राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य (Major Folk Dramas of Rajasthan) MCQ – Part 7
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें रम्मत, गवरी, तमाशा, नौटंकी, तुर्रा कलंगी, भवाई, गंधर्व, हेला ख्याल, स्वांग, लीलाएँ आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य
- Question: 121 से 132
- Last Updated:
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121. लोक संगीत, नृत्य एवं नाट्य की कौन-सी विद्या पूर्वी राजस्थान से सम्बंधित है?
- (A) रम्मत
- (B) नौटंकी
- (C) तुर्रा कलंगी
- (D) गवरी
नौटंकी पूर्वी राजस्थान (खासतौर पर भरतपुर, करौली, धौलपुर, अलवर, सवाई माधोपुर) में अत्यधिक लोकप्रिय है। इसका संबंध हाथरस शैली से जुड़ता है। प्रस्तुति में नगाड़ा, ढोल, सारंगी, चिकारा, ढपली आदि कई वाद्ययंत्र प्रयुक्त होते हैं। विषय भक्ति, वीरगाथा और सामाजिक प्रसंग होते हैं। इसे मेलों-उत्सवों और मंगल अवसरों पर बड़े चाव से देखा जाता है।
122. गोमा-मीणा, कालू कीर, कानगूजरी, मियांवड़ व नाहर—ये क्या हैं?
- (A) छोटी लघु नाटिकाएँ, जिनका मंचन गवरी उत्सव में किया जाता है।
- (B) गवरी उत्सव के सभी पात्र, जो नृत्य में निपुण हैं।
- (C) गवरी उत्सव के पात्र, जो पुरुषों का अभिनय भी करते हैं।
- (D) गवरी के प्रमुख वाद्ययंत्र।
गोमा-मीणा, कालू कीर, कानगूजरी, मियांवड़, नाहर आदि लघु नाटिकाएँ हैं जिनका मंचन गवरी उत्सव के दौरान होता है। गवरी में शिव–भस्मासुर, अंबा माता, लाखा बंजारा जैसे प्रसंग भी शामिल होते हैं। कथानक क्रमबद्ध न होकर घाई जैसे सामूहिक नृत्यों से जोड़े जाते हैं। सूत्रधार खटकड़्या/कुटकुटिया और झामट्या कविता व संवादों से प्रस्तुति को जीवंत रखते हैं।
123. मेवाड़ के अरावली क्षेत्र की भील जाति का लोकनाट्य कौन-सा है?
- (A) रम्मत
- (B) भवाई
- (C) गवरी
- (D) गंधर्व
गवरी मेवाड़-अरावली क्षेत्र के भील समुदाय का अनूठा धार्मिक लोकनाट्य है। यह दिन में खेला जाता है और 40 दिनों तक गाँव-गाँव घूमकर प्रस्तुतियाँ होती हैं। प्रमुख पात्र राई बुढ़िया/राई माता, झामट्या, खटकड़्या, पुरिया आदि हैं। मांदल-थाली की लय, सामूहिक नृत्य और देवकथाओंकी अभिव्यक्ति इसे विशेष पहचान देती है।
124. राजस्थान में गोपीकृष्ण भट्ट किसके लिए प्रसिद्ध हैं?
- (A) तमाशा
- (B) हेला ख्याल
- (C) स्वांग
- (D) लीलाएँ
गोपीकृष्ण भट्ट (साथ में वासुदेव भट्ट, फूलजी भट्ट) तमाशा के लिए प्रसिद्ध हैं। तमाशा मूलतः महाराष्ट्र की शैली है, पर जयपुर में इसे राजाश्रय मिला और यहाँ जयपुरी ख्याल व ध्रुपद का सुंदर मिश्रण दिखता है। प्रस्तुति खुले अखाड़े में होती है; हारमोनियम, तबला, सारंगी, नगाड़ाप्रमुख वाद्य हैं और स्त्री भूमिकाएँ स्त्रियाँ ही निभाती हैं।
125. राई बुढ़िया और राई माता किस लोक नाट्य के मुख्य पात्र हैं?
- (A) गवरी
- (B) वालर
- (C) रम्मत
- (D) तुर्रा कलंगी
राई बुढ़िया और राई माता गवरी के प्रमुख पात्र हैं। गवरी में शिव–भस्मासुर कथा केंद्र में रहती है, पर साथ ही गोमा-मीणा, कानगूजरी, अंबा माता जैसे प्रसंग भी खेले जाते हैं। थाली–मांदल की ताल, घाई का सामूहिक नृत्य और सूत्रधार खटकड़्या की भागीदारी से पूरा नाट्य जीवंत बनता है।
126. निम्नलिखित में से कौन-सी लोक संगीत एवं नृत्य शैली केवल जयपुर में सम्बंधित है?
- (A) तुर्रा कलंगी
- (B) स्वांग
- (C) तमाशा
- (D) नौटंकी
तमाशा जयपुर का प्रसिद्ध लोकनाट्य है, हालांकि इसका मूल महाराष्ट्र है। जयपुर में इसे सवाई प्रताप सिंह के समय शुरू किया गया। इसके प्रवर्तक बंशीधर भट्ट माने जाते हैं। तमाशा में जयपुरी ख्याल और ध्रुपद गायकी का सुंदर मिश्रण मिलता है। प्रस्तुति खुले मंच पर होती है जिसे अखाड़ा कहा जाता है और इसमें स्त्री पात्रों की भूमिका स्त्रियां ही निभाती हैं।
127. अली बक्शी ख्याल कौन से क्षेत्र में प्रचलित लोक नाट्य शैली है?
- (A) करौली
- (B) चिड़ावा
- (C) अलवर
- (D) चित्तौड़
अली बक्शी ख्याल का उद्भव अलवर जिले के मुंडावर ठिकाने में हुआ था। इसे वहाँ के शासक राव राजा अली बक्श ने प्रारंभ कराया। इन्हें अलवर का रसखान कहा जाता है। यह ख्याल पूर्वी राजस्थान की प्रसिद्ध लोकनाट्य शैलियों में गिना जाता है और इसमें संगीत, गायन और अभिनय की विशेष झलक मिलती है।
128. राजस्थान में किस लोकनाट्य का मंचन खुले मोहल्ले या बाजार के चौक में किया जाता है?
- (A) भवाई
- (B) गवरी
- (C) रम्मत
- (D) तमाशा
रम्मत का मंचन प्रायः खुले मोहल्लों या चौक में किया जाता है। इसका उद्भव जैसलमेर से हुआ लेकिन बीकानेर की रम्मत सबसे लोकप्रिय है। रम्मत का शाब्दिक अर्थ है "रमने वाला" अर्थात खेलना। होली के अवसर पर होने वाली बीकानेर की रम्मत ऐतिहासिक, पौराणिक और वीरगाथाओं पर आधारित होती है और इसमें प्रमुख भूमिका खेलार/रामतिए निभाते हैं।
129. गिरीराज प्रसाद राजस्थान में किस लोकनाट्य के प्रसिद्ध कलाकार हैं?
- (A) रम्मत
- (B) तमाशा
- (C) गवरी
- (D) नौटंकी
गिरीराज प्रसाद राजस्थान में नौटंकी कला के प्रसिद्ध कलाकार हैं। नौटंकी विशेष रूप से भरतपुर, धौलपुर, करौली, अलवर और सवाई माधोपुर में लोकप्रिय है। अन्य प्रसिद्ध कलाकारों में मास्टर नत्थाराम, मास्टर छज्जन सिंह, कृष्णा कुमारी, गुलाब बाई और श्यामसुन्दर भी शामिल हैं।
130. हरिश्चन्द्र, हीर रांझा, जयदेव कलाली, भृर्तहरि, ढोला मरवण—इनका संबंध किस ख्याल से है?
- (A) कुचामनी ख्याल
- (B) शेखावाटी ख्याल
- (C) जयपुरी ख्याल
- (D) अली बक्शी ख्याल
ये सभी ख्याल शेखावाटी ख्याल के अंतर्गत आते हैं। इसके प्रवर्तक नानूराम राणा (चिड़ावा, झुंझुनूं) थे और दूलिया राणा ने इसे लोकप्रिय बनाया। शेखावाटी ख्याल में वीरगाथाएँ और पौराणिक आख्यान अधिक गाए जाते हैं और इसमें शहनाई, सारंगी, हारमोनियम, ढोलक जैसे वाद्ययंत्र प्रमुख होते हैं।
131. निम्न में से किसे 'ब्रज कोकिला' व 'ब्रज पपीहा' कहा जाता है?
- (A) रामदयाल शर्मा
- (B) रामगोपाल मेहता
- (C) सत्यवान सावित्री
- (D) अमरसिंह राठौड़
रामदयाल शर्मा (भरतपुर) को ब्रज कोकिला और ब्रज पपीहा के नाम से जाना जाता है। वे नौटंकी कला के ख्याति प्राप्त कलाकार हैं। इन्हें 2021 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। उनके सुर, लय और अभिनय ने नौटंकी कला को नई पहचान दिलाई।
132. भाटो और नाटो द्वारा नचाई जाने वाली कठपुतली में किसकी लकड़ी का प्रयोग होता है?
- (A) ढाक
- (B) आडू
- (C) खैर
- (D) शहतूत
राजस्थान की कठपुतली परंपरा में भाट और नट समुदाय द्वारा नचाई जाने वाली कठपुतलियाँ मुख्यतः आडू की लकड़ी से बनाई जाती हैं। इसके बाद इन्हें चमकदार कपड़ों और रंगीन धागों से सजाया जाता है। कठपुतली राजस्थान की लोकनाट्य परंपरा का अभिन्न हिस्सा है, जिसे अक्सर कथावाचन और गीत-संगीत के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7
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