राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ (Saint Sects of Rajasthan) – Part 11
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में निरंजनी सम्प्रदाय, चरणदासी सम्प्रदाय, परनामी सम्प्रदाय, अलखिया सम्प्रदाय, संत पीपा, भूरी बाई, गवरी बाई, राना बाई, भोली गुजरी, मीरा बाई आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
- कुल प्रश्न: 20
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(Since 2021)
201. निरंजनी सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत हरिदास जी का मूल नाम था?
- (A) हरिसिंह सांखला
- (B) रामकिशन
- (C) रणजीत
- (D) नवलदास
निरंजनी सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत हरिदास जी का असली नाम हरिसिंह सांखला था। उन्होंने समाज में निर्गुण भक्ति का प्रचार किया और अपने उपदेशों को "मंत्र राजप्रकाश" नामक ग्रंथ में संकलित किया।
202. दादूदयाल की किन दो रचनाओं का संकलन उनके शिष्यों ने किया है?
- (A) दादूजी री वाणी, कायाबेलि
- (B) कायाबेलि, दादूदयाल रा दुहा
- (C) हरड़ेवाणी, अंगवधू
- (D) साखी पद, अनभै प्रबोध
संत दादूदयाल के उपदेश और रचनाएँ उनके शिष्यों ने "हरड़ेवाणी" और "अंगवधू" नामक ग्रंथों में संकलित की हैं। इन ग्रंथों में उनके भक्ति विचार, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक संदेश सुरक्षित हैं।
203. चरणदासी सम्प्रदाय के बारे में निम्न में से असत्य कथन है?
- (A) चरणदास का बचपन का नाम 'रणजीत' था।
- (B) इन्होंने गुरु शुकदेव से दीक्षा लेकर अपना नाम चरणदास रखा।
- (C) इस सम्प्रदाय के संत पीले वस्त्र पहनते हैं।
- (D) इनकी प्रधान पीठ वृंदावन में है।
चरणदासी सम्प्रदाय की प्रधान पीठ दिल्ली में स्थित है, न कि वृंदावन में। चरणदास जी का जन्म अलवर जिले के डेहरा गाँव में हुआ और उनका बचपन का नाम रणजीत था। गुरु शुकदेव से दीक्षा लेकर उन्होंने अपना नाम चरणदास रखा। इनके अनुयायी पीले वस्त्र पहनते हैं और सादगीपूर्ण जीवन जीते हैं। यह सम्प्रदाय भक्ति और अनुशासन पर आधारित है।
204. संत रामचरण जी के उपदेश किस रचना में संकलित हैं?
- (A) आध्यात्म बोध
- (B) अनभै प्रबोध
- (C) अर्णभवाणी
- (D) भक्ति सागर
संत रामचरण जी रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रवर्तक थे। उनके उपदेश "अर्णभवाणी" नामक रचना में संकलित हैं। इस ग्रंथ में उन्होंने भक्ति, साधना और नैतिक जीवन पर विशेष बल दिया। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया और सच्चे जीवन मूल्यों का संदेश दिया। "अर्णभवाणी" ने राजस्थान में भक्ति आंदोलन को नई दिशा दी।
205. राजस्थान की वह प्रथम महिला जिस पर डाक टिकट जारी किया गया?
- (A) मीरां बाई
- (B) अल्लाह जिलाई बाई
- (C) गवरी बाई
- (D) गायत्री देवी
मीराबाई राजस्थान की महान भक्त कवयित्री थीं। उन पर 1 अक्टूबर 1952 को 2 आना मूल्य का डाक टिकट जारी किया गया, जो राजस्थान की किसी महिला पर जारी किया गया पहला टिकट था। मीरा की भक्ति श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। उनकी रचनाएँ और पद आज भी समाज में भक्ति भावना जगाते हैं।
206. राजस्थान के किस संत ने साधुओं को सैन्य प्रशिक्षण देकर एक सैन्य दल 'लश्करी' बनाया था?
- (A) संत मावजी
- (B) कृष्णदास पयहारी
- (C) बालनंदाचार्य
- (D) आचार्य परशुराम
संत बालनंदाचार्य ने साधुओं को केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं दी बल्कि उन्हें आत्मरक्षा और समाज रक्षा के लिए सैन्य प्रशिक्षण भी दिया। उन्होंने "लश्करी" नामक सैन्य दल का गठन किया। इस दल का उद्देश्य धर्म, समाज और राष्ट्र की रक्षा करना था। इससे संत परंपरा केवल भक्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज सुधार और सुरक्षा में भी योगदान दिया।
207. परनामी सम्प्रदाय के बारे में निम्न में से असत्य कथन है?
- (A) इसके प्रवर्तक 'प्राणनाथ' जी थे।
- (B) इस सम्प्रदाय में 'कुलजम स्वरूप' ग्रन्थ की पूजा की जाती है।
- (C) इसकी प्रमुख पीठ पन्ना (मध्यप्रदेश) में है।
- (D) राजस्थान में इसकी प्रधान पीठ बीकानेर में है।
परनामी सम्प्रदाय के प्रवर्तक प्राणनाथ जी थे। इस सम्प्रदाय में 'कुलजम स्वरूप' नामक ग्रंथ की पूजा की जाती है और इसकी मुख्य पीठ पन्ना (मध्यप्रदेश) में है। राजस्थान में इसकी प्रधान पीठ जयपुर (आदर्श नगर) में है, न कि बीकानेर में। यह सम्प्रदाय भगवान कृष्ण की भक्ति और शुद्ध जीवन शैली को मानता है।
208. अलखिया सम्प्रदाय के बारे में निम्न में से असत्य कथन है?
- (A) इसके प्रवर्तक 'लालगिरी' थे।
- (B) लालगिरी का जन्म सुलखनिया गाँव (चुरू) में हुआ था।
- (C) इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ चुरू में है।
- (D) इनका प्रमुख ग्रन्थ 'अलख स्तुति प्रकाश' है।
अलखिया सम्प्रदाय के प्रवर्तक लालगिरी जी थे और उनका जन्म चुरू जिले के सुलखनिया गाँव में हुआ था। इनके अनुयायी मुख्य रूप से मोची समाज से आते हैं। इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ बीकानेर में है, न कि चुरू में। इनके अनुयायी 'अलख स्तुति प्रकाश' जैसे ग्रंथों का अध्ययन करते हैं और सादगीपूर्ण भक्ति जीवन जीते हैं।
209. राजस्थान के किन जिलों में सिक्ख धर्म के सर्वाधिक अनुयायी हैं?
- (A) ब्यावर, अजमेर
- (B) दौसा, टोंक
- (C) गंगानगर, हनुमानगढ़
- (D) जयपुर, सीकर
राजस्थान में सिख धर्म के अनुयायी सबसे अधिक गंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में पाए जाते हैं। इसका कारण यह है कि यह क्षेत्र पंजाब से सटा हुआ है और यहाँ पर गंग नहर के निर्माण के बाद कृषि भूमि उपलब्ध हुई। बड़ी संख्या में सिख किसान यहाँ आकर बस गए। इन जिलों में आज भी सिख समुदाय का महत्वपूर्ण योगदान है।
210. संत पीपा का बचपन का नाम था?
- (A) प्रतापसिंह कछवाहा
- (B) प्रतापसिंह राठौड़
- (C) प्रतापसिंह खींची
- (D) प्रतापसिंह सिसोदिया
संत पीपा का जन्म गागरोन (झालावाड़) के खींची राजघराने में हुआ था और उनका बचपन का नाम प्रतापसिंह खींची था। बाद में उन्होंने राजपाट छोड़कर भक्ति मार्ग अपनाया। वे आचार्य रामानन्द के शिष्य बने। दर्जी समाज इन्हें अपना आराध्य देव मानता है। संत पीपा ने जीवनभर सत्य, भक्ति और सादगीपूर्ण जीवन का संदेश दिया।
211. समदड़ी (बालोतरा) में पीपापंथियों का मेला कब भरता है?
- (A) कार्तिक पूर्णिमा
- (B) चैत्र पूर्णिमा
- (C) भाद्रपद पूर्णिमा
- (D) श्रावण पूर्णिमा
समदड़ी (बालोतरा) में पीपापंथियों का प्रसिद्ध मेला चैत्र पूर्णिमा को भरता है। इस दिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहाँ एकत्रित होकर संत पीपा की शिक्षाओं और भक्ति गीतों का स्मरण करते हैं। यह मेला संत पीपा की भक्ति परंपरा को जीवित रखने का एक प्रमुख अवसर है। इसे सामाजिक एकता और आध्यात्मिक उत्सव का प्रतीक माना जाता है।
212. किस विद्वान ने संत पीपा की जीवनी लिखी है?
- (A) गार्सा द तासी
- (B) एल. पी. टेस्सीटोरी
- (C) कर्नल जेम्स टॉड
- (D) मुंशी देवीप्रसाद
संत पीपा की जीवनी प्रसिद्ध फ्रांसीसी विद्वान गार्सा द तासी ने लिखी थी। उन्होंने भारतीय संत परंपरा और साहित्य का गहन अध्ययन किया और संत पीपा के जीवन व शिक्षाओं को विस्तार से वर्णित किया। उनके लेखन से संत पीपा के योगदान और उनकी भक्ति धारा की महत्ता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
213. संत धन्नाजी के मेले में राजस्थान के अलावा किस राज्य से सर्वाधिक अनुयायी आते हैं?
- (A) हरियाणा
- (B) गुजरात
- (C) पंजाब
- (D) मध्यप्रदेश
संत धन्नाजी का मेला राजस्थान के अलावा पंजाब से सर्वाधिक अनुयायियों को आकर्षित करता है। इसका कारण यह है कि पंजाब में भी संत धन्ना की भक्ति परंपरा और विचारों का प्रभाव गहराई से फैला हुआ है। उनकी सरलता, श्रम और भक्ति पर आधारित शिक्षा ने हर वर्ग को प्रभावित किया। इसीलिए पंजाब से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके मेले में सम्मिलित होते हैं।
214. निम्न में से असुमेलित युग्म है?(संत- रचना)
- (A) संत पीपा - चिन्तावणी
- (B) रैदास - रैदास की परचर्चा
- (C) संत धन्ना - धन्ना जी की आरती
- (D) मावजी - कीर्तनमाला
यहाँ असुमेलित युग्म 'मावजी-कीर्तनमाला' है। कीर्तनमाला गवरी बाई की रचना है, जबकि मावजी की वाणी को "चौपड़ा" कहा जाता है। संत मावजी को वागड़ का धणी कहा जाता है। उनके उपदेश और भजनों ने वागड़ क्षेत्र में भक्ति आंदोलन को नई दिशा दी।
215. अचलदास खींची री वचनिका के अनुसार संत पीपा ने निम्न में से किस शासक को युद्ध में पराजित किया था?
- (A) शेरशाह सूरी
- (B) महमूद गजनवी
- (C) फिरोजशाह तुगलक
- (D) तैमूर लंग
संत पीपा ने अपने जीवनकाल में फिरोजशाह तुगलक को युद्ध में पराजित किया था। अचलदास खींची री वचनिका में इसका उल्लेख मिलता है। संत पीपा मूलतः खींची राजघराने के शासक थे, लेकिन बाद में उन्होंने राजपाट त्यागकर भक्ति मार्ग को अपनाया। उनका यह जीवन संघर्ष और आध्यात्मिक परिवर्तन समाज को प्रेरित करता है।
216. संत रैदास के सम्बन्ध में निम्न में से असत्य कथन है?
- (A) ये जाति से 'चमार' थे।
- (B) ये 'रामानन्द' के शिष्य थे।
- (C) इनकी 4 खम्भों की छतरी चित्तौड़गढ़ में बनी है।
- (D) इनकी मृत्यु चित्तौड़गढ़ में हुई थी।
संत रैदास का निधन वाराणसी में 1538 ई. में हुआ था, न कि चित्तौड़गढ़ में। वे जाति से चमार थे और समाज में समानता और भक्ति का संदेश दिया। वे रामानन्द के प्रमुख शिष्यों में थे और मीरा बाई भी उनकी शिष्या रहीं। चित्तौड़गढ़ में उनकी छतरी स्मृति स्थल के रूप में आज भी विद्यमान है।
217. निम्न में से किस महिला संत (प्रसिद्ध कृष्ण उपासिका) का सम्बन्ध मेवाड़ से था?
- (A) भूरी बाई
- (B) गवरी बाई
- (C) राना बाई
- (D) भोली गुजरी
भूरी बाई मेवाड़ की प्रसिद्ध महिला संत थीं। वे कृष्ण भक्ति के लिए जानी जाती थीं और उन्हें समाज में महिला संत परंपरा की अग्रणी हस्तियों में गिना जाता है। उन्होंने अपनी भक्ति और पदों के माध्यम से कृष्ण को सखा और आराध्य दोनों रूपों में प्रस्तुत किया। मेवाड़ में उनकी भक्ति का प्रभाव आज भी देखा जा सकता है।
218. थाली भरके लाई रे खिचड़ो, ऊपर घी की बाटकी। जीमो म्हारा श्याम धणी, जिमाव बेटी जाट की।' इस गीत का सम्बन्ध है?
- (A) मीरा बाई
- (B) ब्रज कंवरी
- (C) करमा बाई
- (D) फुली बाई
यह प्रसिद्ध गीत करमा बाई से जुड़ा हुआ है। करमा बाई जाट समुदाय की महान कृष्ण भक्त थीं। लोक परंपरा के अनुसार, उन्होंने भगवान कृष्ण को खिचड़ी का भोग लगाया था। यह कथा बताती है कि भगवान भावना और भक्ति से प्रसन्न होते हैं, न कि केवल बाहरी आडंबर से। इसलिए करमा बाई की यह कथा बहुत प्रसिद्ध है।
219. राजस्थान की दूसरी मीरां' कहलाने वाली राना बाई का जन्म कहाँ पर हुआ था?
- (A) कालवा (डीडवाना-कुचामन)
- (B) हरनावा (डीडवाना-कुचामन)
- (C) मांझवास (नागौर)
- (D) माहुन्द (अलवर)
राना बाई, जिन्हें 'राजस्थान की दूसरी मीरां' कहा जाता है, का जन्म हरनावा (डीडवाना-कुचामन) में हुआ था। वे भी कृष्ण की महान उपासिका थीं। अपने जीवनकाल में उन्होंने मीरा की तरह कृष्ण भक्ति को अपनाया और समाज में भक्ति आंदोलन की धारा को आगे बढ़ाया। उनका जीवन महिलाओं के लिए भक्ति और त्याग का आदर्श प्रस्तुत करता है।
220. जैन धर्म के तेरापंथ सम्प्रदाय के 9वें आचार्य थे?
- (A) आचार्य महाप्रज्ञ
- (B) आचार्य महाश्रमण
- (C) आचार्य तुलसी
- (D) आचार्य भीक्षु
जैन धर्म के तेरापंथ सम्प्रदाय के 9वें आचार्य आचार्य तुलसी थे। उनका जन्म लाडनूं (नागौर) में हुआ था। उन्होंने "अणुव्रत आंदोलन" की शुरुआत की, जिसमें सत्य, अहिंसा, संयम और नैतिकता पर विशेष बल दिया गया। आचार्य तुलसी ने जैन समाज के साथ-साथ सामाजिक सुधार में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ – सभी भाग:
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