राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ (Saint Sects of Rajasthan) – Part 5
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में दादूदयाल, गौड़ीय सम्प्रदाय, वल्लभ सम्प्रदाय, सुन्दरदास, रज्जब, गरीबदास, नवलदास, लालगिरी, संत हरिदास, संतदास आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
- कुल प्रश्न: 20
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81. सुप्रसिद्ध 'कायावेलि' ग्रंथ की रचना किसने की?
- (A) दादूदयाल
- (B) सुन्दरदास
- (C) रज्जब
- (D) गरीबदास
सुप्रसिद्ध ग्रंथ ‘कायावेली’ की रचना दादूदयाल ने की। इसमें उन्होंने शरीर और आत्मा के संबंध, मोक्ष प्राप्ति और भक्ति मार्ग पर गहन विचार प्रस्तुत किए। दादूदयाल को राजस्थान का कबीर कहा जाता है।
82. अलखिया सम्प्रदाय के प्रवर्तक कौन थे?
- (A) नवलदास
- (B) लालगिरी
- (C) संत हरिदास
- (D) संतदास
अलखिया संप्रदाय के प्रवर्तक लालगिरी थे। इस संप्रदाय में भक्ति को 'अलख निरंजन' के रूप में मान्यता दी गई। यह संप्रदाय साधना और सादगी के लिए प्रसिद्ध है।
83. जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना किसने की?
- (A) जसनाथ जी
- (B) जाम्भोजी
- (C) रामचरण जी
- (D) हरिदास जी
जसनाथी संप्रदाय की स्थापना सिद्ध जसनाथ जी ने की। 1504 ई. में बीकानेर के कतरियासर में इसकी नींव रखी गई। जसनाथ जी ने 36 नियमों का प्रतिपादन किया और समाज सुधार तथा आग से खेल (फायर डांस) की परंपरा चलाई।
84. मैं सबसे पहले मानव हूँ, फिर धार्मिक, फिर जैन धर्माचार्य यह कथन किसने कहा था?
- (A) आचार्य भिक्षु
- (B) आचार्य तुलसी
- (C) महावीर स्वामी
- (D) ऋषभदेव
यह कथन आचार्य तुलसी का है। वे अनuvrat आंदोलन के प्रवर्तक और जैन धर्म के महान आचार्य थे। उन्होंने सबसे पहले मानवता और नैतिकता को प्राथमिकता दी और धर्म को मानव कल्याण का साधन माना।
85. पाशुपत नामक शैव सम्प्रदाय के प्रवर्तक थे-
- (A) लकुलिश
- (B) आचार्य परशुराम
- (C) वल्लभाचार्य
- (D) स्वामी अग्रदास
पाशुपत शैव संप्रदाय के प्रवर्तक लकुलिश माने जाते हैं। यह संप्रदाय भगवान शिव की उपासना से संबंधित है और इसका प्रारंभ प्राचीन काल में हुआ। पाशुपत साधु तपस्या और वैराग्य के लिए प्रसिद्ध थे।
86. सन्त पीपा राजस्थान की किस रियासत के शासक भी रहे थे?
- (A) झालावाड़
- (B) टोंक
- (C) नागौर
- (D) बाँसवाड़ा
संत पीपाजी का जन्म 1425 ई. में गागरोन (झालावाड़) के खींची राज परिवार में हुआ था। वे प्रारंभ में गागरोन के शासक थे, लेकिन बाद में राज्य त्यागकर संत रामानंद की शरण में चले गए। इस तरह वे संत और समाज सुधारक के रूप में प्रसिद्ध हुए।
87. निम्न में असुमेलित छांटिए-सम्प्रदाय — प्रमुख पीठ
- (A) गूदड़ सम्प्रदाय – दाँतड़ा (भीलवाड़ा)
- (B) नवल सम्प्रदाय – जोधपुर
- (C) चरणदासी सम्प्रदाय – दिल्ली
- (D) अलखिया सम्प्रदाय – नागौर
यहाँ अलखिया सम्प्रदाय – नागौर असंगत है। वास्तव में अलखिया सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ बीकानेर में है। जबकि गूदड़ सम्प्रदाय की पीठ दाँतड़ा, नवल सम्प्रदाय की जोधपुर और चरणदासी की दिल्ली में है।
88. संत जसनाथ जी के बारे में कौनसा कथन सही नहीं है-(क) उनका जन्म 1482 ई. बीकानेर के कतरियासर गाँव में हुआ था।(ख) गोरख मालिया नामक स्थान पर इन्होंने 20 वर्ष तक साधना की।(ग) इन्होंने 1506 ई. में कतरियासर में जीवित समाधि ली।(घ) इनके उपदेश सिंभूधड़ा व कोंडा नामक ग्रंथ राजस्थान शैली में हैं।
- (A) कथन (क) व (ख) सही नहीं है।
- (B) कथन (ख) व (ग) सही नहीं है।
- (C) कथन (घ) सही नहीं है।
- (D) कथन (ख) सही नहीं है।
संत जसनाथ जी ने गोरख मालिया नामक स्थान पर 20 नहीं बल्कि 12 वर्ष तक तपस्या की थी। उनका जन्म 1482 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में हुआ और 1506 ई. में वहीं उन्होंने जीवित समाधि ली। इनके उपदेश सिंभूधड़ा व कोंडा ग्रंथों में संकलित हैं।
89. राजस्थान में 'तेरापंथ' सम्प्रदाय के प्रवर्तक रहे हैं?
- (A) आचार्य तुलसी
- (B) भगवान महावीर
- (C) भीखण जी
- (D) आचार्य महाप्रज्ञ
तेरापंथ संप्रदाय के प्रवर्तक आचार्य भीखण जी (आचार्य भिक्षु) थे। उनका जन्म 1726 ई. में कंटालिया (पाली) में हुआ और समाधि सिरयारी (पाली) में हुई। तेरापंथ की स्थापना 1760 ई. में हुई और यह जैन धर्म का एक प्रमुख संप्रदाय है।
90. लालनाथजी, चोखनाथजी और सवाईनाथ जी संत किस सम्प्रदाय में संबंधित है?
- (A) विश्नोई सम्प्रदाय
- (B) जसनाथी सम्प्रदाय
- (C) गौड़ीय सम्प्रदाय
- (D) वल्लभ सम्प्रदाय
लालनाथजी, चोखनाथजी और सवाईनाथजी सभी जसनाथी संप्रदाय से संबंधित थे। इसके अलावा रूस्तमजी भी इस संप्रदाय के संत थे। जसनाथी संप्रदाय की स्थापना सिद्ध जसनाथजी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में की थी।
91. जसनाथ जी ने कतरियासर में 'जसनाथी सम्प्रदाय' की स्थापना कब की?
- (A) 1504 ई.
- (B) 1526 ई.
- (C) 1604 ई.
- (D) 1562 ई.
सिद्ध जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी संप्रदाय की स्थापना की। इस संप्रदाय के 36 नियम माने जाते हैं। यह संप्रदाय समाज सुधार और आग से खेल (फायर डांस) की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
92. नाथद्वारा भगवान कृष्ण को मानने वाले किस सम्प्रदाय का महत्वपूर्ण धार्मिक केन्द्र है?
- (A) रामानुज सम्प्रदाय
- (B) गौड़ीय सम्प्रदाय
- (C) निम्बार्क सम्प्रदाय
- (D) वल्लभ सम्प्रदाय
नाथद्वारा (राजसमंद) वल्लभ संप्रदाय का प्रमुख केंद्र है। इसके प्रवर्तक आचार्य वल्लभाचार्य थे। इस संप्रदाय के आराध्य देव श्रीनाथजी हैं, जिनकी प्रतिमा वल्लभाचार्य को गोवर्धन पर्वत के जतीपुरा गाँव से प्राप्त हुई थी।
93. वरणदासी सम्प्रदाय की प्रधान पीठ कहाँ स्थित है?
- (A) अलवर
- (B) दिल्ली
- (C) जयपुर
- (D) जोधपुर
वरणदासी संप्रदाय की प्रमुख पीठ दिल्ली में स्थित है। यह संप्रदाय भक्ति और साधना के लिए जाना जाता है। इसके संतों ने समाज में भक्ति, प्रेम और सेवा का संदेश फैलाया।
94. खेजड़ी के वृक्ष व वन्यजीवों के महत्त्व को सर्वप्रथम समझने वाले संत कौन थे?
- (A) संत सुंदरदास जी
- (B) संत जसनाथ जी
- (C) संत जाम्भोजी
- (D) संत रज्जब जी
गुरु जाम्भोजी ने वृक्षों और वन्य जीवों की रक्षा का संदेश दिया। उन्होंने 1485 ई. में बिश्नोई संप्रदाय की स्थापना कर अनुयायियों को 29 नियमों का पालन करने की प्रेरणा दी। उनमें से एक प्रमुख नियम था – हरे पेड़ न काटना और पशुओं को न मारना। इसलिए उन्हें विश्व का प्रथम पर्यावरण आंदोलन का प्रणेता कहा जाता है।
95. राजस्थान में प्रणामी सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ कहाँ पर स्थित है?
- (A) जयपुर
- (B) ब्यावर
- (C) सलूम्बर
- (D) भरतपुर
राजस्थान में प्रणामी संप्रदाय की प्रमुख पीठ जयपुर में स्थित है। यह संप्रदाय भक्ति मार्ग पर आधारित है और प्रेम, सद्भाव तथा समानता को महत्व देता है। इस संप्रदाय का प्रभाव राजस्थान के कई क्षेत्रों में देखा जाता है।
96. संत पीपा के गुरु कौन थे?
- (A) दादूदयाल
- (B) वल्लभाचार्य
- (C) जसनाथ जी
- (D) रामानन्द
संत पीपा का जन्म गागरोन (झालावाड़) में हुआ और वे वहाँ के शासक भी थे। बाद में उन्होंने राज्य त्यागकर संत रामानन्द की शरण ली। रामानन्द उनके गुरु बने और उनके प्रभाव से पीपा ने भक्ति मार्ग अपनाया। रामानन्द से दीक्षा लेकर पीपा ने समाज में समानता, भक्ति और सदाचार का संदेश दिया।
97. राजस्थान में दर्जी समुदाय किसे अपना आराध्य मानता है?
- (A) गुरु रामानन्द
- (B) संत पीपा
- (C) संत माव जी
- (D) संत धन्ना
राजस्थान में दर्जी समुदाय संत पीपा को अपना आराध्य मानता है। पीपा ने भक्ति आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और निर्गुण भक्ति का प्रचार किया। उनके विचारों ने समाज के हर वर्ग को प्रेरित किया। उनके द्वारा दी गई शिक्षा आज भी दर्जी समाज में गाई और अपनाई जाती है।
98. मीरां ने अपना अंतिम समय किस स्थान पर बिताया?
- (A) कुड़की
- (B) द्वारिका
- (C) मेड़ता
- (D) नाथद्वारा
मीरांबाई अपने देवर विक्रमादित्य की प्रताड़ना से दुखी होकर पहले चित्तौड़ छोड़कर मेड़ता गईं, फिर वृंदावन और अंत में द्वारिका चली गईं। वहाँ 1547 ई. में गुजरात के रणछोड़ मंदिर (डाकोर) में उन्होंने कृष्ण की मूर्ति में विलीन होकर जीवन का अंत किया।
99. कौनसे संत 'वागड़ के धणी' कहलाते हैं?
- (A) संत पीपा
- (B) संत धन्ना
- (C) मावजी
- (D) संत दुर्लभ जी
संत मावजी को 'वागड़ के धणी' कहा जाता है। उन्होंने निष्कलंक सम्प्रदाय की स्थापना की और बेणेश्वर धाम को प्रमुख धार्मिक स्थल बनाया। वागड़ क्षेत्र (डूंगरपुर-बांसवाड़ा) में उनके अनुयायी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। ध्यान रहे, नरहड़ के पीर को 'बांगड़ का धणी' कहा जाता है।
100. मीरां बाई की क्रीड़ा स्थली के नाम से प्रसिद्ध स्थान है?
- (A) कुड़की (ब्यावर)
- (B) पुष्कर (अजमेर)
- (C) मेड़ता (नागौर)
- (D) नाथद्वारा (राजसमंद)
मीरांबाई की माता की मृत्यु के बाद उनके दादा राव दूदा उन्हें मेड़ता ले आए। यहाँ उनका लालन-पालन हुआ और कृष्ण भक्ति की शुरुआत भी यहीं से मानी जाती है। इसी कारण मेड़ता को मीरां की क्रीड़ा स्थली कहा जाता है।
राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ – सभी भाग:
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