राजस्थान के मेले व महोत्सव MCQ Questions with Answers

राजस्थान के मेले व महोत्सव MCQ (Fairs and Festivals of Rajasthan) – Part 5

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के मेले व महोत्सव से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में गणेश मंदिर मेला सवाई माधोपुर, बनेश्वर (बेणेश्वर) मेला डूंगरपुर, तेजाजी का मेला नागौर, गोगामेड़ी का मेला हनुमानगढ़, कैलादेवी का मेला करौली, तिलवाड़ा पशु मेला बाड़मेर आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के मेले व महोत्सव
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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81. रणथम्भौर का प्रसिद्ध गणेश मेला कब आयोजित होता है?

  • (A) श्रावण शुक्ल चतुर्दशी
  • (B) भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
  • (C) कार्तिक शुक्ल चतुर्थी
  • (D) आश्विन शुक्ल चतुर्दशी

गणेश मंदिर मेला सवाई माधोपुर जिले के रणथम्भौर दुर्ग के भीतर स्थित गणेश मंदिर में आयोजित होता है। यह मेला भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को लगता है। मंदिर का निर्माण महाराजा हम्मीरदेव चौहान ने करवाया था, लेकिन यहाँ की गणेश प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है। प्रतिमा का स्वरूप त्रिनेत्र गणेशजी का है, जिसमें तीसरा नेत्र ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। यह मेला लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

82. बनेश्वर मेले का आयोजन किस दिन किया जाता है?

  • (A) माघ पूर्णिमा
  • (B) वैशाख पूर्णिमा
  • (C) कार्तिक पूर्णिमा
  • (D) भाद्रपद पूर्णिमा

बनेश्वर (बेणेश्वर) मेला डूंगरपुर जिले के नवटापरा गांव में माघ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक आयोजित होता है। इसे वागड़ का कुंभ और बागड़ का पुष्कर कहा जाता है। यहाँ सोम, माही और जाखम नदियों का संगम है। यह आदिवासियों का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है और संत मावजी की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। इसमें खंडित शिवलिंग की भी पूजा की जाती है।

83. प्रसिद्ध वेणेश्वर धाम कहां स्थित है?

  • (A) नवाटापरा गांव
  • (B) देसूरी गांव
  • (C) भूमगढ़ गांव
  • (D) इनमें से कोई नहीं

प्रसिद्ध वेणेश्वर धाम डूंगरपुर जिले के नवटापरा गांव में स्थित है। यहाँ प्रतिवर्ष माघ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक बेणेश्वर मेला आयोजित होता है। यह स्थान आदिवासी समाज के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। इसे भीलों का कुंभ कहा जाता है और यहाँ तीन नदियों का संगम धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

84. राजस्थान का प्रसिद्ध बेणेश्वर मेला किस माह में भरता है?

  • (A) फाल्गुन
  • (B) माघ
  • (C) आषाढ़
  • (D) पौष

बेणेश्वर मेला माघ माह में डूंगरपुर जिले के नवटापरा गांव में आयोजित होता है। यह मेला माघ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक भरता है। यहाँ खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है। यह आदिवासियों का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है और इसे "भीलों का कुंभ" तथा "बागड़ का पुष्कर" भी कहा जाता है। इसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय भाग लेता है।

85. “आदिवासियों का कुंभ" राजस्थान के कौनसे मेले को कहा जाता है?

  • (A) बेणेश्वर मेला
  • (B) कैला देवी मेला
  • (C) जीणमाता मेला
  • (D) डिग्गी मेला

बेणेश्वर मेला राजस्थान में आदिवासियों का कुंभ कहलाता है। यह डूंगरपुर जिले के नवटापरा गांव में माघ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक भरता है। इसे "भीलों का कुंभ" और "बागड़ का पुष्कर" भी कहा जाता है। यह मेला आदिवासी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक है।

86. आदिवासियों का कुंभ' कहां लगता है?

  • (A) डूंगरपुर जिले में
  • (B) बांसवाड़ा जिले में
  • (C) उदयपुर जिले में
  • (D) प्रतापगढ़ जिले में

आदिवासियों का कुंभ डूंगरपुर जिले के नवटापरा गांव में लगने वाले बेणेश्वर मेले को कहा जाता है। यह माघ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक भरता है। यहाँ सोम, माही और जाखम नदियों का संगम होता है। आदिवासी समाज इसे अत्यधिक श्रद्धा से मानता है और इसे "भीलों का कुंभ" तथा "बागड़ का पुष्कर" भी कहा जाता है।

87. पाली जिले के विराटिया खुर्द में भरने वाला मेला सम्बन्धित है-

  • (A) भूरिया बाबा
  • (B) दरियाव जी
  • (C) रामदेव जी
  • (D) खेतेश्वर महाराज

विराटिया खुर्द (पाली) का प्रसिद्ध मेला लोकदेवता रामदेव जी से संबंधित है। रामदेव जी को रुणेचा धणी और कृष्ण का अवतार माना जाता है। इनके पूजास्थल केवल पाली ही नहीं, बल्कि अजमेर (खुण्डियास), जोधपुर (मसूरिया), चित्तौड़गढ़ (सुरताखेड़ा), बाड़मेर (कोटड़ा) और अलवर (हल्दीना) में भी स्थित हैं। रामदेवरा की यात्रा करने वालों को "जातरु" कहा जाता है।

88. निम्नलिखित में से कौन से मेले और उनके मनाने के महीने का जोड़ा सही नहीं है?

  • (A) खाटू श्यामजी मेला - फाल्गुन
  • (B) पुष्कर मेला - कार्तिक
  • (C) बाबा रामदेवजी का मेला - श्रावण
  • (D) इनमें से कोई नहीं

बाबा रामदेव जी का मेला श्रावण में नहीं, बल्कि भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से ग्यारस तक (भादवा 2-11) जैसलमेर के रुणेचा धाम में भरता है। इसे लक्खी मेला भी कहा जाता है। यह साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है और यहाँ कामड़िया पंथ के अनुयायी विशेष नृत्य-तेरहताली करते हैं। इसलिए विकल्प (C) गलत है।

89. तेजाजी का मेला कहां आयोजित होता है?

  • (A) मेड़ता सिटी (नागौर)
  • (B) परबतसर (नागौर)
  • (C) देशनोक (बीकानेर)
  • (D) गोगामेडी (गंगानगर)

तेजाजी का मेला नागौर जिले के परबतसर में आयोजित होता है। यह मेला लोकदेवता वीर तेजाजी की स्मृति में श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक भरता है। इसे नागौरी बैलों की खरीद-बिक्री के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। आर्थिक दृष्टि से यह राजस्थान का सबसे बड़ा पशु मेला है।

90. किसकी स्मृति में परबतसर का मेला आयोजित किया जाता है?

  • (A) गोगाजी
  • (B) तेजाजी
  • (C) रामदेवजी
  • (D) जाम्भोजी

परबतसर का प्रसिद्ध मेला लोकदेवता वीर तेजाजी की स्मृति में आयोजित होता है। यह श्रावण पूर्णिमा से लेकर भाद्रपद अमावस्या तक चलता है। नागौर क्षेत्र का यह मेला मुख्य रूप से नागौरी बैलों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। पशु व्यापार के दृष्टिकोण से यह राजस्थान का सबसे बड़ा मेला है और इसे "तेजाजी पशु मेला" कहा जाता है।

91. राजस्थान का 'तेजाजी पशु मेला' निम्नांकित नस्लों में से किस एक के लिए प्रसिद्ध है?

  • (A) नाचना ऊंट
  • (B) मुर्रा भैंस
  • (C) चोखला भेड़
  • (D) नागौरी गाय

राजस्थान का तेजाजी पशु मेला नागौरी नस्ल के बैलों और गायों के लिए प्रसिद्ध है। यह परबतसर (नागौर) में श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक आयोजित होता है। नागौरी बैल अपनी शक्ति और परिश्रम के लिए प्रसिद्ध हैं। इस मेले में हजारों पशुपालक आते हैं और पशुओं का व्यापार होता है।

92. राजस्थान में निम्नलिखित में से किस स्थान पर तेजाजी की स्मृति पशु मेला आयोजित होता है?

  • (A) देशनोक
  • (B) आसीन्द
  • (C) परबतसर
  • (D) तिलवाड़ा

तेजाजी की स्मृति में पशु मेला नागौर जिले के परबतसर में आयोजित होता है। यह मेला श्रावण पूर्णिमा से लेकर भाद्रपद अमावस्या तक भरता है। नागौरी बैलों की प्रसिद्ध नस्ल के कारण यह मेला पूरे देश में जाना जाता है। लोकदेवता तेजाजी की वीरता और लोकविश्वास के कारण इस मेले की विशेष पहचान है।

93. गोगाजी का प्रमुख मेला गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) में भरता है जबकि दूसरा मेला कहां भरता है?

  • (A) नेवटपुर (डूंगरपुर)
  • (B) गोगाजी की ओल्डी (सांचौर)
  • (C) राश्मी गांव (चित्तौड़गढ़)
  • (D) कोलूमण्ड (जोधपुर)

गोगाजी के प्रमुख मेलों में गोगामेड़ी (हनुमानगढ़), ददरेवा (चुरू) और गोगाजी की ओल्डी (सांचौर, जालौर) शामिल हैं। इन्हें धुरमेड़ी, शीर्षमेड़ी और ओल्डी के नाम से भी जाना जाता है। गोगाजी की लोककथाओं में गुरु गोरखनाथ और वाद्य यंत्र डेरू तथा मांदल का विशेष महत्व है।

94. गोगाजी का मेला किस माह में भरता है?

  • (A) भाद्रपद
  • (B) माघ
  • (C) फाल्गुन
  • (D) श्रावण

गोगाजी का प्रमुख मेला भाद्रपद कृष्ण नवमी को आयोजित होता है, जिसे गोगा नवमी भी कहा जाता है। गोगाजी को साँपों के देवता माना जाता है और इस दिन श्रद्धालु विशेष रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। राजस्थान में इसे सांपों के प्रति आस्था और श्रद्धा का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है।

95. गोगामेढ़ी का मेला इस जिले में लगता है-

  • (A) हनुमानगढ़
  • (B) गंगानगर
  • (C) बीकानेर
  • (D) इनमें कोई नहीं

गोगामेड़ी का मेला हनुमानगढ़ जिले के नोहर तहसील में भाद्रपद कृष्ण नवमी को आयोजित होता है। इसे धुरमेड़ी भी कहा जाता है। गोगाजी के अन्य प्रसिद्ध मेले ददरेवा (चुरू) और ओल्डी (सांचौर, जालौर) में भी लगते हैं। गोगा भक्त इन्हें विशेष श्रद्धा से मानते हैं और गोगाजी को "जहांगीर" की उपाधि भी दी गई थी।

96. बोहरा समाज का उर्स कहां भरता है?

  • (A) बाड़मेर
  • (B) अजमेर
  • (C) गलियाकोट
  • (D) उदयपुर

दाऊदी बोहरा समाज का प्रमुख उर्स गलियाकोट (डूंगरपुर) में भरता है। यह माही नदी के किनारे स्थित है और सैय्यद फखरूद्दीन शाह की मज़ार-ए-मकबरा यहाँ स्थित है। उर्स मोहर्रम के 27वें दिन मनाया जाता है। यह स्थान बोहरा समाज का आस्था केंद्र माना जाता है और हजारों अनुयायी इस अवसर पर यहाँ इकट्ठा होते हैं।

97. केलादेवी' का मेला कब लगता है?

  • (A) चैत्र-कृष्ण पक्ष
  • (B) चैत्र-शुक्ल पक्ष
  • (C) वैशाख-शुक्ल पक्ष
  • (D) वैशाख-कृष्ण पक्ष

कैलादेवी का मेला करौली जिले में चैत्र शुक्ल पक्ष की अष्टमी को भरता है। कैलादेवी करौली राजवंश और यादववंश की कुलदेवी हैं। यहाँ बलि देने की परंपरा नहीं है। मेला लक्खी मेला कहलाता है और इसमें जोगनिया नृत्य और लांगुरिया गीत प्रमुख आकर्षण हैं। मूलतः इस मंदिर की स्थापना साधु केदारगिरी ने 1114 ई. में की थी और बाद में महाराजा गोपाल सिंह ने इसका पुनर्निर्माण करवाया।

98. ……को मूल रूप से मांड महोत्सव के रूप में जाना जाता है।

  • (A) मारवाड़
  • (B) कोलायत
  • (C) चन्द्रभागा
  • (D) कबीर यात्रा

मांड महोत्सव को आज मारवाड़ महोत्सव के नाम से जाना जाता है। यह जोधपुर में आश्विन माह (सितम्बर-अक्टूबर) में शरद पूर्णिमा पर आयोजित होता है। इसका आयोजन उम्मेद भवन, मडोर और मेहरानगढ़ किले में होता है। इसका उद्देश्य मारवाड़ की लोकसंस्कृति और लोककला को प्रदर्शित करना है। इसी प्रकार मरु महोत्सव जैसलमेर और थार महोत्सव बाड़मेर में आयोजित होते हैं।

99. लांगुरिया' राजस्थान के किस मेले से संबंधित है?

  • (A) पुष्कर मेला
  • (B) दशहरा मेला
  • (C) भर्तृहरि मेला
  • (D) कैलादेवी मेला

लांगुरिया गीत और जोगनिया नृत्य कैलादेवी मेले की विशेष पहचान हैं। कैलादेवी करौली जिले में स्थित हैं और यादववंश की कुलदेवी मानी जाती हैं। यह मेला चैत्र शुक्ल अष्टमी को लक्खी मेले के रूप में भरता है। यहाँ सिंह पर सवार अष्टभुजा माता की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर के सामने "बोहरा जी की छतरी" भी स्थित है। धार्मिक आस्था और लोकगीत इस मेले को विशेष बनाते हैं।

100. तिलवाड़ा पशु मेला किस लोक देवता की स्मृति में आयोजित किया जाता है?

  • (A) पाबूजी
  • (B) रामदेवजी
  • (C) तेजाजी
  • (D) मल्लीनाथजी

तिलवाड़ा पशु मेला बाड़मेर जिले के लूनी नदी के किनारे भरता है। यह राजस्थान का सबसे पुराना पशु मेला है और इसे रावल मल्लीनाथ की स्मृति में आयोजित किया जाता है। यह चैत्र बदी प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल एकादशी तक चलता है। इसमें थारपारकर और कांकरेज नस्ल के पशुओं का व्यापार होता है। धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से यह मेला अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राजस्थान के मेले व महोत्सव MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6

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