राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र (Folk Instruments of Rajasthan) MCQ – Part 10
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें अलगोजा, नड़, सतारा, बांकिया, मशक, कामायचा, मोहनवीणा, ड्रम सेट, सितार, सरोद आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र
- Question: 181 से 194
- Last Updated:
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181. राजस्थान के पंडित विश्व मोहन भट्ट का संबंध किस वाद्ययंत्र से है?
- (A) मोहनवीणा
- (B) ड्रम सेट
- (C) सितार
- (D) सरोद
पंडित विश्व मोहन भट्ट का संबंध मोहनवीणा से है। वे इसके जनक हैं। उन्हें 2002 में पद्मश्री, 2012 में राजस्थान रत्न, और 2017 में पद्मभूषणसम्मान प्राप्त हुआ। साथ ही उन्होंने ग्रैमी अवार्ड भी जीता है।
182. वह वाद्ययंत्र जिसमें पीतल की छोटी-छोटी गोलाकार पत्तियाँ होती हैं, जिसे हिलाने से झनझनाट की ध्वनि निकलती है-
- (A) श्री मंडल
- (B) लेजिम गरासिया
- (C) करताल
- (D) घुरोलियो
लेजिम गरासिया बाँस का धनुषाकार टुकड़ा होता है, जिसके साथ लगी जंजीर में पीतल की छोटी-छोटी गोलाकार पतियाँ होती हैं। इसे हिलाने पर झनझनाहट की ध्वनि निकलती है। राजस्थान में इसे गरासिया जनजाति द्वारा प्रयोग किया जाता है।
183. चमड़े के पट्टे पर बहुत सारे घुंघरू सिले होते हैं, जिन्हे नृतकियाँ नृत्य करते समय पैरों में बाँधती हैं, क्या कहलाता है?
- (A) खंजरी
- (B) रमझौल
- (C) श्रीमंडल
- (D) लेजिम
नृतकियाँ जब नृत्य करती हैं तो वे पैरों में रमझौल बाँधती हैं। यह चमड़े के पट्टे पर सिले हुए घुंघरुओं का रूप होता है। इसे हिलाने और पैरों के ताल से मधुर ध्वनि उत्पन्न होती है।
184. कौनसा वाद्ययंत्र जोगी, भील व ढोली बजाते हैं, जो शहनाई का ही देशी वर्जन माना जाता है?
- (A) टोटो
- (B) सींगा
- (C) अलगोजा
- (D) नड़
टोटो शहनाई का देशी वर्जन माना जाता है। इसे जोगी, भील और ढोली समुदाय बजाते हैं। इसका स्वर शहनाई जैसा होता है और यह लोकगीतों तथा उत्सवों में प्रयुक्त होता है।
185. मृदंग की आकृति के मिट्टी से बने लोक वाद्य, जो मोलेला गाँव में विशेषतः बनाया जाता है, का क्या नाम है?
- (A) नौबत
- (B) मांदल
- (C) धौंसा
- (D) माठ
मांदल मृदंग के आकार का वाद्य है, जिसे राजसमंद जिले के मोलेला गाँव में विशेष रूप से बनाया जाता है। इसके खोल मिट्टी से बने होते हैं और दोनों ओर चमड़ा मढ़ा होता है। यह भीलों और गरासिया जाति द्वारा गवरी और मांदल नृत्य में बजाया जाता है।
186. सरगड़ा जाति का खानदानी वाद्य कौनसा है?
- (A) बांकिया
- (B) मशक
- (C) भूगल
- (D) सतारा
बांकिया सरगड़ा जाति का खानदानी वाद्ययंत्र है। यह बिगुल का बड़ा रूप है, जो पीतल या स्टील से बना होता है। आजकल इसे बैंड में भी प्रयोग किया जाता है।
187. लोहे से बना मोरचंग किस प्रकार का वाद्य है?
- (A) घन
- (B) सुषिर
- (C) ताल
- (D) तत्
मोरचंग लोहे से बना छोटा वाद्य है। इसे होंठों में दबाकर बजाया जाता है। इसे फूँक नहीं मारी जाती, लेकिन इसकी गिनती सुषिर वाद्ययंत्रों में होती है। इसे ‘ज्यूज हार्प’ भी कहते हैं।
188. निम्न में से कौनसा वाद्य धातु निर्मित्त घन वाद्य है?
- (A) खंजरी
- (B) मंजीरा
- (C) बीन
- (D) कामायचा
मंजीरा एक धातु निर्मित घन वाद्य है। इसमें दो छोटी-छोटी पीतल की थालियाँ होती हैं, जिन्हें आपस में टकराकर बजाया जाता है। यह भजन-कीर्तन और लोकनृत्यों में प्रयोग होता है।
189. निम्न में से कौनसा वाद्ययंत्र तत् वाद्ययंत्र नहीं है?
- (A) कामायचा
- (B) सतारा
- (C) चिकारा
- (D) भपंग
सतारा एक सुषिर वाद्ययंत्र है। यह बाँसुरी, अलगोजा और शहनाई का मिश्रित रूप है। जबकि कामायचा, चिकारा और भपंग सभी तत् (तंतु) वाद्य हैं।
190. निम्न में से कौनसा वाद्ययंत्र सुषिर वाद्ययंत्र नहीं है?
- (A) मसक
- (B) सतारा
- (C) नड़
- (D) रबाज
रबाज (रबाब) एक तत् वाद्ययंत्र है, जिसमें तार होते हैं और इसे गज या उँगलियों से बजाया जाता है। जबकि मसक, सतारा और नड़ सभी सुषिर वाद्य हैं।
191. निम्न में से कौनसा वाद्य अवनद्य/ताल वाद्य नहीं है?
- (A) झांझ
- (B) डैरू
- (C) तासा
- (D) डफ
झांझ एक घन वाद्ययंत्र है। यह धातु का बना होता है और शेखावाटी क्षेत्र में कच्छी घोड़ी नृत्य के दौरान बजाया जाता है। जबकि डैरू, तासा और डफ सभी अवनद्य वाद्य हैं।
192. निम्न में से कौनसा वाद्ययंत्र घन वाद्ययंत्र नहीं है?
- (A) बांकिया
- (B) रमझौल
- (C) श्रीमंडल
- (D) लेजिम
बांकिया एक सुषिर वाद्ययंत्र है, जो पीतल या स्टील से बनाया जाता है और इसे फूँक मारकर बजाया जाता है। यह सरगड़ा जाति का पारंपरिक वाद्ययंत्र है। जबकि रमझौल, श्रीमंडल और लेजिम घन वाद्य हैं।
193. निम्नलिखित में से कौन सा वाद्ययंत्र भिन्न है?
- (A) अलगोजा
- (B) मशक
- (C) शहनाई
- (D) खड़ताल
अलगोजा, मशक और शहनाई सभी सुषिर वाद्ययंत्र हैं, जिन्हें फूँक मारकर बजाया जाता है। जबकि खड़ताल एक घन वाद्ययंत्र है, जिसे ताल देने के लिए प्रयोग किया जाता है।
194. निम्न में से कौनसा वाद्य एक सुषिर वाद्य नहीं है?
- (A) सारंगी
- (B) नागफणी
- (C) अलगोजा
- (D) नड़
सारंगी एक तत् वाद्ययंत्र है। इसे गज की सहायता से बजाया जाता है और इसे तत् वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। जबकि नागफणी, अलगोजा और नड़ सभी सुषिर वाद्ययंत्र हैं।
राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र MCQ – सभी भाग:
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