राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र (Folk Instruments of Rajasthan) MCQ – Part 3
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें रावणहत्था, ताशा, मशक, कामायचा, नौबत, पखावज, सुरमंडल, जन्तर, नगाड़ा, अलगोजा आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र
- Question: 41 से 60
- Last Updated:
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41. राजस्थान का एकमात्र ऐसा लोक वाद्य जिसकी डोटी में तनाव के लिए पखावज की तरह लकड़ी के गुटके डाले जाते हैं?
- (A) रावलों की मादल
- (B) लेजिम गरासिया
- (C) डैरू
- (D) खंजरी
रावलों की मादल राजस्थान का विशेष लोक वाद्य है। इसमें पखावज की तरह डोटी में लकड़ी के गुटके डाले जाते हैं ताकि तार और चमड़े में उचित तनाव पैदा हो। इसे धार्मिक आयोजनों, मेलों और लोकसंगीत में प्रयोग किया जाता है। यह मादल राजस्थान की लोक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
42. राजस्थान का राज्य वाद्य है?
- (A) रावणहत्था
- (B) अलगोजा
- (C) कामायचा
- (D) शहनाई
राजस्थान का राज्य वाद्य अलगोजा है। यह दो बांसुरियों से मिलकर बना होता है जिनमें 4–7 छिद्र होते हैं। वादक इन्हें एक साथ मुँह में रखकर बजाता है। यह भील और कालबेलिया जाति में प्रचलित है और सामान्यतः कैर की लकड़ी से बनाया जाता है। अलगोजा की मधुर ध्वनि लोकसंगीत को जीवंत बनाती है।
43. निम्नलिखित में से कौनसा सुषिर वाद्य यंत्र है?
- (A) कामायचा
- (B) ढप
- (C) ताशा
- (D) मशक
मशक एक सुषिर वाद्य है जिसे बकरे की खाल से बनाया जाता है। यह आधुनिक बैगपाइपर जैसा दिखता है। इसमें हवा मुँह से भरी जाती है और दूसरी ओर लगी नलियों से ध्वनि निकलती है। इसे काँख में दबाकर बजाया जाता है। कामायचा तार वाला, ढप और ताशा अवनद्ध वाद्य हैं।
44. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म सही है-
- (A) खड़ताल – सुषिर वाद्य
- (B) रबाब – तत् वाद्य
- (C) बाँकिया – घन वाद्य
- (D) डेरू – सुषिर वाद्य
रबाब एक प्रमुख तत् वाद्य है जिसमें तार होते हैं और इन्हें गज से बजाया जाता है। खड़ताल वास्तव में घन वाद्य है, बाँकिया सुषिर वाद्य है और डेरू अवनद्ध वाद्य है। अतः केवल रबाब–तत् वाद्य का युग्म सही है।
45. धातु की अर्द्ध अण्डाकार कुण्डी को भैंसे की खाल से मढ़कर चमड़े की डोरियों से कसकर लकड़ी के डंडों से बजाया जाने वाला लोक वाद्य कहलाता है?
- (A) ढाक
- (B) रमझौल
- (C) नौबत
- (D) पखावज
इस विवरण के अनुसार वाद्य नौबत है। यह एक विशेष लोक वाद्य है जिसमें धातु की अर्ध-अंडाकार कुण्डी होती है जिसे भैंसे की खाल से मढ़ा जाता है। इसे चमड़े की डोरियों से कसकर तैयार किया जाता है और फिर लकड़ी के डंडों से बजाया जाता है। यह विशेष अवसरों और धार्मिक आयोजनों में प्रयुक्त होता है।
46. निम्न में से मुँह से बजाया जाने वाला वाद्य यंत्र है?
- (A) धौसा
- (B) मशक
- (C) सुरमंडल
- (D) निशान
मशक एक थैलेनुमा वाद्य है जिसे आधुनिक बैगपाइपर से तुलना की जाती है। यह बकरे की खाल से बनाया जाता है। इसमें एक नली के माध्यम से मुँह से हवा भरी जाती है और दूसरी ओर से दो नलियों से ध्वनि निकलती रहती है। इसे काँख में दबाकर बजाया जाता है और लोकनृत्यों व मेलों में प्रयुक्त किया जाता है।
47. मारवाड़ के जोगियों द्वारा गोपीचंद, भर्तृहरि, निहालदे आदि के ख्याल गाते समय किस वाद्य का प्रयोग किया जाता है?
- (A) भपंग
- (B) सारंगी
- (C) जन्तर
- (D) मशक
सारंगी राजस्थान का प्रमुख तत् वाद्य है जिसे जोगियों द्वारा ख्याल गाते समय बजाया जाता है। इसमें मानवीय स्वर जैसी ध्वनि उत्पन्न होती है। मारवाड़ के जोगी लोककथाओं और संतों की वाणी गाते समय सारंगी का प्रयोग करते हैं, जिससे उनका गायन और भी प्रभावशाली बन जाता है।
48. प्रसिद्ध सुरनाई वादक है-
- (A) पेपे खाँ
- (B) सद्दीक खाँ
- (C) जुहूर खाँ
- (D) कमल साकर खाँ
राजस्थान के प्रसिद्ध सुरनाई वादक पेपे खाँ हैं। सुरनाई शहनाई और टोटो से मिलता-जुलता वाद्य है। यह मुख्य रूप से मांगलिक अवसरों और विवाह समारोहों में बजाया जाता है। शहनाई को शास्त्रीय वाद्य माना जाता है जबकि सुरनाई लोक वाद्य है। पेपे खाँ ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई।
49. निम्न में से राजस्थान का लोकवाद्य है?
- (A) मोरचा
- (B) नोबत
- (C) नगाड़ा
- (D) उपर्युक्त सभी
राजस्थान में मोरचा, नौबत और नगाड़ा सभी लोकवाद्य प्रचलित हैं। ये वाद्य प्राचीन काल से धार्मिक उत्सवों, मेलों, लोकनाट्यों और युद्धों में बजाए जाते रहे हैं। इनकी ध्वनि समूह में ऊर्जा और जोश भर देती है। इसलिए सही उत्तर "उपर्युक्त सभी" है क्योंकि तीनों ही राजस्थान के लोकवाद्य हैं।
50. जो वाद्य फूंक मार कर बजाये जाते हैं, उन्हें कहा जाता है?
- (A) घन
- (B) सुषिर वाद्य
- (C) अवनद्ध
- (D) तत्
जिन वाद्यों में हवा फूँकने से ध्वनि उत्पन्न होती है उन्हें सुषिर वाद्य कहा जाता है। इनमें बांसुरी, तुरही, शहनाई, नड़ और मशक जैसे वाद्य आते हैं। ये वाद्य राजस्थान के लोकसंगीत में प्रमुख स्थान रखते हैं और धार्मिक अवसरों तथा मेलों में इनका प्रयोग होता है।
51. सारंगी' किस प्रकार का वाद्ययंत्र है?
- (A) सुषिर
- (B) घन
- (C) तत्
- (D) अवनद्ध
सारंगी राजस्थान और उत्तर भारत का प्रसिद्ध तत् वाद्ययंत्र है। इसे गज से बजाया जाता है और इसकी ध्वनि मानवीय आवाज जैसी लगती है। लोकसंगीत और शास्त्रीय संगीत दोनों में सारंगी का अत्यधिक महत्व है। इसे मांगणियार और लंगा कलाकार प्रमुखता से बजाते हैं।
52. सुरिन्दा किस प्रकार का वाद्ययंत्र है?
- (A) अवनद्ध
- (B) घनवाद्य
- (C) सुषिर
- (D) तत्
सुरिन्दा एक तत् वाद्ययंत्र है। इसे गज से बजाया जाता है और यह रोहिड़े की लकड़ी से बनाया जाता है। इसे विशेषकर राजस्थान की लंगा जाति गाती-बजाती है। इसका प्रयोग मुरला और सतारा जैसे सुषिर वाद्यों की संगत में होता है।
53. निम्न में से कौन, तार वाला वाद्य यंत्र नहीं है?
- (A) सुरमंडल
- (B) रावणहत्था
- (C) ताशा
- (D) कमायचा
ताशा एक अवनद्ध वाद्य यंत्र है, जिसे चमड़े पर मारकर बजाया जाता है। जबकि सुरमंडल, रावणहत्था और कमायचा सभी तार (तत्) वाद्य यंत्र हैं। ये तारों से ध्वनि उत्पन्न करते हैं। इसलिए ताशा बाकी तीनों से अलग है।
54. जन्तर' वाद्य यंत्र किसके द्वारा बजाया जाता है?
- (A) देवनारायण जी के भोपे
- (B) पाबू जी के भोपे
- (C) गरासिया जाति
- (D) भील जाति
जन्तर एक तार वाला वाद्य यंत्र है जिसे देवनारायण जी के गुर्जर भोपे फड़ वाचन करते समय बजाते हैं। इसमें 5–6 तार होते हैं और इसका प्रयोग भक्ति व लोककथाओं के गायन में किया जाता है।
55. निम्नलिखित में से फड़ वाचन से सम्बन्धित है?
- (A) भोपे
- (B) कालबेलिया
- (C) सरगड़े
- (D) बनजारे
राजस्थान में फड़ वाचन की परंपरा भोपों द्वारा निभाई जाती है। फड़ धार्मिक कथाओं और लोकदेवताओं जैसे देवनारायण जी और पाबूजी की जीवनगाथा को चित्रित पट्ट पर गाकर सुनाने की कला है। इसमें रावणहत्था जैसे वाद्यों का प्रयोग होता है।
56. निम्न में से कौनसा वाद्य यंत्र तत् वाद्य है?
- (A) रावणहत्था
- (B) मोरचंग
- (C) मुरला
- (D) नड़
रावणहत्था राजस्थान का प्रसिद्ध तत् वाद्ययंत्र है। इसे आधे नारियल की कटोरी पर चमड़ा चढ़ाकर बनाया जाता है और इसमें कई तार लगे होते हैं। यह भोपों का मुख्य वाद्य है जिसे फड़ वाचन के समय प्रयोग किया जाता है।
57. पाबूजी तथा डूंगरजी के भोपे किस वाद्ययंत्र का प्रयोग करते हैं?
- (A) रावणहत्था
- (B) नगाड़ा
- (C) झालर
- (D) नौबत
पाबूजी और डूंगरजी के भोपे अपनी फड़ वाचन परंपरा में मुख्य रूप से रावणहत्था का प्रयोग करते हैं। यह भोपों का सबसे प्रमुख वाद्य है। इसकी ध्वनि कथा गायन को अधिक प्रभावशाली बनाती है और लोकधर्म से गहराई से जुड़ी होती है।
58. मुहर्रम के अवसर पर बजाया जाने वाला प्रसिद्ध वाद्ययंत्र कौनसा है?
- (A) ताशा
- (B) सींगा
- (C) गुजरी
- (D) तुरही
मुहर्रम के अवसर पर ताशा बजाया जाता है। यह अवनद्ध वाद्य है जिसे चमड़े पर डंडों से मारकर बजाया जाता है। इसकी तीव्र और ऊँची ध्वनि जुलूसों और धार्मिक आयोजनों में वातावरण को गूँजायमान बना देती है। राजस्थान में भी इसे विशेष मौकों पर बजाया जाता है।
59. निम्न में से तार लगा वाद्ययंत्र है?
- (A) जन्तर
- (B) लेजिम
- (C) पखावज
- (D) श्रीमंडल
जन्तर राजस्थान का प्रमुख तत् वाद्य है, जिसमें 5–6 तार लगे होते हैं। इसे बजाकर धार्मिक कथाओं और लोकगाथाओं का वाचन किया जाता है। विशेष रूप से देवनारायण जी की फड़ वाचन में भोपों द्वारा जन्तर का प्रयोग किया जाता है। यह वाद्य राजस्थान की लोकपरंपरा का अभिन्न अंग है।
60. ऐसा लोकवाद्य जिसका निर्माण आधे कटे नारियल की कटोरी से होता है?
- (A) रावणहत्था
- (B) मृदंग
- (C) करणा
- (D) मंजीरा
रावणहत्था राजस्थान का सबसे प्राचीन तत् वाद्य है। इसे आधे कटे नारियल की कटोरी पर बकरे की खाल चढ़ाकर बनाया जाता है। इसमें 9 तार होते हैं और इसे गज से बजाया जाता है। यह भोपों का मुख्य वाद्य है और फड़ वाचन में अनिवार्य रूप से प्रयोग किया जाता है।
राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10
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