राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ (Musical Schools, Artists, Singing Styles, and Famous Musicians of Rajasthan) MCQ – Part 3
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें जगजीत सिंह, गणपत लाल डांगी, पं. विश्व मोहन भट्ट, रेशमा, हम्मीरदेव, महाराणा कुम्भा, सवाई प्रतापसिंह, पृथ्वीसिंह, पं. उदयशंकर, गजानन वर्मा आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ
- Question: 41 से 60
- Last Updated:
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41. 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुआ आकाशवाणी पर प्रसारित धारावाहिक 'लड़े सूरमा आज जी' किस संगीतज्ञ द्वारा रचित था?
- (A) गणपत लाल डांगी
- (B) पं. विश्व मोहन भट्ट
- (C) जगजीत सिंह
- (D) रेशमा
जोधपुर के गणपत लाल डांगी द्वारा रचित ‘लड़े सूरमा आज जी’ धारावाहिक 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय आकाशवाणी पर प्रसारित हुआ और राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुआ। गणपत लाल डांगी को अभिनय, गायन और लोकनाट्य की त्रिवेणी कहा जाता है। उनके कार्यक्रमों ने युद्ध के समय जनता में उत्साह और जोश भरा।
42. अल्लाह जिलाई बाई के बारे में असत्य कथन है-
- (A) बचपन में इन्होंने उस्ताद हुसैन बक्श से शिक्षा ली थी।
- (B) महाराजा गंगासिंह ने 'बीकानेर म्यूजिकल स्कूल' में भर्ती करवाया।
- (C) इन्हे 1982 में 'पद्मश्री' सम्मान मिला।
- (D) 2010 में इन पर 5 रु. का डाकटिकट जारी हुआ।
अल्लाह जिलाई बाई पर 29 दिसम्बर 2003 को 5 रुपये का डाक टिकट जारी किया गया था, न कि 2010 में। वे बीकानेर की निवासी और प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। बचपन से ही उन्हें उस्ताद हुसैन बक्श से संगीत की शिक्षा मिली और महाराजा गंगासिंह ने उन्हें ‘बीकानेर म्यूजिकल स्कूल’ में भर्ती करवाया। इन्हें 1982 में पद्मश्री पुरस्कार भी मिला।
43. पं. विश्वमोहन भट्ट के बारे में असत्य कथन है-
- (A) ये जयपुर के प्रसिद्ध सितार वादक है।
- (B) इन्होंने नई राग 'गौरीम्मा' का सृजन किया।
- (C) इन्होंने 'मोहनवीणा' नाम का नया वाद्य यंत्र बनाया।
- (D) इन्हे 2017 में 'पद्मश्री' पुरस्कार दिया गया था।
पं. विश्वमोहन भट्ट को 2002 में पद्मश्री और 2017 में पद्मभूषण पुरस्कार दिया गया था। वे जयपुर के प्रसिद्ध वादक हैं और उन्होंने ‘मोहन वीणा’ नामक वाद्य यंत्र का निर्माण किया। साथ ही उन्होंने ‘गौरीम्मा’ नामक नई राग की रचना भी की। उनकी संगीत कला ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।
44. मांगणियार समुदाय में कितने प्रकार के गायक होते हैं?
- (A) दो
- (B) तीन
- (C) एक
- (D) चार
मांगणियार समुदाय में गायक दो प्रकार के होते हैं। पहले वे जो केवल हिंदुओं के अवसरों पर गाते हैं और दूसरे वे जो हिन्दू और मुसलमान दोनों समुदायों के अवसरों पर गाते हैं। मांगणियार लोकसंगीत राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ये कामायचा, ढोलक और खड़ताल जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग करते हैं।
45. श्रृंगार हार' नामक रचना किस संगीतज्ञ की है?
- (A) हम्मीरदेव
- (B) महाराणा कुम्भा
- (C) सवाई प्रतापसिंह
- (D) पृथ्वीसिंह
प्रसिद्ध संगीतज्ञ हम्मीरदेव ने ‘श्रृंगार हार’ नामक रचना की। वे भारतीय संगीत के विद्वान थे और उनकी रचनाओं ने शास्त्रीय संगीत को विशेष योगदान दिया। श्रृंगार रस पर आधारित इस रचना ने संगीत प्रेमियों में विशेष स्थान बनाया।
46. उदयपुर के किस प्रसिद्ध संगीतज्ञ को 'भारतीय बैले का जनक' कहा जाता है?
- (A) पं. उदयशंकर
- (B) गजानन वर्मा
- (C) जगजीत सिंह
- (D) मुन्ना मास्टर
पं. उदयशंकर को ‘भारतीय बैले का जनक’ कहा जाता है। वे उदयपुर के प्रसिद्ध नर्तक और संगीतज्ञ थे। उन्होंने नृत्य और संगीत को आधुनिक रूप देकर बैले शैली का निर्माण किया। उनके कार्यों ने भारतीय नृत्य और संगीत को नई पहचान दिलाई और पश्चिमी कला-जगत तक पहुँचाया।
47. जयपुर के किस शासक ने संगीत सम्मेलन कराकर 'राधा गोविन्द संगीत सार' ग्रंथ की रचना करवाई थी?
- (A) सवाई जयसिंह
- (B) सवाई प्रतापसिंह
- (C) सवाई ईश्वरी सिंह
- (D) माधोसिंह द्वितीय
सवाई प्रतापसिंह जयपुर के कला और संस्कृति प्रेमी शासक थे। उन्होंने संगीत का विशाल सम्मेलन आयोजित किया और ‘राधा गोविन्द संगीत सार’ नामक ग्रंथ की रचना करवाई। यह ग्रंथ संगीत के क्षेत्र में जयपुर दरबार की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है।
48. किस शासक को 'अभिनव भरताचार्य' व 'नंदिकेश्वरावतार' की उपाधियाँ मिली?
- (A) महाराणा कुम्भा
- (B) सवाई प्रतापसिंह
- (C) बीसलदेव
- (D) हम्मीदेव चौहान
मेवाड़ के शासक महाराणा कुम्भा को संगीत और कला में उनके योगदान के कारण ‘अभिनव भरताचार्य’ और ‘नंदिकेश्वरावतार’ की उपाधियाँ मिलीं। उन्होंने ‘संगीतराज, संगीत मीमांसा, सूड़ प्रबंध और रसिकप्रिया’ जैसी रचनाएँ कीं। उनकी विद्वता और संगीत प्रेम ने उन्हें भारतीय संस्कृति में अमर कर दिया।
49. सवाई प्रतापसिंह के बारे में असत्य कथन है-
- (A) सवाई प्रतापसिंह 'ब्रजनिधि' के नाम से कविताएँ लिखते थे।
- (B) इन्होंने 'राधा गोविन्द संगीत सार' ग्रन्थ लिखा।
- (C) इनके दरबार में 22 संगीतज्ञों व विद्वानों की मंडली थी।
- (D) सवाई प्रतापसिंह जयपुर के शासक थे।
सवाई प्रतापसिंह जयपुर के शासक थे और संगीत व कला के बड़े संरक्षक थे। वे स्वयं कविताएँ ‘ब्रजनिधि’ उपनाम से लिखते थे। उनके दरबार में 22 संगीतज्ञ और विद्वानों की मंडली रहती थी। लेकिन ‘राधा गोविन्द संगीत सार’ की रचना उन्होंने स्वयं नहीं लिखी, बल्कि यह उनके विद्वान देवर्षि ब्रजपाल भट्ट द्वारा लिखी गई थी।
50. निम्न में से सवाई प्रतापसिंह का दरबारी संगीतज्ञ नहीं था?
- (A) देवर्षि द्वारकानाथ भट्ट
- (B) चाँद खाँ
- (C) गणपत भारती
- (D) भावभट्ट
सवाई प्रतापसिंह के दरबार में देवर्षि द्वारकानाथ भट्ट, चाँद खाँ और गणपत भारती जैसे विद्वान और संगीतज्ञ थे। लेकिन भावभट्ट उनके दरबारी संगीतज्ञ नहीं थे। जयपुर दरबार संगीत परंपरा और विद्वानों की मंडली के लिए प्रसिद्ध रहा।
51. तबला व सितार का आविष्कारक किसे माना जाता है?
- (A) बदायूँनी
- (B) गुलबदन बेगम
- (C) अबुल फजल
- (D) अमीर खुसरो
अमीर खुसरो को तबला और सितार का आविष्कारक माना जाता है। वे अलाउद्दीन खिलजी के दरबारी संगीतज्ञ थे। अमीर खुसरो ने भारतीय और ईरानी संगीत शैलियों का समन्वय करके नई परंपराओं को जन्म दिया। उन्होंने ही ‘कव्वाली’ शैली की भी शुरुआत की, जो आज भी लोकप्रिय है।
52. नन्हें खाँ व सलीम खाँ का सम्बन्ध किस घराने से है?
- (A) आगरा घराना
- (B) दिल्ली घराना
- (C) बीनकार घराना
- (D) सेनिया घराना
नन्हें खाँ और सलीम खाँ का संबंध आगरा घराने से है। आगरा घराना ध्रुपद, धमार और ख्याल गायकी की प्रमुख परंपराओं में गिना जाता है। यह घराना अपनी गहरी आवाज़, आलाप और तानों की जटिलता के लिए प्रसिद्ध है।
53. दिल्ली घराने के प्रवर्तक माने जाते हैं?
- (A) सदारंग खाँ/नियामत खाँ
- (B) रमजान खाँ/रज्जू खाँ
- (C) बहराम खाँ
- (D) सूरत सेन
दिल्ली घराने के प्रवर्तक सदारंग खाँ (नियामत खाँ) माने जाते हैं। उन्होंने ख्याल गायकी को लोकप्रिय बनाया और इसे दरबारी शैली से जोड़कर नया रूप दिया। दिल्ली घराना ख्याल संगीत की शुद्धता और रागों की गहराई के लिए प्रसिद्ध है।
54. महताब खाँ को किस संगीत घराने का प्रर्वतक माना जाता है?
- (A) मथुरा
- (B) दिल्ली
- (C) जयपुर
- (D) आगरा
मथुरा घराना, जिसे ब्रज क्षेत्र का प्रमुख घराना कहा जाता है, इसके प्रवर्तक महताब खाँ थे। यह घराना अपनी विशिष्ट गायन शैली और ब्रज संस्कृति से जुड़े संगीत के लिए जाना जाता है। यहाँ भक्ति भाव से जुड़े राग और ध्रुपद विशेष रूप से प्रचलित थे।
55. रंगीला घराना कहाँ स्थित है?
- (A) जयपुर
- (B) जोधपुर
- (C) कोटा
- (D) उदयपुर
रंगीला घराना राजस्थान के जोधपुर में स्थित है। इसे ‘जोधपुर घराना’ भी कहा जाता है। इसके प्रवर्तक रमजान खाँ रंगीले थे। इस घराने को रागों की विशिष्ट लय और ताल में प्रयोग के लिए प्रसिद्धि मिली।
56. मोतीराम ज्योतीराम, पं. जसराज व पं. मणिराम का सम्बन्ध किस संगीत घराने से है?
- (A) पटियाला
- (B) मेवाती
- (C) जयपुर
- (D) जोधपुर
मोतीराम ज्योतीराम, पं. मणिराम और पं. जसराज सभी मेवाती घराने से जुड़े थे। इस घराने की स्थापना घग्घे नजीर खाँ ने की थी। पं. जसराज ने मेवाती घराने को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई।
57. निम्न में से किस जाति का मुख्य कार्य अपने यजमानों की वंशावलियाँ लिखना व उनका बखान करना है?
- (A) भाट
- (B) ढोली
- (C) भोपा
- (D) ढाढ़ी
भाट जाति का मुख्य कार्य अपने यजमानों की वंशावलियाँ लिखना और उनका बखान करना है। राजस्थान में भाट लोग सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षक माने जाते हैं। वे विवाह और अन्य अवसरों पर वंश और कुल की महिमा का वर्णन करते हैं।
58. सेनिया घराना कहाँ स्थित है?
- (A) कोटा
- (B) जोधपुर
- (C) जयपुर
- (D) उदयपुर
सेनिया घराना का संबंध जयपुर से है। इसके प्रवर्तक तानसेन के पुत्र सूरत सेन माने जाते हैं। इसे ‘सितारियों का घराना’ भी कहा जाता है। इस घराने में ध्रुपद गायन शैली विशेष रूप से गोहरवाणी और खण्डारवाणी में सिद्धहस्त रही। सेनिया घराना भारतीय संगीत इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
59. मेवाती घराना के प्रवर्तक 'घग्घे नजीर खाँ' जोधपुर के किस शासक के दरबारी थे?
- (A) तख्त सिंह
- (B) महाराजा जसवंत सिंह
- (C) उम्मेदसिंह
- (D) अमरसिंह
मेवाती घराने के प्रवर्तक घग्घे नजीर खाँ जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह के दरबारी गायक थे। उन्होंने जयपुर घराने की ख्याल गायिकी को अपनाकर उसमें अपनी विशेष शैली जोड़ी और इसे मेवाती घराने के रूप में स्थापित किया। यह घराना आगे चलकर पं. जसराज जैसे महान गायक के कारण और अधिक प्रसिद्ध हुआ।
60. सहारनपुर घराने के प्रवर्तक है?
- (A) रज्जब अली
- (B) भूपत खाँ
- (C) बहराम खाँ डागर
- (D) आलिया फतु
सहारनपुर घराना के प्रवर्तक बहराम खाँ डागर माने जाते हैं। इसी कारण इसे ‘डागर घराना’ भी कहा जाता है। डागर घराना ध्रुपद परंपरा का सबसे बड़ा और प्रमुख घराना है, जिसने भारतीय शास्त्रीय संगीत में अमूल्य योगदान दिया।
राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7
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