राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र (Folk Instruments of Rajasthan) MCQ – Part 6
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें भपंग, नगाड़ा, टिकोरा, मोरचंग, खंजरी, बांसुरी, बांकिया, शंख, माठ, डमरू आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र
- Question: 101 से 120
- Last Updated:
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101. कौनसा वाद्ययंत्र अवनद्य वाद्य नहीं है?
- (A) टिकोरा
- (B) माठ
- (C) डमरू
- (D) ढोल
टिकोरा अवनद्य नहीं बल्कि घन वाद्ययंत्र है। इसे धातु से बनाया जाता है और पूजा, आरती व धार्मिक अनुष्ठानों में बजाया जाता है। जबकि माठ, डमरू और ढोल सभी अवनद्य वाद्य हैं क्योंकि इन्हें चमड़े पर प्रहार करके ध्वनि उत्पन्न की जाती है।
102. निम्न में से तत् वाद्य है?
- (A) टिकोरा
- (B) मृदंग
- (C) भपंग
- (D) नौबत
भपंग एक पारंपरिक तंतुवाद्य है। यह डमरू जैसा दिखता है और कटे हुए तुम्बे से बनाया जाता है। इसके एक सिरे पर चमड़ा मढ़ा होता है। इसे कांख में दबाकर और लकड़ी की मदद से बजाया जाता है। यह मेवात क्षेत्र का लोकप्रिय वाद्ययंत्र है और इसके कई प्रसिद्ध कलाकार भी रहे हैं।
103. कौनसा वाद्ययंत्र घनवाद्य है?
- (A) सुरिन्दा
- (B) श्रीमंडल
- (C) गुजरी
- (D) चिकारा
सुरिन्दा को घन वाद्ययंत्र माना जाता है। इसकी बनावट झाड़ीनुमा पौधे जैसी होती है और लकड़ी के स्टैंड पर 8 से 16 गोल धातु की प्लेटें लटकती हैं। इन्हें लकड़ी की डंडियों से बजाया जाता है। इसकी ध्वनि का उपयोग मेलों और लोकनृत्यों में वातावरण को जीवंत बनाने के लिए किया जाता है।
104. कौनसा तत् वाद्ययंत्र भील समुदाय द्वारा घुटनों में दबाकर बजाया जाता है?
- (A) भपंग
- (B) नगाड़ा
- (C) दुकाको
- (D) माटी
दुकाको एक पारंपरिक तंतुवाद्य है। इसे भील समुदाय विशेष रूप से बजाता है। इसे घुटनों के बीच दबाकर और तारों को हाथ से छेड़कर बजाया जाता है। दुकाको की ध्वनि उनके लोकगीतों और सांस्कृतिक आयोजनों का अभिन्न हिस्सा है। यह भीलों की परंपरा और संस्कृति को दर्शाता है।
105. कौनसा वाद्य यंत्र मुख्यतः पश्चिमी राजस्थान में बजाया जाता है?
- (A) सुरमंडल
- (B) अपंग
- (C) बम
- (D) भयंग
सुरमंडल पश्चिमी राजस्थान का प्रसिद्ध तंतुवाद्य है। इसमें कई तार होते हैं जिन्हें उंगलियों से बजाया जाता है। इसकी मधुर ध्वनि का उपयोग लोकसंगीत, भजन और शास्त्रीय संगीत में किया जाता है। इसे अक्सर गायक अपने साथ रखते हैं ताकि सुर में सामंजस्य स्थापित हो सके। यह आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाला वाद्ययंत्र माना जाता है।
106. किस वाद्य यंत्र का प्रयोग भरतपुर में रसिया गीत के दौरान किया जाता है?
- (A) दमामा
- (B) नगाड़ा
- (C) मोरचंग
- (D) खंजरी
दमामा लोहे की कड़ाही जैसा बना एक बड़ा वाद्ययंत्र है, जिसकी ऊँचाई लगभग तीन फीट होती है। इसे भैंसे की खाल से मंढ़ा जाता है और लकड़ी के भारी डंडों से बजाया जाता है। भरतपुर क्षेत्र में यह विशेष रूप से रसिया गीत के दौरान प्रयोग किया जाता है। इसकी गूंजदार ध्वनि माहौल को जीवंत कर देती है और यह लोक संगीत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
107. मेवात में लोकप्रिय वाद्ययंत्र जिसे काँख में दबाकर एक हाथ से लकड़ी के टुकड़े से बजाया जाता है?
- (A) मांदल
- (B) भपंग
- (C) मसक
- (D) जंतर
भपंग एक पारंपरिक तत् वाद्ययंत्र है जो मेवात क्षेत्र में विशेष रूप से लोकप्रिय है। इसे डमरू जैसा समझा जाता है लेकिन यह कटे हुए तुम्बे से बनाया जाता है और इसके एक सिरे पर चमड़ा मंढ़ा होता है। वादक इसे काँख में दबाकर एक हाथ से लकड़ी के टुकड़े की मदद से बजाता है। इसकी ध्वनि लोकगीतों और फड़ वाचन में विशेष आकर्षण जोड़ती है।
108. निम्न में से कौनसा युग्म (वाद्ययंत्र-प्रकार) सुमेलित नहीं है?
- (A) ताशा-अवनद्य
- (B) सिंगी-सुषिर
- (C) नड़-घन
- (D) भपंग-तत्
नड़ सुषिर वाद्ययंत्र है, जो केर या कैर की लकड़ी से बनाया जाता है। यह एक मीटर लंबा होता है और बांसुरी की तरह छेदों वाला होता है। चरवाहे और ऊँटों के रेवड़ वाले इसका प्रयोग करते हैं। जबकि इसे गलती से घन वाद्ययंत्र की श्रेणी में रख दिया गया है, इसलिए यह युग्म असंगत है।
109. करताल किस प्रकार का वाद्ययंत्र है?
- (A) तत् वाद्ययंत्र
- (B) अवनद्य वाद्ययंत्र
- (C) सुषिर वाद्ययंत्र
- (D) घनवाद्य यंत्र
करताल एक घनवाद्य यंत्र है, जिसमें दो चौकोर लकड़ी के टुकड़े होते हैं। इन लकड़ियों में पीतल की छोटी-छोटी तश्तरियाँ लगी होती हैं। जब इन्हें हाथों में पकड़कर टकराया जाता है तो मधुर झंकार उत्पन्न होती है। यह वाद्य विशेष रूप से लोकसंगीत और भजन मंडलियों में प्रयोग किया जाता है।
110. ऐसे वाद्ययंत्र जो चमड़े से बनाये जाते हैं क्या कहलाते हैं?
- (A) तत् वाद्ययंत्र
- (B) सुषिर वाद्ययंत्र
- (C) अवनद्य वाद्ययंत्र
- (D) घनवाद्य यंत्र
जिन वाद्ययंत्रों को चमड़े से बनाया जाता है और जिन पर चोट या थाप से ध्वनि उत्पन्न होती है, उन्हें अवनद्य वाद्ययंत्र कहा जाता है। उदाहरणस्वरूप नगाड़ा, ढोल, पखावज और मांदल। इन वाद्यों का प्रयोग लोकनृत्यों, धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक अवसरों पर ध्वनि व ताल देने के लिए किया जाता है।
111. तत् वाद्ययंत्र
- (A) 1234
- (B) 4231
- (C) 1324
- (D) 2134
चिमटा – घनवाद्य यंत्र है।
112. निम्न में से कौनसा वाद्ययंत्र अवनद्य है?
- (A) करणा
- (B) तुरही
- (C) नगाड़ा
- (D) मुरला
नगाड़ा एक अवनद्य वाद्ययंत्र है, जिसे चमड़े से बनाया जाता है। यह मांगलिक अवसरों और धार्मिक आयोजनों में शहनाई के साथ बजाया जाता है। नगाड़ा आमतौर पर जोड़े में बजाया जाता है, जिसमें एक बड़ा (नर) और एक छोटा (मादा) नगाड़ा होता है। यह आकार में नौबत से छोटा होता है और लोकसंगीत में गूंजदार ध्वनि उत्पन्न करता है।
113. सुषिर वाद्ययंत्रों में सबसे छोटा वाद्ययंत्र कौनसा है?
- (A) मोरचंग
- (B) बांसुरी
- (C) बिगुल
- (D) टोटो
मोरचंग एक अत्यंत छोटा सुषिर वाद्ययंत्र है। इसे लोहे से बनाया जाता है और बजाते समय होंठों के बीच दबाकर उंगलियों से कंपन दिया जाता है। इसमें सीधे फूँक नहीं मारी जाती, लेकिन इसकी ध्वनि गले की कंपन और साँस के उतार-चढ़ाव से उत्पन्न होती है। यह लोकसंगीत में ताल और विशेष लय देने के लिए प्रयुक्त होता है।
114. निम्न में से किस वाद्ययंत्र को 'रणभेरी' भी कहा जाता है?
- (A) मुरली
- (B) बांकिया
- (C) शंख
- (D) भूगल
भूगल एक लंबा सुषिर वाद्ययंत्र है, जो देखने में सींग जैसा लगता है। इसे प्राचीनकाल में युद्ध के समय सैनिकों को इकट्ठा करने और संकेत देने के लिए बजाया जाता था। इसी कारण इसे रणभेरी भी कहा जाता है। आज भी इसे धार्मिक आयोजनों और ग्रामीण मेलों में बजते हुए देखा जा सकता है।
115. किस वाद्ययंत्र का सम्बन्ध नारद जी से जोड़ा गया है?
- (A) इकतारा
- (B) रावणहत्था
- (C) कामायचा
- (D) सारंगी
नारद जी को सदा हाथ में इकतारा लिए हुए दिखाया जाता है। इकतारा एक सरल तत् वाद्ययंत्र है, जिसमें एक ही तार होता है और इसे लोकगायक भक्ति गीत गाते समय प्रयोग करते हैं। यह संतों और साधुओं का प्रिय वाद्ययंत्र रहा है और मीरा बाई से भी इसका संबंध बताया गया है।
116. सपेरों का कौन सा वाद्ययंत्र है?
- (A) बांसुरी
- (B) नड़
- (C) पूंगी
- (D) बांकिया
पूंगी सपेरों का प्रमुख वाद्ययंत्र है। यह एक सुषिर वाद्ययंत्र है, जिसे बांस या लकड़ी की नली और सूखे तुम्बे से बनाया जाता है। इसे बजाकर सपेरे साँपों को नचाने का काम करते हैं। इसकी ध्वनि तीखी और मोहक होती है।
117. निम्न में से कौनसा अवनद्य वाद्ययंत्र नहीं है?
- (A) धौसा
- (B) ढाक
- (C) खंजरी
- (D) घुरालियो
घुरालियो एक घन वाद्ययंत्र है, न कि अवनद्य। यह बाँस की खपच्ची से बनाया जाता है और छोटे आकार का होता है। इसे दाँतों के बीच दबाकर और धागे की सहायता से बजाया जाता है। जबकि अवनद्य वाद्य चमड़े पर थाप से बजते हैं, जैसे ढाक और धौसा।
118. निम्न में से कौनसा घनवाद्य यंत्र नहीं है?
- (A) शंख
- (B) करताल
- (C) खड़ताल
- (D) झालर
शंख वास्तव में एक सुषिर वाद्ययंत्र है। यह समुद्री घोंघे के खोल से बनता है और इसमें फूँक मारकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है। शंख का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों और युद्ध के संकेत के रूप में किया जाता था। जबकि करताल, खड़ताल और झालर घनवाद्य यंत्र हैं।
119. जिन वाद्ययंत्रों को गज की सहायता से बजाया जाता है, वे कहलाते हैं?
- (A) अवनत वाद्ययंत्र
- (B) ताल वाद्ययंत्र
- (C) वितत वाद्ययंत्र
- (D) सुर वाद्ययंत्र
जिन वाद्ययंत्रों में गज (धनुषनुमा छड़ी) का प्रयोग करके ध्वनि निकाली जाती है, वे वितत वाद्ययंत्र कहलाते हैं। जैसे सारंगी, रावणहत्था, कमायचा आदि। इन वाद्यों में तार होते हैं और गज से रगड़ने पर मधुर संगीत उत्पन्न होता है।
120. निम्न में से वाद्ययंत्र व उसमें प्रयुक्त लकड़ी का असुमेलित युग्म है?
- (A) सुरनाई - शीशम की लकड़ी
- (B) सुरिन्दा - रोहिड़े की लकड़ी
- (C) नड़ - कैर की लकड़ी
- (D) अलगोजा - शीशम की लकड़ी
अलगोजा के निर्माण में शीशम नहीं, बल्कि कैर की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। यह राजस्थान का राज्य वाद्ययंत्र है और इसे दो बांसुरियों को एक साथ बजाकर वादन किया जाता है। शेष युग्म सही हैं।
राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र MCQ – सभी भाग:
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