राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य (Major Folk Dramas of Rajasthan) MCQ – Part 5
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें कन्हैया ख्याल, शेखावाटी ख्याल, हेला ख्याल, तमाशा, चारबैत, जयपुरी ख्याल, तुर्रा कलंगी ख्याल, रामलीला, चारर्खेत, नौटंकी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य
- Question: 81 से 100
- Last Updated:
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81. नाहरों का स्वांग कहाँ का प्रसिद्ध है?
- (A) केलवा (राजसमंद)
- (B) रावतसर (हनुमानगढ़)
- (C) मांडल (भीलवाड़ा)
- (D) सागवाड़ा (डूंगरपुर)
नाहरों का स्वांग मांडल (भीलवाड़ा) क्षेत्र का प्रसिद्ध लोकनाट्य है। इसमें विशेष रूप से पौराणिक और ऐतिहासिक पात्रों का अभिनय किया जाता है। कलाकार वेशभूषा और मेकअप करके देवी-देवताओं या प्रसिद्ध व्यक्तित्वों का रूप धारण करते हैं और उनके जीवन से संबंधित घटनाओं का मंचन करते हैं।
82. रामलीला नाट्य कला प्रारम्भ करने का श्रेय किसे दिया जाता है?
- (A) विठ्ठलनाथ
- (B) रसखान
- (C) सूरदास
- (D) तुलसीदास
रामलीला की शुरुआत तुलसीदास ने की। उन्होंने रामचरितमानस के माध्यम से राम कथा को आमजन तक पहुँचाया और फिर इसे नाट्य रूप दिया गया। रामलीला का मंचन विशेषकर उत्तर भारत में अधिक प्रसिद्ध है और यह आज भी धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों का मुख्य आकर्षण है।
83. राजस्थान में किस स्थान की रामलीला में शिव धनुष राम के द्वारा नहीं बल्कि दर्शकों द्वारा तोड़ा जाता है?
- (A) कैथून (कोटा)
- (B) ब्यावर
- (C) अटरू (बारा)
- (D) सांभर (जयपुर)
राजस्थान के अटरू (बारा) क्षेत्र की रामलीला अपनी विशिष्टता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ शिव धनुष को मंच पर राम के बजाय दर्शक स्वयं तोड़ते हैं। यह परंपरा वहाँ की रामलीला को अन्य स्थानों से अलग बनाती है। इस नाट्य के माध्यम से धार्मिक उत्साह और सामूहिक भागीदारी दोनों दिखाई देते हैं।
84. किस नाट्य कला में कलाकार ढ़फ बजाकर कव्वालों की भांति भावावेश में घुटनों के बल खड़े होकर गीत गाते हैं?
- (A) रामलीला
- (B) चारर्खेत
- (C) नौटंकी
- (D) तमाशा
चारर्खेत लोकनाट्य में कलाकार ढ़फ बजाकर कव्वालों की भांति भावावेश में गीत गाते हैं। यह कला मूल रूप से अफगानिस्तान से आई हुई है और राजस्थान के कुछ हिस्सों में प्रचलित रही है। इसमें कलाकार घुटनों के बल बैठकर गाते हैं, जिससे इसका वातावरण कव्वाली जैसा बन जाता है।
85. परशुराम, धनरूप व जानकीलाल का सम्बन्ध किस कला से है?
- (A) स्वांग
- (B) फड़ चित्रण
- (C) चारबैत गायन
- (D) कठपुतली कला
परशुराम, धनरूप और जानकीलाल का संबंध स्वांग (बहुरूपिया कला) से है। स्वांग एक पारंपरिक लोकनाट्य है, जिसमें कलाकार विभिन्न पात्रों का रूप धारण कर हास्य और व्यंग्य प्रस्तुत करते हैं। जानकीलाल भांड तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी “मंकी मैन” के नाम से प्रसिद्ध हुए।
86. आबू क्षेत्र के गरासियों द्वारा जाने वाला 'गरासियों की गोर वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को खेला लीला' नाट्य क्या कहलाता है?
- (A) आबू की गणगोर
- (B) वैशाख की गणगोर
- (C) भख्योर की गणगोर
- (D) मादंल गणगोर
आबू क्षेत्र के गरासिया समुदाय द्वारा वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को खेला जाने वाला यह नाट्य भख्योर की गणगोर कहलाता है। इसमें धार्मिक आस्था के साथ सामूहिक नृत्य और गीत का प्रदर्शन होता है। यह नाट्य गरासिया समाज की सांस्कृतिक धरोहर और उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
87. गोपीकृष्ण भट्ट, फूलजी भट्ट व वासुदेव भट्ट का सम्बन्ध किस कला से है?
- (A) कन्हैया ख्याल
- (B) रम्मत
- (C) चारबैत
- (D) तमाशा
गोपीकृष्ण भट्ट, फूलजी भट्ट और वासुदेव भट्ट का संबंध तमाशा कला से है। तमाशा मूलतः महाराष्ट्र की कला है, लेकिन राजस्थान में भी यह लोकप्रिय हुई। इसमें संगीत, नृत्य और अभिनय का सुंदर समन्वय होता है। इसे खुले मंच पर “अखाड़ा” कहा जाता है और इसमें दर्शकों की सक्रिय भागीदारी रहती है।
88. बम व नौबत वाद्ययंत्र की प्रधानता किस ख्याल में होती है?
- (A) शेखावाटी ख्याल
- (B) हेला ख्याल
- (C) कन्हैया ख्याल
- (D) जयपुरी ख्याल
हेला ख्याल में बम और नौबत जैसे वाद्ययंत्रों की प्रधानता होती है। यह ख्याल सवाई माधोपुर और दौसा जिले के लालसोट क्षेत्र में विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसमें शायराना अंदाज और दंगल की तरह प्रस्तुति होती है, जिसमें दो दल गीत और कवित्तों के माध्यम से प्रतिस्पर्धा करते हैं।
89. दुलिया राणा व नानूराम का संबंध किस ख्याल से है?
- (A) शेखावाटी ख्याल
- (B) कन्हैया ख्याल
- (C) हेला ख्याल
- (D) जयपुरी ख्याल
दुलिया राणा और नानूराम का संबंध शेखावाटी ख्याल से है। यह ख्याल झुंझुनूं जिले के चिड़ावा क्षेत्र में विकसित हुआ और इसे "चिड़ावा ख्याल" भी कहा जाता है। नानूराम इसके प्रवर्तक थे जबकि दुलिया राणा ने इसे लोकप्रिय बनाया। इस ख्याल में वीरगाथाएँ और धार्मिक कथाएँ प्रस्तुत की जाती थीं।
90. पठानी मूल की काव्य प्रधान लोक नाट्य विधा जिसे टोंक के नवाब फैजुल्ला खाँ के समय अब्दुल करीम खाँ निहंग ने प्रारम्भ किया?
- (A) चारबैत
- (B) अली बक्शी
- (C) तुर्रा कलंगी
- (D) तमाशा
पठानी मूल की काव्य प्रधान लोक नाट्य विधा चारबैत कहलाती है। इसे टोंक के नवाब फैजुल्ला खाँ के समय अब्दुल करीम खाँ निहंग ने प्रारंभ किया। इसमें चार पंक्तियों वाले पद्य गाए जाते हैं। चारबैत में धार्मिक और सामाजिक विषयों को काव्य रूप में प्रस्तुत किया जाता है और यह टोंक क्षेत्र की विशेष पहचान है।
91. किस ख्याल में चंग वाद्ययंत्र की प्रधानता रहती है?
- (A) शेखावाटी ख्याल
- (B) हेला ख्याल
- (C) तुर्रा कलंगी ख्याल
- (D) कन्हैया ख्याल
तुर्रा कलंगी ख्याल में चंग वाद्ययंत्र की प्रधानता होती है। इस ख्याल में काव्यात्मक संवादों को "बोल" कहा जाता है और यह अन्य लोकनाट्यों की तरह मंच सज्जा रहित नहीं होता, बल्कि इसमें विशेष मंच व्यवस्था होती है। चंग की ताल इस ख्याल को और अधिक प्रभावशाली बनाती है।
92. सहेडू सिंह, हमीद बेग, ताराचंद व ठाकुर ओंकार सिंह का संबंध किस ख्याल से है?
- (A) शेखावाटी ख्याल
- (B) कन्हैया ख्याल
- (C) हेला ख्याल
- (D) तुर्रा कलंगी ख्याल
सहेडू सिंह, हमीद बेग, ताराचंद और ठाकुर ओंकार सिंह का संबंध तुर्रा कलंगी ख्याल से है। यह ख्याल मेवाड़ क्षेत्र में प्रसिद्ध है और इसमें शिव और पार्वती का प्रतीकात्मक मंचन होता है। इसमें संवाद और गायन की प्रमुखता होती है और यह अक्सर बड़े उत्सवों या मेलों में खेला जाता है।
93. निम्न में से कौनसा जयपुरी ख्याल शैली का प्रसिद्ध ख्याल नहीं है?
- (A) जोगी-जोगण
- (B) मियाँ-बीबी
- (C) कान-गुजरी
- (D) ढोला-मरवन
ढोला-मरवन शेखावाटी ख्याल का हिस्सा है, न कि जयपुरी ख्याल का। जयपुरी ख्याल में जोगी-जोगण, मियाँ-बीबी और कान-गुजरी प्रमुख ख्याल हैं। ढोला-मरवन के अतिरिक्त हरिचंद, हीर-राँझा, जयदेव कलाली और आल्हादेव जैसे ख्याल शेखावाटी परंपरा से जुड़े हैं।
94. मनीराम व्यास, तुलसीराम, फागू महाराज, सुआ महाराज व तेज कवि का संबंध किस लोकनाट्य से है?
- (A) गवरी नाट्य
- (B) रम्मत
- (C) तमाशा
- (D) नौटंकी
मनीराम व्यास, तुलसीराम, फागू महाराज, सुआ महाराज और तेज कवि का संबंध रम्मत लोकनाट्य से है। रम्मत विशेषकर बीकानेर और जैसलमेर में लोकप्रिय है और होली के अवसर पर इसका आयोजन किया जाता है। इसमें नगाड़ों और ढोलकों की थाप पर पौराणिक और ऐतिहासिक कथाओं का मंचन किया जाता है।
95. राजस्थान में सर्वाधिक लोकप्रिय रम्मत है?
- (A) फक्कड़ दाता की रम्मत
- (B) हेड़ाउ मेरी की रम्मत
- (C) अमरसिंह राठौड़ की रम्मत
- (D) चौबेल नौटंकी की रम्मत
राजस्थान में हेड़ाउ मेरी की रम्मत सबसे लोकप्रिय मानी जाती है। यह रम्मत बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। इसमें देवी-देवताओं और वीर गाथाओं का मंचन होता है। बीकानेर में होली पर रम्मत का आयोजन एक बड़े उत्सव के रूप में देखा जाता है।
96. निम्न में से रम्मत के बारे में असत्य कथन है-
- (A) फक्कड़ दाता की रम्मत से बीकानेर में रम्मतों की शुरूआत होती है।
- (B) अमरसिंह राठौड़ की रम्मत आचार्यो के चौक (बीकानेर) में होती है।
- (C) आचार्यों का चौक (बीकानेर) रम्मतों के लिए प्रसिद्ध है।
- (D) उपरोक्त सभी सत्य है।
रम्मतों के संदर्भ में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। फक्कड़ दाता की रम्मत से रम्मतों की शुरुआत होती है, अमरसिंह राठौड़ की रम्मत आचार्यों के चौक में होती है और आचार्यों का चौक बीकानेर की रम्मतों का प्रमुख केंद्र है। अतः विकल्प D असत्य है क्योंकि इसमें कहा गया है कि “सभी कथन गलत हैं।”
97. निम्न में से कौनसा युग्म असंगत है? (लोकनाट्य शैली-प्रचलित क्षेत्र)
- (A) चारबैत – टोंक
- (B) रसिया दंगल – डीग
- (C) भवाई – हनुमानगढ़
- (D) रासलीला – फुलेरा (जयपुर)
भवाई नाट्य हनुमानगढ़ का नहीं है। यह मूलतः गुजरात का लोकनाट्य है, जो राजस्थान के उदयपुर और गुजरात की सीमा से लगे जिलों में लोकप्रिय है। इसमें भवाई जाति के लोग व्यंग्यात्मक और हास्य से भरपूर अभिनय करते हैं। अन्य विकल्प अपने-अपने क्षेत्रों से सही जुड़े हैं।
98. गवरी नाट्य में 'पुरिया/बुढ़िया' किसे कहा जाता है?
- (A) ब्रह्मा का रूप धारण करने वाला
- (B) शिव का रूप धारण करने वाला
- (C) विष्णु का रूप धारण करने वाला
- (D) भस्मासुर का रूप धारण करने वाला
गवरी नाट्य में शिव का रूप धारण करने वाले पात्र को 'पुरिया' या 'बुढ़िया' कहा जाता है। गवरी नाट्य भील समुदाय का प्रमुख धार्मिक लोकनाट्य है जिसमें शिव-भस्मासुर की कथा को प्रस्तुत किया जाता है। यह राजस्थान में विशेषकर उदयपुर और आसपास के इलाकों में खेला जाता है।
99. गवरी की घाई क्या है?
- (A) लोक नाट्य
- (B) लोक नृत्य
- (C) लोक गीत
- (D) लोक वाद्ययंत्र
गवरी की घाई एक लोक नाट्य है। इसमें गवरी के विभिन्न प्रसंगों को जोड़ने का कार्य किया जाता है। घाई एक प्रकार का सामूहिक नृत्यात्मक मंचन है जो कथानक को क्रमबद्ध करता है। इसमें सभी कलाकार मिलकर गोल घेरे में नृत्य करते हुए गान और अभिनय प्रस्तुत करते हैं।
100. मुक्ताकाशी रंगमच किस शहर में स्थित है?
- (A) उदयपुर
- (B) बीकानेर
- (C) अजमेर
- (D) जयपुर
मुक्ताकाशी रंगमंच उदयपुर शहर में स्थित है। यह खुला मंच है जिसे "Open Air Theatre" भी कहते हैं। यहाँ पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनाट्य और पारंपरिक प्रस्तुतियाँ आयोजित होती हैं। यह उदयपुर की कला और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।
राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7
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