राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ Questions with Answers

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ (Saint Sects of Rajasthan) – Part 6

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में निरंजनी, संत पीपा, संत रैदास, संत धन्ना, दादू, जसनाथी, दादूपंथी, रामानन्दी, संत दरियाव जी, संत धन्ना जी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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101. राजस्थान के प्रसिद्ध संत जिनका निर्वाण नरायणा/नरैना (दूदू) में हुआ था-

  • (A) संत पीपा
  • (B) संत रैदास
  • (C) संत धन्ना
  • (D) दादू

संत दादू दयाल का निर्वाण जयपुर जिले के नरायणा (दूदू) के निकट भैराणा पहाड़ी पर हुआ था। कहा जाता है कि दादूजी ने अपने शरीर को वहीं खुले में छोड़ दिया। उनका पंथ दादूपंथ कहलाता है और इसकी प्रमुख पीठ आज भी नरायणा में है।

102. विश्नोई सम्प्रदाय में जाम्भोजी द्वारा अभिमंत्रित जल पिलाकर विश्नोई पंथ में दीक्षित करते थे, कहलाता है?

  • (A) अलख
  • (B) साथरी
  • (C) पाहल
  • (D) सब्वंगी

विश्नोई संप्रदाय में जब किसी व्यक्ति को दीक्षित किया जाता था तो जाम्भोजी द्वारा अभिमंत्रित जल पिलाया जाता था, जिसे "पाहल"कहा जाता था। यह दीक्षा संस्कार बिश्नोई समाज की परंपरा में आज भी मान्य है।

103. गुदड़ सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ कहाँ स्थित है?

  • (A) सलेमाबाद (अजमेर)
  • (B) दांतड़ा (भीलवाड़ा)
  • (C) महामंदिर (जोधपुर)
  • (D) शिकारपुरा (जोधपुर)

गुदड़ संप्रदाय की प्रमुख पीठ दांतड़ा (भीलवाड़ा) में स्थित है। इसके प्रवर्तक संतदास जी माने जाते हैं। यह संप्रदाय समाज में भक्ति, प्रेम और नैतिक मूल्यों के प्रसार के लिए प्रसिद्ध है।

104. संत रज्जब जी का जन्म स्थान है?

  • (A) सांगानेर
  • (B) दौसा
  • (C) नरायणा
  • (D) सांभर

संत रज्जब जी का जन्म सांगानेर (जयपुर) में हुआ था। वे संत दादू दयाल के शिष्य थे और उनकी रचनाओं का संग्रह रज्जब वाणी नाम से प्रसिद्ध है। उनकी वाणी ने निर्गुण भक्ति आंदोलन को नई दिशा दी।

105. संत दरियावजी का संबंध किस सम्प्रदाय से है?

  • (A) चरणदास सम्प्रदाय
  • (B) जसनाथी सम्प्रदाय
  • (C) लालदास सम्प्रदाय
  • (D) रामस्नेही सम्प्रदाय

संत दरियाव जी का संबंध रामस्नेही संप्रदाय से था। वे इस संप्रदाय की रैण शाखा के प्रवर्तक माने जाते हैं। उनका जन्म जैतारण (ब्यावर) में हुआ और उन्होंने समाज को सादगी, भक्ति और समानता का संदेश दिया।

106. वैष्णव धर्म के सम्प्रदायों में से राजस्थान में सबसे कम लोकप्रिय कौनसा सम्प्रदाय है?

  • (A) वल्लभ सम्प्रदाय
  • (B) राधावल्लभ सम्प्रदाय
  • (C) निम्बार्क सम्प्रदाय
  • (D) रामानुज सम्प्रदाय

राधा वल्लभ सम्प्रदाय की स्थापना गोस्वामी हित हरिवंश ने की थी। यह सम्प्रदाय राधा-कृष्ण की माधुर्य भक्ति पर आधारित है, परन्तु इसका प्रभाव राजस्थान में लगभग नहीं के बराबर रहा। राजस्थान में वैष्णव सम्प्रदायों में वल्लभ, निम्बार्क और रामानुज सम्प्रदाय अधिक प्रचलित रहे, जबकि राधावल्लभ सम्प्रदाय मुख्यतः उत्तर भारत के कुछ अन्य क्षेत्रों में सीमित रहा।

107. राजस्थान में 'शैव मत' को मानने वाला राजघराना है?

  • (A) मेवाड़
  • (B) बीकानेर
  • (C) मारवाड़
  • (D) जयपुर

राजस्थान का मेवाड़ राजघराना प्राचीन समय से ही शैव मत का अनुयायी रहा है। इसका प्रमुख प्रतीक एकलिंगजी मंदिर (उदयपुर) है, जिसे मेवाड़ के शासक अपने आराध्य देव मानते हैं। आज भी मेवाड़ के शासक स्वयं को ‘एकलिंगजी का दीवान’ कहते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि मेवाड़ शैव परंपरा का प्रमुख केन्द्र रहा है।

108. राजस्थान में लकुलीश सम्प्रदाय का प्रमुख मंदिर है?

  • (A) रणकपुर मंदिर (पाली)
  • (B) एकलिंग मंदिर (उदयपुर)
  • (C) गोविन्द देव मंदिर (जयपुर)
  • (D) श्रीनाथ मंदिर (राजसमंद)

राजस्थान में लकुलीश सम्प्रदाय का प्रमुख मंदिर एकलिंगजी (उदयपुर) है। लकुलीश, शैव मत के महत्वपूर्ण आचार्य थे जिन्होंने पाशुपत सम्प्रदाय का विस्तार किया। मेवाड़ के राजाओं ने इस मंदिर को अपनी आस्था का केंद्र बनाया। आज भी एकलिंगजी मंदिर मेवाड़ राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है।

109. निम्नलिखित में से कौनसा सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति सम्प्रदाय नहीं है?

  • (A) निरंजनी
  • (B) जसनाथी
  • (C) दादूपंथी
  • (D) रामानन्दी

रामानन्दी सम्प्रदाय सगुण भक्ति पर आधारित है और इसमें राम व विष्णु की मूर्तिपूजा प्रमुख है। इसके विपरीत निरंजनी, जसनाथी और दादूपंथ निर्गुण भक्ति सम्प्रदाय माने जाते हैं, जिनमें ईश्वर को निराकार और निर्गुण रूप में पूजा जाता है। इसलिए रामानन्दी सम्प्रदाय को निर्गुण भक्ति की श्रेणी में नहीं रखा जाता।

110. रामस्नेही सम्प्रदाय का प्रमुख मेला कब भरता है?

  • (A) चैत्र कृष्ण एकम से चैत्र कृष्ण पंचमी
  • (B) बसन्त पंचमी
  • (C) फाल्गुन शुक्ल अष्टमी
  • (D) भाद्रपद शुक्ल अष्टमी

रामस्नेही सम्प्रदाय का प्रमुख मेला चैत्र कृष्ण एकम से चैत्र कृष्ण पंचमी तक भरता है। यह मेला शाहपुरा (भीलवाड़ा) स्थित रामद्वारा में आयोजित होता है। इसमें देशभर से संप्रदाय के अनुयायी बड़ी संख्या में आते हैं। यह मेला रामभक्ति, भजन-कीर्तन और संत परंपरा की शिक्षाओं के लिए प्रसिद्ध है।

111. गुरु जांभोजी का जन्म स्थल है?

  • (A) समराथल (बीकानेर)
  • (B) मुकाम (बीकानेर)
  • (C) पीपासर (नागौर)
  • (D) कतरियासर (बीकानेर)

गुरु जांभोजी का जन्म 1451 ई. में पीपासर (नागौर) में हुआ था। उनके पिता लोहटजी पंवार और माता हंसा देवी थीं। जांभोजी ने 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की। उनके 29 नियम पर्यावरण और सामाजिक सुधार से जुड़े हैं, जिनका पालन आज भी विश्नोई समाज करता है।

112. नाथ सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं?

  • (A) गोरखनाथ
  • (B) मत्स्येन्द्रनाथ
  • (C) जालंधरनाथ
  • (D) भृतहरिनाथ

नाथ सम्प्रदाय के प्रवर्तक मत्स्येन्द्रनाथ माने जाते हैं। यह शैव मत का ही एक रूप है जिसे योग सम्प्रदाय या सिद्धमार्ग सम्प्रदाय भी कहा जाता है। मत्स्येन्द्रनाथ के प्रमुख शिष्य गोरखनाथ थे, जिन्होंने इस सम्प्रदाय को राजस्थान और उत्तर भारत में व्यापक रूप से फैलाया।

113. राजस्थान में नाथ की प्रमुख 2 शाखाएँ हैं, उनके नाम हैं?

  • (A) बैराग पंथ व माननाथी
  • (B) रसिक पंथ व गोरखनाथी
  • (C) ब्रह्म पंथ व माधोनाथी
  • (D) सखि पंथ व हरिनाथी

राजस्थान में नाथ सम्प्रदाय की प्रमुख दो शाखाएँ हैं – बैराग पंथ और माननाथी। नाथ सम्प्रदाय योग और तपस्या पर बल देता है। इस सम्प्रदाय ने राजस्थान में विशेषकर जोधपुर, अलवर और उदयपुर क्षेत्रों में काफी प्रभाव डाला।

114. राजस्थान में नाथ सम्प्रदाय को सर्वाधिक बढ़ावा देने वाले शासक थे?

  • (A) सवाई जयसिंह (जयपुर)
  • (B) महाराणा राजसिंह (उदयपुर)
  • (C) महाराणा कुम्भा (मेवाड़)
  • (D) महाराजा मानसिंह (जोधपुर)

राजस्थान में नाथ सम्प्रदाय को सर्वाधिक बढ़ावा जोधपुर के महाराजा मानसिंह ने दिया। उन्होंने जोधपुर में महामंदिर का निर्माण कराया, जो आज भी नाथ सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ है। इस कारण जोधपुर क्षेत्र नाथ सम्प्रदाय का महत्वपूर्ण केन्द्र माना जाता है।

115. राजस्थान के वे संत कौन है जो राजस्थान छोड़कर बनारस गये और रामानंद के शिष्य बन गये?

  • (A) संत दरियाव जी
  • (B) संत धन्ना जी
  • (C) संत पीपा जी
  • (D) संत भाव जी

संत धन्ना जी राजस्थान से बनारस गए और वहाँ जाकर रामानंद के शिष्य बने। धन्नाजी मूलतः टोंक जिले के धुवन गाँव के निवासी थे और जाट समुदाय से आते थे। उनकी रचनाएँ गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं। धन्ना जी ने भक्ति और ईश्वर की सादगीपूर्ण उपासना पर बल दिया।

116. जाम्भोजी के अनुयायी किस नाम से जाने जाते है?

  • (A) बिश्नोई
  • (B) मुकामपंथी
  • (C) गुरुपंथी
  • (D) जाम्भापंनी

गुरु जाम्भोजी द्वारा स्थापित सम्प्रदाय के अनुयायी विश्नोई कहलाते हैं। इस सम्प्रदाय की स्थापना 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) में हुई थी। जाम्भोजी ने समाज को 29 नियम दिए जिनमें पर्यावरण संरक्षण, पशु-पक्षियों की रक्षा और सादा जीवन मुख्य हैं। विश्नोई समाज आज भी इन नियमों का पालन करता है।

117. राजस्थान में रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रधान पीठ कहाँ है?

  • (A) डीडवाना-कुचामन
  • (B) ब्यावर
  • (C) पुष्कर (अजमेर)
  • (D) शाहपुरा (भीलवाड़ा)

रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है। इसकी स्थापना संत रामचरणजी ने की थी। शाहपुरा में रामद्वारा इस सम्प्रदाय का प्रमुख धार्मिक स्थल है जहाँ प्रतिवर्ष चैत्र मास में विशाल मेला भरता है। इस सम्प्रदाय में मूर्तिपूजा का विरोध किया गया और केवल राम नाम जपने पर जोर दिया गया।

118. दादू पंथ की मुख्य गद्दी कहाँ स्थित है?

  • (A) अहमदाबाद
  • (B) शाहपुरा (जयपुर)
  • (C) गागरोन (झालावाड़)
  • (D) नरायणा (जयपुर)

दादू पंथ की मुख्य गद्दी नरायणा (जयपुर) में स्थित है। दादू दयाल ने 1574 ई. में इस पंथ की स्थापना की थी। उनका निर्वाण भी यहीं भैराणा पहाड़ी पर हुआ। नरायणा दादूपंथ का प्रमुख केंद्र है और यहाँ आज भी संतों और अनुयायियों का बड़ा समुदाय मौजूद है।

119. मिस्किनदासजी, माधोदासजी, संतदास व जनगोपाल आदि सन्तों का सम्बन्ध किस सम्प्रदाय से माना जाता है-

  • (A) दादूपंथ
  • (B) लालदासी
  • (C) चरणदासी
  • (D) निरंजनी

मिस्किनदास, माधोदास, संतदास और जनगोपाल जैसे संत दादूपंथ से जुड़े थे। दादूदयाल के 52 शिष्यों को "52 स्तंभ" कहा जाता है। इन शिष्यों ने राजस्थान में निर्गुण भक्ति का प्रचार-प्रसार किया। इनकी वाणी और विचार आज भी भक्ति साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

120. पुष्टिमार्ग' सम्प्रदाय के प्रवर्तक कौन है?

  • (A) निम्बार्काचार्य
  • (B) वल्लभाचार्य
  • (C) माध्वाचार्य
  • (D) रामानुजाचार्य

पुष्टिमार्ग सम्प्रदाय के प्रवर्तक वल्लभाचार्य थे। यह सम्प्रदाय वैष्णव धर्म की शाखा है और इसमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल स्वरूप में पूजा की जाती है। इस सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र नाथद्वारा (राजसमंद) है, जहाँ श्रीनाथजी की पूजा की जाती है। पुष्टिमार्ग में भक्ति को ईश्वर की कृपा का परिणाम माना गया है।

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ – सभी भाग:
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