राजस्थान के लोकनृत्य (Folk Dances of Rajasthan) MCQ – Part 11
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के लोकनृत्य से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमे अग्नि, घूमर, वालर, गवरी, बम नृत्य, चरी नृत्य, कच्छी घोड़ी, शंकरिया, कालबेलिया आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के लोकनृत्य
- Question: 201 से 220
- Last Updated:
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201. राजस्थान के लोक नृत्यों का सरमौर है?
- (A) अग्नि नृत्य
- (B) घूमर नृत्य
- (C) गैर नृत्य
- (D) बम नृत्य
घूमर नृत्य राजस्थान के लोक नृत्यों का सिरमौर माना जाता है। इसे राज्य नृत्य का दर्जा प्राप्त है। यह महिलाओं द्वारा किया जाने वाला अत्यंत लोकप्रिय नृत्य है। मांगलिक अवसरों और पर्वों, विशेषकर गणगौर पर इसे किया जाता है। इसमें गोल घेरे में घूमकर नृत्य किया जाता है।
202. फलकू बाई किस नृत्य की नृत्यांगना है?
- (A) चरी नृत्य
- (B) कच्छी घोड़ी
- (C) घूमर नृत्य
- (D) रसिया नृत्य
फलकू बाई प्रसिद्ध चरी नृत्य की नृत्यांगना हैं। चरी नृत्य मुख्यतः किशनगढ़ (अजमेर) में प्रचलित है। इसमें महिलाएँ सिर पर कलश रखकर नृत्य करती हैं। यह नृत्य अब व्यावसायिक रूप भी ले चुका है। इसकी अन्य प्रमुख नृत्यांगनाएँ कुमारी सुनीता रावत और श्री मोहन गौड़ हैं।
203. चरी लोकनृत्य मुख्य रूप से राजस्थान के किस जिले में किया जाता है?
- (A) अजमेर
- (B) अलवर
- (C) जयपुर
- (D) जोधपुर
चरी नृत्य मुख्यतः किशनगढ़ (अजमेर) जिले में किया जाता है। इसमें महिलाएँ सिर पर कलश (7 चरियाँ) रखकर उनमें कपास के बीज और तेल डालकर आग जलाती हैं और फिर नृत्य करती हैं। इस नृत्य की प्रसिद्ध कलाकारों में फलकू बाई, श्री मोहन गौड़ और कुमारी सुनीता रावत शामिल हैं। यह नृत्य अब व्यावसायिक स्वरूप भी ले चुका है।
204. निम्नलिखित में से प्रख्यात 'चरी नृत्यांगना' कौन है?
- (A) मांगी बाई
- (B) फलकू बाई
- (C) गुलाबो
- (D) तीजन बाई
चरी नृत्य गुर्जर जाति की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला नृत्य है। इसमें ढोल, थाली और बाकिया जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है। इस नृत्य की प्रमुख नृत्यांगनाएँ फलकू बाई, सुनीता रावत और श्री मोहन गौड़ हैं। यह नृत्य विशेषकर किशनगढ़ (अजमेर) क्षेत्र में प्रसिद्ध है, जहाँ महिलाएँ सिर पर कलश रखकर उसमें आग जलाकर संतुलन बनाते हुए नृत्य करती हैं।
205. तेरहताली नृत्य' किस लोकदेवता को समर्पित है?
- (A) गोगाजी
- (B) रामदेव जी
- (C) पाबूजी
- (D) देवनारायण जी
तेरहताली नृत्य एक धार्मिक नृत्य है जिसे बाबा रामदेव जी को समर्पित किया जाता है। इसका उद्भव पाली जिले के पादरला गाँव से हुआ था। यह कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा बैठकर किया जाने वाला एकमात्र नृत्य है। इसमें 13 मंजीरों का प्रयोग होता है, जिनमें से 9 पैरों में, 2 कोहनियों पर और 2 हाथों में बांधे जाते हैं। यह नृत्य मुख्यतः रामदेवरा मेले में प्रस्तुत किया जाता है।
206. तेरहताली नृत्य किया जाता है?
- (A) रामदेवजी के मेले पर
- (B) तेजाजी के मेले पर
- (C) पाबूजी के मेले पर
- (D) भैरूजी के मेले पर
तेरहताली नृत्य मुख्यतः रामदेवजी के मेले में किया जाता है। यह कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला नृत्य है। इसे बैठकर किया जाता है और इसमें मांगीबाई, मोहनी, नारायणी व लक्ष्मणदास जैसे प्रमुख कलाकारों ने ख्याति प्राप्त की है। इसमें तानपुरा, चौतारा और मंजीरा जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है।
207. मांगीबाई एवं लक्ष्मणदास कामड़ किस नृत्य के प्रमुख नृत्यकार हैं?
- (A) भवाई नृत्य
- (B) वालर नृत्य
- (C) कच्छी घोड़ी
- (D) तेरहताली नृत्य
तेरहताली नृत्य के प्रमुख कलाकारों में मांगीबाई और लक्ष्मणदास कामड़ का नाम लिया जाता है। इनके अलावा मोहनी और नारायणी भी इस नृत्य की प्रमुख नृत्यांगनाएँ रही हैं। यह नृत्य मुख्यतः रामदेवजी की आराधना हेतु किया जाता है और इसमें तानपुरा, चौतारा व मंजीरा जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है।
208. किस लोक नृत्य में डफली, धुरालियों, खंजरी और पुंगी वाद्य का प्रयोग किया जाता है?
- (A) गैर
- (B) कालबेलिया
- (C) कच्छी घोड़ी
- (D) अग्नि नृत्य
कालबेलिया नृत्य राजस्थान की कालबेलिया जनजाति द्वारा किया जाने वाला नृत्य है। यह एक भावमय और उत्सव प्रधान नृत्य है। इसमें डफली, पुंगी, खंजरी और धुरालियों जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है। यह नृत्य नायक-नायिका की प्रेम कथाओं पर आधारित होता है। इसे कालबेलिया पुरुष और महिलाएँ दोनों प्रस्तुत करते हैं और यह नृत्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रसिद्ध है।
209. निम्न में से कौन-सा नृत्य राजस्थान के कालबेलियों का नहीं है?
- (A) शंकरिया
- (B) चरी
- (C) पणिहारी
- (D) इंडोणी
चरी नृत्य कालबेलियों का नृत्य नहीं है, बल्कि यह गुर्जर जाति की महिलाओं का प्रमुख नृत्य है। कालबेलिया जाति के प्रमुख नृत्य कालबेलिया, शंकरिया, पणिहारी, बागड़िया, इंडोणी और चकरी हैं। इस नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने में गुलाबो देवी का बड़ा योगदान है, जिन्हें 2016 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
210. गुलाबो सपेरा किस क्षेत्र हेतु प्रसिद्ध है?
- (A) खेल
- (B) लोक गायन
- (C) लोक नृत्य
- (D) मुखिया
गुलाबो सपेरा राजस्थान की विश्वप्रसिद्ध लोक नृत्यांगना हैं। इनका जन्म 1960 में हुआ और इन्हें 2016 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इन्होंने विशेष रूप से कालबेलिया नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई। फ्रांस के लेखकों थियरी रॉबिन और वेरोनिक गुइलियन ने उन पर "Danseuse Gitane Du Rajasthan" नामक पुस्तक भी लिखी।
211. निम्न में से कौन सा नृत्य कालबेलिया जाति से सम्बन्धित है?
- (A) अग्नि नृत्य
- (B) इंडोनी नृत्य
- (C) गवरी नृत्य
- (D) कालबेलिया नृत्य
कालबेलिया नृत्य राजस्थान की कालबेलिया जाति का सबसे प्रमुख नृत्य है। यह नृत्य साँप की चाल की तरह लचकदार और आकर्षक होता है। इसे पुरुष और महिलाएँ दोनों प्रस्तुत करते हैं। यह नृत्य राजस्थान की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है और इसे UNESCO ने भी मान्यता दी है।
212. निम्न में से राज्य का कौन सा लोकनृत्य प्रसिद्ध तौर पर 'स्नैक चार्मर डांस' से जाना जाता है?
- (A) भवाई
- (B) घूमर
- (C) कालबेलिया
- (D) कठपुतली
कालबेलिया नृत्य को दुनिया भर में "स्नेक चार्मर डांस" के नाम से जाना जाता है। इसमें महिलाएँ साँप की तरह लचकदार मुद्राएँ करती हैं। यह नृत्य कालबेलिया जाति की महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसे अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली प्रमुख नृत्यांगनाओं में गुलाबो, कंचन, कमली और राजकी का नाम लिया जाता है।
213. राजस्थान के निम्नलिखित में से किस लोक नृत्य को यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विरासत सूची में सूचीबद्ध किया गया है?
- (A) भवई नृत्य
- (B) तेराताली नृत्य
- (C) घूमर नृत्य
- (D) कालबेलिया नृत्य
कालबेलिया नृत्य को वर्ष 2010 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया। यह नृत्य कालबेलिया जाति की महिलाओं द्वारा किया जाता है और इसे स्नेक चार्मर डांस भी कहा जाता है। कालबेलिया नृत्य के अलावा राजस्थान की विरासत में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (1985), जंतर मंतर जयपुर (2010), छह पहाड़ी दुर्ग (2013) और जयपुर का परकोटा (2019) भी विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं।
214. “गींदड़ नृत्य" राजस्थान के किस क्षेत्र में किया जाता है?
- (A) मेवाड़
- (B) हाड़ौती
- (C) बागड़
- (D) शेखावटी
गींदड़ नृत्य शेखावटी क्षेत्र में होली के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य है। यह नृत्य प्रहलाद स्थापना से लेकर होली दहन तक लगभग एक सप्ताह तक चलता है। इसमें पुरुष नगाड़ा, ढोल, डफ और चंग जैसे वाद्ययंत्रों के साथ वृत्ताकार नृत्य करते हैं। कुछ पुरुष महिलाओें के वस्त्र पहनकर "मेहरी" कहलाते हैं और स्वांग रचते हैं जैसे साधु, शिकारी, सेठ-सेठानी, दुल्हा-दुल्हन, पठान आदि।
215. रतवाई' लोक नृत्य संबंधित है-
- (A) मेवाड़ क्षेत्र से
- (B) मेवात क्षेत्र से
- (C) हाड़ौती क्षेत्र से
- (D) मालवा क्षेत्र से
रतवाई नृत्य मेव जाति का पारंपरिक नृत्य है जो मुख्यतः मेवात क्षेत्र में किया जाता है। इसमें महिलाएँ चूड़ियाँ खनकाते हुए नृत्य करती हैं जबकि पुरुष अलगोजा और टामक बजाते हैं। यह नृत्य विवाह एवं मांगलिक अवसरों पर किया जाता है। मेव समाज का एक और प्रसिद्ध नृत्य रणबाजा भी है जो वीर रस प्रधान होता है।
216. नृत्य रूप जो केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है-
- (A) शंकरिया
- (B) लुंबर
- (C) गीदड़
- (D) चरकुला
गीदड़ नृत्य शेखावटी क्षेत्र का प्रमुख नृत्य है जो केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है। इसमें नगाड़ा, ढोल, चंग और डफ वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है। पुरुष वृत्ताकार नृत्य करते हैं और कभी-कभी महिलाओें का वेश धारण करके हास्य स्वांग भी प्रस्तुत करते हैं। इसे "मेहरी" या "गणगौर" भी कहा जाता है।
217. निम्नलिखित में से कौन सा युगल नृत्य है?
- (A) चरी नृत्य
- (B) गीदड़ नृत्य
- (C) शंकरिया नृत्य
- (D) मांडल नृत्य
शंकरिया नृत्य कालबेलिया जाति का एक आकर्षक युगल नृत्य है। यह एक प्रेम कथा पर आधारित होता है और इसमें पुरुष और महिलाएँ मिलकर सुंदर अंग संचालन करते हैं। यह नृत्य अपनी लचकदार और मनमोहक गतियों के कारण दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।
218. निम्नलिखित में से कौन से लोक नृत्य में किसी वाद्य यंत्र का प्रयोग नहीं होता है?
- (A) गवरी नृत्य
- (B) बम नृत्य
- (C) अग्नि नृत्य
- (D) वालर नृत्य
वालर नृत्य सिरोही क्षेत्र की गरासिया जनजाति द्वारा किया जाने वाला प्रमुख नृत्य है। इसे गरासिया घूमर भी कहा जाता है। यह धीमी गति का युगल नृत्य है जिसमें पुरुष और महिलाएँ दो अर्द्धवृत्त बनाकर नृत्य करते हैं। विशेष बात यह है कि इस नृत्य में कोई वाद्ययंत्र प्रयोग नहीं किया जाता। प्रारंभ एक पुरुष छाता या तलवार लेकर करता है।
219. वालर किसका प्रसिद्ध नृत्य है?
- (A) सांसी
- (B) भील
- (C) गरासिया
- (D) चारण
वालर नृत्य विशेष रूप से गरासिया जनजाति का प्रमुख नृत्य है। यह सिरोही और आस-पास के क्षेत्रों में किया जाता है। इसमें स्त्री और पुरुष एक साथ धीमी गति से नृत्य करते हैं। नृत्य की शुरुआत एक पुरुष तलवार या छाता लेकर करता है। इसे गरासिया घूमर भी कहा जाता है।
220. निम्नलिखित में से कौनसी नृत्य शैली जनजाति समुदाय से संबंद्ध नहीं है?
- (A) गीदड़
- (B) वालर
- (C) मांदल
- (D) गवरी
गीदड़ नृत्य शेखावटी क्षेत्र का नृत्य है और यह जनजातीय नृत्य नहीं है। जबकि वालर और मांदल नृत्य गरासिया जनजाति द्वारा तथा गवरी नृत्य भील जनजाति द्वारा किया जाता है। गीदड़ नृत्य में नगाड़ा, चंग और ढोल का प्रयोग होता है और यह मुख्यतः होली पर किया जाता है।
राजस्थान के लोकनृत्य MCQ – सभी भाग:
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