राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – Rajasthan GK

राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ | Painting Styles of Rajasthan Questions

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं, जो राजस्थान की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी हैं।

इन प्रश्नों में मेवाड़ शैली, मारवाड़ शैली, किशनगढ़ शैली, कोटा शैली, बूंदी शैली, नाथद्वारा शैली, अलवर शैली, मारवाड़ चित्रकला शैली, पंचतन्त्र चित्रांकन, ढूंढाड़ शैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ RPSC, RSMSSB, RSSB, REET, Patwar, Police, LDC, Teacher तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। प्रत्येक प्रश्न के साथ सही उत्तर और explanation दिया गया है, जिससे आपकी Rajasthan GK की तैयारी और मजबूत होगी।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
  • कुल प्रश्न: 20

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1. गुलाम अली, बलदेव, सालिगराम, रामगोपाल चित्रकारों का सम्बंध किस चित्र शैली से रहा है?

  • (A) नाथद्वारा
  • (B) अलवर
  • (C) बून्दी
  • (D) बीकानेर

अलवर चित्रशैली ढूंढाड़ स्कूल का हिस्सा मानी जाती है। इसकी शुरुआत राव राजा प्रतापसिंह (1775 ई.) से हुई और इसका स्वर्णकाल महाराजा विनयसिंह के समय रहा। इस शैली में सीमाओं पर सुंदर बॉर्डर चित्रण, वेश्याओं (गणिकाओं) के चित्र तथा ईरानी, मुगल व जयपुर शैली का प्रभाव दिखाई देता है। प्रमुख कलाकारों में डालूराम, बलदेव, गुलाम अली, सालिगराम, नंदलाल, रामगोपाल, छोटे लाल, जमुनादास, मूलचंद और जगमोहन शामिल हैं।

2. मारवाड़ चित्रकला शैली के प्रसिद्ध चित्रकारों में था?

  • (A) अमरदास
  • (B) किसन दास
  • (C) गंगाराम
  • (D) कालू राम

मारवाड़ चित्रकला शैली राजस्थान की एक प्रमुख शाखा है। इस शैली के कई प्रसिद्ध चित्रकार हुए जिनमें अमरदास, दाना, जीतमल, बिशनदास, किशनदास, नाथो, वीरजी, रतनजी, छज्जू, उदयराम, देवदास, नारायणदास, सामसिंह, लादू, माधोदास, शंकरदास और बभूत (भाटी परिवार) प्रमुख थे। इनमें गंगाराम भी एक विख्यात चित्रकार था, जिसने अपने समय में मारवाड़ शैली को नई पहचान दी।

3. निम्नलिखित में से कौन सी चित्रशैली पंचतन्त्र चित्रांकन के लिये प्रसिद्ध है?

  • (A) बूंदी
  • (B) कोटा
  • (C) मारवाड़
  • (D) ढूंढाड़

जोधपुर चित्रशैली (मारवाड़ स्कूल का भाग) पंचतंत्र चित्रांकन के लिए प्रसिद्ध है। राजस्थान में अजंता शैली का प्रभाव सबसे पहले जोधपुर शैली पर पड़ा। सूरसिंह के काल में भागवत पुराण, ढोला-मारू और पंचतंत्र जैसे ग्रंथों का चित्रण हुआ। वीरजी भाटी और विट्ठलदास चपांवत जैसे चित्रकारों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। 19वीं शताब्दी में मतिराम चितेरे ने रसराज चित्रित किए।

4. अमरदास भाटी एवं शिवदास किस चित्रकला शैली के चित्रकार है?

  • (A) ढूंढाड़ शैली
  • (B) मेवाड़ शैली
  • (C) मारवाड़ शैली
  • (D) हाड़ौती शैली

अमरदास भाटी और शिवदास मारवाड़ चित्रकला शैली से संबंधित थे। इस शैली में अनेक अन्य कलाकार जैसे शंकरदास, माधोदास, दाना, रामसिंह, जीतमल, कालूराम, वीरजी, नारायणदास, छज्जू, देवदास और किशनदास ने भी काम किया। इस परिवार को भाटी परिवार कहा जाता है और यह मारवाड़ चित्रशैली की रीढ़ माने जाते हैं।

5. रामा, नाथा, छज्जू और सेफू चित्रकला की किस शैली से संबंधित चित्रकार हैं?

  • (A) अलवर शैली
  • (B) जोधपुर शैली
  • (C) मेवाड़ शैली
  • (D) जयपुर शैली

जोधपुर चित्रशैली (मारवाड़ स्कूल का भाग) के प्रमुख चित्रकारों में रामा, नाथा, छज्जू और सेफू का नाम आता है। इस शैली का स्वर्णकाल महाराजा मानसिंह (1803–1843 ई.) के समय था। इसमें ढोला-मारू, मूमल-महेन्द्र, उजली-जेठवा और कल्याण रागिनी जैसे चित्र प्रमुख हैं। कलाकारों में भाटी परिवार का योगदान अत्यधिक उल्लेखनीय रहा।

6. आमेर के किस शासक ने अपने काल में विभिन्न कलाओं को बढ़ावा देने व सामग्री निर्माण के लिए 36 कारखानों की स्थापना की थी?

  • (A) मानसिंह प्रथम
  • (B) रामसिंह प्रथम
  • (C) सवाई जयसिंह
  • (D) माधोसिंह प्रथम

सवाई जयसिंह ने आमेर किले में 36 कारखाने स्थापित करवाए। इन कारखानों में विभिन्न प्रकार की कलाओं और निर्माण कार्यों को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने आमेर किले में गणेश पोल का निर्माण भी करवाया, जो सुंदर भित्ति चित्रों और अलंकरणों से सुसज्जित है। यह उनकी कला-प्रेमी प्रवृत्ति को दर्शाता है।

7. शेखावाटी शैली में अपने भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है, जिस पर देवा नामक चित्रकार ने चित्रण किया है।

  • (A) जोगीदास की छतरी (उदयपुर)
  • (B) रामदत्त गोयनका की छतरी
  • (C) चाँदसिंह की छतरी
  • (D) रामगोपाल पौद्दार की छतरी

शेखावाटी क्षेत्र अपने भित्ति चित्रों और हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के कई चित्रकारों ने छतरियों और हवेलियों पर अद्भुत चित्रण किया। देवा नामक चित्रकार ने जोगीदास की छतरी (उदयपुर) में भित्ति चित्र बनाए, जो उस समय की चित्रकला और समाजिक जीवन को प्रदर्शित करते हैं।

8. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए –सूची-I — सूची-II(क) पोथीखाना संग्रहालय — जयपुर(ख) पुस्तक प्रकाश — जोधपुर(ग) सरस्वती भण्डार — उदयपुर(घ) चित्रशाला संग्रहालय — बूंदी

  • (A) 3412
  • (B) 1234
  • (C) 4321
  • (D) 1432

यह प्रश्न संग्रहालयों और उनके स्थानों से संबंधित है। पोथीखाना संग्रहालय जयपुर में है। पुस्तक प्रकाश जोधपुर में स्थित है। सरस्वती भण्डार उदयपुर से संबंधित है। वहीं चित्रशाला संग्रहालय बूंदी का प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र है। सही क्रम 3412 है।

9. विभिन्न रियासतों के शासक व उनके समय के प्रसिद्ध चित्रकारों का कौनसा युग्म असुमेलित है?

  • (A) महाराजा विनयसिंह (अलवर) — बलदेव व गुलाम अली
  • (B) मंगल सिंह (अलवर) — मूलचंद व उदयराम
  • (C) महाराजा जयसिंह (अलवर) — रामप्रसाद व रामगोपाल
  • (D) सवाई प्रताप सिंह (जयपुर) — लालचन्द व साहिबराम

जयपुर शासक सवाई प्रताप सिंह के समय प्रसिद्ध चित्रकार गोपाल, चिमना, हुकमा, रामसेवक, उदय, सालिगराम और लक्ष्मण थे। लालचन्द और साहिबराम उनके समय के कलाकार नहीं थे, इसलिए यह युग्म असुमेलित है।

10. शेखावाटी क्षेत्र किसलिए प्रसिद्ध है?

  • (A) हवेलियों पर भित्ति चित्रकला हेतु
  • (B) हाथी दांत पर चित्रकारी हेतु
  • (C) पिछवाईयों के निर्माण हेतु
  • (D) फड़ चित्रण के लिए

शेखावाटी क्षेत्र अपनी भित्ति चित्रकला और हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है। 19वीं से 20वीं सदी के बीच यहाँ के सेठों ने भव्य हवेलियाँ बनवाईं। इन हवेलियों पर आकर्षक भित्ति चित्र बनाए गए, जिनमें फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, रामगढ़, नवलगढ़ और मंडावा प्रमुख हैं। इसी कारण शेखावाटी को “ऑपन एयर आर्ट गैलरी” कहा जाता है।

11. कोटा के किस शासक के काल में 'शिकार का चित्रण' कोटा शैली का प्रतीक बना?

  • (A) सावंत सिंह
  • (B) जवाहर सिंह
  • (C) माधो सिंह
  • (D) महाराव उम्मेद सिंह

कोटा चित्रशैली में शिकार का चित्रण विशेष रूप से प्रसिद्ध है और यह इस शैली का प्रतीक बन गया। इसका उत्कर्ष महाराव उम्मेद सिंह के काल में हुआ। उस समय शिकार से संबंधित दृश्य बहुत बारीकी से बनाए जाते थे। इस शैली में जंगल, वन्य जीव, और शिकार की गतिविधियाँ वास्तविकता के साथ प्रस्तुत की गईं।

12. प्रसिद्ध 'गीत-गोविन्द' चित्र किस शैली का है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) किशनगढ़ शैली
  • (C) शेखावाटी शैली
  • (D) मारवाड़ शैली

गीत-गोविन्द' चित्र मेवाड़ शैली से संबंधित है। मेवाड़ शैली धार्मिक और पौराणिक विषयों पर आधारित रही। इसमें राधा-कृष्ण लीला, भागवत पुराण और गीत-गोविन्द का सुंदर चित्रण किया गया। इस शैली में रंगों की गहराई और भावनाओं की अभिव्यक्ति को विशेष महत्व दिया गया है।

13. किस राजपूत चित्रकला शैली में नारियों और रानियों को शिकार करते चित्रित किया गया है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) कोटा शैली
  • (C) बूंदी शैली
  • (D) मारवाड़ शैली

कोटा चित्रशैली शिकार दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। इसमें केवल पुरुषों को ही नहीं, बल्कि नारियों और रानियों को भी शिकार करते हुए चित्रित किया गया। इस शैली में पशु-पक्षियों का यथार्थवादी चित्रण किया गया, और प्राकृतिक दृश्यों के बीच शिकार के रोमांच को दिखाया गया।

14. प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन चित्रकला की किस शैली से सम्बंधित है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) कोटा शैली
  • (C) बीकानेर शैली
  • (D) मारवाड़ शैली

साहिबदीन मेवाड़ शैली के प्रमुख चित्रकार थे। वे महाराणा जगतसिंह प्रथम के समय में कार्यरत रहे। उन्होंने 1648 ई. में 'भागवत पुराण' का चित्रांकन किया। इनके साथ नसीरूद्दीन और मनोहर भी प्रमुख कलाकार थे। साहिबदीन ने धार्मिक विषयों को अपनी कला से जीवंत रूप दिया।

15. फारसी कवि शेख सादी द्वारा जवाहरातों की स्याही से लिखा प्रसिद्ध ग्रंथ 'गुलिस्तां' वर्तमान में किस संग्रहालय में रखा हुआ है?

  • (A) अजमेर संग्रहालय
  • (B) अलवर संग्रहालय
  • (C) सिटी पैलेस, जयपुर
  • (D) करौली संग्रहालय

गुलिस्तां' फारसी कवि शेख सादी का प्रसिद्ध ग्रंथ है, जिसे जवाहरातों की स्याही से लिखा गया। इसे अलवर के शासक विनयसिंह ने सुलेखित और चित्रांकित करवाया था। इसके चित्र बलदेव और गुलाम अली जैसे महान कलाकारों ने बनाए। यह ग्रंथ वर्तमान में अलवर संग्रहालय में सुरक्षित है।

16. किसके शासन में निर्मित चित्रशाला (रंगीन चित्र) बूंदी शैली का श्रेष्ठ उदाहरण है?

  • (A) राव शत्रुशाल
  • (B) अनिरूद्ध सिंह
  • (C) सुर्जन सिंह
  • (D) महाराव उम्मेद सिंह

बूंदी के महाराव उम्मेद सिंह ने राजमहल में एक भव्य चित्रशाला का निर्माण करवाया। इसमें बूंदी शैली के अद्भुत भित्ति चित्र बनाए गए। इस चित्रशाला को “भित्ति चित्रों का स्वर्ग” कहा जाता है। यहाँ की चित्रकला में प्रकृति, दरबारी जीवन और धार्मिक कथाओं का सुंदर चित्रण मिलता है।

17. पद्मश्री रामगोपाल विजयवर्गीय थे-

  • (A) प्रसिद्ध चित्रकार
  • (B) प्रसिद्ध फिल्मी गीतकार
  • (C) मेवाड़ के प्रसिद्ध क्रांतिकारी
  • (D) प्रसिद्ध मांड गायक

रामगोपाल विजयवर्गीय एक प्रसिद्ध चित्रकार थे। इनका जन्म 1905 ई. में बालेर ठिकाना (सवाई माधोपुर) में हुआ। वे राजस्थान के पहले चित्रकार थे जिन्हें 1984 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ। उन्होंने भारतीय चित्रकला में परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत किया।

18. किस चित्रकला शैली में कमला व इलायची नामक महिला चित्रकार थी?

  • (A) देवगढ़ शैली
  • (B) नाथद्वारा शैली
  • (C) किशनगढ़ शैली
  • (D) अलवर शैली

नाथद्वारा चित्रशैली का उद्भव 1672 ई. में मेवाड़ महाराजा राजसिंह के समय हुआ। जब श्रीनाथजी की मूर्ति सिहाड़ गाँव (नाथद्वारा) लाई गई, तभी यह शैली फली-फूली। इसमें धार्मिक भावनाओं का चित्रण किया गया। इस शैली में कमला और इलायची नामक महिला चित्रकारों ने भी योगदान दिया।

19. पक्षियों को विशेष महत्व देने वाली चित्र शैली है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) किशनगढ़ शैली
  • (C) बूंदी शैली
  • (D) नाथद्वारा शैली

बूंदी चित्रशैली में पशु-पक्षियों का सबसे अधिक चित्रांकन किया गया है। इसी कारण इसे 'पक्षी शैली' भी कहा जाता है। कबूतर और बतख का चित्रण विशेष रूप से मिलता है। यहाँ प्राकृतिक दृश्यों में पक्षियों की सुंदरता और जीवन को जीवंत रूप में दर्शाया गया है।

20. श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' नाम चित्रित ग्रंथ राजस्थान की किस शैली में है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) किशनगढ़ शैली
  • (C) बूंदी शैली
  • (D) नाथद्वारा शैली

श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' मेवाड़ शैली का आरम्भिक चित्रित ग्रंथ है। इसे 1260 ई. में महाराणा तेजसिंह के समय चित्रित किया गया था। इसका चित्रकार कमलचंद्र था। यह चित्र आहड़ (उदयपुर) में ताड़पत्र पर बनाया गया था। यह ग्रंथ मेवाड़ शैली की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को दर्शाता है।

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