राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ (Musical Schools, Artists, Singing Styles, and Famous Musicians of Rajasthan) MCQ – Part 1
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें लंगा गायन, मांड गायन, हवेली गायन, मांगणियार लोक गीत, अल्ला जिलाई बाई, गवरी बाई, उषा चौहान, मांगी बाई, लाँगुरिया, हींडो आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ
- Question: 1 से 20
- Last Updated:
📌 इस टॉपिक के अन्य भाग (Parts) के लिंक इस पोस्ट के अंतिम प्रश्न के बाद दिए गए हैं।
✍️ Prepared & Reviewed by:
Shiksha247 Rajasthan GK
Faculty & Content Team
(Since 2021)
1. मांड गीत राजस्थान के किस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है?
- (A) बीकानेर
- (B) मेवाड़
- (C) शेखावाटी
- (D) वागड़
मांड गीत का उद्गम मुख्यतः बीकानेर और जैसलमेर क्षेत्र से माना जाता है। यह श्रृंगार प्रधान गायकी है और इसे राजस्थान का शास्त्रीय लोकगीत भी कहा जाता है।
2. नाचगान करने वाली वैश्याओं का वर्ग क्या कहलाता है?
- (A) पातुर
- (B) पासवान
- (C) जोगण
- (D) भगतण
राजस्थान में नाचगान करने वाली वैश्याओं के वर्ग को भगतन कहा जाता है। ये सामाजिक और सांस्कृतिक अवसरों पर नृत्य और गायन प्रस्तुत करती थीं।
3. निम्न में से कौन मांड गायिका है?
- (A) गवरी देवी
- (B) रूकमा मांगणियार
- (C) पार्वती जोशी
- (D) नाथी देवी
गवरी देवी (पाली) भैरवी युक्त मांड गायकी के लिए प्रसिद्ध रही हैं। दूसरी ओर बीकानेर की गवरी देवी को मांड मल्लिका कहा जाता है। दोनों ही राजस्थान की मांड गायन परंपरा की प्रमुख हस्तियाँ रही हैं।
4. गवरी देवी राजस्थान की किस गायन शैली से जुड़ी है?
- (A) माँड
- (B) मांगणियार
- (C) लंगा
- (D) तालबंदी
गवरी देवी राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं, जिन्हें मरू कोकिला कहा जाता है। वे पाली जिले से थीं और भैरवी युक्त मांड गायन में सिद्धहस्त थीं। 2013 में उन्हें राजस्थान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मांड गायन राजस्थान की शास्त्रीयता और लोक की गहराई का सुंदर संगम है।
5. झोरावा' लोक गीत संबंध है-
- (A) उदयपुर में
- (B) जैसलमेर में
- (C) बीकानेर में
- (D) बाड़मेर में
झोरावा गीत मुख्य रूप से जैसलमेर क्षेत्र में गाया जाता है। यह एक विरह गीत है, जिसमें पत्नी अपने पति के वियोग में अपने दर्द और भावनाओं को प्रकट करती है। यह गीत राजस्थान की लोक-संस्कृति में स्त्रियों की भावनाओं का सजीव चित्रण करता है।
6. अल्ला- जिलाई- बाई की पहचान किस क्षेत्र में रही?
- (A) लंगा गायन
- (B) मांड गायन
- (C) हवेली गायन
- (D) मांगणियार लोक गीत
अल्ला जिलाई बाई बीकानेर की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला कहा जाता है। उनका लोकप्रिय गीत ‘केसरिया बालम’ आज भी राजस्थान की पहचान बना हुआ है। उनकी स्मृति में अखिल भारतीय मांड गायन समारोह आयोजित होता है। उनके अन्य प्रसिद्ध गीतों में ‘बाईसा रा बीरा’ और ‘काली काजलिये री रेख’ शामिल हैं।
7. किस प्रसिद्ध मांड गायिका को कला के क्षेत्र में योगदान के लिए 1982 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया?
- (A) अल्ला जिलाई बाई
- (B) गवरी बाई
- (C) उषा चौहान
- (D) मांगी बाई
अल्ला जिलाई बाई को उनके अद्भुत मांड गायन और लोक संगीत में योगदान के लिए वर्ष 1982 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला कहा जाता है। बीकानेर की निवासी अल्ला जिलाई बाई का गायन इतना मधुर था कि वे राजस्थान की पहचान बन गईं। उनका गायन केवल लोकधुन नहीं था बल्कि उसमें राजस्थान की संस्कृति और परंपरा की आत्मा झलकती थी।
8. बीकानेर की गायिका अल्ला जिलाई बाई किस राग गाने के लिए प्रसिद्ध थी?
- (A) बसंती
- (B) जैजेवंती
- (C) मल्हार
- (D) माण्ड
अल्ला जिलाई बाई बीकानेर की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला भी कहा जाता है। उन्होंने ‘केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश’ जैसे प्रसिद्ध गीत को गाकर अमर बना दिया। वे गंगासिंह के दरबार की राजगायिका थीं और उनके गुरु हुसैन बक्श लंगड़े थे। वे मांड के अलावा ठुमरी, ख्याल और दादरा भी गाती थीं।
9. निम्न में से किसे मरूभूमि की कोकिला कहा जाता है?
- (A) गवरी देवी
- (B) मांगी बाई
- (C) बन्नो बेगम
- (D) अल्ला जिलाई बाई
अल्ला जिलाई बाई को ‘मरूभूमि की कोकिला’ कहा जाता है। इनका जन्म 1 फरवरी 1902 को बीकानेर के जयसिंह देसरा गाँव में हुआ था। राजस्थान के लोकसंगीत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता है। गवरी देवी को राजस्थान कोकिला कहा जाता है, जबकि अल्ला जिलाई बाई को उनके मांड गायन के कारण मरुभूमि की कोकिला के रूप में विशेष पहचान मिली।
10. केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश' को अल्ला जिलाई बाई ने किस राग में गाया?
- (A) भोपाली
- (B) पीलू
- (C) मांड
- (D) मेघ
राजस्थान की प्रसिद्ध लोकगायिका अल्ला जिलाई बाई ने ‘केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश’ गीत को मांड राग में गाया। यह गीत आज राजस्थान की पहचान बन चुका है। अल्ला जिलाई बाई के अन्य प्रसिद्ध गीतों में ‘बाईसा रा बीरा’, ‘काली काजलिये री रेख’ और ‘झालो दियो जाय’ शामिल हैं। उन्होंने मांड के साथ ठुमरी, ख्याल और दादरा भी गाए।
11. पंडित जसराज गायकी से संबंधित हैं।
- (A) मौद
- (B) मेवाती
- (C) खयाल
- (D) इनमें से कोई नहीं
पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के मेवाती घराने से जुड़े थे। इस घराने के संस्थापक घग्घे नजीर खां थे, जो जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह के दरबारी गायक थे। पंडित जसराज को 1975 में पद्मश्री और 2000 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें मारवाड़ संगीत रत्न पुरस्कार भी मिला। 17 अगस्त 2020 को अमेरिका के न्यूजर्सी में उनका निधन हुआ।
12. ओल्यू' राजस्थानी लोक जीवन के किस अवसर से संबंधित है?
- (A) पुत्र जन्मोत्सव गीत
- (B) पुत्री विवाह का विदाई गीत
- (C) होली पर किया जाने वाला लोक नृत्य
- (D) बारात की आगवानी का गीत
राजस्थान का प्रसिद्ध गीत ‘ओल्यू’ पुत्री के विवाह के समय उसके विदाई अवसर पर गाया जाता है। इसमें घर की बेटियों के विदा होते समय माँ और परिवार की भावनाओं को प्रकट किया जाता है। यह गीत लोकजीवन की संवेदनाओं और रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। राजस्थान की लोकसंस्कृति में ओल्यू गीत बेटी की विदाई का मार्मिक चित्रण करता है।
13. निम्नलिखित में से किस संगीत का संबंध राजस्थान से नहीं है?
- (A) बाउल
- (B) मांगणियार
- (C) भोपा
- (D) लंगा
बाउल संगीत का संबंध राजस्थान से नहीं बल्कि बंगाल क्षेत्र से है। राजस्थान में प्रमुख रूप से मांगणियार, भोपा और लंगा परंपराएँ पाई जाती हैं। मांगणियार जाति के लोग कमायचा बजाते हैं, भोपा देवनारायण जी की फड़ गाते समय रावणहट्टा बजाते हैं और लंगा समुदाय सुरिंदा, मुरली और सतारा जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग करता है।
14. करौली क्षेत्र में 'कैला देवी' की आराधना में गाए जाने वाले गीत हैं-
- (A) लाँगुरिया
- (B) हींडो
- (C) इंडोणी
- (D) लावणी
करौली क्षेत्र के प्रसिद्ध कैला देवी मेले में भक्त ‘लाँगुरिया गीत’ गाते हैं। यह चैत्र शुक्ल अष्टमी को आयोजित मेले का प्रमुख हिस्सा होता है। इन गीतों में देवी की स्तुति और भक्ति की भावना झलकती है। मेले के दौरान जोगनिया नृत्य भी किया जाता है, जो स्थानीय लोकसंस्कृति का हिस्सा है।
15. राजस्थान के पंडित विश्वमोहन भट्ट का संबंध किस वाद्ययंत्र से है?
- (A) मोहन वीणा
- (B) सारंगी
- (C) कामायचा
- (D) खड़ताल
पंडित विश्वमोहन भट्ट ने पश्चिमी गिटार में बदलाव करके एक नया वाद्ययंत्र तैयार किया, जिसे मोहन वीणा कहा जाता है। यह वीणा, सरोद और सितार का सुंदर मिश्रण है। पंडित विश्वमोहन भट्ट ने इस वाद्ययंत्र से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का नाम रोशन किया। उन्हें अपने योगदान के लिए ग्रैमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
16. निम्नलिखित में से कौन राजस्थान के प्रसिद्ध गायक हैं?
- (A) तुलसीदास
- (B) जुबेन गर्ग
- (C) मामे खान
- (D) सुंदरराजन
मामे खान राजस्थान के जैसलमेर जिले के सत्तु गाँव के निवासी और प्रसिद्ध लोकगायक हैं। वे मांगणियार परंपरा से जुड़े हैं। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों जैसे ‘मिरज्या’ और ‘सोन चिरैया’ में गायन किया है। वर्ष 2016 में उन्हें GIMA अवॉर्ड ‘बेस्ट ट्रेडिशनल फोक सॉन्ग’ के लिए मिला। आज वे राजस्थान की लोकधुनों को वैश्विक मंच पर ले जा रहे हैं।
17. मांगणियारों द्वारा प्रयुक्त मुख्य वाद्य यंत्र कौनसा है?
- (A) कामायचा
- (B) जन्तर
- (C) रावणहत्था
- (D) मांदल
मांगणियार समुदाय राजस्थान के पश्चिमी भाग में विशेष रूप से जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में पाया जाता है। ये लोकसंगीत और भजनों के लिए प्रसिद्ध हैं। मांगणियारों का मुख्य वाद्य यंत्र कामायचा है, जो एक प्राचीन तारवाद्य है। इसके अलावा वे ढोलक, खड़ताल और अन्य वाद्य यंत्र भी प्रयोग करते हैं, लेकिन उनकी पहचान कामायचा बजाने और गाने से ही होती है।
18. गवरी देवी किस गायन शैली से संबद्ध थी?
- (A) मांगणियार गायन
- (B) लंगा गायन
- (C) हवेली संगीत
- (D) मांड गायन
गवरी देवी राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें ‘मरू कोकिला’ की उपाधि भी मिली। वे पाली जिले से थीं और भैरवी युक्त मांड गाने में सिद्धहस्त थीं। उनकी गायकी ने राजस्थान की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। 2013 में उन्हें ‘राजस्थान रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मांड गायन में उनकी विशेष पकड़ थी।
19. बीकानेर की गायिका अल्लाह जिलाई बाई कौनसी राग गाने के लिए प्रसिद्ध थी?
- (A) मांगणियार गायकी
- (B) माण्ड गायकी
- (C) लंगा गायकी
- (D) तालबंदी गायकी
अल्ला जिलाई बाई बीकानेर की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला कहा जाता है। उनका सबसे प्रसिद्ध गीत “केसरिया बालम आओ नी” है, जो मांड राग में गाया गया है। वे गंगासिंह के दरबार की राजगायिका थीं और हुसैन बक्श लंगड़े की शिष्या थीं। मांड के अलावा उन्होंने ठुमरी, ख्याल और दादरा भी गाए।
20. मामे खान को 2016 में कौनसा अवॉर्ड मिला?
- (A) पद्मश्री
- (B) GIMA
- (C) पद्मभूषण
- (D) राजस्थान रत्न
मामे खान, जैसलमेर के सत्तु गाँव के निवासी और मांगणियार लोकगायक, को वर्ष 2016 में GIMA अवॉर्ड (ग्लोबल इंडियन म्यूजिक अवॉर्ड) ‘बेस्ट ट्रेडिशनल फोक सॉन्ग’ के लिए मिला। उन्होंने फिल्मों जैसे ‘मिरज्या’ और ‘सोन चिरैया’ में अपनी गायकी से पहचान बनाई। आज वे राजस्थान के लोकसंगीत को विश्व पटल तक पहुँचा रहे हैं।
राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7
Agar aapko kisi MCQ me doubt, correction ya suggestion lagta hai, to please is post ke comment section ki jagah humare YouTube channel par dedicated discussion video ke comment box me post link ke sath comment karein.
📝 Comment karne ka format:
• MCQ Post ka link
• Question number
• Short doubt / correction
✔ Link Copied
👉 Official Discussion Video:
Shiksha247 YouTube Channel