राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ (Saint Sects of Rajasthan) – Part 13
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में लालदास, चरणदास, रैदास, हरिदास, दादू दयाल, पीपा, सुंदरदास, हरिरामदास, मावजी, दादूदयाल आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
- कुल प्रश्न: 20
- Last Updated:
✍️ Prepared & Reviewed by:
Shiksha247 Rajasthan GK
Faculty & Content Team
(Since 2021)
241. संत भूरी बाई अलख' का कार्यकाल था?
- (A) गोडवाड़
- (B) भारवाड़
- (C) मेवाड़
- (D) बागड़
महात्मा भूरी बाई अलख का जन्म संवत् 1949 में आषाढ़ शुक्ल 14 को लावासरदारगढ़ (मेवाड़) में हुआ था। वे अद्वैत मत की समर्थक थीं और अपने गहन आध्यात्मिक विचारों से प्रसिद्ध हुईं। उस समय के मेवाड़ के संत चतुरसिंहजी जैसे विद्वान भी उनसे दार्शनिक चर्चा करने आते थे। इन्होंने ब्रह्मानंद को अनिर्वचनीय माना और अपनी वाणी के माध्यम से सरल भक्ति का प्रचार किया।
242. जीवन भर दूल्हे के वेश में रहते हुए दादू के उपदेशों का बखान करने वाले संत कौन थे?
- (A) सुन्दर दास जी
- (B) रज्जब जी
- (C) रामपाल दास जी
- (D) माधोदास जी
संत रज्जब जी दादूदयाल के प्रमुख शिष्य थे और वे आजीवन दूल्हे के वेश में रहे। इनकी पीठ सांगानेर में स्थापित है और इनके उपदेश रज्जब वाणी व सर्वगी नाम से संकलित हैं। रज्जब जी ने दादू के निर्गुण भक्ति विचारों को आगे बढ़ाया और उनकी स्मृति में रज्जब पंथ की शुरुआत की। इनके अनुयायी इन्हें एक महान संत मानते हैं।
243. निम्नलिखित संतों में से कौन मेवात क्षेत्र से बंधित है?
- (A) हरिदास
- (B) दादू दयाल
- (C) लालदास
- (D) पीपा
संत लालदास का जन्म 1540 ई. में धोलीदूब (अलवर) में हुआ था। इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की, जिसकी प्रमुख पीठ नगला जहाज (भरतपुर) में है। यह सम्प्रदाय मुख्यतः मेवात क्षेत्र में प्रचलित हुआ। लालदास जी ने समाज में फैली कुरीतियों और अंधविश्वासों का विरोध किया और हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल दिया।
244. मध्यकालीन के प्रसिद्ध संत थे?
- (A) सुंदरदास
- (B) चरणदास
- (C) लालदास
- (D) हरिरामदास
संत लालदास मध्यकालीन संत परंपरा के प्रमुख सुधारक संत थे। वे लालदासी सम्प्रदाय के प्रवर्तक थे और इनकी रचना लालदास की चेतावणियाँ (मेवाती भाषा में) प्रसिद्ध है। दाराशिकोह उनसे प्रभावित होकर उनसे मिले थे। इन्होंने समाज में हिन्दू-मुस्लिम एकता, भक्ति मार्ग और समाज सुधार को बढ़ावा दिया, जिससे इन्हें विशेष पहचान मिली।
245. निम्नलिखित संतो में कौन जन्म से मुसलमान था?
- (A) मावजी
- (B) दादूदयाल
- (C) लालदास
- (D) चरणदास
संत लालदास का जन्म 1540 ई. में मेवात क्षेत्र के धोलीदूब (अलवर) में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। बाद में इन्हें संत गद्दन चिश्ती से दीक्षा मिली और इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की। लालदास जी ने निर्गुण भक्ति का प्रचार किया और समाज में अंधविश्वास व पाखंड के विरोधी रहे। उनकी समाधि शेरपुर (अलवर) में स्थित है।
246. संत लालदास के सम्बन्ध में कौन सा तथ्य सही है?
- (A) लालदास की वाणी' नामक ग्रन्थ विभाजित
- (B) इनका जन्म मेवात प्रदेश में हुआ
- (C) ये शादीशुदा थे।
- (D) 1688 ई. में इनका देहान्त हुआ।
संत लालदास का जन्म 1540 ई. में मेवात प्रदेश (धोलीदूब, अलवर) में हुआ था। वे लालदासी सम्प्रदाय के प्रवर्तक थे और निर्गुण भक्ति के प्रचारक माने जाते हैं। इनकी प्रमुख कृति लालदास की चेतावणियाँ है। लालदास जी का निधन 1648 ई. में नगला जहाज (भरतपुर) में हुआ और समाधि शेरपुर (अलवर) में बनी।
247. संत लालदास जी किसके लिए अच्छी तरह से जाने जाते हैं?
- (A) मूर्तिपूजा
- (B) साम्प्रदायिक
- (C) समाज सुधार
- (D) सरल
संत लालदास जी समाज सुधार के लिए प्रसिद्ध थे। उनका जन्म मेवात क्षेत्र में हुआ और उन्होंने जीवनभर समाज में व्याप्त अंधविश्वास, पाखंड और मिथ्याचार का विरोध किया। वे मानते थे कि संत को स्वावलंबी होना चाहिए और दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उनके उपदेश आज भी लोगों को भक्ति और नैतिक शुद्धता की प्रेरणा देते हैं।
248. निम्नलिखित में से कौनसा वैष्णव संप्रदाय नहीं है?
- (A) निम्बार्क
- (B) वल्लभ
- (C) निष्कलंक
- (D) लालदासी
निष्कलंक सम्प्रदाय वैष्णव सम्प्रदाय नहीं है, बल्कि इसके प्रवर्तक संत मावजी थे। इन्हें वागड़ का धणी कहा जाता है। मावजी के अनुयायी इन्हें विष्णु का दसवाँ अवतार कल्कि मानते हैं। इन्होंने बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर) में अपनी पीठ स्थापित की। उनकी वाणी को मावजी चौपड़ा कहा जाता है।
249. राजस्थान के संत पीपा के गुरू कौन थे?
- (A) रामानंद
- (B) रैदास
- (C) दादू
- (D) रामानुज
संत पीपा जी ने गुरु रामानंद से दीक्षा ग्रहण की थी। रामानंद के शिष्य होने के बाद पीपा जी ने निर्गुण भक्ति परम्परा को अपनाया और उसका प्रचार किया। उन्होंने जीवनभर सादगी और भक्ति मार्ग को अपनाया। उनकी प्रमुख रचना चिंतावणी जोग है। उनके मेले आज भी टोंक, बाड़मेर और झालावाड़ में आयोजित होते हैं।
250. राजस्थान के किस संत और रामानंद के शिष्य ने अपने राज्य को त्याग कर गुरु मंडली में सम्मिलित हुए?
- (A) धन्नाजी
- (B) जाम्भोजी
- (C) पीपाजी
- (D) रैदास
संत पीपाजी गागरोन के शाक्त राजा एवं संत कवि थे। उनका जन्म प्रताप राव खींची के रूप में हुआ। बाद में वे रामानंद जी के शिष्य बने और राज-पाट त्यागकर भक्ति मार्ग को अपनाया। इन्हें पीपा बैरागी के नाम से भी जाना जाता है। ये भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में से एक थे। संत धन्नाजी भी रामानंद के शिष्य थे, लेकिन पीपाजी का त्याग विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
251. संत पीपाजी का जन्म स्थान निम्नलिखित में से कौन सा है?
- (A) गागरोन
- (B) कतरियासर
- (C) पीपासर
- (D) बिलाड़ा
संत पीपा जी का जन्म 1425 ई. चैत्र पूर्णिमा को गागरोन (झालावाड़) में हुआ था। उनके पिता कड़वाराव खींची और माता लक्ष्मीवती थीं। पीपा जी ने रामानंद से दीक्षा लेकर भक्ति को मोक्ष का साधन बताया। उनकी रचना चिंतावणी प्रसिद्ध है। उनकी स्मृति में गागरोन कालीसिंध नदी किनारे छतरी और समदड़ी (बाड़मेर) में मंदिर है, साथ ही टोडाराय सिंह (टोंक) में उनकी गुफा है।
252. एक शासक एवं संत पीपा किस स्थान से संबंधित थे?
- (A) आम्बेर
- (B) वाराणसी
- (C) जाबल
- (D) गागरोन
संत पीपा, जिन्हें प्रताप सिंह खींची भी कहा जाता है, का जन्म 1425 ई. में गागरोन (झालावाड़) में हुआ था। वे गागरोन के शासक रहे और बाद में रामानंद के शिष्य बने। उन्होंने सांसारिक जीवन त्यागकर भक्ति आंदोलन में योगदान दिया। गागरोन में आज भी उनकी स्मृति में छतरी बनी हुई है।
253. संत दरियाव जी द्वारा रामस्नेही सम्प्रदाय की शाखा स्थापित की-
- (A) शाहपुरा
- (B) सिंथल
- (C) रैण
- (D) खेड़ापा
संत दरियाव जी ने रामस्नेही सम्प्रदाय की रैण (नागौर) शाखा स्थापित की। इनका जन्म 1676 ई. में जैतारण (पाली) में हुआ था। इनके पिता का नाम मानजी और माता का नाम गीगण था। इन्होंने योगमार्ग और हिन्दू-मुस्लिम समन्वय की भावना पर बल दिया। इनकी मृत्यु 1733 ई. में हुई।
254. रामस्नेही संप्रदाय की शाहपुरा शाखा के संस्थापक कौन थे?
- (A) जैमलदास जी
- (B) रामचरण जी
- (C) रामदास जी
- (D) हरिदास जी
रामस्नेही सम्प्रदाय की शाहपुरा (भीलवाड़ा) शाखा के संस्थापक संत रामचरण जी थे। उनका जन्म 1719 ई. में सोडा ग्राम (टोंक) में हुआ। रामचरण जी ने रामभक्ति को निर्गुण स्वरूप में स्नेह के भाव से करने पर बल दिया। उनके उपदेश अर्णभवाणी (अणभैवाणी) नामक ग्रंथ में संकलित हैं। शाहपुरा में आज भी उनकी प्रमुख पीठ स्थित है।
255. 18वीं शताब्दी में राजस्थान में रेणु, शाहपुरा, सिंथल, खेड़ापा किस संप्रदाय के चार प्रमुख केन्द्र थे?
- (A) मीरादासी संप्रदाय
- (B) रामस्नेही संप्रदाय
- (C) दादू पंथ
- (D) रामदासी संप्रदाय
18वीं शताब्दी में रामस्नेही सम्प्रदाय के चार प्रमुख केंद्र रहे –
256. रामस्नेही सम्प्रदाय के संस्थापक संत रामचरण कहां पैदा हुए?
- (A) सोड़ा-डिग्गी
- (B) शाहपुरा-भीलवाड़ा
- (C) नगलू-भरतपुर
- (D) मुकाम - बीकानेर
संत रामचरण जी का जन्म 1719 ई. में सोडा ग्राम (मालपुरा, टोंक) में हुआ था। उनके पिता का नाम बख्ताराम और माता का नाम देउजीथा। वे गुदड़ सम्प्रदाय के संत कृपाराम के शिष्य थे। रामचरण जी ने रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की और शाहपुरा (भीलवाड़ा) को इसका प्रमुख केंद्र बनाया।
257. रामस्नेही सम्प्रदाय के संस्थापक संत रामचरण के गुरु कौन थे?
- (A) चरणदास
- (B) हरिदास
- (C) कृपाराम
- (D) लालदास
संत रामचरण जी के गुरु संत कृपाराम थे, जो गुदड़ सम्प्रदाय से जुड़े थे। कृपाराम जी ने रामचरण जी को भक्ति और साधना का मार्ग दिखाया। उनके उपदेशों के आधार पर ही रामचरण जी ने रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की। कृपाराम का प्रभाव रामचरण जी की शिक्षाओं में स्पष्ट झलकता है।
258. रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ (गद्दी) कहाँ स्थित है?
- (A) समदड़ी (बाड़मेर)
- (B) सलेमाबाद
- (C) गलता (जयपुर)
- (D) शाहपुरा (भीलवाड़ा)
रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है। इसकी स्थापना संत रामचरण जी ने 1719-1798 ई. के बीच की थी। शाहपुरा में हर साल फूलडोल महोत्सव मनाया जाता है, जो चैत्र कृष्ण 1 से चैत्र कृष्ण 5 तक चलता है। यही रामस्नेही सम्प्रदाय का मुख्य धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्र माना जाता है।
259. रामस्नेही सम्प्रदाय की रैण शाखा के प्रवर्तक थे-
- (A) संत रामचरण जी
- (B) संत दरियाव जी
- (C) संत हरिराम दास जी
- (D) संत हरिदास जी
संत दरियाव जी रामस्नेही सम्प्रदाय की रैण शाखा के प्रवर्तक थे। उनका जन्म 1676 ई. में जैतारण (पाली) में हुआ था। दरियाव जी ने निर्गुण भक्ति परंपरा को आगे बढ़ाया और लोगों को आडंबर-मुक्त साधना का मार्ग बताया। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता और समन्वय पर विशेष बल दिया। 1733 ई. में उनका निधन हुआ और रैण (नागौर) उनकी प्रमुख साधना स्थली बनी।
260. संत मीराबाई का जन्म स्थान "कुडकी" वर्तमान में राजस्थान के किस जिले में स्थित है?
- (A) उदयपुर
- (B) चित्तौड़गढ़
- (C) राजसमंद
- (D) पाली
मीरा बाई, जिन्हें राजस्थान की राधा कहा जाता है, का जन्म 1498 ई. में कुडकी गाँव (पाली जिला) में हुआ था। उनका बचपन का नाम पेमल था। पिता का नाम राव रतनसिंह था। मीरा का विवाह राणा सांगा के पुत्र भोजराज से हुआ। मीरा ने सांसारिक जीवन का त्याग कर स्वयं को पूरी तरह कृष्ण भक्ति में समर्पित कर दिया। उन्होंने अपना अंतिम समय द्वारका (गुजरात) में बिताया।
राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10 | Part 11 | Part 12 | Part 13 | Part 14 | Part 15 | Part 16 | Part 17
Agar aapko kisi MCQ me doubt, correction ya suggestion lagta hai, to please is post ke comment section ki jagah humare YouTube channel par dedicated discussion video ke comment box me post link ke sath comment karein.
📝 Comment karne ka format:
• MCQ Post ka link
• Question number
• Short doubt / correction
✔ Link Copied
👉 Official Discussion Video:
Shiksha247 YouTube Channel