राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र (Folk Instruments of Rajasthan) MCQ – Part 5
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें नड़, मोरचंग, मुरला, तुरही, करणा, नागफणी, टोटो, भरनी, बांकिया, सारंगी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र
- Question: 81 से 100
- Last Updated:
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81. कौनसा वाद्ययन्त्र अवनद्ध वाद्य यंत्रों में सबसे प्राचीन माना जाता है?
- (A) भरनी
- (B) घुरोलियो
- (C) ढोलक
- (D) टिकोरा
ढोलक को अवनद्ध वाद्ययंत्रों में सबसे प्राचीन माना जाता है। यह लकड़ी के खोखले ढांचे पर चमड़ा चढ़ाकर बनाया जाता है। इसे दोनों ओर से हाथों या डंडों से बजाया जाता है। ढोलक का प्रयोग लोकसंगीत, धार्मिक आयोजनों, विवाह और उत्सवों में प्रमुखता से होता है।
82. कौनसा वाद्ययन्त्र चंग जैसा दिखाई देता है?
- (A) घेरा
- (B) ढप
- (C) मृदंग
- (D) खंजरी
खंजरी चंग जैसा दिखने वाला अवनद्ध वाद्य है। इसे भी गोल लकड़ी के घेरे पर चमड़ा चढ़ाकर बनाया जाता है। अंतर केवल इतना है कि खंजरी आकार में छोटी होती है और इसमें अक्सर झंकार के लिए धातु की झिर्रियाँ लगाई जाती हैं। यह लोकसंगीत और नृत्यों में उपयोगी है।
83. लंगा जाति
- (A) 1234
- (B) 4321
- (C) 1243
- (D) 2134
दुकाको भील समुदाय का वाद्य है। जंतर गुर्जर भोपों द्वारा प्रयोग होता है। चौतारा कामड़ जाति का वाद्य है जबकि मुरला लंगा जाति बजाती है। ये सभी वाद्य अपनी-अपनी जातीय परंपराओं और संगीत से गहराई से जुड़े हुए हैं।
84. काँख में दबाकर बजाया जाने वाला वाद्य यन्त्र, जिसका प्रयोग पूर्वी राजस्थान में सर्वाधिक किया जाता है?
- (A) नगाड़ा
- (B) झांझ
- (C) मशक
- (D) मंजीरा
मशक राजस्थान का लोकप्रिय सुषिर वाद्य है। इसे बकरे की खाल से बनाया जाता है और यह बैगपाइपर जैसा दिखता है। इसे काँख में दबाकर बजाया जाता है। इसमें मुँह से हवा भरकर नलियों के माध्यम से ध्वनि उत्पन्न की जाती है। इसका प्रयोग पूर्वी राजस्थान में बहुत अधिक होता है।
85. एक मीटर लम्बी नलीनुमा वाद्य यन्त्र, जिसका प्रयोग चरवाहों व ऊँटों के रेवड़ वालों द्वारा अधिकतर किया जाता है?
- (A) बांकिया
- (B) नड़
- (C) सतारा
- (D) मोरचंग
नड़ राजस्थान का प्रमुख सुषिर वाद्य है। यह लगभग एक मीटर लंबी नली होती है जिसे कैर की लकड़ी से बनाया जाता है। इसमें छेद होते हैं और इसे फूँककर बजाया जाता है। इसका प्रयोग विशेषकर चरवाहे और ऊँटों के रेवड़ वाले करते हैं।
86. प्रसिद्ध कलाकार बिस्मिल्ला खाँ किस वाद्ययंत्र के लिए जाने जाते हैं?
- (A) बांसुरी वादन
- (B) भपंग वादन
- (C) शहनाई वादन
- (D) सारंगी वादन
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ विश्वप्रसिद्ध शहनाई वादक थे। उन्होंने शहनाई वादन को लोक और शास्त्रीय दोनों परंपराओं में लोकप्रिय बनाया। उनकी शहनाई की ध्वनि को राष्ट्रीय एकता और भारतीय संस्कृति का प्रतीक माना गया। उन्हें भारत रत्न सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए।
87. निम्नलिखित युग्मों में से सही सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूटों में से सत्य कूट का चयन करें।वाद्य यन्त्र - जाति
- (A) मंजीरा - कामड़ जाति की महिलाएँ
- (B) डैरू - गोगाजी के भक्त
- (C) खंजरी - सरगड़ा जाति
- (D) बांकिया - कामड़ जाति के पुरुषA. 1234B. 4321C. 1324D. 2134
सही सुमेलित युग्म 1234 है। मंजीरा का प्रयोग कामड़ जाति की महिलाएँ करती हैं। डैरू गोगाजी के भक्तों से जुड़ा है। खंजरी सरगड़ा जाति से संबंधित है और बांकिया कामड़ जाति के पुरुषों का वाद्य माना जाता है। ये सभी वाद्य राजस्थान की लोकसंस्कृति और धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़े हैं।
88. हरिप्रसाद चौरसिया किस वाद्य यन्त्र के कलाकार है?
- (A) बांसुरी
- (B) भूगल
- (C) सारंगी
- (D) शहनाई
पंडित हरिप्रसाद चौरसिया भारतीय शास्त्रीय संगीत के विश्व प्रसिद्ध बांसुरी वादक हैं। उन्होंने बांसुरी वादन को एक नई ऊँचाई दी और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इनके संगीत की मधुरता और भावपूर्ण धुनों ने श्रोताओं को हमेशा मंत्रमुग्ध किया। इन्हें पद्मविभूषण और कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
89. किस वाद्य यन्त्र को बांसुरी की तरह बजाया जाता है?
- (A) मसक
- (B) अलगोजा
- (C) मुरला
- (D) तुरही
अलगोजा एक पारंपरिक सुषिर वाद्ययंत्र है, जिसमें दो बांसुरियाँ होती हैं। वादक इन्हें एक साथ मुँह में रखकर बजाता है। इसकी धुन बिल्कुल बांसुरी जैसी सुनाई देती है। यही कारण है कि इसे बांसुरी की तरह बजाया जाने वाला वाद्य कहा जाता है। राजस्थान का राज्य वाद्ययंत्र भी अलगोजा है। इसका प्रयोग भील और कालबेलिया जाति प्रमुख रूप से करती है।
90. किस वाद्य यन्त्र का प्रयोग प्राचीनकाल में युद्धों में होता था, वर्तमान में सेना व पुलिस द्वारा भी प्रयोग किया जाता है?
- (A) पुंगी
- (B) नड़
- (C) करणा
- (D) बिगुल
बिगुल एक प्राचीन सुषिर वाद्ययंत्र है। प्राचीन युद्धों में इसे सैनिकों को इकट्ठा करने, युद्ध आरंभ करने या पीछे हटने के संकेत देने के लिए प्रयोग किया जाता था। इसकी ध्वनि तीव्र और ऊँची होती है। आज भी इसका उपयोग सेना और पुलिस परेडों तथा औपचारिक समारोहों में किया जाता है।
91. किस वाद्य यन्त्र का प्रयोग युद्ध में नहीं किया जाता था?
- (A) तुरही
- (B) सींगी
- (C) भरनी
- (D) बिगुल
भरनी एक ऐसा वाद्य है जिसका प्रयोग युद्ध में नहीं किया जाता था। यह मिट्टी के मटके पर काँसे की प्लेट लगाकर बनाया जाता है और लकड़ी की डंडियों से बजाया जाता है। इसका प्रयोग मुख्यतः अलवर, डीग और भरतपुर क्षेत्रों में धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों में होता है। जबकि तुरही, सींगी और बिगुल युद्ध संबंधी संकेतों के लिए प्रयोग किए जाते थे।
92. आधुनिक बैगपाईपर जैसा वाद्य यन्त्र, जिसमें एक नली से हवा भरते हैं और दूसरी तरफ दो नलियों से हवा निकलती है?
- (A) करणा
- (B) नागफणी
- (C) मसकबाजा
- (D) तुरही
मसकबाजा राजस्थान का पारंपरिक वाद्ययंत्र है जिसे आधुनिक बैगपाइप जैसा माना जाता है। यह बकरे की खाल से बने थैले (मसक) से बनाया जाता है। इसमें एक नली से हवा भरी जाती है और दूसरी ओर लगी दो नलियों से स्वर निकलते हैं। इसे काँख में दबाकर बजाया जाता है। ग्रामीण मेलों और लोक उत्सवों में इसका खूब प्रयोग होता है।
93. किस वाद्य यन्त्र के छोटे रूप को ढपली कहा जाता है?
- (A) तासा
- (B) चंग
- (C) मुरला
- (D) टोटो
चंग राजस्थान का एक पारंपरिक अवनद्ध वाद्ययंत्र है। इसका छोटा रूप ढपली कहलाता है। चंग गोलाकार लकड़ी के घेरे पर चमड़ा चढ़ाकर बनाया जाता है। यह होली और फागोत्सव जैसे अवसरों पर विशेष रूप से बजाया जाता है। इसकी थाप पर गाए जाने वाले गीत और किए जाने वाले नृत्य लोक संस्कृति की विशेष पहचान हैं।
94. किस वाद्ययन्त्र को फूंक मारकर नहीं बजाया जाता है?
- (A) मोरचंग
- (B) मुरला
- (C) शंख
- (D) नागफणी
मोरचंग एक अनोखा वाद्य है जिसे फूंक मारकर नहीं बजाया जाता। इसे होंठों के बीच दबाकर और उंगलियों से कंपन देकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है। इसे "ज्यूज हार्प" भी कहा जाता है। हालांकि इसे सुषिर वाद्ययंत्र की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन इसकी ध्वनि उत्पन्न करने की शैली अलग है। यह राजस्थान के लोकसंगीत में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
95. सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूटों में से सत्य कूट का चयन करें।वाद्य यन्त्र - प्रयोग
- (A) झांझ – कच्छी घोड़ी नृत्य
- (B) मांदल – गवरी नाट्य
- (C) घेरा – गीदड़ नृत्य
- (D) तंदूरा – तेरहताली नृत्यA. 1234B. 4321C. 1324D. 2134
सही सुमेलित युग्म 1234 है। झांझ का प्रयोग कच्छी घोड़ी नृत्य में, मांदल का प्रयोग गवरी नाट्य में, घेरा का प्रयोग गीदड़ नृत्य में और तंदूराका प्रयोग तेरहताली नृत्य में किया जाता है। यह सभी वाद्य राजस्थान की लोक संस्कृति और नाट्य परंपराओं का हिस्सा हैं।
96. किस वाद्य यन्त्र का प्रयोग कालबेलियों द्वारा सांपों को मोहित करने के लिए किया जाता है?
- (A) बीन
- (B) नड़
- (C) टोटो
- (D) नागफणी
बीन एक पारंपरिक सुषिर वाद्ययंत्र है। इसे विशेष रूप से कालबेलिया जाति के लोग सांपों को मोहित करने के लिए बजाते हैं। यह एक तुम्बे से बनी होती है, जिसके अगले हिस्से में दो नलियाँ जुड़ी रहती हैं। इसकी धुन सुनकर सांप फन उठाकर लहराने लगता है। बीन राजस्थान की लोक परंपरा और सांप-नृत्य का प्रमुख प्रतीक है।
97. किस वाद्ययन्त्र का निर्माण समुद्री जन्तु के खोल से होता है?
- (A) निसान
- (B) शंख
- (C) टोटो
- (D) बांकिया
शंख समुद्री जीव के खोल से बनाया जाता है। इसे फूँक मारकर बजाया जाता है और यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंदिरों में आरती और शुभ कार्यों के दौरान शंख बजाने की परंपरा है। प्राचीन समय में इसका उपयोग युद्धों की शुरुआत और संकेत देने के लिए भी किया जाता था। इसकी ध्वनि को पवित्र और ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।
98. युद्धों व राजदरबारों में प्रयोग होने वाला वह वाद्ययंत्र, जो देखने में चीलम के आकार जैसा होता है?
- (A) करणा
- (B) पुंगी
- (C) मोरचंग
- (D) सर्सीगा
करणा एक सुषिर वाद्ययंत्र है। यह 8 से 10 फुट लंबा होता है और पीतल की चादर से बनाया जाता है। इसका आकार चीलम जैसा दिखाई देता है। प्राचीन समय में इसका प्रयोग युद्ध के दौरान सैनिकों को संकेत देने और शौर्य जगाने के लिए किया जाता था। आज भी पाली क्षेत्र के कुछ मंदिरों में इसे बजाया जाता है।
99. राजस्थान का सबसे प्राचीन वाद्ययंत्र माना जाता है?
- (A) तंदूरा
- (B) सारंगी
- (C) रावणहत्था
- (D) कामायचा
रावणहत्था राजस्थान का सबसे प्राचीन वाद्ययंत्र माना जाता है। इसे नारियल के खोल और बकरे की खाल से बनाया जाता है और इसमें तार लगाए जाते हैं। भोपे फड़ वाचन करते समय इसका प्रयोग करते हैं। इसकी ध्वनि लोककथाओं और धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष महत्व रखती है। यह राजस्थान की लोकसंस्कृति का प्रतीक है।
100. नारद जी व मीरां बाई का वाद्ययंत्र कहलाता है?
- (A) तंबूरा
- (B) इकतारा
- (C) कामायचा
- (D) भपंग
इकतारा एक तंतुवाद्य है जिसमें केवल एक तार होता है। इसे संत नारद और संत मीरां बाई का प्रिय वाद्ययंत्र माना जाता है। भक्ति गीतों और कीर्तन में इसका प्रयोग प्रमुखता से होता है। सरल संरचना होने के बावजूद इसकी ध्वनि भक्ति और आध्यात्मिकता से भर देती है। यह भक्तिकाल की परंपरा का प्रतीक है।
राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10
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