राजस्थान के मेले व महोत्सव MCQ Questions with Answers

राजस्थान के मेले व महोत्सव MCQ (Fairs and Festivals of Rajasthan) – Part 4

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के मेले व महोत्सव से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में जीणमाता का मेला सीकर, नारायणी माता का मेला अलवर, दधिमति माता का मेला नागौर, सीताबाड़ी मेला बारां, चन्द्रभागा मेला (झालरापाटन, झालावाड़), भर्तृहरि मेला अलवर, धौलागढ़ देवी का प्रसिद्ध मेला अलवर, फूलडोल मेला शाहपुरा (भीलवाड़ा), लाल्या काल्या मेला अजमेर, कल्याणजी का प्रसिद्ध मेला टोंक आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के मेले व महोत्सव
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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61. जीणमाता का मेला राजस्थान के किस जिले में वर्ष में दो बार आयोजित होता है?

  • (A) सिरोही
  • (B) सीकर
  • (C) सवाई माधोपुर
  • (D) जालौर

जीणमाता का मेला सीकर जिले में प्रतिवर्ष दो बार चैत्र और आश्विन नवरात्रों में आयोजित होता है। जीणमाता शेखावाटी क्षेत्र की लोकदेवी और चौहान वंश की कुलदेवी मानी जाती हैं। इन्हें मधुमक्खी देवी भी कहा जाता है। यहाँ भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए आते हैं। यह मेला धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।

62. नारायणी माता (अलवर) का मेला किस तिथि को आयोजित होता है?

  • (A) चैत्र शुक्ल 13
  • (B) कार्तिक शुक्ल 4
  • (C) अश्विन शुक्ल 14
  • (D) वैशाख शुक्ल 11

नारायणी माता का मेला अलवर जिले के बरवा डूंगरी में वैशाख शुक्ल 11 को आयोजित होता है। यह नाई जाति की कुलदेवी का मंदिर है। इसकी विशेषता यह है कि पूजा-पाठ का कार्य मीणा समाज करता है। इस कारण यहां परंपरागत मान्यताओं को लेकर समय-समय पर विवाद भी होता है। यह मेला धार्मिक आस्था और सामाजिक महत्व का प्रतीक है।

63. दधिमति माता का मेला निम्न में से किस जिले में आयोजित किया जाता है?

  • (A) डूंगरपुर
  • (B) बारां
  • (C) सवाई माधोपुर
  • (D) नागौर

दधिमति माता का मेला नागौर जिले के गोठ मंगलोद गांव में आयोजित होता है। यह दाधिच ब्राह्मणों की कुलदेवी हैं। मंदिर की स्थापत्य शैली "महामारू" है और यहाँ 608 ईस्वी का शिलालेख भी मिला है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ राम से लेकर रावण तक की कथाओं का चित्रण किया गया है, जो इसे ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से विशिष्ट बनाता है।

64. राजस्थान में पतंग उत्सव किस महीने में मनाया जाता है?

  • (A) अप्रैल
  • (B) जून
  • (C) जनवरी
  • (D) सितम्बर

पतंग उत्सव प्रतिवर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर जयपुर में आयोजित किया जाता है। इस दिन पूरा आसमान पतंगों से ढक जाता है और प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। यह उत्सव राजस्थान की पहचान बन चुका है। जैसलमेर में भी फरवरी माह में पतंग उत्सव मनाया जाता है। यह आयोजन पर्यटकों को आकर्षित करता है और राजस्थान की सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन करता है।

65. सीताबाड़ी आदिवासियों का मेला' किस जिले में लगता है?

  • (A) बारां
  • (B) भरतपुर
  • (C) जयपुर
  • (D) बांसवाड़ा

सीताबाड़ी आदिवासी मेला बारां जिले के केलवाड़ा कस्बे में ज्येष्ठ अमावस्या को आयोजित होता है। इसे "सहरिया जनजाति का कुंभ" कहा जाता है। यह हाड़ौती क्षेत्र का सबसे बड़ा आदिवासी मेला है। इसमें आदिवासी समुदाय अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं को प्रदर्शित करते हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ पहुँचकर मेले की शोभा बढ़ाते हैं।

66. निम्न में से किस क्षेत्र में सीताबाड़ी का मेला आयोजित किया जाता है?

  • (A) हाड़ौती में
  • (B) मारवाड़ में
  • (C) बागड़ में
  • (D) मेवाड़ में

सीताबाड़ी मेला बारां जिले के केलवाड़ा कस्बे में आयोजित होता है। यह हाड़ौती क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला माना जाता है। यह मेला सहरिया जनजाति का "कुंभ" कहलाता है और ज्येष्ठ अमावस्या को भरता है। धार्मिक दृष्टि से इस मेले का अत्यंत महत्व है, क्योंकि यहाँ सीता माता से संबंधित पौराणिक मान्यताएँ जुड़ी हुई हैं।

67. राजस्थान में सीताबाड़ी का मेला कहां आयोजित होता है?

  • (A) नोखा
  • (B) तिलवाड़ा
  • (C) केलवाड़ा
  • (D) कोलायत

सीताबाड़ी मेला बारां जिले के केलवाड़ा कस्बे में आयोजित होता है। यह हाड़ौती क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला है और इसे "सहरिया जाति का कुंभ" कहा जाता है। यह वैशाख पूर्णिमा से लेकर ज्येष्ठ अमावस्या तक भरता है। यहाँ तीन प्रमुख कुंड – सीता कुंड, लक्ष्मण कुंड और सूरज कुंड स्थित हैं, जहाँ श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं।

68. राजस्थान में चन्द्रभागा मेला अक्टूबर-नवम्बर में कहाँ आयोजित किया जाता है?

  • (A) कामां (भरतपुर)
  • (B) माउंट आबू
  • (C) चित्तौड़गढ़
  • (D) झालरापाटन

चन्द्रभागा मेला झालरापाटन (झालावाड़) में चन्द्रभागा नदी के किनारे कार्तिक पूर्णिमा को आयोजित होता है। इसे त्रिपुरा पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन कोलायत (बीकानेर), पुष्कर (अजमेर) और कपिलधारा (बारां) में भी मेले भरते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह दिन महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन गुरु नानक जयंती भी पड़ती है।

69. किस मेले को सहरियों का महातीर्थ कुंभ कहा जाता है?

  • (A) बेणेश्वर
  • (B) सीताबाड़ी
  • (C) सालासर
  • (D) कपिलधारा

सीताबाड़ी मेला, जो बारां जिले के केलवाड़ा कस्बे में भरता है, सहरिया जनजाति का महातीर्थ और कुंभ कहलाता है। यह हाड़ौती क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला है। ज्येष्ठ अमावस्या को लगने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालु एकत्र होते हैं और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

70. भर्तृहरि मेला राजस्थान के किस जिले में लगता है?

  • (A) अजमेर
  • (B) अलवर
  • (C) सवाई माधोपुर
  • (D) सिरोही

भर्तृहरि मेला अलवर जिले में आयोजित होता है। यह वर्ष में दो बार लगता है – वैशाख माह में और भाद्रपद शुक्ल सप्तमी-अष्टमी को। इसे "लक्खी मेला" भी कहा जाता है। मुख्यतः मीणा, गुर्जर, अहीर, जाट और बागड़ा जाति के लोग इसमें भाग लेते हैं। कालबेलिया नृत्य इसका मुख्य आकर्षण है और कनफटे साधुओं के कारण इसे "लघु कुंभ" माना जाता है।

71. चन्द्रभागा मेला' राजस्थान के निम्नलिखित में से किस जिले में आयोजित किया जाता है?

  • (A) जयपुर
  • (B) झालावाड़
  • (C) जैसलमेर
  • (D) जालौर

चन्द्रभागा मेला झालावाड़ जिले के झालरापाटन कस्बे में चन्द्रभागा नदी के किनारे भरता है। यह कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होता है। धार्मिक महत्त्व के साथ-साथ यह एक बड़ा पशु मेला भी है। इसी जिले में वैशाख पूर्णिमा को गोमतीसागर मेला भी आयोजित किया जाता है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से प्रसिद्ध है।

72. हाड़ौती का सुरंगा मेला कहा जाता है?

  • (A) पुष्कर मेले को
  • (B) चन्द्रभागा मेले को
  • (C) रामदेवरा मेले को
  • (D) परबतसर मेले को

चन्द्रभागा मेला (झालरापाटन, झालावाड़) को हाड़ौती का सुरंगा मेला कहा जाता है। यह कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर-नवम्बर) पर आयोजित होता है। इस मेले में लाखों श्रद्धालु स्नान और पूजा करते हैं। पशु व्यापार भी यहाँ होता है। तुलना में पुष्कर मेला (अजमेर) भी कार्तिक पूर्णिमा पर लगता है, जबकि रामदेवरा मेला (जैसलमेर) और परबतसर पशु मेला अन्य समय पर आयोजित होते हैं।

73. कौनसा मेला भाद्रपद मास में आयोजित किया जाता है?

  • (A) जसवंत पशु मेला
  • (B) बाणगंगा मेला
  • (C) घुड़ला मेला
  • (D) भर्तृहरि का मेला

भर्तृहरि मेला अलवर जिले में भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को आयोजित होता है। इसे लक्खी मेला भी कहा जाता है। इसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं और साधु-संतों का जमावड़ा होता है। कालबेलिया नृत्य तथा धार्मिक अनुष्ठान इस मेले का मुख्य आकर्षण होते हैं। अन्य विकल्पों में जसवंत पशु मेला भरतपुर में अश्विन शुक्ल पक्ष में, बाणगंगा मेला बैराठ (जयपुर) में वैशाख पूर्णिमा को और घुड़ला मेला मारवाड़ में चैत्र शुक्ल तृतीया को आयोजित होता है।

74. फूलडोल मनाया जाता है?

  • (A) परनामी पंथ
  • (B) वल्लभ पंथ
  • (C) रामस्नेही
  • (D) सतनाम

फूलडोल महोत्सव शाहपुरा (भीलवाड़ा) में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से पंचमी तक आयोजित होता है। यह रामस्नेही सम्प्रदाय से संबंधित है, जिसकी स्थापना संत रामचरण जी ने 1760 ई. में की थी। रामस्नेही सम्प्रदाय निर्गुण उपासना पर जोर देता है। इनके अनुयायी गुलाबी रंग की धोती पहनते हैं, पूर्णतः शाकाहारी होते हैं और मूर्ति पूजा नहीं करते।

75. धौलागढ़ देवी का मेला राजस्थान के किस जिले से जुड़ा है?

  • (A) जोधपुर
  • (B) अलवर
  • (C) जयपुर
  • (D) अजमेर

धौलागढ़ देवी का प्रसिद्ध मेला अलवर जिले के बहटुकलां (कठूमर) में भरता है। यह वैशाख बदी पंचमी से एकादशी तक आयोजित होता है और लक्खी मेला कहलाता है। धौलागढ़ देवी को धोला गोत्र के नागवंशी जाट की पुत्री माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में हुआ था और इसका वर्तमान स्वरूप भरतपुर के शासक सूरजमल द्वारा बनवाया गया।

76. शाहपुरा का फूलडोल मेला किस महीने में आयोजित किया जाता है?

  • (A) चैत्र
  • (B) वैशाख
  • (C) कार्तिक
  • (D) पौष

फूलडोल मेला चैत्र माह में शाहपुरा (भीलवाड़ा) में आयोजित होता है। इसकी परंपरा 1822 से 1826 तक भीलवाड़ा से शुरू हुई और बाद में शाहपुरा में मनाया जाने लगा। धुलण्डी के दिन रामद्वारा से वाणीजी की थाल लेकर इसका शुभारंभ होता है। यह रामस्नेही सम्प्रदाय से जुड़ा हुआ है और इसकी विशेषता है कि इसे अन्य शहरों जैसे उदयपुर में भी कई बार मनाया गया।

77. फूलडोल का मेला कहां लगता है?

  • (A) अजमेर
  • (B) जैसलमेर
  • (C) शाहपुरा
  • (D) अलवर

फूलडोल मेला शाहपुरा (भीलवाड़ा) में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से पंचमी तक आयोजित होता है। धुलण्डी के दिन रामद्वारा से वाणीजी की थाल लेकर इसका शुभारंभ होता है। यह रामस्नेही सम्प्रदाय का प्रमुख मेला है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसमें धार्मिक कथा, संगीत और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं।

78. लाल्या काल्या मेला आयोजित होता है-

  • (A) भरतपुर में
  • (B) जयपुर में
  • (C) भीलवाड़ा में
  • (D) अजमेर में

लाल्या काल्या मेला अजमेर में आयोजित होता है। यह नृसिंह भगवान की जयंती पर आयोजित किया जाता है और अजमेर के बाजार स्थित नृसिंह जी के नोहरे में इसका आयोजन होता है। इस मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसकी विशेषता यह है कि स्थानीय स्तर पर इसे बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

79. कल्याणजी का मेला कहां आयोजित होता है?

  • (A) जयपुर
  • (B) आमेर
  • (C) फालना
  • (D) डिग्गी

कल्याणजी का प्रसिद्ध मेला टोंक जिले के मालपुरा तहसील स्थित डिग्गी में आयोजित होता है। यह खंगारोत शाखा का प्रमुख ठिकाना है और भगवान विष्णु के स्वरूप की पूजा यहां की जाती है। यह मेला वैशाख पूर्णिमा और भादवा एकादशी को भरता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ इसका ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं।

80. मालपुरा तहसील में स्थित डिग्गीपुरी में कल्याणजी का मेला किस भगवान के लिए आयोजित किया जाता है?

  • (A) भगवान विष्णु
  • (B) भगवान शिव
  • (C) भगवान लक्ष्मण
  • (D) भगवान इन्द्र

डिग्गी कल्याणजी का मेला भगवान विष्णु को समर्पित है। यहाँ चतुर्भुज विष्णु की प्रतिमा स्थापित है। मुस्लिम समाज इसे "कलहपीर" कहता है। इसका पुनर्निर्माण मेवाड़ महाराणा संग्राम सिंह ने 1527 ई. में करवाया था। यह मेला वैशाख पूर्णिमा, श्रावण अमावस्या और भादवा शुक्ल एकादशी को आयोजित होता है और इसकी ख्याति राजस्थान के प्रमुख धार्मिक मेलों में है।

राजस्थान के मेले व महोत्सव MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6

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