राजस्थान के लोकनृत्य (Folk Dances of Rajasthan) MCQ – Part 12
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के लोकनृत्य से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में नृत्य, वालर, भवाई, तेरहताली, घूमर, गवरी, चरी, राई, मांदल, लांगुरिया आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के लोकनृत्य
- Question: 221 से 235
- Last Updated:
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221. गरासिया जनजाति से सम्बन्धित लोक-नृत्य शैली है-
- (A) वालर
- (B) गवरी
- (C) तेरहताली
- (D) चरी
वालर नृत्य गरासिया जनजाति का प्रमुख नृत्य है। इसे पुरुष और महिलाएँ मिलकर करते हैं। इसके अलावा गरासिया जनजाति के अन्य प्रमुख नृत्यों में लूर, कूद, मांदल, गौर, जवारा, मोरिया और गरवा शामिल हैं। यह नृत्य विशेष रूप से उत्सव और विवाह अवसरों पर किया जाता है।
222. निम्नलिखित किस जनजाति का 'वालर' लोकनृत्य (Balar Folk Dance) लोकप्रिय है?
- (A) भील
- (B) सहरिया
- (C) गरासिया
- (D) मीणा
वालर नृत्य गरासिया जनजाति का एक प्रसिद्ध लोकनृत्य है। यह बिना वाद्ययंत्रों के किया जाने वाला युगल नृत्य है। इसे गरासिया घूमर भी कहा जाता है। इस नृत्य में पुरुष और महिलाएँ एक साथ नृत्य करते हैं और इसकी शुरुआत प्रायः एक पुरुष तलवार या छाता लेकर करता है। यह नृत्य गरासिया संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
223. वालर नृत्य किसके द्वारा किया जाता है?
- (A) द्वारा
- (B) पुरुष द्वारा
- (C) स्त्री व पुरुष द्वारा
- (D) इनमें से कोई नहीं
- वालर नृत्य गरासिया जनजाति के द्वारा बिना वाद्ययंत्र के (स्त्री-पुरुष) किया जाता है। इसे गरासिया घूमर भी कहते हैं। इस नृत्य में स्त्री और पुरुष दोनों अर्द्धवृत्त में मिलकर भाग लेते हैं। इसकी विशेषता धीमी गति और सुंदर अंग संचालन है।
224. बम' नृत्य जो अलवर-भरतपुर में प्रसिद्ध है। यहाँ 'बम' शब्द से क्या तात्पर्य है?
- (A) नयी फसल
- (B) पुरुषों का समूह
- (C) भगवान शिव का उच्च स्वर
- (D) नगाड़ा
- भरतपुर क्षेत्र में बम नृत्य नई फसल कटने के बाद खुशी में पुरुषों द्वारा फाल्गुन की मस्ती में गांव की चौपाल पर किया जाता है। इसमें दो फुट व्यास व ढाई से तीन फुट ऊँचे नगाड़े को खड़े होकर दोनों हाथों में मोटे डंडों (बम) से बजाया जाता है। दूसरा दल वादकों का होता है, जो थाली को गिलास पर उल्टा रखकर बजाते हैं। तीसरा दल गायकों व नृत्यकारों का होता है, जो गा-गाकर नाचते हैं।
225. बम' नृत्य का सम्बन्ध किस स्थान से है?
- (A) अलवर
- (B) उदयपुर
- (C) शेखावाटी
- (D) मारवाड़
- भरतपुर व अलवर क्षेत्र में यह नृत्य नई फसल कटने के बाद खुशी में पुरुषों द्वारा फाल्गुन की मस्ती में गांव की चौपाल पर किया जाता है। यह वहाँ का प्रमुख सामूहिक नृत्य है।
226. राई नृत्य संबंधित है?
- (A) जसनाथी
- (B) भील
- (C) गुर्जर
- (D) माली
- राई नृत्य भील जनजाति का प्रमुख लोकनृत्य है। यह एक प्रकार का नाट्य नृत्य है, जिसमें गवरी की झलक भी दिखाई देती है। इसे कई स्थानों पर गवरी/राई नृत्य कहा जाता है। इस नृत्य में पौराणिक प्रसंगों को भी प्रस्तुत किया जाता है, जिससे यह अधिक रोचक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनता है।
227. बमरसिया कौन से क्षेत्र का एक लोकप्रिय लोकनृत्य है?
- (A) मारवाड़
- (B) शेखावाटी
- (C) जालोर
- (D) अलवर-भरतपुर
- बमरसिया नृत्य फाल्गुन माह में नई फसल आने के उपलक्ष्य में किया जाता है। इसमें नगाड़े (बम) की धुन पर रसिया गाए जाते हैं। बम की ताल और रसिया गीत के कारण इसे 'बमरसिया' कहा जाता है। यह विशेष रूप से भरतपुर और अलवर क्षेत्र का प्रसिद्ध नृत्य है।
228. किस लोकनृत्य में "पुरिया" को नृत्य का मुख्य पात्र माना जाता है?
- (A) वालर
- (B) राई
- (C) मांदल
- (D) भवाई
- गवरी/राई नृत्य मेवाड़ क्षेत्र के भील जाति का प्रमुख नाट्य रूप है। इसे सावन-भाद्रपद में किया जाता है। इसमें मादल और थाली वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है। इस नृत्य में विभिन्न पौराणिक प्रसंगों का मंचन किया जाता है और 'शिव' को इसमें पुरिया कहा जाता है। गवरी में अनेक पात्र होते हैं जैसे- राई, कुटकड़िया, मीणा, कंजर, शंकरिया, भोपा आदि।
229. करौली जिले का प्रसिद्ध लोकनृत्य है?
- (A) भवाई
- (B) घूमर
- (C) लांगुरिया
- (D) गरबा
- लांगुरिया नृत्य करौली जिले का प्रसिद्ध धार्मिक नृत्य है। इसे कैला माता के भक्त विशेष रूप से मीणा जाति द्वारा किया जाता है। यह नृत्य मेले और धार्मिक अवसरों पर बड़े उत्साह से प्रस्तुत किया जाता है।
230. लांगुरिया नृत्य' किस मेले का मुख्य आकर्षण है?
- (A) शीतला माता मेला
- (B) करणी माता मेला
- (C) कैलादेवी माता मेला
- (D) जीण माता मेला
- कैलादेवी माता का मेला करौली जिले में कालीसिल नदी के किनारे त्रिकूट पहाड़ी पर भरता है। यह मेला चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल एकादशी तक चलता है। इस मेले का प्रमुख आकर्षण लांगुरिया गीत और नृत्य होते हैं, जिन्हें श्रद्धालु बड़े उत्साह से प्रस्तुत करते हैं। इसे 'लक्खी मेला' भी कहा जाता है।
231. निम्न में से कौन राजस्थान के भवाई लोकनृत्य से संबद्ध है?
- (A) फाल्कू बाई
- (B) शांति देवी
- (C) कृष्णा व्यास छंगाणी
- (D) मांगी बाई
- भवाई नृत्य उदयपुर संभाग का प्रमुख पेशेवर नृत्य है। इसके प्रमुख कलाकारों में कृष्णा व्यास छंगाणी, रूपसिंह, दयाराम, तारा शर्मा और अस्मिता काला शामिल हैं। इस नृत्य में अद्भुत शारीरिक क्रियाएँ, लयकारी और संतुलन की कला देखने को मिलती है। इसे नागोजी जाट ने प्रवर्तित किया था।
232. भवाई नृत्य किस संभाग का मुख्य नृत्य है?
- (A) बीकानेर
- (B) उदयपुर
- (C) जोधपुर
- (D) भरतपुर
- भवाई नृत्य उदयपुर संभाग का प्रमुख पेशेवर नृत्य है। इसमें नृत्यांगनाएँ सिर पर सात-आठ मटके रखकर नृत्य करती हैं, जमीन पर रखे रूमाल को मुंह से उठाती हैं और तलवार की धार तथा काँच के टुकड़ों पर संतुलन बनाकर नृत्य करती हैं। यह नृत्य अद्भुत संतुलन और लयकारी का उदाहरण है। प्रमुख कलाकारों में कृष्णा व्यास छंगाणी, रूपसिंह, दयाराम, तारा शर्मा और अस्मिता काला का नाम शामिल है।
233. निम्नलिखित में से नृत्य जसनाथी संप्रदाय के अनुयायियों द्वारा किया जाता है?
- (A) अग्नि नृत्य
- (B) घूमर नृत्य
- (C) बम नृत्य
- (D) ढोल नृत्य
- जसनाथी सम्प्रदाय के अनुयायी जाट जागरण में सिद्धों द्वारा रात्री को नगाड़ा वाद्ययंत्र पर अग्नि नृत्य करते हैं। इस नृत्य में केवल पुरुष भाग लेते हैं। इसका उद्गम कतरियासर गांव (बीकानेर) में हुआ है। अंगारों के ढेर को 'धूणा' कहा जाता है, और नृतक गुरु के सामने खड़े होकर 'फफ' का उच्चारण करते हुए नृत्य करते हैं।
234. रूपसिंह शेखावत किस नृत्य के प्रमुख नृत्यकार हैं?
- (A) वालर नृत्य
- (B) कच्छी घोड़ी
- (C) भवाई नृत्य
- (D) तेरहताली नृत्य
- भवाई नृत्य मेवाड़ क्षेत्र का व्यावसायिक नृत्य है। इसके प्रवर्तक बाघाजी और नागोजी (केकड़ी, अजमेर) माने जाते हैं। इसके प्रमुख कलाकारों में रूपसिंह शेखावत, श्रेष्ठा सोनी, अस्मिता काला, तारा शर्मा और दयाराम का नाम शामिल है। इस नृत्य की पहचान संतुलन और शारीरिक कौशल के अद्भुत प्रदर्शन के लिए है।
235. जालौर का ढोल नृत्य किस शैली में आयोजित होता है?
- (A) नाहर
- (B) धूणा
- (C) धुम्ब
- (D) थाकना
- ढोल नृत्य सरगड़ा, ढोली, माली और भील जाति के पुरुषों द्वारा मुख्यतः विवाह अवसर पर किया जाता है। जालौर का ढोल नृत्य विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो थाकना शैली में ढोल बजाकर किया जाता है। इस नृत्य को पहचान और लोकप्रियता दिलाने का श्रेय जयनारायण व्यास को जाता है।
राजस्थान के लोकनृत्य MCQ – सभी भाग:
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