राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ Questions with Answers

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ (Saint Sects of Rajasthan) – Part 12

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में आचार्य महाश्रमण, आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ, आचार्य भीक्षु, जसनाथी सम्प्रदाय, विश्नोई सम्प्रदाय, आचार्य भिक्षु, जाम्भोजी, धन्नाजी, मीरा बाई आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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221. जैन धर्म के तेरापंथ सम्प्रदाय के 10वें आचार्य थे?

  • (A) आचार्य महाश्रमण
  • (B) आचार्य भीक्षु
  • (C) आचार्य तुलसी
  • (D) आचार्य महाप्रज्ञ

जैन धर्म के तेरापंथ सम्प्रदाय के 10वें आचार्य आचार्य महाप्रज्ञ थे। उनका जन्म झुंझुनूं जिले के टमकोर गाँव में हुआ था और उनका मूल नाम नथमल चौरड़िया था। उन्होंने "प्रेक्षाध्यान" पद्धति का प्रतिपादन किया, जो आत्मिक शांति और ध्यान पर आधारित थी। उन्होंने जैन धर्म को आधुनिक युग में आध्यात्मिक जागरण से जोड़ा।

222. आओ हम जीना सीखें', 'दुख मुक्ति का मार्ग' नामक पुस्तकों के रचयिता है?

  • (A) आचार्य महाप्रज्ञ
  • (B) आचार्य महाश्रमण
  • (C) आचार्य तुलसी
  • (D) आचार्य भिक्षु

आचार्य महाश्रमण ने समाज को नैतिक और आध्यात्मिक जीवन की दिशा देने के लिए कई ग्रंथ लिखे। उनकी रचनाएँ जैसे 'आओ हम जीना सीखें' और 'दुख मुक्ति का मार्ग' में मानव जीवन की समस्याओं का सरल समाधान दिया गया है। इनमें अहिंसा, संयम और करुणा के महत्व को स्पष्ट किया गया है। वे तेरापंथ परंपरा के 11वें आचार्य हैं और आज भी उनके विचार समाज को मार्गदर्शन देते हैं।

223. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म (सम्प्रदाय प्रमुख पीठ) सुमेलित नहीं है?

  • (A) विश्नोई सम्प्रदाय - मुकाम (बीकानेर)
  • (B) जसनाथ जी सम्प्रदाय - कतरियासर (बीकानेर)
  • (C) लालदासी सम्प्रदाय - नगला जहाज (भरतपुर)
  • (D) निरंजनी सम्प्रदाय - बनेड़ा (भीलवाड़ा)

यहाँ असुमेलित युग्म है निरंजनी सम्प्रदाय - बनेड़ा (भीलवाड़ा)। वास्तव में निरंजनी सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ गाढ़ा (डीडवाना-कुचामन) में है। जबकि अन्य तीन युग्म सही हैं। विश्नोई सम्प्रदाय की पीठ मुकाम, जसनाथी सम्प्रदाय की पीठ कतरियासर और लालदासी सम्प्रदाय की पीठ नगला जहाज में स्थित है।

224. राजस्थान में 'कंदरिया पंथ' किनमें प्रचलित है?

  • (A) गरासियों में
  • (B) भीलों में
  • (C) महरिया
  • (D) डामोर

कंदरिया पंथ राजस्थान में विशेष रूप से भीलों में प्रचलित है। यह पंथ मुख्यतः सलूम्बर क्षेत्र के जयसमंद झील के आस-पास के भीलों के बीच विकसित हुआ। इसमें प्रकृति पूजा और लोक परंपराओं का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। कंदरिया पंथ भक्ति और सामाजिक एकता पर आधारित है और भील समुदाय की धार्मिक आस्थाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

225. राजस्थान का वह लोकसंत जिनके चमत्कारों से प्रभावित होकर दिल्ली सुल्तान सिकन्दर लोदी ने भू-दान किया था?

  • (A) जाम्भोजी
  • (B) धन्नाजी
  • (C) मीरा बाई
  • (D) जसनाथ जी

संत जसनाथ जी के चमत्कारों से प्रभावित होकर दिल्ली सुल्तान सिकन्दर लोदी ने उन्हें कतरियासर में 500 बीघा भूमि प्रदान की थी और नगाड़ा बजाने की अनुमति भी दी। यह घटना इस बात को दर्शाती है कि संत जसनाथ जी का प्रभाव केवल राजस्थान में ही नहीं बल्कि दिल्ली तक था। उनके उपदेशों ने अहिंसा, दया और सत्संग की परंपरा को बढ़ावा दिया।

226. निम्न में से कौनसा मंदिर वल्लभ सम्प्रदाय की प्रथम पीठ कहलाती है?

  • (A) मथुरेश मंदिर (कोटा)
  • (B) गोकुलचन्द्र जी मंदिर (कामां-डीग)
  • (C) श्रीनाथ मंदिर (नाथद्वारा)
  • (D) द्वारकाधीश मंदिर (कांकरोली)

वल्लभ सम्प्रदाय की प्रथम पीठ मथुरेश मंदिर (कोटा) है। वल्लभाचार्य ने इस सम्प्रदाय की स्थापना की और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप श्रीनाथ जी की भक्ति को इसका केंद्र बनाया। इस सम्प्रदाय में सेवा और भोग को प्रमुख माना गया। बाद में नाथद्वारा का श्रीनाथ मंदिर इस सम्प्रदाय का सबसे बड़ा केंद्र बन गया, लेकिन पहली पीठ कोटा में ही मानी जाती है।

227. फैमिली एंड द नेशन', 'जैन योग', 'मेरी दृष्टि मेरी सृष्टि', 'महावीर का पुनर्जन्म' व 'ध्यान योग' आदि पुस्तकों की रचना किसके द्वारा की गई है?

  • (A) चंद्रप्रभु
  • (B) पार्श्वनाथ
  • (C) आचार्य महाप्रज्ञ
  • (D) नेमीनाथ

इन पुस्तकों के लेखक आचार्य महाप्रज्ञ हैं। वे जैन धर्म के तेरापंथ सम्प्रदाय के 10वें आचार्य थे और उनका मूल नाम नथमल चौरड़िया था। उन्होंने प्रेक्षाध्यान पद्धति का प्रतिपादन किया और समाज में अहिंसा, संयम और ध्यान का संदेश फैलाया। उनकी रचनाएँ आज भी आध्यात्मिक मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती हैं।

228. संत दुर्लभ जी किस उपनाम से विख्यात हैं?

  • (A) राजस्थान का नृसिंह
  • (B) राजस्थान का रहीम
  • (C) राजस्थान का कबीर
  • (D) राजस्थान का तुलसीदास

संत दुर्लभ जी को 'राजस्थान का नृसिंह' कहा जाता है। उन्होंने अपने जीवनकाल में धर्म की रक्षा, अन्याय के विरोध और भक्ति मार्ग का प्रचार किया। उनके उपदेशों ने समाज में साहस और धर्मनिष्ठा की भावना जगाई। लोक परंपराओं और भक्ति गीतों के माध्यम से उन्होंने जनमानस को प्रभावित किया और धर्म रक्षा के प्रतीक बने।

229. श्रद्धानाथजी का आश्रम कहाँ स्थित है?

  • (A) खैरथल-तिजारा
  • (B) नागौर
  • (C) झुंझुनूं
  • (D) सीकर

श्रद्धानाथ जी का आश्रम लक्ष्मणगढ़ (सीकर) के पास रेलवे स्टेशन के समीप स्थित है। यह आश्रम नाथ सम्प्रदाय का एक प्रमुख केंद्र है। इसे अमृतनाथ जी महाराज की शिष्य परंपरा के तहत स्थापित किया गया था। यहाँ श्रद्धालुओं को श्रद्धानाथ जी के साधना जीवन और उपदेशों की झाँकी देखने को मिलती है। यह स्थान आज भी भक्ति और साधना का प्रमुख केंद्र है।

230. इन्सान पहले इन्सान, फिर हिंदू या मुसलमान यह संदेश किसका है?

  • (A) आचार्य महाप्रज्ञ
  • (B) आचार्य महाश्रमण
  • (C) आचार्य तुलसी
  • (D) आचार्य भीक्षु

यह प्रसिद्ध संदेश आचार्य तुलसी का है। उन्होंने कहा कि पहले हमें मानवता को अपनाना चाहिए, उसके बाद धर्म या जाति का विचार करना चाहिए। आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन चलाकर समाज में नैतिकता, सदाचार और अहिंसा को बढ़ावा दिया। उनका यह संदेश समाज में धार्मिक सौहार्द और एकता के लिए आज भी प्रासंगिक है।

231. दादू पंथ की कितनी शाखाएँ थीं?

  • (A) 4
  • (B) 5
  • (C) 6
  • (D) 8

दादू पंथ की 5 शाखाएँ मानी जाती हैं –(1) खालसा – गरीबदास द्वारा प्रारंभ की गई।(2) खाकी – इसमें साधु भस्म रमाते और जटा रखते थे।(3) नागा – सुन्दरदास द्वारा चलाया गया, जिसमें साधु हथियार रखते थे।(4) उत्तरादे/स्थानधारी – जो उत्तर भारत में जाकर बसे।(5) विरक्त – गृहस्थों को उपदेश देने वाले।इन शाखाओं ने दादूपंथ को समाज में विविध रूपों में फैलाया।

232. दादूपंथ में नागा उप संप्रदाय के प्रवर्तक थे

  • (A) रज्जब
  • (B) गरीबदास
  • (C) मलूकदास
  • (D) सुंदरदास

दादूपंथ में नागा उपसंप्रदाय के प्रवर्तक संत सुन्दरदास थे। नागा साधु शारीरिक रूप से बलशाली होते थे और अपने साथ हथियार भी रखते थे। इनका मुख्य उद्देश्य सम्प्रदाय की रक्षा करना और समाज में धर्म की सुरक्षा करना था। संत सुन्दरदास ने इस शाखा को प्रारंभ करके दादूपंथ की परंपरा को नई दिशा दी। यह शाखा विशेषकर साहस और वीरता के लिए प्रसिद्ध रही।

233. संत दादू की मृत्यु किस स्थल पर हुई ?

  • (A) सांभर
  • (B) आम्बेर
  • (C) नारायणा
  • (D) पुष्कर

संत दादूदयाल का जन्म अहमदाबाद में 1544 ई. में हुआ था और उनकी मृत्यु 1603 ई. में नारायणा (जयपुर) में हुई। यहाँ उनकी गद्दी स्थापित हुई जिसे दादूखोल या भैराणा पहाड़ी कहते हैं। दादू ने 1574 ई. में दादूपंथ की स्थापना की थी। इनके उपदेशों का संग्रह दादूवाणी कहलाता है। इन्हें राजस्थान का कबीर भी कहा जाता है।

234. राजस्थान के कौन से प्रसिद्ध सन्त बीकानेर के कातरियासर से संबंधित हैं?

  • (A) हरि दास
  • (B) सिद्ध जसनाथ
  • (C) जांभोजी
  • (D) दरियावजी

सिद्ध जसनाथ जी का जन्म 1482 ई. में हुआ और उन्होंने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की। यह सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति पर आधारित था। जसनाथ जी ने समाज को 36 नियमों का पालन करने की शिक्षा दी। उनके उपदेश सिंभूधड़ा और कोंडा ग्रंथोंमें संकलित हैं। उनकी समाधि कतरियासर में ही है।

235. संत जसनाथ जी के बारे में कौनसा कथन सही नहीं है?

  • (A) इनका जन्म 1482 ई. बीकानेर के कतरियासर गांव में हुआ।
  • (B) कतरियासर में इन्होंने 12 वर्ष तक साधना की।
  • (C) 1506 ई. में, इन्होंने कतरियासर में समाधि ली।
  • (D) इनके उपदेश "सिंधूधड़ा" व "कोंडा" नामक ग्रंथ में संकलित हैं।

संत जसनाथ जी ने गोरख मालिया स्थान पर 12 वर्षों तक साधना नहीं की बल्कि 20 वर्षों तक तपस्या की थी। उनका जन्म 1482 ई. में हुआ और 1504 ई. में कतरियासर में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की। उन्होंने समाज को अहिंसा, सत्य और सेवा का संदेश दिया। उनके उपदेश "सिंभूधड़ा" और "कोंडा" नामक ग्रंथों में संकलित हैं।

236. दादू दयाल के निधन के पश्चात् दादुपंथ का उत्तराधिकारी किये नियुक्त किया गया था?

  • (A) मिस्किन दास
  • (B) गरीब दास
  • (C) रज्जब
  • (D) नारायण दास

संत दादूदयाल के निधन के बाद उनके पुत्र गरीबदास को दादूपंथ का उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया। हालांकि गरीबदास ने स्वयं को गद्दी संभालने के लिए अक्षम मानकर त्याग दिया और इसके बाद मिस्किनदास गद्दी पर बैठे। दादूपंथ में आगे चलकर कई शाखाएँ बनीं, जैसे खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे और विरक्त।

237. जसनाथी सम्प्रदाय की प्रमुख गद्दी कहाँ पर है?

  • (A) जैतारण
  • (B) कतरियासर
  • (C) शाहपुरा
  • (D) खेड़ापा

जसनाथी सम्प्रदाय की प्रमुख गद्दी कतरियासर (बीकानेर) में है। यहीं पर 1504 ई. में संत जसनाथ जी ने इस सम्प्रदाय की स्थापना की थी। उनके उपदेशों का संकलन सिंभूधड़ा और कोंडा ग्रंथों में है। उनकी समाधि भी यहीं पर स्थित है और यहाँ आश्विन शुक्ल सप्तमी को मेला भरता है। यह स्थान अनुयायियों के लिए तीर्थ समान है।

238. सिंभूदड़ा एवं कोंड़ा ग्रंथों में किस संप्रदाय के उपदेश हैं?

  • (A) विश्नोई संप्रदाय
  • (B) हरभूजी
  • (C) संत जसनाथ सम्प्रदाय
  • (D) विश्नोई और जसनाथी संप्रदाय

सिंभूदड़ा और कोंड़ा ग्रंथों में संत जसनाथ जी के उपदेश संग्रहीत हैं। ये दोनों ग्रंथ जसनाथी सम्प्रदाय की धार्मिक नींव माने जाते हैं। इनमें आचार, व्यवहार और नियमों का वर्णन किया गया है। जसनाथ जी ने समाज को सादगी, सेवा और धर्म पालन का संदेश दिया। उनके अनुयायी आज भी इन ग्रंथों को मार्गदर्शक मानते हैं।

239. लिखमादेसर, पूनरासर, मालासर में किस सम्प्रदाय की उप पीठें हैं?

  • (A) निम्बार्क संप्रदाय
  • (B) जसनाथी सम्प्रदाय
  • (C) विश्नोई सम्प्रदाय
  • (D) गौड़ीय सम्प्रदाय

लिखमादेसर, पूनरासर और मालासर में जसनाथी सम्प्रदाय की उपपीठें हैं। यह सम्प्रदाय संत जसनाथ जी द्वारा 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में स्थापित किया गया था। इसके प्रमुख संतों में टोडर जी, हांसो जी और हालो जी का नाम आता है। इन उपपीठों के माध्यम से जसनाथी सम्प्रदाय का प्रचार-प्रसार राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में हुआ।

240. लालनाथजी, चोखनाथजी, और सवाईदास जी सन्त किस सम्प्रदाय से सम्बन्धित है?

  • (A) जसनाथी सम्प्रदाय
  • (B) निरंजनी सम्प्रदाय
  • (C) विश्नोई सम्प्रदाय
  • (D) रामस्नेही सम्प्रदाय

लालनाथजी, चोखनाथजी और सवाईनाथजी का संबंध जसनाथी सम्प्रदाय से है। इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत जसनाथ जी थे। इस सम्प्रदाय की बाईबल 'यशोनाथ पुराण' कहलाती है, जिसे रामनाथ जी ने लिखा। इस सम्प्रदाय के प्रमुख मेले कतरियासर (बीकानेर) में लगते हैं। इन संतों ने समाज को धार्मिक अनुशासन और भक्ति मार्ग पर चलने की शिक्षा दी।

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10 | Part 11 | Part 12 | Part 13 | Part 14 | Part 15 | Part 16 | Part 17

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