राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य (Major Folk Dramas of Rajasthan) MCQ – Part 2
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें नौटंकी, हेला ख्याल, तुर्रा कलंगी ख्याल, चारबेंत, रामलीला, रासलीला, गवरी लोक नाट्य, ट्रंटिया, तमाशा लोक नाट्य, कुचामनी ख्याल आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य
- Question: 21 से 40
- Last Updated:
📌 इस टॉपिक के अन्य भाग (Parts) के लिंक इस पोस्ट के अंतिम प्रश्न के बाद दिए गए हैं।
✍️ Prepared & Reviewed by:
Shiksha247 Rajasthan GK
Faculty & Content Team
(Since 2021)
21. तुर्रा कलंगी क्या है?
- (A) लोकनाट्य विधा
- (B) एक प्रकार का घन वाद्य
- (C) चित्रकला शैली
- (D) सांझी का एक प्रकार
तुर्रा कलंगी एक लोकनाट्य विधा है। इसका प्रवर्तन मेवाड़ के शाह अली और तुकनगीर संतों ने किया था। इसमें "तुर्रा" को शिव और "कलंगी" को पार्वती का प्रतीक माना गया है। इसमें गायन और अभिनय के माध्यम से धार्मिक एवं पौराणिक कथाओं का मंचन होता है। यह राजस्थान की ख्याल परंपरा की एक विशिष्ट शैली है।
22. राजस्थान के बहरूपिया कलाकार जो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुके हैं?
- (A) पुरुषोत्तम दास भांड
- (B) जानकी लाल भांड
- (C) करीम खाँ निहंग
- (D) नवाब फैजुल्ला
राजस्थान के प्रसिद्ध बहरूपिया कलाकार जानकी लाल भांड ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की। इन्हें "मंकी मैन" भी कहा जाता था। इन्होंने स्वांग/बहुरूपिया कला को वैश्विक पहचान दिलाई। इनके साथ परशुराम और धनरूप भांड जैसे कलाकारों का भी नाम लिया जाता है। इनकी प्रस्तुतियाँ राजस्थान की लोकसंस्कृति की धरोहर मानी जाती हैं।
23. धौलपुर, डीग, भरतपुर, सवाई माधोपुर, खैरथल तिजारा, अलवर व करौली जिलों में प्रचलित लोकनाट्य है?
- (A) चारबेंत
- (B) रामलीला
- (C) नौटंकी
- (D) रासलीला
इन जिलों में नौटंकी लोकनाट्य का विशेष प्रचलन है। नौटंकी एक लोकप्रिय शैली है, जिसमें गान और अभिनय के माध्यम से कथाओं का मंचन होता है। राजस्थान में भूरिलाल ने इसे प्रसिद्ध किया, जो पहले उत्तर प्रदेश के हाथरस में नौटंकी करते थे। नौटंकी ने ग्रामीण समाज में मनोरंजन और सामाजिक संदेश दोनों का कार्य किया।
24. सम्पूर्ण भारत का एकमात्र लोकनाट्य जो केवल दिन में प्रदर्शित होता है?
- (A) गवरी लोक नाट्य
- (B) ट्रंटिया
- (C) तमाशा लोक नाट्य
- (D) हेला ख्याल
सम्पूर्ण भारत में केवल गवरी लोकनाट्य ही ऐसा है जिसे दिन में खेला जाता है। यह भील जनजाति का प्रमुख धार्मिक नाट्य है, जिसमें शिव-पार्वती और अन्य देवताओं की कथाओं का मंचन होता है। गवरी उत्सव के दौरान इसे गाँव-गाँव में खुले मैदानों में प्रस्तुत किया जाता है और इसमें सामूहिक नृत्य व गायन होता है।
25. चारबैत क्या है?
- (A) टोंक में प्रचलित बेंतमार होली
- (B) होली पर एक दूसरे को पीटने का खेल
- (C) एक प्रकार की गीत गायन शैली
- (D) काव्य से भरपूर एक लोकनाट्य विधा
चारबैत टोंक क्षेत्र का एक विशेष लोकनाट्य है, जिसमें चार पंक्तियों के पद्य (बैत) गाए जाते हैं। इसका प्रवर्तन करीम खाँ निहंग ने नवाब फैजुल्ला के समय किया था। यह कला इस्लामी प्रभाव और स्थानीय संस्कृति का मिश्रण है। इसमें सामाजिक और धार्मिक विषयों पर व्यंग्यात्मक और भावनात्मक प्रस्तुति की जाती है।
26. नौटंकी तथा रामलीला राजस्थान के किस भाग में अधिक लोकप्रिय है?
- (A) पूर्वी
- (B) दक्षिणी
- (C) पश्चिमी
- (D)
राजस्थान के पूर्वी भाग में नौटंकी और रामलीला विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। भरतपुर, धौलपुर, अलवर और करौली जैसे जिलों में ये नाट्य शैलियाँ व्यापक रूप से मंचित होती हैं। नौटंकी जहाँ मनोरंजन का साधन है, वहीं रामलीला धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। दोनों ने पूर्वी राजस्थान की संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया।
27. निम्नलिखित में से कौनसा (लोक नाट्य-स्थान) सुमेलित नहीं है?
- (A) नौटंकी – भरतपुर, डीग, धौलपुर
- (B) तमाशा – जयपुर
- (C) तुर्रा कलंगी – मारवाड़
- (D) रम्मत – बीकानेर, जैसलमेर
तुर्रा कलंगी का सम्बन्ध मारवाड़ से नहीं है। इसका प्रवर्तन मेवाड़ में शाह अली और तुकनगीर ने किया था। जबकि नौटंकी का केंद्र पूर्वी राजस्थान, तमाशा जयपुर और रम्मत बीकानेर-जैसलमेर क्षेत्र से जुड़ा है। इसलिए विकल्प C सुमेलित नहीं है।
28. राजस्थान के भवाई नाट्य के जन्मदाता थे?
- (A) बाघाजी
- (B) करीम खाँ
- (C) पृथ्वीराज
- (D) धनरूप भांड
राजस्थान में भवाई नाट्य के जन्मदाता बाघाजी माने जाते हैं। भवाई मूलतः गुजरात की परंपरा से जुड़ा है, लेकिन राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में यह विशेष रूप से लोकप्रिय हुआ। इसमें हास्य-व्यंग्य और सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया जाता है। बाघाजी ने इसे एक संगठित लोकनाट्य के रूप में विकसित किया।
29. तमाशा लोक नाट्य को सर्वाधिक प्रश्रय देने वाले शासक थे?
- (A) सवाई जयसिंह
- (B) रामसिंह द्वितीय
- (C) मानसिंह प्रथम
- (D) माधोसिंह द्वितीय
तमाशा जयपुर का प्रसिद्ध लोकनाट्य है। इसे सर्वाधिक प्रश्रय रामसिंह द्वितीय ने दिया। इसकी शुरुआत महाराजा सवाई प्रताप सिंह के काल में हुई थी और इसके प्रवर्तक बंशीधर भट्ट थे। तमाशा में जयपुरी ख्याल और ध्रुपद गायकी का सुंदर मिश्रण है, जिसने इसे अन्य लोकनाट्य शैलियों से अलग पहचान दी।
30. राज्य में नौटंकी का सर्वाधिक प्रचलन किस जिले में है?
- (A) झालावाड़ व कोटा
- (B) बीकानेर व जोधपुर
- (C) उदयपुर व भीलवाड़ा
- (D) भरतपुर व डीग
राजस्थान में नौटंकी का सर्वाधिक प्रचलन भरतपुर और डीग जिलों में पाया जाता है। यह पूर्वी राजस्थान का प्रमुख लोकनाट्य है, जहाँ इसे विशेष उत्सवों और मेलों में मंचित किया जाता है। नौटंकी में गायन, नृत्य और अभिनय का मिश्रण होता है और यह लोकजीवन के मनोरंजन का महत्वपूर्ण साधन रहा है।
31. किस लोकनाट्य में स्त्री पात्रों की भूमिका स्त्रियाँ ही निभाती हैं?
- (A) कुचामनी ख्याल
- (B) जयपुरी ख्याल
- (C) तुर्रा कलंगी ख्याल
- (D) गवरी नाट्य
अधिकांश लोकनाट्य शैलियों में स्त्री भूमिकाएँ पुरुष कलाकार निभाते हैं, लेकिन जयपुरी ख्याल इस दृष्टि से विशेष है। इसमें स्त्री पात्रों की भूमिकाएँ वास्तविक महिलाएँ ही निभाती हैं। इससे इस ख्याल की प्रस्तुतियाँ अधिक स्वाभाविक और प्रभावशाली बनती हैं। जयपुरी ख्याल जयपुर क्षेत्र में लोकप्रिय है और इसमें ध्रुपद गायन का प्रभाव भी दिखाई देता है।
32. अली बक्शी ख्याल के प्रवर्तक माने जाते हैं?
- (A) राव राजा अली बक्श
- (B) लच्छीराम
- (C) बंशीधर भट्ट
- (D) नानुराम राणा
अली बक्शी ख्याल के प्रवर्तक राव राजा अली बक्श माने जाते हैं। यह शैली अलवर रियासत के मुंडावर ठिकाने से जुड़ी है। इसमें गायन और अभिनय के माध्यम से धार्मिक एवं वीरगाथाओं का मंचन किया जाता था। अली बक्श ने इस शैली को विशेष पहचान दी और उनके नाम पर ही इसे "अली बक्शी ख्याल" कहा जाता है।
33. किशनगढ़ी ख्याल के मुख्य कलाकार हैं?
- (A) उगमराज
- (B) नानूराम
- (C) बंशीधर भट्ट
- (D) बंशीधर शर्मा
बंशीधर शर्मा किशनगढ़ी ख्याल के प्रमुख कलाकार रहे हैं। उन्होंने अपनी कला से इस शैली को नई पहचान दी। किशनगढ़ी ख्याल मुख्यतः किशनगढ़ क्षेत्र में प्रचलित रहा और इसमें स्थानीय जीवन, पौराणिक कथाएँ और सामाजिक विषयों को शामिल किया गया। बंशीधर शर्मा के योगदान से यह ख्याल अधिक लोकप्रिय हुआ।
34. भानू भारती द्वारा रचित प्रसिद्ध 'पशु गायत्री' नाट्य किस लोक-नाट्य पर आधारित है?
- (A) गवरी लोक-नाट्य
- (B) रम्मत
- (C) चारबैंत नाट्य
- (D) तुर्रा कलंगी ख्याल
भानू भारती द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक 'पशु गायत्री' गवरी लोकनाट्य पर आधारित है। गवरी भील जनजाति का धार्मिक नाट्य है जिसमें पौराणिक और धार्मिक कथाओं को मंचित किया जाता है। भानू भारती ने इसी शैली का प्रयोग करके "पशु गायत्री" का निर्माण किया, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचा।
35. निम्न में से व्यावसायिक लोक-नाट्य है?
- (A) रम्मत
- (B) गवरी
- (C) नौटंकी
- (D) भवाई
भवाई नाट्य व्यावसायिक लोकनाट्य के रूप में जाना जाता है। इसका उद्भव गुजरात में हुआ और राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में भी यह लोकप्रिय हुआ। इसमें भोपा-भोपी सगोजी-सगीजी के रूप में व्यंग्यात्मक प्रस्तुति करते हैं। भवाई समाज की कुरीतियों और दोषों पर हास्य के माध्यम से चोट करता है, जिससे यह सामाजिक चेतना का साधन भी बनता है।
36. तुर्रा और कलंगी लोकनाट्य में तुर्रा और कलंगी प्रतीक हैं?
- (A) गणेश और रिद्धि के
- (B) कृष्ण और राधा के
- (C) विष्णु और लक्ष्मी के
- (D) शिव और पार्वती के
तुर्रा और कलंगी लोकनाट्य में तुर्रा शिव का और कलंगी पार्वती का प्रतीक है। इसका प्रवर्तन मेवाड़ के शाह अली और तुकनगीर संतों ने किया। यह लोकनाट्य धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और इसमें संवाद व गायन के माध्यम से सामाजिक एवं आध्यात्मिक संदेश दिए जाते हैं।
37. शेखावाटी ख्याल के प्रवर्तक थे?
- (A) नानूराम
- (B) अली बक्श
- (C) जयदयाल सोनी
- (D) मुंशीधर बक्ख
नानूराम राणा शेखावाटी ख्याल के प्रवर्तक थे। यह झुंझुनूं जिले के चिड़ावा क्षेत्र में विकसित हुआ, इसलिए इसे "चिड़ावा ख्याल" भी कहा जाता है। शेखावाटी में इसे लोकप्रिय बनाने वाले कलाकार दुलिया राणा थे। इस ख्याल में ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं का पद्य रूप में मंचन किया जाता है।
38. हेला ख्याल लोक संगीत राजस्थान के निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से संबंधित है?
- (A) दौसा- सवाई माधोपुर
- (B) अलवर-भरतपुर
- (C) कोटा-बारां
- (D) अजमेर-नागौर
हेला ख्याल दौसा और सवाई माधोपुर क्षेत्र से संबंधित है। इसके प्रवर्तक हेला शायर माने जाते हैं। इसे संगीत दंगल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें दो दल गीतों और कवित्तों के माध्यम से प्रतिस्पर्धा करते हैं। हेला ख्याल में तत्काल रचना और शायराना अंदाज इसकी विशेषता है।
39. अलीबक्शी ख्याल राजस्थान के कौन से क्षेत्र में प्रचलित लोक नाट्य शैली है?
- (A) खैरथल तिजारा
- (B) कोटा
- (C) अजमेर
- (D) बीकानेर
अलीबक्शी ख्याल खैरथल-तिजारा क्षेत्र की प्रसिद्ध लोकनाट्य शैली है। यह शैली अलवर रियासत के मुंडावर ठिकाने के राव राजा अली बक्श से जुड़ी है। इसमें धार्मिक, वीर और ऐतिहासिक कथाओं को संगीत और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। इसने राजस्थान के पूर्वी हिस्से में विशेष पहचान बनाई।
40. किस ख्याल में नौबत, घेरा, मंजीरा व ढोलक वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है?
- (A) हेला ख्याल
- (B) कन्हैया ख्याल
- (C) शेखावाटी ख्याल
- (D) तुर्रा कलंगी ख्याल
कन्हैया ख्याल में नौबत, घेरा, मंजीरा और ढोलक जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। यह ख्याल मुख्यतः कृष्ण-लीलाओं और भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसमें नृत्य और संगीत का विशेष महत्व होता है। कन्हैया ख्याल ने धार्मिक आस्था और लोक-संस्कृति को जोड़ते हुए दर्शकों का मनोरंजन और आध्यात्मिक संदेश दोनों दिया।
राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7
Agar aapko kisi MCQ me doubt, correction ya suggestion lagta hai, to please is post ke comment section ki jagah humare YouTube channel par dedicated discussion video ke comment box me post link ke sath comment karein.
📝 Comment karne ka format:
• MCQ Post ka link
• Question number
• Short doubt / correction
✔ Link Copied
👉 Official Discussion Video:
Shiksha247 YouTube Channel