राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र (Folk Instruments of Rajasthan) MCQ – Part 2
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें सतारा, सारंगी, कामायचा, जन्तर, नड़, सुरनाई, सुरमण्डल, मोरचंग, नगाड़ा, शहनाई आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र
- Question: 21 से 40
- Last Updated:
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21. कौनसा वाद्ययंत्र तत् वाद्ययंत्रों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है?
- (A) सारंगी
- (B) कामायचा
- (C) शहनाई
- (D) जन्तर
सारंगी को तत् वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह तार वाला वाद्य है जो मानवीय आवाज़ की तरह ध्वनि उत्पन्न करता है। सारंगी का प्रयोग राजस्थान और उत्तर भारत के शास्त्रीय व लोकसंगीत दोनों में होता है।
22. सुषिर वाद्ययंत्रों में सबसे लम्बा वाद्ययंत्र, जो तीन हाथ लम्बी नली जैसा होता है, भवाई जाति का प्रमुख वाद्ययंत्र है?
- (A) नड़
- (B) बाँकिया
- (C) सींगा
- (D) भंगल
भंगल (भूगल) एक लम्बा सुषिर वाद्य यंत्र है। इसकी लंबाई लगभग तीन हाथ होती है और इसे भवाई जाति के लोग बजाते हैं। युद्धों में इसे रणभेरी के नाम से भी बजाया जाता था।
23. बाँकिया, सींगी और टोटो लोकवाद्य किस परम्परा से सम्बद्ध है?
- (A) घन वाद्य
- (B) सुषिर वाद्य
- (C) ताल वाद्य
- (D) तत् वाद्य
बाँकिया, सींगी और टोटो सभी सुषिर वाद्य हैं, जिन्हें बजाने के लिए हवा फूँकी जाती है। ये वाद्ययंत्र मुख्य रूप से ग्रामीण अंचल और लोक परंपराओं में प्रचलित हैं। इनकी ध्वनि धार्मिक अनुष्ठानों, उत्सवों और मेलों में प्रयोग की जाती है। सुषिर वाद्यों की विशेषता है कि इनमें वायु का प्रवाह ध्वनि उत्पन्न करता है।
24. निम्नलिखित में से कौनसा कथन कामायचा के बारे में असत्य है-
- (A) कामायचा मांगणियार जाति के द्वारा बहुतायत से प्रयोग किया जाता है।
- (B) यह लकड़ी के एकल टुकड़े से बनाया जाता है।
- (C) इसके तीन मुख्य तंतु बकरे की आँत के बने होते हैं।
- (D) कामायचा को वायलिन का अग्रगामी माना जाता है।
कामायचा एक प्रसिद्ध तत् वाद्य है जिसका प्रयोग राजस्थान की मांगणियार जाति करती है। यह लकड़ी के एकल टुकड़े से बनाया जाता है और इसके तंतु बकरे की आँत से बने होते हैं। इसे बजाने के लिए गज का प्रयोग होता है जो घोड़े की पूंछ के बालों से बनता है। इसे वायलिन का अग्रगामी नहीं माना जाता, इसलिए विकल्प D असत्य है।
25. निम्नलिखित में से कौनसा वाद्य यंत्र तत् वाद्य नहीं है?
- (A) सारंगी
- (B) इकतारा
- (C) अलगोजा
- (D) दुकाको
अलगोजा एक सुषिर वाद्य है, जिसमें दोहरी बांसुरी होती है और इसे फूँककर बजाया जाता है। जबकि सारंगी, इकतारा और दुकाको सभी तत् वाद्य हैं, जिनसे ध्वनि तारों के कंपन से निकलती है। अलगोजा राजस्थान के लोकसंगीत में प्रमुख भूमिका निभाता है, लेकिन यह सुषिर वाद्य है।
26. राजस्थान का कौनसा कलाकार अलगोजा वाद्ययंत्र का प्रसिद्ध कलाकार है?
- (A) रामनाथ चौधरी
- (B) चांद मोहम्मद
- (C) सदिक खां मांगणियार
- (D) रामकिशन सोलंकी
अलगोजा, जिसे डबल फ्लूट भी कहा जाता है, राजस्थान के लोकसंगीत में अत्यधिक लोकप्रिय है। इसके प्रसिद्ध कलाकार रामनाथ चौधरीरहे हैं। अलगोजा की मधुर ध्वनि लोकधुनों को जीवंत बनाती है। इसका प्रयोग विशेषकर लोकनृत्यों और मांगणियार-लंगा गायन परंपराओं में होता है।
27. निम्नलिखित में से कौनसा सुषिर वाद्य नहीं है?
- (A) सुरनाई
- (B) सतारा
- (C) करणा
- (D) सुरमण्डल
सुरमण्डल एक तत् वाद्य है जिसमें तार होते हैं और इसे बजाने से मधुर ध्वनि निकलती है। इसके विपरीत, सुरनाई, सतारा और करणा सभी सुषिर वाद्य हैं जिन्हें फूँककर बजाया जाता है। इस प्रकार सुरमण्डल को सुषिर वाद्यों में शामिल करना गलत होगा।
28. वाद्य यंत्र 'टामक' का सम्बन्ध क्षेत्र से है?
- (A) मारवाड़
- (B) मेरवाड़ा
- (C) मेवाड़
- (D) मेवात
टामक वाद्ययंत्र का सम्बन्ध राजस्थान के मेवात क्षेत्र से है। यह वाद्य स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं में प्रयुक्त होता है। इसे विशेष रूप से धार्मिक आयोजनों और मेलों में बजाया जाता है। इसकी ध्वनि सामूहिक उत्सवों को अधिक प्रभावशाली बनाती है।
29. घुरालियों' क्या है?
- (A) गरासियों का वाद्ययंत्र
- (B) कालबेलियों का वाद्ययंत्र
- (C) सरगड़ा जाति का वाद्ययंत्र
- (D) भीलों का वाद्ययंत्र
घुरालियों राजस्थान की कालबेलिया जाति का पारंपरिक वाद्ययंत्र है। यह बाँस की खपच्ची से बनाया जाता है और लगभग 5–6 अंगुल लंबा होता है। इसके एक छोर पर धागा बाँधा जाता है और इसे दाँतों के बीच दबाकर बजाया जाता है। यह वाद्य लोकनृत्यों में ताल देने के लिए प्रसिद्ध है।
30. राजस्थान के किस लोकवाद्य को 'ज्यूज हार्प' भी कहा जाता है?
- (A) मोरचंग
- (B) शंख
- (C) नागफणी
- (D) सुरनाई
राजस्थान का पारंपरिक वाद्य मोरचंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यूज हार्प के नाम से जाना जाता है। यह धातु से बना छोटा वाद्ययंत्र है जिसे मुँह के पास रखकर बजाया जाता है। इसकी ध्वनि विशेष और तालबद्ध होती है। यह वाद्य विशेषकर मांगणियार और लंगा कलाकारों द्वारा बजाया जाता है और लोकसंगीत की पहचान है।
31. रावण हत्था को निम्न में से किस से बनाया जाता है?
- (A) बाँस की लकड़ी
- (B) काँच का बर्तन
- (C) नीम की लकड़ी
- (D) नारियल की कटोरी
रावण हत्था राजस्थान का सबसे प्राचीन वाद्ययंत्र माना जाता है। इसे आधे कटे हुए नारियल की कटोरी पर बकरे का चमड़ा चढ़ाकर बनाया जाता है। इसमें लगभग 9 तार होते हैं और इसे गज से बजाया जाता है। यह मुख्य रूप से भोपों द्वारा फड़ वाचन में प्रयोग किया जाता है। लोककथाओं और धार्मिक प्रसंगों को सुनाने में यह वाद्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।
32. करणा भील किस वाद्य का प्रसिद्ध वादक था?
- (A) बांकिया
- (B) नड़
- (C) सतारा
- (D) नगाड़ा
करणा भील राजस्थान का प्रसिद्ध नड़ वादक था। नड़ कैर की लकड़ी से बनी हुई लगभग एक मीटर लंबी नली होती है जिसमें बांसुरी की तरह छेद होते हैं। इसमें मशक से हवा भरकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है। यह वाद्य जैसलमेर क्षेत्र में अधिक प्रचलित है और लोकगीतों व धार्मिक आयोजनों में इसका प्रयोग होता है।
33. चौतारा, कामयचा कौन से लोकवाद्य परंपरा से जुड़े है?
- (A) सुषिर वाद्य
- (B) अवनद्ध वाद्य
- (C) तत् वाद्य
- (D) घन वाद्य
चौतारा और कामायचा दोनों तत् वाद्य हैं। जिन वाद्ययंत्रों से ध्वनि तारों को खींचने या बजाने से निकलती है उन्हें तत् वाद्य कहते हैं। इनमें से कई वाद्यों को गज की सहायता से भी बजाया जाता है जिन्हें वितत वाद्य कहा जाता है। चौतारा और कामायचा विशेषकर मांगणियार और लंगा जातिद्वारा बजाए जाते हैं।
34. मोरचंग एक प्रकार का है-
- (A) लोकगीत
- (B) वेशभूषा
- (C) आभूषण
- (D) वाद्य यंत्र
मोरचंग राजस्थान का एक पारंपरिक घन वाद्य यंत्र है। यह लोहे का बना छोटा वाद्य होता है जिसे मुँह के पास रखकर और उँगलियों से झटके देकर बजाया जाता है। इसकी ध्वनि अनूठी और तालबद्ध होती है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यूज हार्प के नाम से जाना जाता है। यह वाद्य विशेषकर मांगणियार और लंगा कलाकारों में प्रसिद्ध है।
35. लोक वाद्ययंत्र 'भपंग' राजस्थान के किस क्षेत्र से सम्बंधित है?
- (A) शेखावाटी
- (B) मेवात
- (C) मेवाड़
- (D) मारवाड़
भपंग राजस्थान का प्रमुख तत् वाद्य है जो विशेष रूप से मेवात क्षेत्र में प्रचलित है। इसे काँख में दबाकर लकड़ी की छड़ी से बजाया जाता है। यह डमरू जैसा दिखने वाला वाद्य है। इसके प्रमुख कलाकारों में जुहूर खाँ मेवाती और उमर फारूक मेवाती का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। यह वाद्य लोकसंगीत में अलग पहचान रखता है।
36. निम्न में से असुमेलित युग्म छांटिए
- (A) इकतारा – तत् वाद्य
- (B) अलगोजा – सुषिर वाद्य
- (C) झांझ – घन वाद्य
- (D) घुरालियो – अवनद्ध वाद्य
घुरालियो वास्तव में कालबेलियों का सुषिर वाद्य है। इसे बाँस की खपच्ची से बनाया जाता है और धागे की सहायता से बजाया जाता है। इसे दाँतों में दबाकर बजाया जाता है। जबकि इकतारा, अलगोजा और झांझ अपने-अपने सही वर्ग (तत्, सुषिर और घन) में आते हैं। इस प्रकार विकल्प D असुमेलित है।
37. राजस्थान के उमर फारुक मेवाती का सम्बन्ध किस वाद्ययंत्र से था?
- (A) कामायचा
- (B) भपंग
- (C) नगाड़ा
- (D) चिकारा
उमर फारूक मेवाती राजस्थान के प्रसिद्ध भपंग वादक थे। भपंग मेवात क्षेत्र का प्रमुख वाद्य है जो डमरू जैसा दिखता है। इसे काँख में दबाकर लकड़ी की छड़ी से बजाया जाता है। उमर फारूक ने इस वाद्य को राजस्थान ही नहीं बल्कि देशभर में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
38. निम्न में से कौनसा तत् वाद्य नहीं है?
- (A) सतारा
- (B) जन्तर
- (C) रबाज
- (D) चौतारा
सतारा वास्तव में एक सुषिर वाद्य है। यह बांसुरी, अलगोजा और शहनाई का मिश्रित रूप होता है। इसे विशेषकर जैसलमेर, बालोतरा और बाड़मेर क्षेत्र में मुस्लिम कलाकार और गड़रिये बजाते हैं। जबकि जन्तर, रबाज और चौतारा सभी तत् वाद्य हैं।
39. फड़ बांचते समय किस वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जाता है?
- (A) तासा
- (B) रावणहत्था
- (C) करताल
- (D) पखावज
फड़ वाचन राजस्थान की प्राचीन लोककला है जिसमें धार्मिक कथाएँ गाई जाती हैं। फड़ बांचते समय रावणहत्था मुख्य वाद्ययंत्र के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसे गज से बजाया जाता है और इसकी ध्वनि कथावाचन को प्रभावशाली बनाती है। यह भोपों का प्रमुख वाद्य है और इसे लोकधार्मिक परंपरा से जोड़ा जाता है।
40. कौनसा सुषिर वाद्य यंत्र नहीं है?
- (A) मोरचंग
- (B) बांसुरी
- (C) तुरही
- (D) सुरमण्डल
सुरमण्डल एक तत् वाद्ययंत्र है जिसमें तार लगे होते हैं और इन्हें बजाकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है। इसके विपरीत मोरचंग, बांसुरी और तुरही सभी सुषिर वाद्य हैं जिन्हें हवा फूँककर बजाया जाता है। इसलिए सही उत्तर सुरमण्डल है क्योंकि यह सुषिर वाद्य नहीं है।
राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र MCQ – सभी भाग:
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