राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य MCQ Questions with Answers

राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य (Major Folk Dramas of Rajasthan) MCQ – Part 6

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें रम्मत, तमाशा, ढप्पाली ख्याल, नौटंकी, गवरी, स्वांग, भवाई आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य
  • Question: 101 से 120
  • Last Updated:

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101. रम्मत' लोकनाटक को निभाने वाले पात्र को ......... के रूप में जाना जाता है।

  • (A) टेरिये
  • (B) खेलार
  • (C) अखाड़ा
  • (D) मेड़िया

रम्मत लोकनाट्य में मुख्य कलाकार को ‘खेलार’ कहा जाता है। यह बीकानेर और जैसलमेर क्षेत्र में लोकप्रिय है। रम्मत विशेषकर होली के समय खेली जाती है और इसमें पौराणिक व ऐतिहासिक घटनाओं का मंचन होता है। नगाड़ा और ढोलक की थाप के साथ खेलार पात्र नृत्य और अभिनय द्वारा दर्शकों का मनोरंजन करते हैं।

102. निम्नलिखित में से असत्य कथन की पहचान करें।

  • (A) शेखावाटी ख्याल के प्रवर्तक नानूराम राणा थे।
  • (B) नानूराम राणा द्वारा रचित ख्याल हीर रांझा, जयदेव कलाली, आल्हादेव व ढोला मरवन।
  • (C) शेखावाटी ख्याल में शहनाई, ढोलक, सारंगी, हारमोनियम व बाँसुरी वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है।
  • (D) कन्हैया ख्याल का मुख्य पात्र को खेलार कहा जाता है।

कन्हैया ख्याल का मुख्य पात्र खेलार नहीं बल्कि 'मेड़िया' कहलाता है। यह ख्याल सवाई माधोपुर, डीग, भरतपुर, धौलपुर और करौली क्षेत्रों में लोकप्रिय है। इसमें कृष्ण-लीला और भक्ति भावनाओं का सुंदर प्रदर्शन होता है। अतः विकल्प D असत्य है।

103. निम्नलिखित में से कौन-सी लोक संगीत एवं नृत्य शैली जयपुर से सम्बंधित है?

  • (A) रम्मत
  • (B) तमाशा
  • (C) ढप्पाली ख्याल
  • (D) नौटंकी

तमाशा लोकनाट्य जयपुर से संबंधित है। इसकी शुरुआत महाराजा सवाई प्रताप सिंह के काल में हुई थी। यह मूलतः महाराष्ट्र की कला है, पर जयपुर में इसे शाही संरक्षण मिला। इसमें गीत, नृत्य और अभिनय तीनों का समन्वय देखने को मिलता है और खुले मंच जिसे “अखाड़ा” कहते हैं, पर इसका प्रदर्शन होता है।

104. राजस्थान के किस क्षेत्र में रम्मत नाट्य का उद्भव हुआ?

  • (A) अलवर, भरतपुर
  • (B) बीकानेर, जैसलमेर
  • (C) कोटा, झालावाड़
  • (D) किशनगढ़, नाथद्वारा

रम्मत का उद्भव बीकानेर और जैसलमेर क्षेत्रों में हुआ। बीकानेर की पाटा संस्कृति और जैसलमेर की धार्मिक परंपरा से जुड़ी रम्मत होली के समय खेली जाती है। इसमें नगाड़ा और ढोलक की थाप के साथ पौराणिक और वीर गाथाओं का मंचन होता है।

105. रामप्रकाश थियेटर की स्थापना किसने की?

  • (A) महाराजा रामसिंह प्रथम
  • (B) महाराजा रामसिंह द्वितीय
  • (C) सवाई मानसिंह
  • (D) महाराजा माधोसिंह

रामप्रकाश थियेटर की स्थापना 1878 ई. में जयपुर के महाराजा रामसिंह द्वितीय ने की थी। यह जयपुर का पहला आधुनिक रंगमंच था जहाँ नाट्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। आज भी यह थिएटर ऐतिहासिक महत्व का माना जाता है।

106. श्रीरामगोपाल मेहता, सांई सेवग, गंगादास सेवग, सूरज व जीतमल किसके लिए प्रसिद्ध हैं?

  • (A) रम्मत लोकनाट्य
  • (B) स्वांग लोकनाट्य
  • (C) गवरी लोकनाट्य
  • (D) ख्याल लोकनाट्य

श्रीरामगोपाल मेहता, सांई सेवग, गंगादास सेवग, सूरज और जीतमल रम्मत के प्रसिद्ध कलाकार हैं। रम्मत विशेषकर बीकानेर क्षेत्र में लोकप्रिय है और इसमें पौराणिक कथाएँ एवं ऐतिहासिक प्रसंग हास्य व व्यंग्य के साथ प्रस्तुत किए जाते हैं। इन कलाकारों ने रम्मत को नई पहचान दी।

107. निम्नलिखित में से कौनसा सुमेलित नहीं है? (लोक नाट्य-कलाकार)

  • (A) नौटंकी – गिरीराज प्रसाद
  • (B) भवाई – बाघ जी
  • (C) कुचामनी ख्याल – लच्छीराम
  • (D) शेखावाटी ख्याल – उगमराज

शेखावाटी ख्याल के प्रवर्तक नानूराम राणा थे, न कि उगमराज। उगमराज कुचामनी ख्याल के प्रसिद्ध कलाकार थे। वहीं नौटंकी में गिरीराज प्रसाद, भवाई में बाघ जी और कुचामनी ख्याल में लच्छीराम का योगदान उल्लेखनीय रहा। इसलिए विकल्प D असंगत है।

108. रम्मत है-

  • (A) एक लोक नाट्य
  • (B) वाद्य यंत्र
  • (C) एक लोक नृत्य
  • (D) एक लोक संगीत

रम्मत एक लोकनाट्य है। इसका उद्भव जैसलमेर में हुआ और यह बीकानेर में अत्यधिक लोकप्रिय है। रम्मत मुख्यतः होली पर खेला जाता है और इसके कलाकार “रामतिए” कहलाते हैं। इसमें नगाड़ा और ढोलक की थाप पर धार्मिक और वीरगाथाओं का मंचन होता है।

109. लोक नाट्यकार दूलिया राणा एवं नानूराम किस ख्याल से सम्बद्ध हैं?

  • (A) जयपुरी
  • (B) कुचामनी
  • (C) हेला ख्याल
  • (D) शेखावटी ख्याल

दूलिया राणा और नानूराम दोनों शेखावटी ख्याल से जुड़े थे। नानूराम राणा इस ख्याल के प्रवर्तक माने जाते हैं और इसे “चिड़ावा ख्याल” भी कहा जाता है। उनके द्वारा रचित ख्यालों में हीर-रांझा, ढोला-मारवण, जयदेव कलाली, आल्हादेव प्रमुख हैं। दूलिया राणा ने इस ख्याल को पूरे शेखावाटी क्षेत्र में लोकप्रिय बनाया। इसमें शहनाई, ढोलक, सारंगी, हारमोनियम आदि वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है।

110. प्रसिद्ध थियेटर निर्देशक शांता गांधी निम्नलिखित में से किस नाट्य शैली से संबंधित थी?

  • (A) गवरी
  • (B) स्वांग
  • (C) भवाई
  • (D) रम्मत

शांता गांधी भवाई नाट्य शैली से जुड़ी थीं। भवाई मूलतः गुजरात का लोकनाट्य है जो राजस्थान के उदयपुर और समीपवर्ती क्षेत्रों में भी लोकप्रिय है। इसमें भवाई जाति के कलाकार सामाजिक व्यंग्य और हास्य प्रधान अभिनय प्रस्तुत करते हैं। शांता गांधी ने "जसमा ओडण" नाटक का मंचन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया और भवाई को नई पहचान दिलाई।

111. हेला ख्याल' लोक संगीत राजस्थान के किस क्षेत्र से संबंधित है?

  • (A) भीलवाड़ा
  • (B) सीकर-झुंझुनूं
  • (C) जोधपुर-बीकानेर
  • (D) दौसा-सवाई माधोपुर

हेला ख्याल दौसा और सवाई माधोपुर क्षेत्र की प्रमुख नाट्य शैली है। इसका प्रवर्तन हेला शायर ने किया। इसमें बम (बड़ा नगाड़ा) और नौबत वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है। इसकी विशेषता "हेला देना" है, यानी लंबी टेर के साथ गीत गाना। इसे शायराना अंदाज़ और संगीत दंगल की शैली के लिए जाना जाता है।

112. शेखावटी ख्याल से संबंद्ध कलाकार है-

  • (A) नानूराम
  • (B) शिवदयाल
  • (C) लक्ष्मीराम
  • (D) मोतीलाल

शेखावटी ख्याल के प्रवर्तक नानूराम राणा थे। वे झुंझुनूं जिले के चिड़ावा क्षेत्र के निवासी थे। दूलिया राणा ने इस ख्याल को जन-जन तक पहुँचाया। इसमें सारंगी, ढोलक, हारमोनियम और बांसुरी जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है। यह ख्याल वीरगाथाओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित होता है।

113. हेला ख्याल नामक लोक नाट्य राजस्थान के कौनसे क्षेत्र से संबंधित है?

  • (A) दौसा
  • (B) बीकानेर
  • (C) सीकर
  • (D) बाड़मेर

हेला ख्याल मुख्यतः दौसा और सवाई माधोपुर जिलों में प्रचलित है। इसका उद्भव लालसोट क्षेत्र में हुआ था। इसमें कवित्त और शेर-ओ-शायरी का प्रयोग किया जाता है। इसके दल को अखाड़ा और कलाकारों को खिलाड़ी कहा जाता है। यह नाट्य विशेषकर धार्मिक व सामाजिक प्रसंगों में खेला जाता है।

114. राजस्थान के निम्नलिखित में से किस शहर में होली के दौरान 'रम्मत' का आयोजन किया जाता है?

  • (A) करौली
  • (B) जोधपुर
  • (C) जैसलमेर
  • (D) बीकानेर

बीकानेर में होली के दौरान रम्मत का आयोजन होता है। आचार्यों का चौक बीकानेर की रम्मतों का मुख्य केंद्र है। यहाँ पौराणिक और ऐतिहासिक कथाओं का मंचन ढोल-नगाड़ों के साथ किया जाता है। बीकानेर की रम्मत अपनी पाटा संस्कृति के कारण विशेष पहचान रखती है।

115. रम्मत' लोक नाटक को निभाने वाले पात्र को क्या कहा जाता है?

  • (A) शिव
  • (B) भवैया
  • (C) खेलर
  • (D) इनमें से कोई नहीं

रम्मत के मुख्य पात्र को ‘खेलर’ कहा जाता है। खेलर अपने अभिनय और संवादों से दर्शकों को प्रभावित करते हैं। बीकानेर में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से चतुर्दशी तक रम्मत का मंचन होता है। इसमें “फक्कड़ दाता री रम्मत” और “हेड़ा मेरी” जैसी प्रसिद्ध रम्मतें खेली जाती हैं।

116. राजस्थान में लच्छीराम द्वारा किस ख्याल का प्रवर्तन किया गया?

  • (A) शेखावटी ख्याल
  • (B) जयपुरी ख्याल
  • (C) कुचामनी ख्याल
  • (D) तुर्रा कलंगी ख्याल

कुचामनी ख्याल का प्रवर्तन लच्छीराम ने किया। यह नागौर जिले के कुचामन सिटी में विकसित हुआ। इसमें खुले मंच पर प्रस्तुति होती है और इसका स्वरूप ओपेरा जैसा है। लच्छीराम द्वारा रचित प्रमुख ख्याल हैं – चांद नीलगिरी, राव रिडमल और मीरा मंगल। उगमराज इसके प्रमुख कलाकार रहे।

117. कुचामनी ख्याल' संबंधित कौनसा कथन सही नहीं है?

  • (A) कुचामनी ख्याल के प्रवर्तक लच्छीराम है।
  • (B) इनमें पुरूष पात्र ही स्त्री चरित्र का अभिनय करते हैं।
  • (C) इसके कलाकार चेतराम, हमीद बेग, ताराचंद प्रमुख।
  • (D) इसके नर्तक ही गाने को गाते हैं।

कुचामनी ख्याल के प्रमुख कलाकार चेतराम, हमीद बेग और ताराचंद नहीं थे। ये तुर्रा कलंगी ख्याल से जुड़े हुए थे। कुचामनी ख्याल की विशेषता है कि इसमें सामाजिक व्यंग्य, लोकगीत और सरल भाषा का प्रयोग होता है। यह शैली ओपेरा जैसी है और इसमें पुरुष ही स्त्री भूमिकाएँ निभाते हैं।

118. कुचामनी ख्याल के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं?

  • (A) लच्छीराम
  • (B) भानुजी महाराज
  • (C) नानूराम
  • (D) सोहनलाल

कुचामनी ख्याल का प्रवर्तन लच्छीराम ने कुचामन सिटी (नागौर) में किया। इसकी खासियत यह है कि स्त्री चरित्रों का अभिनय पुरुष कलाकार करते हैं, भाषा सरल होती है और विषय अक्सर सामाजिक व्यंग्य लिए होते हैं। प्रस्तुति खुले मंच पर होती है और ढोल, शहनाई, ढोलक, सारंगी जैसे वाद्ययंत्र प्रयोग में आते हैं। बाद में उगमराज जैसे कलाकारों ने इसे लोकप्रिय बनाया।

119. हाल ही में, रामदयाल शर्मा को पद्मश्री से नवाजा गया। वे निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं?

  • (A) नौटंकी कला
  • (B) तबला
  • (C) सितार
  • (D) शास्त्रीय गायन

रामदयाल शर्मा (भरतपुर) को नौटंकी कला में उत्कृष्ठ योगदान के लिए पद्मश्री (2022) से सम्मानित किया गया। उन्होंने पारंपरिक हाथरस शैली के सुर-लय और अभिनय को आज के दर्शकों तक पहुँचाया। पूर्वी राजस्थान—भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर—में उनकी प्रस्तुतियों ने लोकनाट्य संरक्षण और नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देने दोनों दिशाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

120. गवरी एक लोकनाट्य है, जो आधारित है-

  • (A) हीर-रांझा की कथा पर
  • (B) शिव-भस्मासुर की कथा पर
  • (C) प्रताप–अकबर की कथा
  • (D) कृष्ण–कंस की कथा पर

गवरी मेवाड़-अरावली क्षेत्र की भील जनजाति का प्रमुख लोकनाट्य है, जो शिव–भस्मासुर की कथा पर आधारित होता है। इसे श्रावण पूर्णिमा के अगले दिन से आश्विन शुक्ल नवमी तक लगभग 40 दिन तक दिन में खेला जाता है, इसलिए इसे लोकनाट्यों का मेरू नाट्य भी कहा जाता है। इसमें थाली, मांदल की थाप, घाई और सामूहिक नृत्य प्रमुख हैं।

राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7

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