राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ Questions with Answers

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ (Saint Sects of Rajasthan) – Part 14

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में वल्लभ सम्प्रदाय, निम्बार्क सम्प्रदाय, रामदासजी, दादू दयालजी, दरियावजी, मीराबाई, संत लालदास, संत रामचरण, संत हरिदास, संत निरंजनदास आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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261. निम्न में से कौन-सा मीरा बाई का जन्म स्थल है?

  • (A) कुडकी
  • (B) सादड़ी
  • (C) मानपुरा भाखरी
  • (D) सोजत

मीरा बाई का जन्म 1498 ई. में कुडकी (पाली जिला) में हुआ था। उन्हें बचपन से ही कृष्ण भक्ति की गहरी लगन थी और उन्होंने कृष्ण को ही अपना पति और आराध्य माना। मीरा ने कई प्रसिद्ध रचनाएँ कीं जैसे पदावली, राग गोविंद की टीका, नरसी रो मायरो और रुक्मणि मंगल। वे कृष्ण भक्ति में माधुर्य भाव की प्रतिनिधि थीं और आज भी उनकी पदावली गाई जाती है।

262. मीराबाई……सदी की कवयित्री थी।

  • (A) 16 वीं
  • (B) 19 वीं
  • (C) 18 वीं
  • (D) 14 वीं

मीरा बाई 16वीं सदी की प्रमुख कवयित्री और संत थीं। उन्होंने अपने पदों और कविताओं में भगवान कृष्ण के प्रति गहन भक्ति और प्रेम का भाव प्रकट किया। मीरा की रचनाओं में माधुर्य भाव की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। वे राजघराने से थीं, लेकिन सांसारिक सुख-सुविधाओं को त्यागकर पूरी तरह कृष्ण भक्ति में लीन हो गईं।

263. निम्न में से कौन सी रचना मीराबाई की है?

  • (A) सखी
  • (B) बीजक
  • (C) शब्द
  • (D) पदावली

मीरा बाई की प्रमुख रचना पदावली है, जिसमें उनकी कृष्ण भक्ति से संबंधित पद संकलित हैं। इसके अलावा उन्होंने राग गोविंद, रुकमणि मंगल और सत्यभामाजी नुं रूसणो जैसी रचनाएँ भी कीं। उनकी रचनाएँ माधुर्य भाव से ओत-प्रोत हैं और कृष्ण भक्ति को सरल भाषा में जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करती हैं।

264. संत मीराबाई के पति का क्या नाम था?

  • (A) भोजराज
  • (B) रतन सिंह
  • (C) संग्रामसिंह
  • (D) नरपत सिंह

मीरा बाई के पति का नाम भोजराज था, जो राणा सांगा के पुत्र थे। भोजराज के असमय निधन के बाद मीरा ने सांसारिक जीवन से पूरी तरह दूरी बना ली और कृष्ण भक्ति में लीन हो गईं। उन्होंने कृष्ण को ही अपना पति और स्वामी माना। मीरा के भक्ति गीत और पद आज भी भारतवर्ष में गाए और पढ़े जाते हैं।

265. राजस्थान के किस सन्त द्वारा 'सत्यभामाजी नुं रूसण' की रचना की गई?

  • (A) रामदासजी
  • (B) दादू दयालजी
  • (C) दरियावजी
  • (D) मीराबाई

सत्यभामाजी नुं रूसणो' की रचना मीराबाई ने की थी। इस रचना में उन्होंने भगवान कृष्ण के साथ सत्यभामा के संवाद के माध्यम से भक्ति और माधुर्य भाव को प्रस्तुत किया। यह रचना मीरा की गहरी आध्यात्मिकता और कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को प्रकट करती है। यह उनकी महत्वपूर्ण कृतियों में से एक मानी जाती है।

266. निरंजनी सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे?

  • (A) संत लालदास
  • (B) संत रामचरण
  • (C) संत हरिदास
  • (D) संत निरंजनदास

निरंजनी सम्प्रदाय के संस्थापक संत हरिदास जी थे। वे पहले डाकू थे, बाद में हरभूजी सांखला से प्रभावित होकर संत बने। उनका जन्म नागौर जिले के कापरोद गाँव में हुआ था और उनका वास्तविक नाम हरिसिंह सांखला था। वे निर्गुण भक्ति के समर्थक थे और उन्हें राजस्थान का वाल्मीकि कहा जाता है। उनकी समाधि गढ़ा का बास (नागौर) में स्थित है।

267. निम्न में से कौन वृंदावन में निम्बार्क सम्प्रदाय के आचार्य हरिव्यास देव से मंत्र दीक्षित हुए थे?

  • (A) रामानुजाचार्य
  • (B) स्वामी अग्रदास
  • (C) आचार्य परशुराम
  • (D) आचार्य हरिसेन

आचार्य परशुराम को वृंदावन में निम्बार्क सम्प्रदाय के आचार्य हरिव्यास देव से दीक्षा प्राप्त हुई थी। उन्होंने भक्ति और साधना के महत्व को समझते हुए अपने शिष्यों को सच्चे आचरण और सेवा का संदेश दिया। इस दीक्षा के बाद उन्होंने निम्बार्क सम्प्रदाय की शिक्षाओं को राजस्थान में फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

268. निम्न में से कौनसी उप-पीठ जसनाथी सम्प्रदाय से सम्बन्धित नहीं है?

  • (A) मालासर
  • (B) लिखमादेसर
  • (C) बम्बलू
  • (D) सिंथल

जसनाथी सम्प्रदाय की प्रमुख उप-पीठें मालासर, लिखमादेसर, पुनरासर, बम्बलू और पांचला हैं। इन स्थानों पर जसनाथ जी के प्रमुख शिष्यों ने पीठें स्थापित कीं। लेकिन सिंथल इस सम्प्रदाय की उप-पीठ नहीं है। सिंथल का सम्बन्ध रामस्नेही सम्प्रदाय से है।

269. निम्न में से किन रचनाओं में दादू के बारे में वर्णन मिलता है?

  • (A) संत गुणसागर
  • (B) नाममाला
  • (C) भक्तमाल
  • (D) उपरोक्त सभी

संत दादूदयाल के जीवन और उपदेशों का वर्णन कई ग्रंथों में मिलता है। संत गुणसागर माधोदास ने लिखा, नाममाला लालदास ने रची और भक्तमाल राघवदास द्वारा रचित है। इन सबमें संत दादू के उपदेश, साधना और समाज सुधार के कार्यों का उल्लेख मिलता है। इसलिए सही उत्तर है उपरोक्त सभी।

270. सर्वप्रथम किस शासक ने नागा दादूपंथियों को अपनी सेना में लेने का आदेश दिया था?

  • (A) सवाई जयसिंह
  • (B) रामसिंह प्रथम
  • (C) मानसिंह प्रथम
  • (D) सवाई प्रतापसिंह

सवाई जयसिंह (जयपुर) ने 1726 ई. में नागा दादूपंथियों को अपनी सेना में शामिल करने का आदेश दिया। उस समय नागा साधु समाज में शौर्य और युद्धकला के लिए प्रसिद्ध थे। इन साधुओं ने बाद में कई युद्धों में अपनी बहादुरी का परिचय दिया और दादूपंथ के अनुशासन को बनाए रखा।

271. समता दर्शन और व्यवहार' नामक पुस्तक की रचना किसने की?

  • (A) आचार्य महाश्रमण
  • (B) आचार्य महाप्रज्ञ
  • (C) आचार्य तुलसी
  • (D) आचार्य नानेश मुनि

आचार्य नानेश मुनि ने 'समता दर्शन और व्यवहार' की रचना की। इस पुस्तक में उन्होंने व्यक्ति से लेकर समाज और विश्व तक शांति और संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया। इसमें समता, सहिष्णुता और नैतिक मूल्यों पर बल दिया गया है। यह कृति जैन दर्शन और मानवीय आचरण को समझाने वाली महत्वपूर्ण रचना है।

272. श्रद्धानाथजी आश्रम के पीठाधीश्वर को पद्मश्री पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है।

  • (A) वैजनाथ महाराज
  • (B) मगन मुनि
  • (C) गणेशलाल जी महाराज
  • (D) चतुग्दास महाराज

वैजनाथ महाराज, जो श्रद्धानाथ आश्रम के पीठाधीश्वर हैं, को 2025 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें समाज सेवा, आध्यात्मिकता और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उनके योगदान के लिए दिया गया। उन्होंने नाथ सम्प्रदाय की परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

273. श्रीकृष्णम् शरणं ममः' मंत्र किस सम्प्रदाय का है?

  • (A) वल्लभ सम्प्रदाय
  • (B) निम्बार्क सम्प्रदाय
  • (C) गौड़ीय सम्प्रदाय
  • (D) गमिक सम्प्रदाय

श्रीकृष्णम् शरणं ममः' मंत्र वल्लभ सम्प्रदाय का प्रमुख मंत्र है। यह सम्प्रदाय आचार्य वल्लभाचार्य द्वारा प्रवर्तित पुष्टिमार्ग कहलाता है। इसमें श्रीनाथजी (कृष्ण के बाल रूप) की उपासना की जाती है। यह मंत्र कृष्ण की शरणागत भक्ति और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

274. निम्नांकित में से कौनसा दादू पंथ से संबंधित नहीं है?

  • (A) अलख दरीचा
  • (B) अर्णभवाणी
  • (C) दादूखोल
  • (D) नरैना/नरायणा

अर्णभवाणी या अणभैवाणी रामस्नेही सम्प्रदाय से संबंधित है। जबकि अलख दरीबा, दादूखोल और नरायणा दादूपंथ से जुड़े प्रमुख स्थान और परंपराएँ हैं। दादूपंथ निर्गुण भक्ति सम्प्रदाय है जिसकी स्थापना संत दादूदयाल ने की थी।

275. राजस्थान में सम्प्रदायों के प्रवर्तक का असंगत युग्म छांटिये-

  • (A) गौड़ीय सम्प्रदाय - गौरांग महाप्रभु चैतन्य
  • (B) रसिक सम्प्रदाय - कृष्णदास पयहारी
  • (C) पाशुपत सम्प्रदाय - आचार्य लकुलिश
  • (D) निम्बार्क सम्प्रदाय - निम्बार्काचार्य

रसिक सम्प्रदाय के प्रवर्तक स्वामी अग्रदास थे, न कि कृष्णदास पयहारी। कृष्णदास पयहारी रामानन्दी सम्प्रदाय से जुड़े थे और उन्होंने गलता (जयपुर) में उसकी पीठ स्थापित की थी। जबकि अन्य तीन युग्म सही हैं – गौड़ीय सम्प्रदाय के प्रवर्तक गौरांग महाप्रभु चैतन्य, पाशुपत सम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य लकुलिश और निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रवर्तक निम्बार्काचार्य थे।

276. राजस्थान के कौनसे संत 'कलियुग का वाल्मिकी' कहलाते हैं?

  • (A) रामचरणदास
  • (B) नवलदास
  • (C) हरिदास जी
  • (D) दादूदयाल

संत हरिदास जी निरंजनी सम्प्रदाय के प्रवर्तक थे। उन्हें समाज सुधार और भक्ति उपदेशों के कारण 'कलियुग का वाल्मिकी' कहा जाता है। हरिदास जी पहले एक डाकू थे, लेकिन गुरु की कृपा से उन्होंने संत मार्ग अपनाया। उन्होंने गढ़ा का बास (नागौर) को अपनी पीठ बनाया और 'हरिपुरुष जी री वाणी' नामक ग्रंथ की रचना की, जिसमें उनके उपदेश संकलित हैं।

277. धधकते अंगारों पर किया जाने वाला अग्नि नृत्य किस सम्प्रदाय के लोगों द्वारा किया जाता है?

  • (A) जसनाथी सम्प्रदाय
  • (B) रामस्नेही सम्प्रदाय
  • (C) विश्नोई सम्प्रदाय
  • (D) निम्बार्क सम्प्रदाय

जसनाथी सम्प्रदाय के अनुयायी विशेष अवसरों पर अग्नि नृत्य करते हैं। इसमें साधु और भक्त धधकते अंगारों पर नंगे पाँव नृत्य करते हैं और इस दौरान "फतेह-फतेह" तथा "सिद्ध रूस्तम जी" का उच्चारण करते हैं। इस परंपरा को सबसे अधिक संरक्षण बीकानेर के महाराजा गंगासिंह ने दिया। यह जसनाथियों की आस्था और साधना का प्रतीक है।

278. निम्न में से किसने जयपुर में नाथों का प्रभाव समाप्त कर रामानंदी भक्ति परंपरा स्थापित की?

  • (A) कृष्णदास पयहारी
  • (B) अग्रदास जी
  • (C) कील्हदास जी
  • (D) वल्लभाचार्य

कृष्णदास पयहारी ने जयपुर के गलता तीर्थ में रामानंदी सम्प्रदाय की स्थापना की। उन्होंने वहाँ नाथ संप्रदाय का प्रभाव कम करके रामानंदी भक्ति परंपरा को मजबूत किया। 16वीं शताब्दी में उनके शिष्य कील्हदास जी ने इस परंपरा को और भी सुदृढ़ बनाया। इस प्रकार जयपुर क्षेत्र में रामानंदी मत प्रमुख बन गया।

279. संत रामचरण जी द्वारा रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना कब की गई थी?

  • (A) 1660 ई.
  • (B) 1760 ई.
  • (C) 1860 ई.
  • (D) 1960 ई.

संत रामचरण जी ने 1760 ई. में रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की। इस सम्प्रदाय में राम की भक्ति रामधुन और स्नेह भाव के माध्यम से की जाती है। इनके अनुयायी प्रार्थना स्थल को रामद्वारा कहते हैं। इस सम्प्रदाय में गुरु को सर्वोच्च माना जाता है और उपदेश अर्णभवाणी में संकलित हैं।

280. निम्न में से कौनसा मंदिर वल्लभ सम्प्रदाय का नहीं है?

  • (A) मथुरेश मंदिर- कोटा
  • (B) गोकुलचन्द्र जी, कामां (डीग)
  • (C) मदनमोहन मंदिर, करौली
  • (D) द्वारकाधीश मंदिर, कांकरोली (राजसमंद)

मदनमोहन मंदिर, करौली वल्लभ सम्प्रदाय का नहीं बल्कि गौड़ीय सम्प्रदाय का मंदिर है। जबकि कोटा का मथुरेश मंदिर, डीग का गोकुलचन्द्र मंदिर और कांकरोली (राजसमंद) का द्वारकाधीश मंदिर वल्लभ सम्प्रदाय से संबंधित प्रमुख पीठें हैं।

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ – सभी भाग:
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