राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र (Folk Instruments of Rajasthan) MCQ – Part 1
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें अलगोजा, खड़ताल, रावणहत्था, शहनाई, मशक, शंख, डमरू, घण्टा, बाँसुरी, कामायचा आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र
- Question: 1 से 20
- Last Updated:
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1. किस वाद्य को भगवान शिव का वाद्य माना जाता है?
- (A) शंख
- (B) डमरू
- (C) घण्टा
- (D) बाँसुरी
डमरू भगवान शिव का प्रमुख वाद्ययंत्र माना जाता है। इसे शिवजी अपने हाथों में धारण करते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, सृष्टि की उत्पत्ति नाद से हुई थी और वह नाद शिव के डमरू से निकला था। इसी कारण यह शिव का प्रिय वाद्ययंत्र है।
2. जीणमाता का मेला राजस्थान के किस जिले में वर्ष में दो बार आयोजित होता है?
- (A) सिरोही
- (B) सीकर
- (C) सवाई माधोपुर
- (D) जालौर
जीणमाता राजस्थान के सीकर जिले में स्थित शेखावाटी क्षेत्र की लोकदेवी और चौहान वंश की कुलदेवी हैं। यहाँ चैत्र और आश्विन नवरात्रि में विशाल मेला भरता है। मंदिर का निर्माण राजा हट्टड ने 1064 ई. में कराया था। लोक परंपरा में जीणमाता को मधुमक्खियों की देवी कहा जाता है और यहाँ सबसे लंबा गीत "ढाई प्याला शराब का भोग" गाया जाता है।
3. किस कलाकार को 'नगाड़े का जादूगर' कहा जाता है?
- (A) रामनाथ चौधरी
- (B) करणा भील
- (C) हरिप्रसाद चौरसिया
- (D) रामकिशन सोलंकी
रामकिशन सोलंकी को ‘नगाड़े का जादूगर’ कहा जाता है। नगाड़ा भैंस की खाल से मढ़ा जाता है और शहनाई के साथ मांगलिक अवसरों पर बजाया जाता है। इसमें नर और मादा नगाड़ों की जोड़ी होती है, जिससे अद्भुत लय और ताल उत्पन्न होती है।
4. जयपुर जिले के लूणियावास ग्राम पंचायत बंध्या 400 वर्षों से कौन से मेले के लिए विख्यात है?
- (A) गायों का मेला
- (B) भैसों का मेला
- (C) ऊंटों का मेला
- (D) गधों का मेला
जयपुर जिले के लूणियावास (सांगानेर) के बंध्या गाँव में गधों का मेला 400 वर्षों से प्रसिद्ध है। यह मेला दशहरे के समय (आसोज बड़ी सप्तमी से ग्यारस तक) खलकाणी माता मंदिर परिसर में भरता है। इसकी शुरुआत कछवाहा राजाओं ने चन्द्रामीणा को हराने के बाद की थी।
5. निम्नलिखित में से कौनसा सुषिर वाद्य है?
- (A) अलगोजा
- (B) कामायचा
- (C) तंदूरा
- (D) रावणहत्था
अलगोजा एक सुषिर वाद्य है जिसे फूँककर बजाया जाता है। जबकि कामायचा, तंदूरा और रावणहत्था सभी तार (तत्) वाद्य यंत्र हैं। सुषिर वाद्यों में हवा के प्रवाह से ध्वनि निकलती है।
6. चिकारा और चौतारा किस प्रकार वाद्य यंत्र है?
- (A) तत् वाद्य
- (B) घन वाद्य
- (C) अवनद्ध वाद्य
- (D) सुषिर वाद्य
चिकारा और चौतारा दोनों ही तार वाले (तत्) वाद्य यंत्र हैं। ये तार खींचने या बजाने से ध्वनि उत्पन्न करते हैं। इसी श्रेणी में रबाब भी आता है।
7. नाथद्वारा के डांग नृत्य में निम्न वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जाता है।
- (A) ढोल
- (B) मांडल
- (C) थाली
- (D) उपरोक्त सभी
नाथद्वारा (राजसमंद) का प्रसिद्ध डांग नृत्य ढोल, मांडल और थाली जैसे वाद्य यंत्रों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। यह सामूहिक नृत्य है और लोक उत्सवों में किया जाता है।
8. निम्नलिखित में से कौन सा वाद्य यंत्र बाकी तीन से अलग है?
- (A) शहनाई
- (B) खड़ताल
- (C) मशक
- (D) अलगोज़ा
खड़ताल एक घन वाद्य यंत्र है जिसे टकराकर बजाया जाता है। जबकि शहनाई, मशक और अलगोज़ा सभी सुषिर वाद्य यंत्र हैं जिन्हें फूँककर बजाया जाता है।
9. लोक-कथा 'देवनारायण जी की फड़' के गायन में कौन वाद्य यन्त्र प्रयोग में लाया जाता है?
- (A) चंग
- (B) मंजीरा
- (C) खड़ताल
- (D) जन्तर
देवनारायण जी की फड़ वाचन के समय जन्तर बजाया जाता है। यह एक तार वाला वाद्य यंत्र है जिसमें 5–6 तार होते हैं। इसके माध्यम से लोक भोपे फड़ की कथा गाते और सुनाते हैं।
10. राजस्थान के पं. शिवकुमार शर्मा का संबंध किस वाद्ययंत्र से है?
- (A) सारंगी
- (B) शहनाई
- (C) संतूर
- (D) सरोद
पं. शिवकुमार शर्मा प्रसिद्ध संतूर वादक थे। संतूर मूलतः एक कश्मीरी लोक वाद्य यंत्र है। उन्हें 2001 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उनकी वजह से संतूर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
11. जहूर खान किस लोकवाद्य से संबंधित है?
- (A) भपंग
- (B) नड़
- (C) अलगोजा
- (D) खड़ताल
जहूर खाँ मेवाती राजस्थान के भपंग वाद्य यंत्र के प्रसिद्ध कलाकार हैं। भपंग एक तत् वाद्ययंत्र है जो डमरू से मिलता-जुलता होता है। यह कटे हुए तुम्बे से बनाया जाता है, जिसके एक सिरे पर चमड़ा मंढ़ा होता है। इसे काँख में दबाकर और लकड़ी के टुकड़े से बजाया जाता है।
12. लोक वाद्य 'भपंग' राजस्थान के किस क्षेत्र से सम्बंधित है?
- (A) मेवात
- (B) मेवाड़
- (C) मारवाड़
- (D) हाड़ौती
भपंग राजस्थान के मेवात क्षेत्र का लोकप्रिय लोक वाद्य है। यह डमरू जैसा वाद्ययंत्र है जिसे काँख में दबाकर बजाया जाता है। इसके प्रसिद्ध कलाकारों में जहूर खाँ मेवाती और उमर फारूक मेवाती का नाम विशेष रूप से लिया जाता है।
13. राजस्थान में भोपों का मुख्य वाद्ययंत्र है?
- (A) भंगल
- (B) मशक
- (C) ढाक
- (D) रावणहत्था
राजस्थान में भोपों का मुख्य वाद्ययंत्र रावणहत्था है। भोपे लोकदेवताओं की फड़ बाँचते समय इसका प्रयोग करते हैं। इसमें तार होते हैं और इसे गज से बजाया जाता है। इसकी अनूठी ध्वनि लोककथाओं और धार्मिक प्रसंगों को जीवंत बना देती है।
14. राजस्थान के प्रसिद्ध पखावज वादक कौन है, जिन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से नवाजा जा चुका है?
- (A) बिस्मिला खाँ
- (B) पंडित पुरुषोत्तम दास
- (C) चाँद मोहम्मद खाँ
- (D) हरिप्रसाद चौरसिया
राजस्थान के प्रसिद्ध पखावज वादक पंडित पुरुषोत्तम दास हैं। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। पखावज या मृदंगढोलक जैसा अवनद्ध वाद्य है, जो मंदिरों और भक्ति संगीत में प्रमुख रूप से प्रयोग किया जाता है।
15. राजस्थान के उमर फारुक मेवाती का सम्बन्ध किस क्षेत्र से था?
- (A) पर्यावरण
- (B) संगीत
- (C) खेल
- (D) चिकित्सा विज्ञान
उमर फारूक मेवाती राजस्थान के मेवात क्षेत्र के प्रसिद्ध भपंग वादक थे। उनका योगदान लोकसंगीत को जीवित रखने में महत्वपूर्ण रहा है। वे लोकसंगीत की परंपरा से जुड़े कलाकारों में गिने जाते हैं।
16. रमझोल किस प्रकार का लोक वाद्य यंत्र है?
- (A) अवनद्ध
- (B) तत्
- (C) सुषिर
- (D) घन
रमझोल एक घन वाद्य यंत्र है। इसमें चमड़े की पट्टी पर छोटे-छोटे घुंघरू लगे होते हैं, जिन्हें नृत्य के समय पैरों में बांधा जाता है। यह केवल वाद्य ही नहीं, बल्कि महिलाओं का आभूषण भी है और विशेषकर मारवाड़ क्षेत्र में प्रचलित है।
17. नड़' वाद्य यंत्र राजस्थान के किस क्षेत्र में अधिकांशतः प्रयुक्त होता है?
- (A) जैसलमेर
- (B) मेवाड़
- (C) बीकानेर
- (D) बाड़मेर
नड़ एक सुषिर वाद्य यंत्र है। यह कैर या करंज की लकड़ी से बनाया जाता है और इसमें चार छिद्र होते हैं। इसे मशक की तरह हवा भरकर बजाया जाता है। यह वाद्य मुख्य रूप से जैसलमेर क्षेत्र में लोकप्रिय है।
18. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म (वाद्ययंत्र प्रकार) सुमेलित नहीं है?
- (A) भपंग - तत्
- (B) नड़ - घन
- (C) सिंगी - सुषिर
- (D) ताशा - अवनद्ध
नड़ वास्तव में एक सुषिर वाद्य यंत्र है, जबकि प्रश्न में इसे घन वाद्य बताया गया है, जो गलत है। सिंगी सुषिर वाद्य है, ताशा अवनद्ध वाद्य है और भपंग तत् वाद्य है।
19. निम्न में से मुँह से बजाया जाने वाला वाद्ययंत्र है?
- (A) ताशा
- (B) इकतारा
- (C) अलगोजा
- (D) नौबत
अलगोजा एक सुषिर वाद्य है जिसे मुँह से फूँककर बजाया जाता है। इसमें दोहरी बांसुरी होती है, जिससे मधुर लोकधुनें बजाई जाती हैं। जबकि ताशा अवनद्ध वाद्य है, इकतारा तार वाला वाद्य है और नौबत वाद्ययंत्रों का समूह होता है।
20. राजस्थान का कौनसा कलाकार 'भपंग का जादूगर' कहलाता है?
- (A) जुहुर खाँ मेवाती
- (B) चांद मोहम्मद
- (C) अमीर मोहम्मद खाँ
- (D) पेपे खाँ
राजस्थान के जुहुर खाँ मेवाती को 'भपंग का जादूगर' कहा जाता है। भपंग डमरू जैसा वाद्य है, जिसे काँख में दबाकर बजाया जाता है। जुहुर खाँ मेवाती ने इस वाद्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर लोकप्रिय बनाया।
राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र MCQ – सभी भाग:
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