राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ Questions with Answers

राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 1

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में मेवाड़ शैली, किशनगढ़ शैली, मारवाड़ शैली, बूंदी शैली, कोटा शैली, नाथद्वारा शैली, अलवर शैली, जयपुर शैली, शेखावाटी शैली, बीकानेर शैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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1. शेखावाटी शैली में अपने भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है, जिस पर देवा नामक चित्रकार ने चित्रण किया है।

  • (A) जोगीदास की छतरी (उदयपुर)
  • (B) रामदत्त गोयनका की छतरी
  • (C) चाँदसिंह की छतरी
  • (D) रामगोपाल पौद्दार की छतरी

शेखावाटी क्षेत्र अपने भित्ति चित्रों और हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के कई चित्रकारों ने छतरियों और हवेलियों पर अद्भुत चित्रण किया। देवा नामक चित्रकार ने जोगीदास की छतरी (उदयपुर) में भित्ति चित्र बनाए, जो उस समय की चित्रकला और समाजिक जीवन को प्रदर्शित करते हैं।

2. कोटा चित्रकारी शैली की विषय वस्तु मुख्यतः है-

  • (A) नारियों की तैराकी मुद्रा
  • (B) वेश्याओं के चित्रण
  • (C) बलखाती लटों का एक ओर अंकन
  • (D) शिकार के दृश्य

कोटा चित्रशैली शिकार दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। इस शैली में हाथियों, शेरों, बाघों और अन्य जंगली जानवरों का शिकार करते हुए राजाओं का चित्रण मिलता है। जंगल और प्राकृतिक दृश्यों की बारीक रेखांकन के साथ प्रस्तुति इसे अद्वितीय बनाती है। यही कारण है कि कोटा शैली को "शिकार की शैली" भी कहा जाता है।

3. चित्रकला के विकास हेतु कार्यरत 'आयाम' व 'कलावृत' संस्थान किस जिले में स्थित है?

  • (A) जयपुर
  • (B) जोधपुर
  • (C) बूंदी
  • (D) बीकानेर

आयाम' और 'कलावृत' संस्थान जयपुर जिले में स्थित हैं। ये संस्थान चित्रकला और लघुचित्रों की परंपरा को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने में कार्यरत हैं। यहाँ परंपरागत कलाकारों को मंच दिया जाता है और उनकी कलाकृतियों को संरक्षित तथा प्रचारित किया जाता है। इस प्रकार यह संस्थान राजस्थान की कला धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

4. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए –सूची-I — सूची-II(क) पोथीखाना संग्रहालय — जयपुर(ख) पुस्तक प्रकाश — जोधपुर(ग) सरस्वती भण्डार — उदयपुर(घ) चित्रशाला संग्रहालय — बूंदी

  • (A) 3412
  • (B) 1234
  • (C) 4321
  • (D) 1432

यह प्रश्न संग्रहालयों और उनके स्थानों से संबंधित है। पोथीखाना संग्रहालय जयपुर में है। पुस्तक प्रकाश जोधपुर में स्थित है। सरस्वती भण्डार उदयपुर से संबंधित है। वहीं चित्रशाला संग्रहालय बूंदी का प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र है। सही क्रम 3412 है।

5. विभिन्न रियासतों के शासक व उनके समय के प्रसिद्ध चित्रकारों का कौनसा युग्म असुमेलित है?

  • (A) महाराजा विनयसिंह (अलवर) — बलदेव व गुलाम अली
  • (B) मंगल सिंह (अलवर) — मूलचंद व उदयराम
  • (C) महाराजा जयसिंह (अलवर) — रामप्रसाद व रामगोपाल
  • (D) सवाई प्रताप सिंह (जयपुर) — लालचन्द व साहिबराम

जयपुर शासक सवाई प्रताप सिंह के समय प्रसिद्ध चित्रकार गोपाल, चिमना, हुकमा, रामसेवक, उदय, सालिगराम और लक्ष्मण थे। लालचन्द और साहिबराम उनके समय के कलाकार नहीं थे, इसलिए यह युग्म असुमेलित है।

6. शेखावाटी क्षेत्र किसलिए प्रसिद्ध है?

  • (A) हवेलियों पर भित्ति चित्रकला हेतु
  • (B) हाथी दांत पर चित्रकारी हेतु
  • (C) पिछवाईयों के निर्माण हेतु
  • (D) फड़ चित्रण के लिए

शेखावाटी क्षेत्र अपनी भित्ति चित्रकला और हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है। 19वीं से 20वीं सदी के बीच यहाँ के सेठों ने भव्य हवेलियाँ बनवाईं। इन हवेलियों पर आकर्षक भित्ति चित्र बनाए गए, जिनमें फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, रामगढ़, नवलगढ़ और मंडावा प्रमुख हैं। इसी कारण शेखावाटी को “ऑपन एयर आर्ट गैलरी” कहा जाता है।

7. कोटा के किस शासक के काल में 'शिकार का चित्रण' कोटा शैली का प्रतीक बना?

  • (A) सावंत सिंह
  • (B) जवाहर सिंह
  • (C) माधो सिंह
  • (D) महाराव उम्मेद सिंह

कोटा चित्रशैली में शिकार का चित्रण विशेष रूप से प्रसिद्ध है और यह इस शैली का प्रतीक बन गया। इसका उत्कर्ष महाराव उम्मेद सिंह के काल में हुआ। उस समय शिकार से संबंधित दृश्य बहुत बारीकी से बनाए जाते थे। इस शैली में जंगल, वन्य जीव, और शिकार की गतिविधियाँ वास्तविकता के साथ प्रस्तुत की गईं।

8. प्रसिद्ध 'गीत-गोविन्द' चित्र किस शैली का है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) किशनगढ़ शैली
  • (C) शेखावाटी शैली
  • (D) मारवाड़ शैली

गीत-गोविन्द' चित्र मेवाड़ शैली से संबंधित है। मेवाड़ शैली धार्मिक और पौराणिक विषयों पर आधारित रही। इसमें राधा-कृष्ण लीला, भागवत पुराण और गीत-गोविन्द का सुंदर चित्रण किया गया। इस शैली में रंगों की गहराई और भावनाओं की अभिव्यक्ति को विशेष महत्व दिया गया है।

9. किस राजपूत चित्रकला शैली में नारियों और रानियों को शिकार करते चित्रित किया गया है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) कोटा शैली
  • (C) बूंदी शैली
  • (D) मारवाड़ शैली

कोटा चित्रशैली शिकार दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। इसमें केवल पुरुषों को ही नहीं, बल्कि नारियों और रानियों को भी शिकार करते हुए चित्रित किया गया। इस शैली में पशु-पक्षियों का यथार्थवादी चित्रण किया गया, और प्राकृतिक दृश्यों के बीच शिकार के रोमांच को दिखाया गया।

10. प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन चित्रकला की किस शैली से सम्बंधित है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) कोटा शैली
  • (C) बीकानेर शैली
  • (D) मारवाड़ शैली

साहिबदीन मेवाड़ शैली के प्रमुख चित्रकार थे। वे महाराणा जगतसिंह प्रथम के समय में कार्यरत रहे। उन्होंने 1648 ई. में 'भागवत पुराण' का चित्रांकन किया। इनके साथ नसीरूद्दीन और मनोहर भी प्रमुख कलाकार थे। साहिबदीन ने धार्मिक विषयों को अपनी कला से जीवंत रूप दिया।

11. फारसी कवि शेख सादी द्वारा जवाहरातों की स्याही से लिखा प्रसिद्ध ग्रंथ 'गुलिस्तां' वर्तमान में किस संग्रहालय में रखा हुआ है?

  • (A) अजमेर संग्रहालय
  • (B) अलवर संग्रहालय
  • (C) सिटी पैलेस, जयपुर
  • (D) करौली संग्रहालय

गुलिस्तां' फारसी कवि शेख सादी का प्रसिद्ध ग्रंथ है, जिसे जवाहरातों की स्याही से लिखा गया। इसे अलवर के शासक विनयसिंह ने सुलेखित और चित्रांकित करवाया था। इसके चित्र बलदेव और गुलाम अली जैसे महान कलाकारों ने बनाए। यह ग्रंथ वर्तमान में अलवर संग्रहालय में सुरक्षित है।

12. किसके शासन में निर्मित चित्रशाला (रंगीन चित्र) बूंदी शैली का श्रेष्ठ उदाहरण है?

  • (A) राव शत्रुशाल
  • (B) अनिरूद्ध सिंह
  • (C) सुर्जन सिंह
  • (D) महाराव उम्मेद सिंह

बूंदी के महाराव उम्मेद सिंह ने राजमहल में एक भव्य चित्रशाला का निर्माण करवाया। इसमें बूंदी शैली के अद्भुत भित्ति चित्र बनाए गए। इस चित्रशाला को “भित्ति चित्रों का स्वर्ग” कहा जाता है। यहाँ की चित्रकला में प्रकृति, दरबारी जीवन और धार्मिक कथाओं का सुंदर चित्रण मिलता है।

13. पद्मश्री रामगोपाल विजयवर्गीय थे-

  • (A) प्रसिद्ध चित्रकार
  • (B) प्रसिद्ध फिल्मी गीतकार
  • (C) मेवाड़ के प्रसिद्ध क्रांतिकारी
  • (D) प्रसिद्ध मांड गायक

रामगोपाल विजयवर्गीय एक प्रसिद्ध चित्रकार थे। इनका जन्म 1905 ई. में बालेर ठिकाना (सवाई माधोपुर) में हुआ। वे राजस्थान के पहले चित्रकार थे जिन्हें 1984 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ। उन्होंने भारतीय चित्रकला में परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत किया।

14. किस चित्रकला शैली में कमला व इलायची नामक महिला चित्रकार थी?

  • (A) देवगढ़ शैली
  • (B) नाथद्वारा शैली
  • (C) किशनगढ़ शैली
  • (D) अलवर शैली

नाथद्वारा चित्रशैली का उद्भव 1672 ई. में मेवाड़ महाराजा राजसिंह के समय हुआ। जब श्रीनाथजी की मूर्ति सिहाड़ गाँव (नाथद्वारा) लाई गई, तभी यह शैली फली-फूली। इसमें धार्मिक भावनाओं का चित्रण किया गया। इस शैली में कमला और इलायची नामक महिला चित्रकारों ने भी योगदान दिया।

15. पक्षियों को विशेष महत्व देने वाली चित्र शैली है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) किशनगढ़ शैली
  • (C) बूंदी शैली
  • (D) नाथद्वारा शैली

बूंदी चित्रशैली में पशु-पक्षियों का सबसे अधिक चित्रांकन किया गया है। इसी कारण इसे 'पक्षी शैली' भी कहा जाता है। कबूतर और बतख का चित्रण विशेष रूप से मिलता है। यहाँ प्राकृतिक दृश्यों में पक्षियों की सुंदरता और जीवन को जीवंत रूप में दर्शाया गया है।

16. श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' नाम चित्रित ग्रंथ राजस्थान की किस शैली में है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) किशनगढ़ शैली
  • (C) बूंदी शैली
  • (D) नाथद्वारा शैली

श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' मेवाड़ शैली का आरम्भिक चित्रित ग्रंथ है। इसे 1260 ई. में महाराणा तेजसिंह के समय चित्रित किया गया था। इसका चित्रकार कमलचंद्र था। यह चित्र आहड़ (उदयपुर) में ताड़पत्र पर बनाया गया था। यह ग्रंथ मेवाड़ शैली की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को दर्शाता है।

17. गुलाम अली, बलदेव, सालिगराम, रामगोपाल चित्रकारों का संबंध किस चित्र शैली से रहा है?

  • (A) अलवर शैली
  • (B) जयपुर शैली
  • (C) बूंदी शैली
  • (D) कोटा शैली

ये चित्रकार अलवर शैली से जुड़े रहे और इस शैली को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अलवर शैली में ईरानी और मुगल कला का प्रभाव देखने को मिलता है। हालांकि ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि सालिगराम नामक एक चित्रकार जयपुर शैली में भी कार्यरत था। वह सवाई प्रताप सिंह के समय सूरतखाने में चित्रण करता था। यह दर्शाता है कि कलाकार कभी-कभी विभिन्न शैलियों में भी योगदान देते थे।

18. मुहम्मद शाह और साहिबराम किस राजस्थानी चित्रकला शैली के प्रसिद्ध चित्रकार थे?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) किशनगढ़ शैली
  • (C) जयपुर शैली
  • (D) मारवाड़ शैली

मुहम्मद शाह और साहिबराम जयपुर चित्रशैली के विख्यात चित्रकार थे। जयपुर शैली दरबारी जीवन, शाही समारोह और आदमकद चित्रों के लिए जानी जाती है। खासकर साहिबराम ने बड़े आकार के आदमकद चित्र बनाकर एक नई परंपरा शुरू की। उनकी कला में बारीकी और यथार्थ का समावेश होता था। जयपुर दरबार में बने उनके चित्र आज भी राजस्थानी कला के महत्वपूर्ण उदाहरण माने जाते हैं।

19. बूंदी की चित्रकला शैली किस महाराजा के काल में चरम पर थी?

  • (A) राव सुर्जन सिंह
  • (B) जवाहर सिंह
  • (C) माधो सिंह
  • (D) उम्मेद सिंह

बूंदी चित्रशैली का उत्कर्ष महाराव उम्मेद सिंह के शासनकाल में हुआ। इस काल में राजमहल में चित्रशाला का निर्माण कराया गया, जिसे "भित्ति चित्रों का स्वर्ग" कहा जाता है। यहाँ की चित्रकला में प्रकृति के दृश्य, धार्मिक कथाएँ और शिकार के चित्र विशेष रूप से अंकित हुए। इस काल की चित्रकला में रंगों की गहराई और चित्रों की जीवंतता बूंदी शैली को विशिष्ट बनाती है।

20. जैसलमेरी शैली का कौनसा प्रमुख चित्र जैसलमेर के राज प्रासादों की प्रमुख शोभा था?

  • (A) मूमल
  • (B) ढोला मारू
  • (C) रागमाला
  • (D) बणी ठणी

जैसलमेरी चित्रशैली में 'मूमल' चित्र प्रमुख रहा, जो जैसलमेर के राजप्रासादों की शोभा माना जाता था। यह चित्र राजस्थानी लोककथाओं और प्रेमकथाओं पर आधारित है। जैसलमेर की चित्रशैली में रेगिस्तानी जीवन, ऊँट, लोकनृत्य और प्रेमकथाओं का चित्रण हुआ। ‘मूमल’ चित्र ने इस शैली को एक अलग पहचान दी और यह कला आज भी जैसलमेर की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
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