राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ (Saint Sects of Rajasthan) – Part 1
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में निष्कलंकी संप्रदाय, निरंजनी संप्रदाय, विश्नोई संप्रदाय, कुंडा पंथ, तेरह पंथ, दादूपंथ, गरीबदासी पंथ, रसिक संप्रदाय, रामस्नेही संप्रदाय, रामानुज संप्रदाय आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
- कुल प्रश्न: 20
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(Since 2021)
1. कुंडा पंथ के प्रणेता कौन थे?
- (A) राव अजीतसिंह
- (B) राव मल्लीनाथ
- (C) गोगाजी
- (D) पाबूजी
कुंडा पंथ की शुरुआत राजस्थान से हुई थी और इसके प्रणेता राव मल्लीनाथ माने जाते हैं। यह एक तांत्रिक पंथ था जिसमें शरीर को ही मोक्ष प्राप्ति का साधन माना गया। इसका उद्देश्य कामभाव को नियंत्रित करके मोक्ष की प्राप्ति करना था। इसकी स्थापना लगभग 1399 ई. में हुई। इस पंथ से धारू मेघवाल, उगम सिंह भाटी, रानी रूपा देवी और नामदेव छोपा जैसे नाम जुड़े हुए हैं।
2. धन्ना भगत के गुरु कौन थे?
- (A) कबीर
- (B) नानक
- (C) रामानंद
- (D) नामदेव
धन्ना भगत का जन्म टोंक जिले के धुवन गांव में हुआ था। बाद में वे राजस्थान से बनारस चले गए और रामानंद के शिष्य बन गए। उनकी वाणी इतनी प्रभावशाली थी कि गुरुग्रंथ साहिब में इनके तीन शब्द सम्मिलित हैं। धन्ना भगत समाज सुधार और भक्ति आंदोलन की प्रमुख कड़ी थे।
3. राजस्थान की दूसरी मीरा संत रानाबाई का जन्म कहाँ हुआ था?
- (A) कुडकी
- (B) कापडोद
- (C) साबला
- (D) हरनावा
रानाबाई को राजस्थान की दूसरी मीरा कहा जाता है। इनका जन्म नागौर जिले के हरनावा गांव में हुआ था। वे सगुण परंपरा की कृष्णभक्तरही और भक्ति भाव में लीन होकर जीवन व्यतीत किया। उन्होंने 1570 ई. में हरनावा में जीवित समाधि ली।
4. राजस्थान में 'तेरह पंथ' के प्रवर्तक रहे हैं—
- (A) धरणीवराह जी
- (B) श्रमणनाथ जी
- (C) जिनसेन जी
- (D) भीखण जी
तेरह पंथ के प्रवर्तक आचार्य भिक्षु (भीखण जी) थे। इनका जन्म कंटालिया (मारवाड़) 1726 ई. में हुआ। 1760 ई. में उन्होंने इस पंथ की स्थापना की। वे श्वेतांबर स्थानकवासी संप्रदाय में दीक्षित हुए और बाद में 13 साधुओं के साथ नया पंथ बनाया। उनकी समाधि सिरयारी (पाली) में है।
5. रज्जब वाणी' पुस्तक किस पंथ/संप्रदाय से संबंधित है?
- (A) दादू
- (B) विश्नोई
- (C) रास्नेही
- (D) निम्बार्क
रज्जब वाणी' दादूपंथ से संबंधित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसके रचयिता रज्जब जी, जो दादूदयाल के शिष्य थे। इस ग्रंथ में भक्ति, संत वाणी और आध्यात्मिक संदेश संकलित हैं। इसकी व्याख्या स्वामी नारायणदास जी महाराज ने की थी।
6. हरनावा गांव किस संत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है?
- (A) मीरा
- (B) रानाबाई
- (C) लालगिरि
- (D) लालागिरी
हरनावा गांव संत रानाबाई से जुड़ा हुआ है, जिन्हें राजस्थान की दूसरी मीरा कहा जाता है। वे संत चतुरदास खोजी जी की शिष्या थीं। हरनावा ही उनका जन्मस्थान और समाधि स्थल है, जिसने इसे धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है।
7. चोपड़ा नामक ग्रंथ की रचना किसने की?
- (A) मावजी
- (B) दरियाव जी
- (C) रामचरण जी
- (D) रामदास जी
मावजी को राजस्थान में निष्कलंकी संप्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने कई ग्रंथों की रचना की, जिनमें से एक प्रमुख ग्रंथ चोपड़ा है। यह ग्रंथ वाद-विवाद की शैली में लिखा गया है। इसमें लगभग 96 हजार छंद बताए जाते हैं, जिन्हें दीपावली पर बाहर निकाला जाता है।
8. वायु की गुणवत्ता सूचकांक को बताने वाला मोबाइल एप्लीकेशन है—
- (A) राजवायु
- (B) प्राणवायु
- (C) मारूति
- (D) राजपवन
राजवायु' एप राजस्थान सरकार द्वारा 5 जून 2016 को लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक की जानकारी जनता तक पहुंचाना है। यह एप प्रदूषण स्तर और चेतावनी देने का काम करता है।
9. निम्नलिखित में से कौन दादू दयाल जी का शिष्य नहीं है?
- (A) सुंदरदास जी
- (B) गरीबदास जी
- (C) रज्जब जी
- (D) लालदास जी
दादूदयाल के 52 प्रमुख शिष्यों को 52 स्तंभ कहा जाता है। इनमें सुंदरदास, गरीबदास, मिस्किनदास और रज्जब प्रमुख हैं। लेकिन लालदास जी उनके शिष्यों में शामिल नहीं थे।
10. मलूकनाथ किस पंथ के साधु थे?
- (A) गरीबदासी पंथ
- (B) चरणदासी पंथ
- (C) रामानंद पंथ
- (D) रामस्नेही पंथ
मलूकनाथ गरीबदासी पंथ के प्रमुख साधु थे। उन्होंने अलखबानी, ज्ञानबोध, पुरुषविलास और सुखसागर जैसे ग्रंथ लिखे। उनके गुरु कबीरथे और उनके शिष्य गरीबदास ने इस पंथ को आगे बढ़ाया। गरीबदास ने 'रत्नसागर' और 'अमृतवाणी' जैसे ग्रंथों की रचना की।
11. रसिक संप्रदाय का प्रवर्तक कौन था?
- (A) अचलदास
- (B) अग्रदास
- (C) ईसरदास
- (D) गिरधरदास
रसिक संप्रदाय का प्रवर्तक अग्रदास था, जो कृष्णदास पयहारी के शिष्य थे। इस संप्रदाय का प्रमुख पीठ रैवासा (सीकर) रहा। इसमें सीता-राम की श्रृंगारिक रूप से माधुर्य भाव की भक्ति की जाती थी। इस संप्रदाय में भक्त भगवान को प्रियतम और स्वयं को प्रिय माना करते थे। अग्रदास के शिष्य नाभादास ने भक्तिकाल का प्रसिद्ध ग्रंथ ‘भक्तमाल’ लिखा, जिसमें अनेक संतों का वर्णन मिलता है। इस प्रकार रसिक संप्रदाय ने भक्ति आंदोलन में विशेष स्थान बनाया।
12. संत हरिदास.... संप्रदाय के संस्थापक थे।
- (A) रामस्नेही
- (B) निरंजनी
- (C) अलखिया
- (D) निम्बार्क
संत हरिदास जी, जिन्हें हरिसिंह सांखला भी कहा जाता है, निरंजनी संप्रदाय के प्रवर्तक थे। इन्हें राजस्थान का वाल्मीकि या कलियुग का वाल्मीकि भी कहा जाता है। हरिदास जी ने समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने और आध्यात्मिक जागरण के लिए इस संप्रदाय की स्थापना की। इनके अनुयायी दो प्रकार के माने जाते हैं—निहंग साधु और घरबारी साधु। इस संप्रदाय ने सादगी, साधना और सेवा पर जोर दिया।
13. निम्न में से कौन सा संप्रदाय संत मावजी के द्वारा स्थापित किया गया?
- (A) रामस्नेही संप्रदाय
- (B) निष्कलंकी संप्रदाय
- (C) रामानुज संप्रदाय
- (D) निरंजनी संप्रदाय
संत मावजी को निष्कलंकी संप्रदाय का संस्थापक माना जाता है। इनका जन्म 1714 ई. में हुआ और पिता का नाम दालरूमसी तथा माता का नाम केशरबाई था। इन्हें भक्तजन कल्कि अवतार मानते हैं। संत मावजी ने सावंत 1784 माघ शुक्ल में बेणेश्वर धाम की स्थापना की, जो डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिलों की संगमस्थली पर स्थित है। इस संप्रदाय से जुड़े प्रमुख स्थान साबला, पूजपुर, दालावाला, शेषपुर और पालोदा रहे। इनके अनुयायी मावजी को 10वें अवतार के रूप में पूजते हैं।
14. वाद-विवाद शैली में लिखे गए ग्रंथ 'चौपड़ा' संबंधित है—
- (A) लालदासी संप्रदाय से
- (B) रामस्नेही संप्रदाय से
- (C) निष्कलंकी संप्रदाय से
- (D) निम्बार्क संप्रदाय से
‘चौपड़ा’ ग्रंथ संत मावजी की रचनाओं में प्रमुख है और यह निष्कलंकी संप्रदाय से संबंधित है। यह ग्रंथ वाद-विवाद की शैली में लिखा गया है और इसमें विभिन्न विषयों पर प्रश्नोत्तर शैली में विचार प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें लगभग 72 से 96 हजार छंद बताए जाते हैं। इस ग्रंथ को विशेष अवसर पर, खासकर दीपावली के दिन, बाहर निकाला जाता है। यह ग्रंथ धार्मिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
15. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
- (A) संत रामचरण जी – शाहपुरा
- (B) संत हरिरामदास जी – सिंहथल
- (C) संत दरियाव जी – रेवासा
- (D) संत रामदास जी – खेड़ापा
इस प्रश्न में संत दरियाव जी को गलत रूप से रेवासा से जोड़ा गया है, जबकि सही स्थान रेण (नागौर) है। संत दरियाव जी के गुरु प्रेमनाथ (बालकनाथ जी) थे। उन्होंने समाज में हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया और उनके अनुयायियों ने इस विचारधारा को आगे बढ़ाया। अन्य विकल्प सही हैं, जैसे संत रामचरण शाहपुरा, हरिरामदास सिंहथल और रामदास खेड़ापा से जुड़े हुए हैं।
16. राजस्थान के कौनसे समुदाय के लिए वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण उनके धार्मिक अनुष्ठान का भाग बन गया है?
- (A) गुर्जर
- (B) सहरिया
- (C) विश्नोई
- (D) मीणा
राजस्थान का विश्नोई समुदाय पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाता है। इनके प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में 29 नियम दिए, जिनमें हरे वृक्षों की रक्षा और पशुओं की सुरक्षा का विशेष महत्व है। विश्नोई समाज में वृक्षों और जीवों को काटना या मारना पाप माना जाता है। इसी कारण इन्हें विश्व का पहला पर्यावरणवादी समाज भी कहा जाता है। गुरु जाम्भोजी को पर्यावरण संत और प्रथम पर्यावरण आंदोलन का जनक भी कहा जाता है।
17. मुकाम प्रसिद्ध है—
- (A) जैनियों के लिए
- (B) बिश्नोईयों के लिए
- (C) सिक्खों के लिए
- (D) जसनाथियों के लिए
मुकाम (बीकानेर) विश्नोई समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहाँ गुरु जाम्भोजी की समाधि स्थित है। विश्नोई संप्रदाय की स्थापना 1485 ई. में बीकानेर के समराथल धोरा पर हुई थी। गुरु जाम्भोजी ने 120 शब्द वाणियां, जम्भ सहिता और जम्भसागर की रचना की। मुकाम में प्रतिवर्ष मेलों का आयोजन होता है और इसे विश्नोई समाज का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है।
18. बिश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जाम्भेश्वर से संबंधित मुख्य स्थान है—
- (A) मुकाम
- (B) गुदा बिश्नोईयान
- (C) नौखा
- (D) लूनी
गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में बीकानेर के समराथल धोरा पर विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। इनका जन्म 1451 ई. में पीपासर (नागौर) में हुआ था। जाम्भोजी ने 29 नियम दिए जिनमें वृक्ष और वन्य जीवों की रक्षा प्रमुख थी। उनकी समाधि मुकाम (बीकानेर) में है, जिसे इस संप्रदाय का सबसे पवित्र तीर्थ माना जाता है। यहाँ हर वर्ष लाखों अनुयायी दर्शन करने आते हैं।
19. हरे वृक्षों की रक्षा के लिए किस संप्रदाय को जाना जाता है?
- (A) विश्नोई
- (B) रामस्नेही
- (C) निरंजनी
- (D) लालदासी
विश्नोई संप्रदाय वृक्षों और वन्य जीवों की रक्षा के लिए प्रसिद्ध है। इसकी स्थापना गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में बीकानेर के समराथल धोरापर की थी। उन्होंने स्पष्ट उपदेश दिया कि हरे वृक्ष मत काटो और पशु-पक्षियों को मत मारो। इस संप्रदाय के लोग पर्यावरण की रक्षा को धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा मानते हैं। विश्नोई समाज के लोग वृक्षों और जानवरों के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर देते हैं।
20. विश्नोई संप्रदाय का संस्थापक कौन था?
- (A) धन्नाजी
- (B) चरणदास
- (C) दादूजी
- (D) जाम्भोजी
गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में बीकानेर जिले के समराथल धोरा पर विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। इस संप्रदाय की प्रमुख पीठें मुकाम, तालवा (नोखा), जाम्भा (फलौदी) और रामड़ावास (पीपाड़) रही। जाम्भोजी द्वारा रचित प्रमुख ग्रंथ हैं—जम्भवाणी (गुरु वाणी/वेद वाणी/शब्द वाणी), जम्भसागर, जम्भ सहिता और जम्भगीता। उन्होंने 29 नियम बताए, जिनमें सत्य, पर्यावरण, पशु-पक्षियों और वृक्षों की रक्षा पर विशेष बल दिया गया। इन्हें पर्यावरण संत के नाम से भी जाना जाता है।
राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ – सभी भाग:
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