राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ Questions with Answers

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ (Saint Sects of Rajasthan) – Part 2

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में दादू पंथ, विश्नोई संप्रदाय, दादू दयाल, गौड़ीय संप्रदाय, जसनाथी संप्रदाय, वल्लभ संप्रदाय, पीपा जी, जाम्भोजी, दादूदयाल जी, कबीरपंथ आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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21. जाम्भोजी जहां प्रवचन करते थे, वह क्या कहलाता था?

  • (A) सधारी
  • (B) सबद
  • (C) वाणी
  • (D) शील

विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी का प्रवचन स्थल सांधारी कहलाता था। वे पंवार वंशीय राजपूत थे और निर्गुण भक्ति संप्रदाय को आगे बढ़ाने वाले संत थे। उनका मूल उपदेश था – हृदय से विष्णु का नाम जपो और हाथों से कार्य करो। उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से समाज को सच्चरित्रता और पर्यावरण संरक्षण की राह दिखाई।

22. राजस्थान के किस लोकदेवता के माता-पिता का नाम हंसादेवी और लोहटजी था?

  • (A) पीपाजी
  • (B) धन्नाजी
  • (C) जाम्भोजी
  • (D) सिद्ध जसनाथजी

गुरु जाम्भोजी का जन्म भादवा कृष्ण अष्टमी, वि.सं. 1508 (1451 ई.) को पीपासर (नागौर) में हुआ था। उनके पिता का नाम लोहटजी पंवार और माता का नाम हंसा देवी था। इनके गुरु गोरखनाथ थे। जाम्भोजी ने 29 नियम दिए और उनकी वाणियों का संग्रह जाम्भसागर कहलाता है। वे विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक और पर्यावरण संरक्षण के प्रथम संत कहे जाते हैं।

23. जाम्भा (फलौदी-जोधपुर) किस संप्रदाय से संबंधित स्थान है?

  • (A) गौड़ीय संप्रदाय
  • (B) जसनाथी संप्रदाय
  • (C) वल्लभ संप्रदाय
  • (D) विश्नोई संप्रदाय

जाम्भा (फलौदी, जोधपुर) विश्नोई संप्रदाय से संबंधित प्रमुख स्थान है। संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी थे, जिन्होंने 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) से इसकी स्थापना की। जाम्भा में जाम्भोजी के कहने पर जैसलमेर के राजा जैतसिंह ने तालाब बनवाया, जिसे विश्नोई समाज में पुष्कर के समान पवित्र माना जाता है।

24. निम्न में से किसने गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली थी?

  • (A) जाम्भोजी
  • (B) संत पीपा
  • (C) दादू दयाल
  • (D) संत चरणदास

गुरु जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को पीपासर (नागौर) में हुआ। इन्हें कृष्ण तथा विष्णु का अवतार भी माना जाता है। जाम्भोजी ने गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली थी। उन्होंने समाज सुधार हेतु 29 नियम और 120 शब्द प्रतिपादित किए। इन्हें विश्व पर्यावरण आंदोलन का प्रथम प्रणेता कहा जाता है और पर्यावरण वैज्ञानिक संत की उपाधि दी जाती है।

25. लोकदेवता जाम्भोजी का जन्म कब हुआ था?

  • (A) 1351 ई.
  • (B) 1451 ई.
  • (C) 1551 ई.
  • (D) 1651 ई.

लोकदेवता गुरु जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. (वि.सं. 1508) में भादवा कृष्ण अष्टमी को पीपासर (नागौर) में हुआ। इनके पिता का नाम लोहटजी (पंवार वंशीय राजपूत) और माता का नाम हंसा देवी था। जाम्भोजी को विष्णु का अवतार भी कहा जाता है। उन्होंने विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की और जीवन पर्यंत पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक सुधार का संदेश दिया।

26. विश्नोई समुदाय के गुरु किसे माना जाता है?

  • (A) गुरु जाम्भेश्वर
  • (B) गुरु रामदेव
  • (C) गुरु नानक
  • (D) इनमें कोई नहीं

विश्नोई संप्रदाय के गुरु गुरु जाम्भेश्वर (जाम्भोजी) माने जाते हैं। इनका जन्म पीपासर (नागौर) में भादवा कृष्ण अष्टमी को हुआ। वे विष्णु के अवतार कहे जाते हैं। 1485 ई. में उन्होंने समराथल धोरा (बीकानेर) पर विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। उनकी समाधि मुकाम (बीकानेर) में है और यहां प्रतिवर्ष फाल्गुन व आश्विन अमावस्या को मेला भरता है।

27. किस समाज सुधारक ने अपने शिष्यों से 29 नियमों का पालन करने हेतु जोर दिया?

  • (A) पीपा जी
  • (B) जाम्भोजी
  • (C) दादूदयाल जी
  • (D) जसनाथ जी

समाज सुधारक गुरु जाम्भोजी ने अपने अनुयायियों को 29 नियमों का पालन करने का उपदेश दिया। वे विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक थे। उन्हें गुंगा, गहला और विष्णु का अवतार कहा जाता है। उनके नियमों में पर्यावरण, वृक्षों, वन्यजीवों की रक्षा, सामाजिक आचरण और धार्मिक जीवन से जुड़े आदर्श बताए गए। इसी कारण जाम्भोजी को पर्यावरण वैज्ञानिक संत भी कहा जाता है।

28. संत बखनाजी, संतदासजी, संत रज्जबजी किस संप्रदाय से संबंधित थे?

  • (A) कबीरपंथ
  • (B) लालदासी
  • (C) रामस्नेही
  • (D) दादूपंथ

संत बखनाजी, संतदासजी और संत रज्जबजी सभी दादू पंथ से संबंधित थे। इसके प्रवर्तक दादूदयाल थे, जिनका जन्म 1544 ई. फाल्गुन अष्टमी को अहमदाबाद (गुजरात) में हुआ। उनके गुरु बुड़दन (वृद्धानंद) थे। दादू दयाल के प्रमुख शिष्यों में गरीबदास, मिस्किनदास, सुंदरदास, रज्जब, माधोदास और अन्य संत शामिल थे।

29. खालसा, खाकी, नागा राजस्थान के किस संप्रदाय के भाग हैं?

  • (A) रामस्नेही संप्रदाय
  • (B) दादू पंथ
  • (C) चरणदासी संप्रदाय
  • (D) लालदासी संप्रदाय

दादू पंथ की 5 प्रमुख शाखाएं मानी जाती हैं – खालसा, खाकी, नागा, उतरादे और स्थानधारी/विरक्त। इस संप्रदाय के प्रवर्तक दादूदयालको राजस्थान का कबीर भी कहा जाता है (मोतीलाल मेनारिया द्वारा)। दादूजी के अनुयायियों ने इनके उपदेशों को समाज में फैलाया और भक्ति परंपरा को मजबूत किया।

30. दादूपंथ में सत्संग स्थल कहलाता है—

  • (A) मुक्ति धाम
  • (B) अलख दरीबा
  • (C) चौपड़ा
  • (D) रामद्वारा

दादूपंथ में सत्संग स्थल को अलख दरीबा कहा जाता है। दादू दयाल ने 1574 ई. में इस पंथ की स्थापना की थी। उन्हें राजस्थान का कबीरभी कहा जाता है। अलख दरीबा में अनुयायी एकत्र होकर भक्ति, सत्संग और आध्यात्मिक चर्चा करते थे। इस स्थान का महत्व दादूपंथ की परंपरा में विशेष है।

31. दादू पंथ की नागा शाखा किसके द्वारा स्थापित की गई थी?

  • (A) गरीबदास
  • (B) मिस्किनदास
  • (C) बनवारीदास
  • (D) सुंदरदास

दादूपंथ की कुल पाँच प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं – (1) खालसा – गरीबदास द्वारा, (2) नागा – सुंदरदास द्वारा, (3) विरक्त, (4) उतरादे या स्थानधारी और (5) खाकी। नागा शाखा की विशेषता थी कि इसमें साधु लोग अपने साथ हथियार रखते थे और समाज की रक्षा के लिए तत्पर रहते थे। दादूपंथ का विस्तार राजस्थान से निकलकर उत्तर भारत तक हुआ।

32. मुगल सम्राट अकबर द्वारा जिस संत को फतेहपुर सीकरी आमंत्रित किया गया वह था—

  • (A) लालदास
  • (B) जसनाथ
  • (C) रज्जबजी
  • (D) दादू दयाल

मुगल सम्राट अकबर ने 1585 ई. में फतेहपुर सीकरी के इबादतखाना में धार्मिक विमर्श के लिए विभिन्न संतों को बुलाया। उनमें दादू दयालभी शामिल थे। दादूजी ने वहाँ 40 दिन तक प्रवचन दिए। इन्हें राजस्थान का कबीर कहा जाता है। इनका जन्म 1544 ई. अहमदाबाद में हुआ था और 1574 ई. में इन्होंने दादूपंथ की स्थापना की।

33. दादू पंथ की प्रमुख पीठ स्थित है?

  • (A) आमेर
  • (B) नरैना
  • (C) मण्डोर
  • (D) करौली

दादू पंथ की प्रमुख पीठ नरैना (जयपुर) में स्थित है। दादूदयाल ने सबसे पहले सांभर में उपदेश दिए और बाद में नरैना को मुख्य केंद्र बनाया। यहीं पर दादू खोल भैराणा पहाड़ी भी स्थित है। इनके उपदेशों का संकलन हरदेवाणी संतदास और जगन्नाथदास ने किया। दादूपंथ का सत्संग स्थल अलख दरीबा कहलाता है।

34. दादू पंथ का प्रमुख केंद्र कहाँ है?

  • (A) पीपासर
  • (B) अजमेर
  • (C) भीनमाल
  • (D) नरैना

दादूपंथ का प्रमुख केंद्र नरैना (जयपुर) है। पंथ की स्थापना 1574 ई. में दादूदयाल ने की थी। अन्य प्रमुख केंद्र कल्याणपुर, अजमेर, सांभर और भराणा भी रहे। दादूजी की प्रमुख रचनाएँ हैं – कायाबेली, दादूजी री वाणी और दादू रा दोहा। उन्होंने निपख आंदोलन चलाया और निर्गुण भक्ति का संदेश दिया।

35. दादू की शिक्षाओं का संकलन “दादूवाणी” रचित है—

  • (A) मेवाती बोली में
  • (B) ढूंढाड़ी बोली में
  • (C) देशवाली बोली में
  • (D) बागड़ी बोली में

दादूदयाल की शिक्षाओं का संकलन ‘दादूवाणी’ कहलाता है। यह ढूंढाड़ी बोली (सधुक्कड़ी भाषा) में लिखी गई है। दादूजी ने सरल भाषा में समाज सुधार और भक्ति का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त इनके दोहे ‘दादू रा दोहा’ नाम से प्रसिद्ध हैं। इस वाणी में भक्ति, नैतिकता और समानता का संदेश झलकता है।

36. निम्नलिखित में से किसे 'राजस्थान के कबीर' के नाम से जाना जाता है?

  • (A) दादू दयाल
  • (B) पाबूजी
  • (C) गोगाजी
  • (D) रामदेवजी

दादू दयाल को ‘राजस्थान का कबीर’ कहा जाता है। वे निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत थे। इन्होंने जात-पात का विरोध किया और सभी को समानता और भाईचारे का संदेश दिया। दादूजी ने 1574 ई. में दादूपंथ की स्थापना की। इनके अनुयायी विभिन्न शाखाओं में बंट गए, जैसे – खालसा, नागा, खाकी आदि।

37. नारायणा किसका जाना-माना केन्द्र है?

  • (A) विश्नोई संप्रदाय
  • (B) नाथ संप्रदाय
  • (C) दादूपंथ
  • (D) रामस्नेही संप्रदाय

नारायणा (जयपुर) दादूपंथ का प्रमुख केंद्र है। दादूदयाल ने यहां अपना मुख्य प्रवास स्थान बनाया। दादूजी ने नरैना को भक्ति और समाज सुधार का केंद्र बनाया, जहां से उनके उपदेश दूर-दूर तक फैले। इसीलिए नरैना को दादूपंथ का आध्यात्मिक गढ़ कहा जाता है।

38. निम्नलिखित में से कौन दादूपंथी उप-संप्रदाय नहीं है?

  • (A) खालसा
  • (B) नागा
  • (C) खाकी
  • (D) चंडाल

दादूपंथ की पाँच प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं, खालसा – गरीबदास द्वारा स्थापित, खाकी – शरीर पर भस्म रमाने वाले साधु, नागा – सुंदरदास द्वारा स्थापित, साधु हथियार रखते थे, उतरादे/स्थानधारी – उत्तर भारत में फैली शाखा, विरक्त – गृहस्थ अनुयायी, चंडाल इनमें से कोई उपसंप्रदाय नहीं है।

39. बालिन्दजी के गुरु कौन थे?

  • (A) दादूदयाल जी
  • (B) रामचरण जी
  • (C) सुंदरदास जी
  • (D) मंगलाराम जी

बालिन्दजी दादूदयाल के शिष्यों में से एक थे। दादूजी के अन्य प्रमुख शिष्य थे – गरीबदास, मिस्किनदास, सुंदरदास, बखनाजी, रज्जब, माधोदास और संतदास। इन्हें मिलाकर कुल 52 शिष्य प्रसिद्ध हुए, जिन्हें ‘52 स्तंभ’ कहा जाता है। इन शिष्यों ने दादूपंथ को जन-जन तक पहुँचाया।

40. संत पीपा का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?

  • (A) औसियां (जोधपुर)
  • (B) टोडारायसिंह (टोंक)
  • (C) समदड़ी (बालोतरा)
  • (D) धुवन गाँव (टोंक)

संत पीपा का मुख्य मंदिर समदड़ी (बालोतरा) में स्थित है। वे भक्ति आंदोलन के निर्गुण संत थे और भक्ति धारा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। संत पीपा का जन्म राजस्थान में हुआ और उन्होंने भक्ति साहित्य की रचना की। उनके भजन गुरु ग्रंथ साहिब में भी संकलित हैं। संत पीपा को निर्गुण साधना और सामाजिक सुधार के लिए याद किया जाता है।

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ – सभी भाग:
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