राजस्थान के लोकनृत्य MCQ Questions with Answers

राजस्थान के लोकनृत्य (Folk Dances of Rajasthan) MCQ – Part 9

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के लोकनृत्य से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें नृत्य, ढोल, घूमर, गैर, लाठी, चरवा, धाकड़, चकरी, डांडिया, गर् आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के लोकनृत्य
  • Question: 161 से 180
  • Last Updated:

📌 इस टॉपिक के अन्य भाग (Parts) के लिंक इस पोस्ट के अंतिम प्रश्न के बाद दिए गए हैं।

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161. गैर नृत्य है?

  • (A) पुरुष प्रधान नृत्य
  • (B) महिला प्रधान नृत्य
  • (C) युगल नृत्य
  • (D) इनमें से कोई नहीं

गैर नृत्य राजस्थान का प्रमुख पुरुष प्रधान नृत्य है। यह विशेषकर होली के अवसर पर किया जाता है। पुरुष हाथों में डंडे लेकर घेरे में नाचते हैं और डंडों को आपस में टकराते हुए ताल देते हैं।

162. सांकल नृत्य किस वाद्ययंत्र के साथ किया जाता है?

  • (A) ढोल
  • (B) चौतारा
  • (C) डैरू
  • (D) बांकिया

सांकल नृत्य गोगाजी के भक्तों द्वारा किया जाता है। इसमें भक्तजन अपनी पीठ पर लोहे की सांकल (जंजीर) मारते हैं और यह नृत्य डैरू वाद्ययंत्र की धुन पर होता है। यह गहरी भक्ति और आत्मसमर्पण का प्रतीक है।

163. धाकड़ नृत्य किस जाति से संबंधित है?

  • (A) सहरिया
  • (B) कोड़ा
  • (C) कालबेलिया
  • (D) कंजर

धाकड़ नृत्य कंजर जाति का नृत्य है। इसमें कलाकार हथियार लेकर युद्ध की कलाओं और शौर्य का प्रदर्शन करते हैं। यह नृत्य विशेष रूप से झालापाव और बीरा के बीच हुए युद्ध की विजय को याद करते हुए किया जाता है।

164. भवाई नृत्य के बारे में असत्य कथन की पहचान करें।

  • (A) यह नृत्य एक पेशेवर लोक नृत्य है।
  • (B) दयाराम भारत के प्रथम भवाई नृतक माने जाते हैं।
  • (C) इसके प्रवर्तक बाघाजी थे।
  • (D) अस्मिताकाला ने इस नृत्य में 111 घड़े सिर पर रखकर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

भवाई नृत्य राजस्थान का पेशेवर नृत्य है जिसके प्रवर्तक बाघाजी माने जाते हैं। इसे अद्भुत संतुलन और साहसिक क्रियाओं के लिए जाना जाता है। कृष्णा व्यास छगानी (जोधपुर) भारत के प्रथम भवाई नृतक माने जाते हैं, न कि दयाराम।

165. वह कौनसा नृत्य है जिसमें महिलाएँ अपने प्रियतम से श्रृंगार की चीजें लाने का अनुरोध करती हैं?

  • (A) लाठी नृत्य
  • (B) चरवा नृत्य
  • (C) धाकड़ नृत्य
  • (D) चकरी नृत्य

चकरी नृत्य हाड़ौती अंचल का प्रमुख नृत्य है। इसमें कंजर जाति की अविवाहित युवतियाँ 80 कली का घाघरा पहनकर तेज गति से चक्राकार घूमती हैं। इस नृत्य में वे गीतों के माध्यम से अपने प्रियतम से श्रृंगार की वस्तुएँ लाने का अनुरोध करती हैं।

166. राजस्थान के अधिकतर भागों में मांगलिक अवसरों पर विशेषकर गणगौर पर्व पर महिलाओं द्वारा कौनसा नृत्य किया जाता है?

  • (A) डांडिया नृत्य
  • (B) ढोल नृत्य
  • (C) घूमर नृत्य
  • (D) गर्गीदड़ नृत्य

घूमर नृत्य राजस्थान का सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्य है। यह विशेषकर गणगौर पर्व और विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसमें महिलाएँ गोल घेरे में थिरकती हैं और लोकगीत गाती हैं।

167. बम नृत्य जो अलवर, डीग व भरतपुर में प्रसिद्ध है, उसमें 'बम' शब्द से क्या तात्पर्य है?

  • (A) नयी फसल
  • (B) नगाड़ा
  • (C) भगवान शिव का उच्च स्वर
  • (D) पुरुषों का समूह

बम नृत्य अलवर, डीग और भरतपुर में किया जाता है। यहाँ ‘बम’ शब्द का अर्थ नगाड़ा होता है। इस नृत्य में कलाकार नगाड़ों की ताल पर थिरकते हैं और यह फाल्गुन माह में नए अनाज की खुशी पर किया जाता है।

168. कनाणा (बालोतरा) क्षेत्र का प्रसिद्ध नृत्य कौनसा है?

  • (A) गैर नृत्य
  • (B) द्विचक्री नृत्य
  • (C) मोरिया नृत्य
  • (D) बालदिया नृत्य

बाड़मेर जिले के कनाणा (बालोतरा) क्षेत्र में गैर नृत्य प्रसिद्ध है। यह मुख्य रूप से होली के अवसर पर किया जाने वाला पुरुष प्रधान नृत्य है।

169. तेरहताली नृत्य का प्रमुख वाद्ययंत्र कौनसा है?

  • (A) मंजीरा
  • (B) चंग
  • (C) झांझ
  • (D) श्रीमंडल

तेरहताली नृत्य में प्रमुख वाद्ययंत्र मंजीरा है। इस नृत्य में महिलाएँ अपने अंगों पर बंधे 13 मंजीरों को लय के साथ बजाते हुए बैठकर नृत्य करती हैं। यह लोकदेवता रामदेवजी की आराधना में किया जाता है।

170. कोमल कोठारी द्वारा किस नृत्य के संरक्षण में योगदान दिया गया?

  • (A) ढोल नृत्य
  • (B) घुड़ला नृत्य
  • (C) भवाई नृत्य
  • (D) चंग नृत्य

लोकसंगीत और लोकनृत्य के महान शोधकर्ता कोमल कोठारी ने राजस्थान की कई विधाओं को संरक्षित किया। विशेषकर उन्होंने घुड़ला नृत्यको बढ़ावा देने और प्रलेखन में योगदान दिया।

171. राजस्थान का कौनसा लोक नृत्य प्रसिद्ध तौर पर 'स्नैक चार्मर डांस' से जाना जाता है?

  • (A) कालबेलिया
  • (B) वालर
  • (C) शंकरिया
  • (D) इंडोणी

राजस्थान का कालबेलिया नृत्य विश्वप्रसिद्ध है और इसे ‘स्नेक चार्मर डांस’ कहा जाता है। इसमें महिलाएँ काले लिबास में नागिन की तरह लहराती हुईं अद्भुत लय में नृत्य करती हैं। 2010 में इसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल किया गया।

172. कत्थक क्या है?

  • (A) लोक नाट्य
  • (B) शास्त्रीय नृत्य
  • (C) लोक कला
  • (D) हस्त कला

कत्थक राजस्थान का एकमात्र शास्त्रीय नृत्य है। इसका उद्गम प्राचीन कथावाचन परंपरा से हुआ। इसके प्रमुख घराने जयपुर, लखनऊ और बनारस घराने हैं। इसके प्रवर्तक भानूजी माने जाते हैं।

173. निम्न में से किस राजस्थानी को वर्ष 2025 में 'पद्मश्री पुरस्कार' से सम्मानित किया गया?

  • (A) बतुल बेगम
  • (B) बैजनाथ महाराज
  • (C) अली मोहम्मद-गनी मोहम्मद
  • (D) शीन काफ निजाम

वर्ष 2025 में पद्मश्री सम्मान पाने वाले राजस्थान के प्रमुख नामों में बतुल बेगम, बैजनाथ महाराज और शीन काफ निजाम शामिल हैं। बैजनाथ महाराज अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किए गए।

174. बतुल बेगम जिन्हें वर्ष 2025 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया, किस क्षेत्र के लिए सम्मानित हुईं?

  • (A) आध्यात्म के लिए
  • (B) साहित्य के लिए
  • (C) माण्ड गायन के लिए
  • (D) संगीत के लिए

बतुल बेगम को वर्ष 2025 में माण्ड गायन के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार दिया गया। माण्ड राजस्थान की शास्त्रीयता लिए हुए लोकसंगीत की एक प्रसिद्ध विधा है, जिसे संरक्षित और प्रचारित करने में उनका योगदान अतुलनीय है।

175. राजस्थान के निम्नलिखित में से किसे वर्ष 2024 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया?

  • (A) पंडित लक्ष्मण भट्ट
  • (B) जानकी लाल भाण्ड
  • (C) मूलचंद लोढा
  • (D) 1 व 2 दोनों

वर्ष 2024 में राजस्थान से पंडित लक्ष्मण भट्ट और जानकी लाल भाण्ड दोनों को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ये दोनों कला और संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखते हैं।

176. गवरी लोक नृत्य मूल से ……… जनजाति का लोकनृत्य है।

  • (A) ग्रासिया
  • (B) कालबेलिया
  • (C) कंजर
  • (D) भील

गवरी लोक नृत्य मुख्यतः भील जनजाति का पारंपरिक नृत्य है। यह नृत्य वास्तव में एक लोक नाट्य है, जिसमें भगवान शिव और पार्वती के प्रतीकात्मक रूपों की प्रस्तुति होती है। नृत्य के दौरान इसे राई गवरी कहा जाता है। इसे राजस्थान का सबसे प्राचीन लोकनाट्य माना जाता है और इसे "लोकनाट्य का मेरू नाट्य" भी कहते हैं। इसकी प्रस्तुति विशेष अवसरों पर की जाती है और दिनभर चलता है।

177. भीलों द्वारा विवाह के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य क्या है?

  • (A) गबरी
  • (B) गैर
  • (C) नेजा
  • (D) हाथिमना

हाथिमना नृत्य भील जनजाति का प्रमुख विवाह नृत्य है। इसे विवाह अवसरों पर पुरुष घुटनों के बल बैठकर प्रस्तुत करते हैं। यह नृत्य भीलों की संस्कृति और सामाजिक परंपरा को दर्शाता है। हाथिमना नृत्य में उनके जीवन की सरलता, उत्साह और सामूहिकता स्पष्ट झलकती है। इसी वजह से इसे भीलों का जातीय लोकनृत्य माना जाता है।

178. राजस्थान में निम्न में से कौन सा नृत्य केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है?

  • (A) घूमर
  • (B) कच्छी घोड़ी
  • (C) तेरहताली
  • (D) कत्थक

कच्छी घोड़ी नृत्य राजस्थान का एक विशेष पुरुष प्रधान नृत्य है। इसमें कलाकार नकली घोड़े के परिधान पहनकर वीर रस से भरपूर प्रस्तुति देते हैं। यह नृत्य शेखावटी, कुचामन, परबतसर और डीडवाना क्षेत्रों में विवाह अवसर पर अधिक लोकप्रिय है। इसमें ढोल, थाली और झांझ जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है और इसके गीतों में वीरता और हास्य का मिश्रण होता है।

179. घुड़ला नामक नृत्यशैली का सम्बन्ध निम्न में से राजस्थान के किस शहर में है?

  • (A) भीलवाड़ा
  • (B) जोधपुर
  • (C) जयपुर
  • (D) उदयपुर

घुड़ला नृत्य राजस्थान के जोधपुर क्षेत्र का स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला प्रमुख नृत्य है। इस नृत्य में महिलाएं सुंदर श्रृंगार कर मटकों को सिर पर रखकर गोल घेरे में नृत्य करती हैं। मटकों में छिद्र होते हैं जिनमें दीपक जलता है। इन मटकों को ही घुड़ला कहा जाता है। यह नृत्य विशेष रूप से उत्सव और तीज-त्योहारों पर किया जाता है और इसे स्त्री प्रधान नृत्य माना जाता है।

180. कच्छीघोड़ी नृत्य के बारे में असत्य कथन की पहचान करें।

  • (A) यह एक व्यावसायिक नृत्य है।
  • (B) यह नृत्य शेखावाटी, कुचामन, परबतसर व डीडवाना क्षेत्रों में किया जाता है।
  • (C) यह नृत्य प्रायः होली के अवसर पर किया जाता है।
  • (D) यह नृत्य पुरुष प्रधान नृत्य है।

कच्छीघोड़ी नृत्य प्रायः विवाह के अवसर पर किया जाता है, न कि होली पर। इसमें लसकरिया, रसाला, बर्बाद और रंगमारिया जैसे गीत गाए जाते हैं। इस नृत्य के प्रमुख कलाकार छंवरलाल गहलोत और गोविंद पारीक रहे हैं।

राजस्थान के लोकनृत्य MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10 | Part 11 | Part 12

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