- (B) बड़ली शिलालेख
- (C) नगरी का शिलालेख
- (D) बुचकला शिलालेख
बड़ली शिलालेख राजस्थान का प्राचीनतम शिलालेख माना जाता है। यह अजमेर जिले के बड़ली गाँव से प्राप्त हुआ है और ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है, जो प्राचीन इतिहास के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
78. उस अभिलेख को चिन्हित कीजिए, जो प्राचीन राजस्थान में वैष्णव संप्रदाय की उपस्थिति के साक्ष्य देता है-
- (A) कन्सुआ अभिलेख
- (B) बरनाला अभिलेख
- (C) हर्षनाथ मंदिर की प्रशस्ति
- (D) आहड़ अभिलेख
बरनाला अभिलेख में भगवान विष्णु की आराधना का उल्लेख मिलता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय वैष्णव संप्रदाय का प्रभाव था। यह अभिलेख धार्मिक स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण है।
79. इकतीसंदा' रुपया राजस्थान की कौनसी टकसाल में बनता था?
- (A) सोजत
- (B) मंडोर
- (C) जोधपुर
- (D) कुचामन
इकतीसंदा' रुपया कुचामन टकसाल में बनाया जाता था। यह राजस्थान की स्थानीय मुद्रा प्रणाली का हिस्सा था और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
80. बिजौलिया का लेख के बारे में निम्न में से असत्य कथन है-
- (A) यह शिलालेख चौहान शासक सोमेश्वर के समय का है।
- (B) इसमें बिजौलिया के आसपास के पठारी भाग को 'उत्तमाद्री' कहा गया है।
- (C) इसको दिगम्बरी जैन श्रावक लोलाक ने मंदिर और कुंड निर्माण की स्मृति में लगाया था।
- (D) इस प्रशस्ति के रचयिता विजयसेन सूरी थे।
बिजोलिया शिलालेख के रचयिता गुणभद्र थे, न कि विजयसेन सूरी। यह अभिलेख चौहान वंश के इतिहास और उस समय की भौगोलिक स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण स्रोत है।
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