राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ (Saint Sects of Rajasthan) – Part 15
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में परनामी सम्प्रदाय, लालदास, चरणदास, कबीर, नानक, निम्बार्क, दादू, रामचरण, सुंदरदास, चरणदासी सम्प्रदाय आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
- कुल प्रश्न: 20
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(Since 2021)
281. जसनाथ जी के उपदेश किन ग्रन्थों में संग्रहित हैं?
- (A) हरड़ेवाणी, अंगवधू
- (B) 120 शब्द वाणियाँ
- (C) ज्ञान समुद्र, ज्ञान सवैया
- (D) सिंधूदड़ा, कोंडा ग्रंथ
संत जसनाथ जी के उपदेश 'सिंधूदड़ा' और 'कोंडा ग्रंथ' में संग्रहित हैं। इन ग्रंथों में जसनाथ जी के निर्गुण भक्ति पर आधारित उपदेश, सामाजिक सुधार के विचार और साधना पद्धतियाँ संकलित हैं। ये ग्रंथ जसनाथी सम्प्रदाय के अनुयायियों के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ माने जाते हैं।
282. निम्न में से कौनसी रामस्नेही सम्प्रदाय की पीठ नहीं है?
- (A) गाढ़ा (डीडवाना-कुचामन)
- (B) खेड़ापा (जोधपुर)
- (C) सिंहथल (बीकानेर)
- (D) रैण (नागौर)
गाढ़ा (डीडवाना-कुचामन) निरंजनी सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ है। जबकि रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रमुख पीठें शाहपुरा (भीलवाड़ा), रैण (नागौर), सिंहथल (बीकानेर) और खेड़ापा (जोधपुर) हैं। इन शाखाओं के माध्यम से संत रामचरण जी के उपदेश व्यापक रूप से प्रचारित हुए।
283. निम्न में से कौनसा स्थान लालदासी सम्प्रदाय से संबंधित नहीं है?
- (A) शेरपुर (कोटपूतली-बहरोड़)
- (B) डेहरा (अलवर)
- (C) नगला जहाज (भरतपुर)
- (D) घोलीदूब (अलवर)
लालदासी सम्प्रदाय के प्रमुख स्थलों में घोलीदूब (जन्मस्थान), नगला जहाज (मृत्यु स्थान), और शेरपुर (समाधि स्थल) शामिल हैं। लेकिन डेहरा (अलवर) का संबंध इस सम्प्रदाय से नहीं है। लालदास जी ने समाज सुधार और निर्गुण भक्ति का संदेश दिया।
284. असंगत छांटिये -
- (A) नवल सम्प्रदाय – नवलदास जी
- (B) गुदड़ सम्प्रदाय – संतदास जी
- (C) अलखिया सम्प्रदाय – अलखदास जी
- (D) परनामी सम्प्रदाय – प्राणनाथ जी
अलखिया सम्प्रदाय के प्रवर्तक लालगिरी जी थे, न कि अलखदास जी। इस सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ बीकानेर में है। बाकी तीन युग्म सही हैं – नवल सम्प्रदाय के प्रवर्तक नवलदास जी, गुदड़ सम्प्रदाय के प्रवर्तक संतदास जी, और परनामी सम्प्रदाय के प्रवर्तक प्राणनाथ जी।
285. जोधपुर का महामंदिर उपासना स्थल है-
- (A) नाथ सम्प्रदाय का
- (B) जसनाथी सम्प्रदाय का
- (C) विश्नोई सम्प्रदाय का
- (D) राधास्वामी सम्प्रदाय का
जोधपुर का महामंदिर नाथ सम्प्रदाय का प्रमुख उपासना स्थल है। इसके प्रवर्तक मत्स्येन्द्रनाथ थे। इस सम्प्रदाय की दो शाखाएँ – बैराग पंथ (रातादूंगा, पुष्कर) और माननाथी (महामंदिर, जोधपुर) हैं। महामंदिर के 84 खम्बों वाला मंदिर राजा मानसिंह ने 1872 ई. में आयसदेव नाथ हेतु बनवाया था।
286. जोधपुर में महामन्दिर राजस्थान के किस संप्रदाय की प्रमुख गही है?
- (A) रामानुज संप्रदाय
- (B) कबीर पंथ
- (C) दादूपंथ
- (D) नाथ पंथ
जोधपुर का महामंदिर नाथ पंथ का प्रमुख केन्द्र है। नाथ सम्प्रदाय का प्रवर्तन मत्स्येन्द्रनाथ ने किया था। इसके प्रमुख संत गोरखनाथ, भर्तृहरि और गोपीचंद माने जाते हैं। देवनाथ का महामंदिर (जोधपुर) नाथ सम्प्रदाय का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व दर्शाता है।
287. अष्ट छाप कवि मंडली का संगठन किसने किया?
- (A) विठ्ठलनाथ ने
- (B) गोविन्द जी ने
- (C) रामानन्द ने
- (D) रामानुजाचार्य ने
अष्टछाप कवि मंडली का संगठन विठ्ठलनाथ ने किया। इसमें पुष्टिमार्गीय आचार्य वल्लभाचार्य के चार शिष्य और विठ्ठलनाथ के चार शिष्य शामिल थे। इसमें सूरदास, कुंभनदास, कृष्णदास, परमानंददास, नंददास, गोविंदस्वामी, छीतस्वामी और चतुर्भुजदास प्रमुख कवि थे।
288. पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक थे?
- (A) मध्वाचार्य
- (B) निम्बार्क
- (C) वल्लभाचार्य
- (D) चैतन्य महाप्रभु
पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक आचार्य वल्लभाचार्य थे। राजस्थान में इसका प्रमुख केन्द्र नाथद्वारा (राजसमंद) है, जहाँ श्रीनाथजी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। इस सम्प्रदाय में पूजा पद्धति को हवेली संगीत और झांकी दर्शन के रूप में जाना जाता है।
289. निम्बार्क' सम्प्रदाय की मुख्य पीठ कहाँ है?
- (A) किशनगढ़ में
- (B) सलेमाबाद में
- (C) सालासर में
- (D) खेड़ापा में
निम्बार्क सम्प्रदाय की मुख्य पीठ सलेमाबाद (अजमेर) में स्थित है। इसके प्रवर्तक निम्बार्काचार्य थे। पीठ की स्थापना परशुराम जी ने की थी। यहाँ सगुण भक्ति परंपरा के अंतर्गत राधा-कृष्ण की युगल रूप में पूजा की जाती है।
290. निम्न में से सगुण भक्ति का प्रचारक संत था-
- (A) कबीर
- (B) नानक
- (C) निम्बार्क
- (D) दादू
सगुण भक्ति के प्रमुख प्रचारक निम्बार्काचार्य थे। उन्होंने राधा-कृष्ण की युगल उपासना पर जोर दिया। उनकी प्रमुख पीठ वृंदावन और राजस्थान के सलेमाबाद में है। यहाँ राधाष्टमी को विशाल मेला भरता है।
291. सहजो बाई के गुरु कौन थे?
- (A) रामचरण
- (B) लालदास
- (C) चरणदास
- (D) सुंदरदास
सहजो बाई के गुरु संत चरणदास थे। उन्होंने चरणदासी सम्प्रदाय की स्थापना की थी। इनके 42 नियम और 52 शिष्य प्रसिद्ध हैं। उनके प्रमुख ग्रंथों में ब्रह्मा ज्ञान सागर, भक्ति सागर और ज्ञान स्वरोदय शामिल हैं।
292. “दयाबाई” एवं “सहजोबाई" का सम्बन्ध किस सम्प्रदाय से रहा है?
- (A) चरणदासी सम्प्रदाय
- (B) जसनाथी सम्प्रदाय
- (C) परनामी सम्प्रदाय
- (D) निरंजनी सम्प्रदाय
दयाबाई और सहजोबाई का सम्बन्ध चरणदासी सम्प्रदाय से था। दयाबाई ने दयाबोध और विनय मालिका, जबकि सहजोबाई ने सहज प्रकाश और सात वार निर्णय जैसे ग्रंथ लिखे। दोनों संतों का प्रमुख केन्द्र डेहरा, अलवर रहा।
293. दयाबाई एवं सहजोबाई किस संत की शिष्याएँ थीं?
- (A) संत पीपा
- (B) चरणदास
- (C) संत दादू
- (D) रामदेव जी
दयाबाई और सहजोबाई संत चरणदास की शिष्याएँ थीं। उन्होंने गुरु की भक्ति परंपरा को आगे बढ़ाया। दोनों ने अपने लेखन के माध्यम से समाज में भक्ति, विनम्रता और साधना का संदेश फैलाया।
294. बागड़ की मीरा' के नाम से निम्न में से कौन प्रसिद्ध है?
- (A) गवरी बाई
- (B) भँवरी बाई
- (C) करमा बाई
- (D) ज्ञानमती बाई
‘बागड़ की मीरा’ के नाम से गवरी बाई प्रसिद्ध हैं, जिन्हें राजस्थान की दूसरी मीरा भी कहा जाता है। इनका जन्म सन् 1815 में मुकुंद लाल सरस्वती के घर हुआ। डूंगरपुर महारावल शिवसिंह ने 1829 में गवरी बाई का मंदिर बनवाया। इन्हें डांग की मीरा भी कहा जाता है।
295. निम्नलिखित कौन सा (सम्प्रदाय - प्रमुख मंदिर/पीठ) सही है?
- (A) अलखिया सम्प्रदाय - बिलाड़ा (जोधपुर)
- (B) निरंजनी - गाढ़ा गांव (डीडवाना)
- (C) लालदासी सम्प्रदाय - धोलीदूब (अलवर)
- (D) गूदड़ सम्प्रदाय - दाँतड़ा (भीलवाड़ा)
अलखिया सम्प्रदाय के प्रवर्तक लालगिरी जी थे। इसकी प्रमुख पीठ बीकानेर में है और प्रमुख ग्रंथ अलख स्तुति प्रकाश तथा कुण्डलियां माने जाते हैं। यह निर्गुण भक्ति सम्प्रदाय से सम्बंधित है।
296. चरणदासी सम्प्रदाय की प्रधान पीठ कहाँ है?
- (A) दिल्ली
- (B) अलवर
- (C) बीकानेर
- (D) सीकर
चरणदासी सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत चरणदास थे। उनका जन्म अलवर जिले के डेहरा में हुआ और निधन दिल्ली में हुआ, जहाँ उनकी प्रधान पीठ स्थित है। इनकी समाधि डेहरा (अलवर) में है और बसंत पंचमी को यहाँ मेला लगता है।
297. आचार्य तुलसी ने "अणुव्रत आन्दोलन" का सूत्रपात कब किया?
- (A) 1942 ई.
- (B) 1949 ई.
- (C) 1945 ई.
- (D) 1952 ई.
आचार्य तुलसी ने 1 मार्च 1949 को सरदारशहर (चूरू) से अणुव्रत आन्दोलन की शुरुआत की। वे तेरापंथी सम्प्रदाय के 9वें आचार्य थे। इनका जन्म 1914 में लाडनूं (नागौर) में हुआ था। तेरापंथी सम्प्रदाय की स्थापना भीखणजी ने 1760 में की थी।
298. आचिंत्य भेदाभेदवाद' का सम्बन्ध किस सम्प्रदाय से है?
- (A) चैतन्य सम्प्रदाय
- (B) निम्बार्क सम्प्रदाय
- (C) परनामी सम्प्रदाय
- (D) लालदासी सम्प्रदाय
आचिंत्य भेदाभेदवाद का सम्बन्ध चैतन्य (गौड़ीय) सम्प्रदाय से है। इसका प्रचार-प्रसार माध्वाचार्य और चैतन्य महाप्रभु ने किया। प्रमुख पीठ वृंदावन है जहाँ गोविंद देव मंदिर मानसिंह प्रथम द्वारा बनवाया गया था। राजस्थान में जयपुर का गोविंद देव जी मंदिर भी प्रसिद्ध है।
299. “कुलजम स्वरूप" किस सम्प्रदाय के उपदेशों का संग्रह है?
- (A) परनामी सम्प्रदाय
- (B) जसनाथ जी
- (C) चरणदास
- (D) लालदास
कुलजम स्वरूप ग्रंथ परनामी सम्प्रदाय के उपदेशों का संग्रह है। इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक प्राणनाथ जी थे। इनकी प्रमुख पीठ पन्ना (मध्यप्रदेश) और आदर्शनगर (जयपुर) है। इस सम्प्रदाय में कृष्ण को प्रणाम करना ही मूल उपासना है।
300. कटे हुए कान तथा 'जटा' निम्न में से किसका परिचयात्मक प्रतीक होते हैं?
- (A) गुर्जर
- (B) औघड़ जोगी
- (C) रावल जोगी
- (D) मीना
कटे हुए कान और जटा औघड़ जोगियों की पहचान माने जाते हैं। इन्हें कान छिदवाने के कारण कनफटा, कुंडल धारण करने के कारण दरशनी, और गोरखनाथ के अनुयायी होने के कारण गोरखनाथी भी कहा जाता है। यह नाथ सम्प्रदाय की परंपरा से जुड़े हैं।
राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ – सभी भाग:
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