राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ Questions with Answers

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ (Saint Sects of Rajasthan) – Part 4

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में जसनाथ जी, जाम्भोजी, संत दादू, सुन्दरदास, वल्लभ सम्प्रदाय, रसिक सम्प्रदाय, नाथ पंथ, रामस्नेही सम्प्रदाय, गवरी बाई, मावजी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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61. निम्नलिखित में से कौन सी रचना मीरां बाई की है?

  • (A) कुलजम स्वरूप
  • (B) पदावली
  • (C) चिंतावणी
  • (D) चौपड़ा

मीरा बाई की सबसे प्रसिद्ध रचना 'पदावली' है। इसमें उनके कृष्ण प्रेम और भक्ति से भरे पदों का संग्रह है। इसके अलावा उन्होंने गीत गोविंद टीका, नरसी मेहता नी हुंडी, रूकमणी मंगल, राग सोरठ के पद, सत्यभामाजी नूं रूसणों और मीरां की गरीबी जैसी रचनाएँ भी कीं। उनकी भक्ति ने समाज को नई दिशा दी।

62. संत पीपाजी का जन्म स्थल निम्नलिखित में से कौन सा है?

  • (A) कतरियासर
  • (B) पीपासर
  • (C) बिलाड़ा
  • (D) गागरोन

संत पीपा का जन्म 1425 ई. में चैत्र पूर्णिमा के दिन गागरोन (झालावाड़) के खींची राज परिवार में हुआ था। वे गागरोन के शासक भी रहे। बचपन से ही उन्हें ईश्वर भक्ति का गहरा लगाव था और बाद में उन्होंने अपने राज्य को त्यागकर भक्ति मार्ग अपनाया। वे रामानंदाचार्य के शिष्य बने।

63. राजस्थान के किस संत ने अपने राज्य को त्याग कर गुरु मंडली में सम्मिलित हुए?

  • (A) धन्ना
  • (B) दादू
  • (C) पीपा
  • (D) चरणदास

संत पीपा जी गागरोन (झालावाड़) के शासक थे। 1425 ई. में जन्मे पीपा जी को भक्ति का गहरा आकर्षण था। जब उनके पास रामानंदाचार्यद्वारका जाते समय गागरोन आए, तो उन्होंने अपने भाई अचलदास को गागरोन का शासन सौंप दिया और स्वयं गुरु रामानंद की मंडली में सम्मिलित होकर भक्ति और साधना के मार्ग पर चल पड़े।

64. जसनाथी संप्रदाय के नियमों की संख्या है?

  • (A) 36
  • (B) 29
  • (C) 11
  • (D) 26

जसनाथी संप्रदाय, जिसकी स्थापना 1504 ई. में सिद्ध जसनाथ जी ने बीकानेर जिले के कतरियासर में की, उसके कुल 36 नियम माने जाते हैं। इन नियमों में धार्मिक आचार-विचार, नैतिकता, पर्यावरण और समाज सुधार से संबंधित शिक्षाएँ शामिल हैं। यह संप्रदाय आग से खेल (फायर डांस)की परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध है।

65. दादू और उनके शिष्यों की अधिकांश रचनाएँ किस भाषा में हैं?

  • (A) मेवाती
  • (B) ढूँढ़ाड़ी
  • (C) मारवाड़ी
  • (D) मेवाड़ी

दादूदयाल और उनके शिष्यों की अधिकतर रचनाएँ ढूँढ़ाड़ी (सधुक्कड़ी) भाषा में लिखी गई हैं। इसका कारण यह था कि यह भाषा उस समय आम जनजीवन की भाषा थी और सरल होने के कारण लोगों तक आसानी से पहुँचती थी। दादू की रचनाएँ आज भी दादूवाणी के रूप में प्रसिद्ध हैं।

66. निम्न में से कौन-सा मीरां बाई का जन्म स्थान है?

  • (A) कुड़की (ब्यावर)
  • (B) मेड़ता (नागौर)
  • (C) चित्तौड़गढ़
  • (D) बनारस

मीराबाई का जन्म 1498 ई. में नागौर जिले के कुड़की गाँव (वर्तमान ब्यावर क्षेत्र) में हुआ था। वे राठौड़ वंश की राजकुमारी थीं और बचपन से ही श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं। बाद में उनका विवाह मेवाड़ के राणा भोजराज से हुआ, लेकिन उन्होंने जीवन भर कृष्ण भक्ति को ही अपना मार्ग बनाया।

67. निम्न में से कौनसा जाम्भो जी का प्रमुख प्रवचन स्थल था?

  • (A) मुकाम
  • (B) पीपासर
  • (C) समराथल
  • (D) जाम्भा गाँव

गुरु जाम्भोजी का प्रमुख प्रवचन स्थल समराथल (बीकानेर) था। यहीं 1485 ई. में उन्होंने बिश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। समराथल को ‘धोक घोरा’ के नाम से भी जाना जाता है। जाम्भोजी ने यहाँ अपने अनुयायियों को 29 नियमों का पालन करने की प्रेरणा दी, जिनमें पर्यावरण और समाज सुधार को विशेष महत्व दिया गया।

68. संत लालदास, के लिए जाने जाते हैं-

  • (A) मूर्तिपूजा
  • (B) समाज सुधार
  • (C) सरल जीवन
  • (D) साम्प्रदायिक सद्भाव

संत लालदास जन्म से मुसलमान थे लेकिन बाद में उन्होंने भक्ति परंपरा को अपनाकर लालदासी संप्रदाय की स्थापना की। वे साम्प्रदायिक सद्भाव और भाईचारे के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने समाज में समानता, प्रेम और एकता का संदेश फैलाया और जाति-पांति के भेदभाव का विरोध किया।

69. निम्न में से असुमेलित युग्म छांटिए-लोक संत — मुख्य पीठ

  • (A) जसनाथ जी – कतरियासर (बीकानेर)
  • (B) रामचरण जी – शाहपुरा
  • (C) जाम्भो जी – मुकाम (नोखा)
  • (D) दादूदयाल – सांभर (जयपुर)

दिए गए युग्मों में दादूदयाल – सांभर (जयपुर) असंगत है। वास्तव में दादूपंथ की प्रमुख पीठ नरैणा (जयपुर) में स्थित है। दादूदयाल ने 1574 ई. में दादूपंथ की स्थापना की थी और उनकी शिक्षाओं का केंद्र नरैणा बना।

70. निम्न में से कौन सा युग्म असुम्मेलित है?

  • (A) संत रैदास – निर्गुण संत
  • (B) मीरां बाई – सगुण संत
  • (C) संत धना – सगुण संत
  • (D) करमा बाई – सगुण संत

संत धन्ना भगत वास्तव में निर्गुण संत थे, जबकि यहाँ उन्हें सगुण संत बताया गया है। वे संत रामानंद के शिष्य थे और निर्गुण भक्ति के प्रचारक थे। वहीं रैदास निर्गुण, मीरा व करमा बाई सगुण भक्ति से जुड़े हुए थे।

71. विश्नोई सम्प्रदाय के संस्थापक कौन है?

  • (A) जसनाथ जी
  • (B) जाम्भोजी
  • (C) संत दादू
  • (D) सुन्दरदास

विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) में की थी। जाम्भोजी ने अपने अनुयायियों को 29 नियमोंका पालन करने की प्रेरणा दी और वृक्षों व जीवों की रक्षा का संदेश दिया। उन्हें पर्यावरण वैज्ञानिक संत भी कहा जाता है।

72. जोधपुर में महामन्दिर राजस्थान के किस संप्रदाय की प्रमुख पीठ है?

  • (A) वल्लभ सम्प्रदाय
  • (B) रसिक सम्प्रदाय
  • (C) नाथ पंथ
  • (D) रामस्नेही सम्प्रदाय

जोधपुर में स्थित महामंदिर नाथपंथ की प्रमुख पीठ है। नाथ संप्रदाय योग, साधना और तपस्या के लिए प्रसिद्ध है। इस पीठ से नाथपंथ का प्रभाव राजस्थान सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में फैला।

73. निम्न में से असुमेलित युग्म छांटिए –संत — जन्म स्थान

  • (A) रामदास जी – भीकमकोर (जोधपुर)
  • (B) जसनाथ जी – कतरियासर (बीकानेर)
  • (C) दरियाव जी – सिंथल (बीकानेर)
  • (D) चरणदास जी – डेहरा (अलवर)

यहाँ संत दरियाव जी – सिंथल (बीकानेर) असंगत है। दरअसल संत दरियाव जी का जन्म जैतारण (ब्यावर, पाली) में हुआ था। वहीं रामदास जी, जसनाथ जी और चरणदास जी के जन्मस्थान सही दिए गए हैं।

74. संत भूरी बाई अलख का कार्य क्षेत्र था?

  • (A) मारवाड़
  • (B) ढूँढाड़
  • (C) मेवाड़
  • (D) हाड़ौती

संत भूरी बाई अलख का कार्य क्षेत्र मेवाड़ था। वे कृष्ण की महान उपासक थीं और भक्ति परंपरा को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी भक्ति ने मेवाड़ क्षेत्र की संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया।

75. निम्न में से कौन दादू पंथ की शाखाओं में सम्मिलित नहीं है?

  • (A) कुण्डा
  • (B) विरक्त
  • (C) खाकी
  • (D)

दादूपंथ की शाखाएँ हैं – खालसा, नागा, खाकी, उतरादे/स्थानधारी और विरक्त। इनमें कुण्डा शाखा शामिल नहीं है। कुण्डा वास्तव में एक अलग पंथ था, जिसकी स्थापना मल्लीनाथ द्वारा की गई थी।

76. राजस्थान के प्रमुख संत तथा उनके द्वारा स्थापित सम्प्रदायों के सम्बन्ध में असुमेलित युग्म छांटिए-

  • (A) रामचरणजी – रामस्नेही सम्प्रदाय
  • (B) लालगिरिजी – अलखिया सम्प्रदाय
  • (C) हरिदासजी – निरंजनी सम्प्रदाय
  • (D) संतदासजी – नवल सम्प्रदाय

यहाँ संतदासजी – नवल सम्प्रदाय असंगत है। वास्तव में संतदास जी ने गुदड़ सम्प्रदाय की स्थापना की थी। वहीं संत रामचरण जी रामस्नेही, लालगिरिजी अलखिया और हरिदासजी निरंजनी संप्रदाय से जुड़े थे।

77. राजस्थान के किस लोक संत के माता-पिता का नाम हंसादेवी और लोहटजी था-

  • (A) पीपाजी
  • (B) जाम्भोजी
  • (C) धन्नाजी
  • (D) सिद्ध जसनाथजी

गुरु जाम्भोजी के पिता का नाम लोहटजी पंवार और माता का नाम हंसा देवी था। जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. (भादवा कृष्ण अष्टमी) को पीपासर (नागौर) में हुआ। वे बिश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक थे और पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक सुधार के लिए प्रसिद्ध हैं।

78. कौनसा कूट सुमेलित नहीं है?(लोक संत) — (जन्म वर्ष)

  • (A) मीरां – 1498 ई.
  • (B) दादू दयाल – 1544 ई.
  • (C) संत जसनाथ जी – 1482 ई.
  • (D) संत चरणदास जी – 1503 ई.

यहाँ संत चरणदास जी – 1503 ई. असंगत है। वास्तव में संत चरणदास जी का जन्म 1703 ई. में डेहरा (अलवर) में हुआ था। उन्होंने चरणदासी संप्रदाय की स्थापना की। अन्य तीन युग्म सही हैं – मीरां (1498), दादू दयाल (1544) और जसनाथ जी (1482)।

79. राजस्थान के किस संत द्वारा 'सत्यभामाजी नुं रूसणो' की रचना की गयी?

  • (A) गवरी बाई
  • (B) मावजी
  • (C) रैदास
  • (D) मीरां बाई

मीराबाई ने 'सत्यभामाजी नूं रूसणो' की रचना की। यह रचना कृष्ण की लीलाओं और उनके भक्तों की भावनाओं को दर्शाती है। मीराबाई की अन्य रचनाओं में पदावली, टीका राग गोविंद, नरसी मेहता नी हुंडी, रूकमणी मंगल आदि शामिल हैं।

80. मंत्र राजप्रकाश' किस संत के आध्यात्मिक विचारों का संकलन है?

  • (A) संत रामचरण
  • (B) संत हरिदास
  • (C) संत चरणदास
  • (D) संत सुन्दरदास

संत हरिदास जी के उपदेश 'मंत्र राजप्रकाश' और 'हरिपुरुष जी की वाणी' में संकलित हैं। इनके अन्य ग्रंथों में साखी, भक्त विरदावली और श्री हरिपुरुष भर्तृहरि संवाद शामिल हैं। वे निरंजनी संप्रदाय के प्रवर्तक थे और इन्हें राजस्थान का वाल्मीकि भी कहा जाता है।

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ – सभी भाग:
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