राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ MCQ Questions with Answers

राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ (Musical Schools, Artists, Singing Styles, and Famous Musicians of Rajasthan) MCQ – Part 6

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें कल्लन खाँ, जहाँगीर खाँ, भूपत खाँ, छज्जू खाँ, पटेल्या, कुरजां, बिछियो, लालर, कुरजा, मूमल आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ
  • Question: 101 से 120
  • Last Updated:

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101. संगीत रत्नाकर के रचयिता है?

  • (A) शारंग देव
  • (B) भावभट्ट
  • (C) कुमार गंधर्व
  • (D) चाँद खाँ

संगीत रत्नाकर के रचयिता शारंगदेव थे। यह ग्रंथ 13वीं शताब्दी में लिखा गया और इसे भारतीय संगीत का एक आधारभूत शास्त्र माना जाता है। इसमें राग, वाद्ययंत्र और नृत्य की विस्तृत जानकारी दी गई है।

102. निम्न में से असत्य युग्म है-संगीत ग्रंथ — रचनाकार

  • (A) स्वरमेल कलानिधि – रामामात्या
  • (B) संगीत परिजात – अहोबल
  • (C) स्वर सागर – चाँद खाँ
  • (D) संगीत सागर – भावभट्ट

‘संगीत सागर’ के रचयिता गणपत भारती थे, जो सवाई प्रतापसिंह के काव्य गुरु थे। जबकि स्वरमेल कलानिधि रामामात्या, संगीत परिजात अहोबल और स्वर सागर चाँद खाँ द्वारा रचित हैं।

103. राजस्थान की विख्यात गायिका गोहर बाई की पुत्री, जो राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका हैं, का क्या नाम है?

  • (A) गवरी देवी
  • (B) माँगी बाई
  • (C) अल्लाह जिलाई बाई
  • (D) बन्नो बेगम

राजस्थान की प्रसिद्ध गायिका गोहर बाई की पुत्री बन्नो बेगम थीं। वे जयपुर दरबार की प्रसिद्ध मांड गायिका के रूप में जानी जाती हैं। बन्नो बेगम ने मांड गायकी को नई ऊँचाई दी और इसे लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

104. निम्न में से कौनसा संगीत ग्रंथ पुण्डरीक विठ्ठल द्वारा रचित है?

  • (A) रागमाला
  • (B) रागमंजरी
  • (C) नर्तन निर्णय
  • (D) उक्त सभी

पुण्डरीक विठ्ठल एक महान संगीतज्ञ और ग्रंथकार थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में रागमाला, रागमंजरी, नर्तन निर्णय और सद्राग चन्द्रोदयशामिल हैं। इन ग्रंथों में राग-रागनियों का विस्तृत वर्णन और संगीत की विविध विधाओं की चर्चा की गई है।

105. मांड गायिकी का उद्गम राजस्थान में किस क्षेत्र से हुआ है?

  • (A) जैसलमेर
  • (B) जयपुर
  • (C) करौली
  • (D) उदयपुर

मांड गायिकी का उद्गम जैसलमेर क्षेत्र से हुआ। 10वीं-11वीं शताब्दी में जैसलमेर को ‘मांड क्षेत्र’ कहा जाता था। मांड गायकी श्रृंगार प्रधान होती है और इसे शास्त्रीय और लोक संगीत की मिश्रित शैली माना जाता है।

106. राजस्थान में हवेली संगीत कहाँ का प्रसिद्ध है?

  • (A) रामदेवरा
  • (B) पुष्कर
  • (C) नाथद्वारा
  • (D) महावीर जी

राजस्थान में नाथद्वारा हवेली संगीत के लिए प्रसिद्ध है। विदेशी आक्रमणों के कारण जब मंदिर तोड़े गए तो घरों और हवेलियों में मंदिर स्थापित किए गए, जहाँ भक्ति संगीत गाया जाने लगा। इसी से ‘हवेली संगीत’ की परंपरा शुरू हुई।

107. राजस्थान में किस स्थान की ताल बंदी गायकी प्रसिद्ध है?

  • (A) टोंक
  • (B) सवाईमाधोपुर
  • (C) उदयपुर
  • (D) भीलवाड़ा

ताल बंदी गायकी सवाईमाधोपुर क्षेत्र की प्रसिद्ध गायन शैली है। औरंगजेब के समय संगीत पर पाबंदी लगने पर विस्थापित कलाकारों ने यहाँ यह शैली विकसित की। आगे चलकर यह करौली, धौलपुर और भरतपुर में भी लोकप्रिय हुई।

108. सदीक खां मांगणियार लोककला व अनुसंधान परिषद् (लोकरंग) कहाँ पर स्थित है?

  • (A) जयपुर
  • (B) बाड़मेर
  • (C) उदयपुर
  • (D) जैसलमेर

प्रसिद्ध गायक और खड़ताल वादक सदीक खां की स्मृति में 2002 में जयपुर में ‘सदीक खां मांगणियार लोककला एवं अनुसंधान परिषद् (लोकरंग)’ की स्थापना की गई। यह संस्था लोककला और संगीत के संरक्षण व अध्ययन का कार्य करती है।

109. ख्याल शैली के जयपुर घराने के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं?

  • (A) कल्लन खाँ
  • (B) जहाँगीर खाँ
  • (C) भूपत खाँ
  • (D) छज्जू खाँ

जयपुर घराने के प्रवर्तक भूपत खाँ (मनरंग) माने जाते हैं। वे दिल्ली घराने के प्रवर्तक सदारंग के पुत्र थे। जयपुर घराना ख्याल गायकी की गहराई और विलंबित रागों की प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध है।

110. जयपुर के किस शासक ने प्रसिद्ध संगीतज्ञों एवं विद्वानों की मंडली 'गंधर्व बाईसी' को अपने दरबार में संरक्षण दे रखा था?

  • (A) महाराजा अनूपसिंह
  • (B) सवाई प्रतापसिंह
  • (C) मिर्जा राजा जयसिंह
  • (D) सवाई जयसिंह

सवाई प्रतापसिंह ने जयपुर दरबार में 22 संगीतज्ञों और विद्वानों की मंडली ‘गंधर्व बाईसी’ को संरक्षण दिया। उनके दरबार के प्रमुख संगीतज्ञों में देवर्षि ब्रजपाल भट्ट, देवर्षि द्वारकानाथ भट्ट, चाँद खाँ और गणपत भारती शामिल थे।

111. लांगुरिया' गीत किस मेले का आकर्षण है?

  • (A) जीण माता का मेला
  • (B) रामदेवजी का मेला
  • (C) शीतला माता का मेला
  • (D) कैलादेवी का मेला

कैलादेवी का मंदिर करौली में स्थित है। यहाँ चैत्र शुक्ल अष्टमी को प्रसिद्ध लक्खी मेला भरता है। इस मेले में ‘लांगुरिया गीत’ विशेष रूप से गाए जाते हैं और ‘जोगनिया नृत्य’ भी किया जाता है।

112. घूघरी, केवड़ा आदि लोकगीत किस क्षेत्र से संबंधित हैं?

  • (A) पर्वतीय क्षेत्र
  • (B) मैदानी क्षेत्र
  • (C) मरूस्थलीय क्षेत्र
  • (D) मेवात क्षेत्र

घूघरी और केवड़ा जैसे लोकगीत राजस्थान के मरूस्थलीय क्षेत्र से संबंधित हैं। केवड़ा गीत में केवड़ा वृक्ष का उल्लेख होता है, जबकि घूघरी गीत जन्मोत्सव और श्रृंगार प्रसंगों में गाए जाते हैं। ये मांड शैली से भी जुड़े हैं।

113. पटेल्या, बिछियो, लालर व माछर क्या हैं?

  • (A) मेवाड़ के प्रसिद्ध गीत
  • (B) मारवाड़ के प्रसिद्ध गीत
  • (C) मेवात के प्रसिद्ध गीत
  • (D) हाड़ौती के प्रसिद्ध गीत

पटेल्या, बिछियो, लालर और माछर मेवाड़ के पर्वतीय क्षेत्र के प्रसिद्ध लोकगीत हैं। ये गीत मुख्यतः उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और सिरोही जिलों में प्रचलित हैं। इन्हें भील, मीणा, गरासिया और सहरिया जैसी आदिवासी जातियाँ गाती हैं। इनके गीत सरल और संक्षिप्त होते हैं, जिनमें शब्दों की सुंदरता कम परंतु भावनात्मक गहराई अधिक होती है।

114. सूबटिया लोकगीत का सम्बन्ध किससे है?

  • (A) गरासिया स्त्री से
  • (B) सती स्त्री से
  • (C) वीरांगना स्त्री से
  • (D) भील स्त्री से

सूबटिया गीत भील जाति का एक प्रसिद्ध लोकगीत है, जो मुख्यतः मेवाड़ के पर्वतीय क्षेत्रों में गाया जाता है। इसे भील स्त्रियाँ अपने पति के संदेश के रूप में गाती हैं। यह गीत विरह गीत की श्रेणी में आता है और इसमें स्त्रियों की भावनाएँ मार्मिक रूप से व्यक्त होती हैं।

115. सारंग' संगीत किस समय गाया जाता है?

  • (A) प्रात:काल
  • (B) दोपहर काल
  • (C) संध्याकाल
  • (D) रात्रि में

राग सारंग जिसे गौड़ सारंग और वृंदावनी सारंग भी कहा जाता है, दोपहर या मध्यान्हकाल में गाया जाता है। यह राग शांति और उल्लास का प्रतीक है। शास्त्रीय संगीत परंपरा में इसका समय निर्धारण मध्यान्ह का है।

116. निम्न में से कौन सा एक लोकगीत राजस्थान के पर्वतीय क्षेत्र का नहीं है?

  • (A) पटेल्या
  • (B) कुरजां
  • (C) बिछियो
  • (D) लालर

कुरजां गीत मरुप्रदेश का प्रसिद्ध गीत है, जो विशेषकर जोधपुर क्षेत्र में वर्षा ऋतु में गाया जाता है। यह एक विरह गीत है, जिसमें प्रवासी पक्षी कुरजां के माध्यम से विरह की भावनाएँ व्यक्त होती हैं। जबकि पटेल्या, बिछियो, लालर और माछर पर्वतीय क्षेत्र के गीत हैं।

117. रतवाई लोक गीत किस क्षेत्र में गाए जाते हैं?

  • (A) मेवाड़
  • (B) मारवाड़
  • (C) मेवात
  • (D) हाड़ौती

रतवई गीत मेवात क्षेत्र (मुख्यतः अलवर और भरतपुर) में प्रचलित हैं। ये गीत मेव समुदाय की स्त्रियाँ एकल नृत्य के साथ गाती हैं। इस दौरान पुरुष कलाकार अलगोजा और टामक जैसे वाद्ययंत्र बजाते हैं। यह गीत लोकनृत्य और संगीत की मिश्रित परंपरा का प्रतीक है।

118. राजस्थान कबीर यात्रा' का सम्बन्ध निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से है?

  • (A) गायन
  • (B) चित्रण
  • (C) लेखन
  • (D) वानिकी

राजस्थान कबीर यात्रा एक लोक संगीत समारोह है, जिसमें कबीर, मीरा और अन्य संत कवियों के भजनों और लोकगायन को प्रस्तुत किया जाता है। यह आयोजन अब तक कई बार राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में हुआ है और इसे लोक और आध्यात्मिक संगीत का अद्भुत संगम माना जाता है।

119. निम्नलिखित में से कौनसी गायकी लोकगायकी की श्रेणी में सम्मिलित नहीं है?

  • (A) ढोला
  • (B) आल्हा
  • (C) ध्रुपद
  • (D) बारह भाषा

ध्रुपद शास्त्रीय संगीत की प्रमुख गायकी है, जिसकी शुरुआत राजा मानसिंह तोमर के काल में हुई थी। इसे राजस्थान में डागर घराने के संगीतज्ञों ने आगे बढ़ाया। जबकि ढोला, आल्हा और बारह भाषा लोकगायन की श्रेणी में आते हैं।

120. कौनसा प्रसिद्ध राजस्थानी गीत एक युवती के सौन्दर्य का वर्णन करता है?

  • (A) कुरजा
  • (B) मूमल
  • (C) सपना
  • (D) गोरबंध

मूमल गीत राजस्थानी लोकगीतों में विशेष स्थान रखता है। इसमें लोद्रवा (जैसलमेर) की राजकुमारी मूमल की सुंदरता का नख-शिख तक वर्णन किया गया है। यह गीत श्रृंगार प्रधान है और स्त्री सौंदर्य के विविध पहलुओं को प्रस्तुत करता है।

राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7

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