राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ MCQ Questions with Answers

राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ (Musical Schools, Artists, Singing Styles, and Famous Musicians of Rajasthan) MCQ – Part 5

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें सरगड़ा, मधुभट्ट तैलंग, जोगी, कालबेलिया, बैजू बावरा, तानसेन, मनरंग, गवरी देवी, जमीला बानो, बन्नो बेगम आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ
  • Question: 81 से 100
  • Last Updated:

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81. ध्रुपद गायन शैली का प्रारम्भ मानसिंह तोमर ने किस महान संगीतज्ञ के सहयोग से किया था?

  • (A) बैजू बावरा
  • (B) तानसेन
  • (C) मधुभट्ट तैलंग
  • (D) मनरंग

ग्वालियर के शासक महाराजा मानसिंह तोमर ने महान संगीतज्ञ बैजू बावरा के सहयोग से ध्रुपद गायन शैली का प्रारंभ किया। ध्रुपद भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे पुरानी शैली है, जिसमें गम्भीरता और भक्ति भाव झलकता है। बैजू बावरा की आवाज़ और उनके आलाप इस शैली की विशेषता रहे।

82. निम्न में से ध्रुपद गायन शैली के चार खण्डों के बारे में असत्य कथन है?

  • (A) गोहरहारी वाणी की उत्पत्ति ग्वालियर में हुई।
  • (B) डागुर वाणी की उत्पत्ति उदयपुर में हुई।
  • (C) खण्डार वाणी की उत्पत्ति उनियारा (टोंक) में हुई।
  • (D) नौहरवाणी की उत्पत्ति जयपुर में हुई।

डागुर वाणी की उत्पत्ति जयपुर से मानी जाती है, न कि उदयपुर से। इसके प्रवर्तक बृजनंद डागर थे। गोहरहारी वाणी ग्वालियर से, खण्डारवाणी टोंक के उनियारा से और नौहरवाणी जयपुर से संबंधित है।

83. राजस्थान की कौनसी जाति घुमन्तु जीवन व्यतीत करती है तथा कठपुतली नचाने में प्रवीण होती है?

  • (A) नट
  • (B) मिरासी
  • (C) भवाई
  • (D) रावल

राजस्थान के नट जाति के लोग घुमंतू जीवन व्यतीत करते हैं। वे अपने पारंपरिक कला-कौशल के लिए जाने जाते हैं, जिसमें कठपुतली नचाना प्रमुख है। यह कला राजस्थान की लोकसंस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है और आज भी लोककथाओं को जीवित रखे हुए है।

84. निम्न में से किसका मांड गायिकी से सम्बन्ध नहीं है?

  • (A) गवरी देवी
  • (B) जमीला बानो
  • (C) बन्नो बेगम
  • (D) मधुभट्ट तैलंग

मधुभट्ट तैलंग का संबंध ध्रुपद गायन शैली से था, न कि मांड गायकी से। मांड गायकी से गवरी देवी, जमीला बानो और बन्नो बेगम का संबंध रहा है। इसीलिए विकल्प D सही उत्तर है।

85. निम्न में से असत्य कथन है-

  • (A) मांड गायकी – बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, फलौदी
  • (B) लंगा गायकी – बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, जोधपुर
  • (C) तालबंदी गायकी – सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर
  • (D) हवेली संगीत – राजसमंद, सवाई माधोपुर, बीकानेर

हवेली संगीत का केंद्र नाथद्वारा (राजसमंद) है। इसके अलावा यह कांकरोली (राजसमंद), जयपुर, कोटा, भरतपुर और डीग में भी प्रचलित है। लेकिन बीकानेर और सवाई माधोपुर से इसका सीधा संबंध नहीं है। इसलिए यह कथन असत्य है।

86. विकलांग गायिका रूकमा मांगणियार का संबंध किस जिले से हैं?

  • (A) उदयपुर
  • (B) जोधपुर
  • (C) पाली
  • (D) बाड़मेर

राजस्थान की प्रसिद्ध विकलांग गायिका रूकमा मांगणियार का संबंध बाड़मेर जिले से है। वे मांगणियार परंपरा की गायिका रही हैं और अपनी लोकगायकी के लिए प्रसिद्ध हैं। मांगणियार जाति का लोकसंगीत पश्चिमी राजस्थान की संस्कृति की पहचान है।

87. कौनसा गाँव 'लंगों का गाँव' कहलाता है?

  • (A) बड़वणा गाँव (बाड़मेर)
  • (B) चौहटन (बाड़मेर)
  • (C) फलौदी
  • (D) भारेवाला (जैसलमेर)

बाड़मेर जिले का बड़वणा गाँव ‘लंगों का गाँव’ कहलाता है। लंगा समुदाय राजस्थान के लोकगायकों में गिना जाता है और उनकी गायकी सारंगी, सतारा और सुरिंदा जैसे वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुत की जाती है।

88. किस गायन शैली में भोपा कलाकार वाद्य यंत्र बजाता हुआ गाता है तथा भोपी हाथ में लालटेन लिए हुए लकड़ी की डंडी से पर्दे के चित्रों को दिखाती है?

  • (A) ताल बंदी
  • (B) हवेली संगीत
  • (C) फड़ गायकी
  • (D) ध्रुपद गायकी

फड़ गायकी में भोपा वाद्ययंत्र बजाता और गाता है जबकि भोपी लालटेन लेकर लकड़ी की डंडी से कपड़े पर बने चित्रों को दर्शाती है। ये फड़ प्रायः शाहपुरा (भीलवाड़ा) में चित्रित होते हैं और लोकदेवताओं की कथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं।

89. पश्चिमी राजस्थान की कौनसी संगीतजीवी जाति, जो सारंगी व रबाब वाद्ययंत्र का प्रयोग करते हुए गायन का कार्य करती हैं?

  • (A) सहरिया
  • (B) कंजर
  • (C) गरासिया
  • (D) ढाढ़ी

ढाढ़ी जाति पश्चिमी राजस्थान की प्रमुख संगीतजीवी जाति है। वे सारंगी और रबाब जैसे वाद्ययंत्र बजाते हुए लोकगीत गाने में प्रवीण होते हैं। इनकी गायकी शौर्य, भक्ति और लोककथाओं पर आधारित होती है।

90. मारवाड़ क्षेत्र में नाचने वाली पेशेवर महिलाएँ कहलाती है तथा पुरुषों को जागरी कहा जाता है-

  • (A) वैरागी
  • (B) भगतन
  • (C) नटनी
  • (D) पातुर

मारवाड़ क्षेत्र में नाचने वाली पेशेवर महिलाओं को ‘पातुर’ कहा जाता है, जबकि उनके साथ गाने वाले पुरुषों को ‘जागरी’ कहा जाता है। पातुर महिलाओं की प्रस्तुति सामाजिक आयोजनों में मनोरंजन का साधन मानी जाती थी।

91. गुर्जरों की एक उपजाति, जो रावणहत्था बजाने के साथ राधाकृष्ण के गीत गाते हैं?

  • (A) कानगुजरी
  • (B) वैरागी
  • (C) जोगी
  • (D) भोपा

गुर्जरों की उपजाति कानगुजरी रावणहत्था बजाने में निपुण होती है और ये विशेष रूप से राधाकृष्ण के गीत गाती है। रावणहत्था राजस्थान का पारंपरिक वाद्ययंत्र है जिसे लोकदेवताओं की कथाओं में भी प्रयोग किया जाता है।

92. कौनसी जनजाति पुंगी व खंजरी वाद्य यंत्रों का प्रयोग करते हैं व साँप पकड़ने का कार्य करते हैं?

  • (A) सरगड़ा
  • (B) जोगी
  • (C) कालबेलिया
  • (D) भोपा

कालबेलिया जनजाति साँप पकड़ने और पुंगी व खंजरी बजाने में प्रसिद्ध है। ये लोग घूम-घूमकर साँपों का खेल दिखाकर जीविकोपार्जन करते थे। कालबेलिया महिलाएँ अपने नृत्य के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसे आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।

93. वह जनजाति जो कच्छीघोड़ी नृत्य में माहिर मानी जाती है?

  • (A) कंजर
  • (B) सरगड़ा
  • (C) सहरिया
  • (D) ढाढ़ी

सरगड़ा जनजाति कच्छीघोड़ी नृत्य में माहिर मानी जाती है। यह नृत्य मुख्यतः विवाह और सामाजिक उत्सवों में किया जाता है। कलाकार घोड़े के आकार का परिधान पहनकर वीर रस और लोककथाओं पर आधारित नृत्य करते हैं।

94. नाथ सम्प्रदाय के अनुयायी जो वैरागी जीवन व्यतीत करते हुए गोपीचंद भर्तृहरि के गीत गाते हुए घर-घर घुमकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं?

  • (A) जोगी
  • (B) बैरागी
  • (C) मिरासी
  • (D) राणा

नाथ सम्प्रदाय के अनुयायी जोगी वैरागी जीवन व्यतीत करते हैं। ये घर-घर घूमकर गोपीचंद और भर्तृहरि के गीत गाते हैं। जोगी परंपरा राजस्थान के भक्ति आंदोलन और लोकधारा का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसने लोकगायन और धार्मिक संस्कृति को जीवित रखा।

95. रावलों की रामत' नामक नाट्य के लिए प्रसिद्ध संगीत प्रिय 'रावल जाति' का मुख्य क्षेत्र है?

  • (A) वागड़
  • (B) मेवाड़
  • (C) हाड़ौती
  • (D) मारवाड़

रावल जाति का मुख्य क्षेत्र मारवाड़ है। यह जाति ‘रावलों की रामत’ नामक लोकनाट्य के लिए प्रसिद्ध है। रामत नाट्य में पौराणिक कथाओं और लोककथाओं का मंचन गीत-संगीत और अभिनय के साथ किया जाता है। यह मारवाड़ की लोक-संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है।

96. भवाई नृत्य में माहिर जाति भवाई की उत्पत्ति मानी जाती है?

  • (A) व्यावर
  • (B) केकड़ी
  • (C) किशनगढ़
  • (D) बगरू

भवाई नृत्य राजस्थान का प्रसिद्ध लोकनृत्य है जिसमें महिलाएँ सिर पर कई घड़े रखकर नृत्य करती हैं। इसकी उत्पत्ति केकड़ी (अजमेर) क्षेत्र से मानी जाती है। भवाई जाति इस नृत्य में प्रवीण होती है और इसे कठिन संतुलन और कलात्मकता के लिए जाना जाता है।

97. ख्याल लोकनाट्य में कुशल जाति, जो ढूंढाड़ व शेखावाटी क्षेत्र में सर्वाधिक पाई जाती है?

  • (A) पातुर
  • (B) रावल
  • (C) वैरागी
  • (D) राणा

राणा जाति ख्याल लोकनाट्य में सर्वाधिक कुशल मानी जाती है। यह जाति मुख्यतः ढूंढाड़ और शेखावाटी क्षेत्र में पाई जाती है। ख्याल लोकनाट्य राजस्थान का महत्वपूर्ण नाट्य रूप है जिसमें हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सन्देशों को गीत-संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।

98. जोधपुर के बोरून्दा में 'रूपायन संस्था' की स्थापना किसने की थी?

  • (A) जयनारायण व्यास
  • (B) कोमल कोठारी
  • (C) मामे खाँ
  • (D) गजानन्द वर्मा

जोधपुर जिले के बोरुन्दा में ‘रूपायन संस्थान’ की स्थापना लोकसंगीत के विद्वान कोमल कोठारी ने की थी। यह संस्थान राजस्थान के लोकसंगीत, लोककला और संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करता है।

99. पश्चिमी राजस्थान में पाई जाने वाली जाति जो कामायचा व सारंगी बजाने में पारगंत होते हैं?

  • (A) मांगणियार
  • (B) सरगड़ा
  • (C) वैरागी
  • (D) कालबेलिया

पश्चिमी राजस्थान में मांगणियार जाति कामायचा और सारंगी जैसे वाद्ययंत्र बजाने में निपुण होती है। वे लोकगायकी और शास्त्रीय परंपरा के संगम के लिए प्रसिद्ध हैं। मांगणियार समाज के लोग विशेष अवसरों और उत्सवों पर गीत प्रस्तुत करते हैं।

100. निम्न में से भावभट्ट द्वारा लिखित संगीत ग्रन्थ नहीं है?

  • (A) संगीत रत्नाकर
  • (B) अनूप संगीत विलास
  • (C) अनूप संगीत रत्नाकर
  • (D) अनूप रागमाला

भावभट्ट बीकानेर के महाराजा अनूप सिंह के दरबारी कवि थे। उन्होंने अनूप संगीत विलास, अनूप संगीत रत्नाकर और अनूप रागमाला जैसे संगीत ग्रंथ लिखे। जबकि संगीत रत्नाकर के रचयिता शारंगदेव थे।

राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7

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