राजस्थान के लोकगीत (Folk Songs of Rajasthan) MCQ – Part 3
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के लोकगीत से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें चिरमी, सुपना, हिचकी, पपैहा, मूमल, कुरजां, सुवटिया, कागा, कुरजां गीत, सुपणा आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के लोकगीत
- Question: 41 से 60
- Last Updated:
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41. एक रजवाड़ी गीत जिसमें विरहणी नारी अपने प्रियतम को घर आने का संदेश देती है?
- (A) पपैहा
- (B) मूमल
- (C) चिरमी
- (D) कुरजां
कुरजां गीत राजस्थान का प्रसिद्ध रजवाड़ी गीत है। इसमें विरहणी नारी अपने प्रियतम को घर आने का संदेश देती है। नायिका कुरजां पक्षी को संदेशवाहक मानकर अपने प्रिय तक प्रेम संदेश पहुँचाती है। यह गीत विरह और प्रतीक्षा की भावनाओं का मार्मिक चित्रण करता है।
42. लड़की द्वारा ससुराल में पिता व भाई को याद करके गाया जाने वाला गीत है?
- (A) सुवटिया
- (B) कागा
- (C) चिरमी
- (D) सुपना
चिरमी गीत लड़की द्वारा ससुराल में गाया जाता है, जब वह अपने पिता और भाई की याद करती है। इस गीत में ससुराल जीवन की भावनाएँ और मायके से जुड़ी आत्मीयता का सुंदर वर्णन मिलता है। यह गीत बेटियों के जीवन में विदाई के बाद की संवेदनशीलता को अभिव्यक्त करता है।
43. सारंग' राग किस समय गाया जाता है?
- (A) भोर के समय
- (B) रात्रि में
- (C) वर्षा के समय
- (D) दोपहर काल
सारंग राग का समय दोपहर 12:00 बजे से 02:00 बजे तक माना जाता है। यह राग गंभीर और मधुर स्वरों वाला है। राजस्थान की लोकधुनों में भी सारंग राग का प्रयोग मिलता है। इसकी प्रस्तुति श्रोताओं के मन को शांति और संतुलन प्रदान करती है।
44. सूवटिया लोकगीत का संबंध किससे है?
- (A) गरासिया स्त्री से
- (B) राजपूत स्त्री से
- (C) वीरांगना स्त्री से
- (D) भील स्त्री से
सूवटिया गीत भील स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला प्रसिद्ध विरह गीत है। इसमें स्त्री अपने पति को संदेश भेजने के लिए तोते (सुवटिया) का सहारा लेती है। यह गीत आदिवासी जीवन की सरलता और भावनात्मक गहराई को दर्शाता है। इससे पता चलता है कि भील संस्कृति में पक्षियों को संदेशवाहक के रूप में मान्यता दी गई है।
45. लोकगीत जनता की भाषा है, लोकगीत हमारी संस्कृति के पहरेदार है उक्त कथन है?
- (A) देवेन्द्र सत्यार्थी
- (B) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
- (C) महात्मा गाँधी
- (D) रविन्द्र नाथ टैगोर
यह कथन महात्मा गांधी का है। गांधीजी का मानना था कि लोकगीत जनता की वास्तविक भाषा होते हैं और वे हमारी संस्कृति व परंपरा की रक्षा करते हैं। लोकगीत समाज की भावनाओं, विचारों और आस्थाओं को संजोकर रखते हैं, इसलिए इन्हें संस्कृति के प्रहरी कहा गया है।
46. राजस्थान में सर्वाधिक लोकगीतों वाला त्योहार है?
- (A) होली
- (B) दीपावली
- (C) तीज
- (D) गणगौर
राजस्थान में गणगौर त्योहार सबसे अधिक लोकगीतों से जुड़ा हुआ है। इस पर्व पर महिलाएं और युवतियाँ देवी पार्वती की पूजा करती हैं और विशेष गणगौर गीत गाती हैं। इन गीतों में दांपत्य जीवन, प्रेम और सौंदर्य का भाव प्रकट होता है। यही कारण है कि इसे लोकगीतों का सबसे समृद्ध पर्व माना जाता है।
47. मूमल क्या है?
- (A) लोक गायन शैली
- (B) एक लोकगीत
- (C) लोक कलाकार
- (D) एक संगीत ग्रन्थ
मूमल एक लोकगीत है, जो राजकुमारी मूमल और अमरकोट के राजकुमार महेन्द्र की प्रेमकथा पर आधारित है। यह गीत जैसलमेर क्षेत्र में गाया जाता है। मूमल गीत में श्रृंगार और करुण रस का अद्भुत संयोजन देखने को मिलता है। यह गीत राजस्थान की अमर प्रेमकथाओं का प्रतीक है।
48. पावणा' नामक गीत गाये जाते है?
- (A) वधू पक्ष की महिलाओं द्वारा बारात का डेरा देखने जाते समय
- (B) दुल्हन की सखियों द्वारा विवाह के अवसर पर
- (C) पति के विदेश जाने पर वियोग में
- (D) नये दामाद को ससुराल में खाना खिलाते समय
पावणा गीत तब गाए जाते हैं जब नया दामाद ससुराल में भोजन करता है। इस अवसर पर महिलाएँ हास्य-व्यंग्य से भरे पावणा गीत गाती हैं। इन गीतों का उद्देश्य दामाद का स्वागत करना और वातावरण को हंसी-ठिठोली से भर देना होता है। यह गीत विवाह परंपराओं की विशिष्ट पहचान हैं।
49. लांगुरिया' लोकगीत है?
- (A) विरह गीत
- (B) भक्ति गीत
- (C) श्रृंगारिक गीत
- (D) विवाह गीत
लांगुरिया गीत मुख्यतः विरह गीत है। यह करौली क्षेत्र में लोकदेवी कैला माता की आराधना से जुड़ा है। इसमें भक्त अपने भावों को लोकधुन और अलगोजा वाद्ययंत्र की धुन पर प्रकट करते हैं। लांगुरिया गीतों में लोकभक्ति और विरह की गहरी अनुभूति होती है।
50. राजस्थान का एक लोकगीत जिसमें कुरजां को विरहणियों का पक्षी कहा गया है?
- (A) कुरजां गीत
- (B) हिचकी
- (C) सुपणा
- (D) चौमासा
कुरजां गीत राजस्थान का अत्यंत लोकप्रिय लोकगीत है। इसमें कुरजां पक्षी को विरहणियों का प्रतीक माना गया है। नायिका इस पक्षी को अपना संदेशवाहक बनाकर प्रियतम तक भावनाएँ पहुँचाती है। यह गीत स्त्रियों के विरह, आशा और प्रतीक्षा की मार्मिक अभिव्यक्ति है।
51. बीजण, शियाळा व जाड़ा क्या है?
- (A) राजस्थान के लोकगीत
- (B) लोकगायन शैलियाँ
- (C) लोकगीतों की राग
- (D) संगीत जीवी जातियाँ
बीजण, शियाळा और जाड़ा राजस्थान के लोकगीत हैं। ये गीत सामाजिक और सांस्कृतिक अवसरों पर गाए जाते हैं। इनमें क्षेत्रीय जीवन, ऋतु और परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। यह लोकजीवन की भावनाओं का सजीव चित्रण करते हैं।
52. बिलावल, जोगिया, मारू, सिन्धु क्या है?
- (A) राजस्थान के लोकगीत
- (B) लोकगायन शैलियाँ
- (C) लोकगीतों की राग
- (D) संगीत जीवी जातियाँ
राजस्थान में लोकगीतों की कई राग परंपराएँ हैं। बिलावल, जोगिया, मारू, सिन्धु जैसे राग विशेष रूप से लोकधुनों में प्रयुक्त होते हैं। इनके साथ-साथ मांड, देस, सोरठ, कालिगंड़ा, आसावरी, पीलू व खमाज भी प्रमुख हैं। इन रागों ने राजस्थान के संगीत को अद्वितीय पहचान दी है।
53. माछर, नोखिला, थारी ऊँटा री असवारी व नाव री असवारी क्या हैं?
- (A) मरूस्थलीय गीत
- (B) महफिल के गीत
- (C) पर्वतीय गीत
- (D) धार्मिक लोकगीत
माछर, नोखिला, थारी ऊँटा री असवारी और नाव री असवारी सभी पर्वतीय क्षेत्र के गीत हैं। इन गीतों में प्रकृति की सुंदरता और पर्वतीय जीवन की कठिनाइयों का सजीव वर्णन मिलता है। ये गीत राजस्थान के भौगोलिक विविधता को प्रकट करते हैं।
54. जला' गीत स्त्रियों द्वारा कब गाया जाता है?
- (A) वर की बारात का डेरा देखने जाने पर
- (B) होलिका दहन के अवसर पर
- (C) दशहरे पर रावण दहन के समय
- (D) दुल्हे को जादू टोने से बचाने के लिए
जला गीत स्त्रियाँ तब गाती हैं जब वे वर की बारात का डेरा देखने जाती हैं। यह गीत उत्सव और उल्लास से भरा होता है। इसमें विवाह की खुशी और सामाजिक समन्वय का भाव प्रकट होता है। यह गीत राजस्थान की विवाह परंपराओं की विशिष्टता को दर्शाता है।
55. रतनराणों, घूघरी, केवड़ा आदि लोकगीत किस क्षेत्र से सम्बन्धित हैं?
- (A) पूर्वी राजस्थान से
- (B) पर्वतीय क्षेत्र
- (C) मैदानी क्षेत्र
- (D) मरूस्थलीय क्षेत्र
रतनराणों, घूघरी और केवड़ा जैसे गीत राजस्थान के मरूस्थलीय क्षेत्र से संबंधित हैं। इसके अलावा कुरजां और मूमल भी इसी श्रेणी में आते हैं। ये गीत रेगिस्तानी जीवन, प्रेम और विरह की गहरी भावनाओं का सजीव चित्रण करते हैं।
56. लोक गीत 'ओल्यूं' कब गाया जाता है?
- (A) नव विवाहिता द्वारा पीहर की याद में
- (B) विवाहित स्त्री द्वारा करवाचौथ के व्रत पर
- (C) अपने किसी प्रिय की याद में
- (D) शादी में दुल्हन की सखियों द्वारा
ओल्यूं गीत स्त्री तब गाती है जब वह अपने किसी प्रिय की याद करती है। इस गीत में प्रेम और विरह की भावनाएँ प्रकट होती हैं। यह गीत राजस्थान की स्त्रियों की संवेदनशीलता और भावनात्मक गहराई का परिचायक है।
57. पनघट पर स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला गीत है?
- (A) हिचकी
- (B) पणिहारी गीत
- (C) सुपना
- (D) पीपली
पणिहारी गीत राजस्थान की स्त्रियाँ पनघट पर पानी भरने जाते समय गाती हैं। इसमें उनकी आपसी बातचीत, हास्य और जीवन के सुख-दुख का चित्रण होता है। पणिहारी गीत लोकसंस्कृति में स्त्रियों की सामूहिकता और सामाजिक बंधन को दर्शाते हैं।
58. कुरजां गीत' राजस्थान में बहुत प्रसिद्ध है, इसमें कुरजां शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
- (A) गरासियों की लोकदेवी
- (B) प्रसिद्ध श्रृंगारिक लोक गीत
- (C) यह एक प्रकार का पक्षी है
- (D) आदिवासी स्त्रियों का पीहर
कुरजां गीत में "कुरजां" शब्द एक पक्षी के लिए प्रयुक्त हुआ है। विरहणियाँ इसे संदेशवाहक मानकर अपने प्रिय तक भावनाएँ पहुँचाती हैं। इस गीत में प्रेम, प्रतीक्षा और संवेदनशीलता की गहरी झलक मिलती है।
59. विवाह के अवसर पर दामाद या मेहमानों को भोजन कराते समय गालियों के रूप में गाये जाने वाले गीत हैं?
- (A) जलो जलाल
- (B) सीठणे
- (C) कुकड़लू
- (D) कामण
सीठणे गीत विवाह के अवसर पर गाया जाता है जब दामाद या मेहमानों को भोजन कराया जाता है। इस गीत में गालियाँ मजाक और हंसी-ठिठोली के रूप में दी जाती हैं। इसलिए इसे 'गाली गीत' भी कहा जाता है। यह परंपरा राजस्थान की लोकसंस्कृति की विशेष पहचान है।
60. हर का हिंडोला' गीत किस अवसर पर गाया जाता है?
- (A) भात भरने के अवसर पर
- (B) पुत्र जन्म पर
- (C) वृद्ध की मृत्यु पर
- (D) निकासी के समय
हर का हिंडोला गीत राजस्थान में प्रायः वृद्ध की मृत्यु पर गाया जाता है। इस गीत में जीवन की नश्वरता और ईश्वर की शरण में जाने का भाव व्यक्त किया जाता है। यह गीत सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें मृत्यु को अंत नहीं बल्कि नई यात्रा की शुरुआत माना जाता है।
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