राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 10
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में बीकानेर शैली, किशनगढ़ शैली, नागौर शैली, अलवर शैली, जैसलमेर शैली, जोधपुर शैली, उणियारा शैली, जयपुर शैली, नाथद्वारा शैली, जैन शैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
- कुल प्रश्न: 20
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181. राजस्थान की किस चित्रकला शैली में भित्ति चित्रण व राग रागिनी चित्र बिल्कुल भी उपलब्ध नहीं है?
- (A) बीकानेर शैली
- (B) किशनगढ़ शैली
- (C) नागौर शैली
- (D) अलवर शैली
किशनगढ़ शैली में भित्ति चित्र और राग-रागिनी विषयक चित्र नहीं मिलते। इस शैली की प्रमुख विशेषता बणी-ठणी जैसे श्रृंगारिक चित्र और धार्मिक विषय रहे। यहाँ विशेषकर नायिका के चित्रण पर अधिक ध्यान दिया गया।
182. राजस्थान की किस चित्रकला शैली में नायिका को 'वेसरि' नामक नाक का आभूषण पहने दिखाया गया है?
- (A) उणियारा शैली
- (B) जैसलमेर शैली
- (C) किशनगढ़ शैली
- (D) जयपुर शैली
किशनगढ़ शैली में नायिका के चित्रण में 'वेसरि' नामक नाक का आभूषण विशेष रूप से दिखाया गया है। यह इस शैली की पहचान बन गया। इस शैली की स्त्रियाँ लंबे चेहरे, नुकीली नाक और रहस्यमयी मुस्कान के लिए प्रसिद्ध हैं।
183. बूंदी चित्रकला शैली में भी भित्ति चित्रण का कार्य बड़े पैमाने पर हुआ है, 'फ्रेस्को' तकनीक पर आधारित इन चित्रों को यहाँ की स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता है?
- (A) कोवड़ी
- (B) अरेशिया
- (C) घाणी
- (D) पणा
बूंदी चित्रकला शैली के भित्ति चित्रों को स्थानीय भाषा में 'अरेशिया' कहा जाता है। ये चित्र फ्रेस्को तकनीक पर आधारित होते हैं। इसमें चूने की परत पर रंगों का प्रयोग किया जाता था, जिससे चित्र लंबे समय तक टिकाऊ रहते थे।
184. वसलियों पर सुन्दर बेल बूंटों का चित्रांकन (बॉर्डर पर बसलो चित्रण) किस शैली की निजी विशेषता है?
- (A) किशनगढ़ शैली
- (B) मेवाड़ शैली
- (C) जोधपुर शैली
- (D) अलवर शैली
अलवर शैली की खास विशेषता वसलियों पर सुंदर बेल-बूटों का बॉर्डर चित्रण था। इस शैली में न केवल मुख्य चित्र बल्कि किनारों पर की गई सजावट भी अत्यंत आकर्षक होती थी। इसे बसलो चित्रण कहा जाता था।
185. बूंदी चित्रकला शैली का सर्वाधिक विकास किस शासक के काल में हुआ, इन्हीं के समय यहाँ सर्वाधिक चित्र चित्रित हुए?
- (A) अनिरूद्ध सिंह
- (B) रतनसिंह
- (C) राव सुर्जन सिंह
- (D) भावसिंह
बूंदी शैली का सर्वाधिक विकास राव सुर्जन सिंह के काल में हुआ। इस समय सबसे अधिक चित्र बनाए गए। इनमें शिकार, युद्ध, पशु-पक्षी और प्राकृतिक दृश्यों का सुंदर चित्रण मिलता है। यही कारण है कि उनका काल बूंदी शैली का उत्कर्षकाल माना जाता है।
186. ऊँट की खाल पर स्वर्णिम चित्रांकन किस शैली की विशेषता है?
- (A) बीकानेर शैली
- (B) जोधपुर शैली
- (C) जैसलमेर शैली
- (D) नागौर शैली
ऊँट की खाल पर स्वर्णिम चित्रांकन बीकानेर शैली की खास विशेषता रही है। इस शैली में उस्ता परिवार के कलाकारों ने ऊँट की खाल पर सुनहरी कलाकृतियाँ बनाईं। यह कला बीकानेर की पहचान बन गई और विदेशों तक प्रसिद्ध हुई।
187. मुन्नालाल, मुकुन्द, चन्दुलाल व जयकिशन किस शैली के चित्रकार थे?
- (A) नाथद्वारा शैली
- (B) अलवर शैली
- (C) बीकानेर शैली
- (D) किशनगढ़ शैली
मुन्नालाल, मुकुन्द, चन्दुलाल और जयकिशन बीकानेर शैली के चित्रकार थे। बीकानेर शैली में मुगल और स्थानीय प्रभाव का सुंदर मिश्रण मिलता है। इन कलाकारों ने अपने समय में इस शैली को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
188. किस शासक के काल में जोधपुर शैली की मौलिकता धीरे-धीरे नष्ट होने लगी और इस काल में यूरोपियन प्रभाव वाले चित्र अधिक बने?
- (A) मान सिंह
- (B) अभयसिंह
- (C) अजीतसिंह
- (D) तख्त सिंह
जोधपुर शैली की मौलिकता तख्त सिंह के काल में धीरे-धीरे नष्ट होने लगी। इस काल में यूरोपियन प्रभाव के चित्र अधिक बनाए गए। स्थानीय विषयों की जगह पाश्चात्य तकनीक और आकृतियों का प्रभाव बढ़ा, जिससे पारंपरिक स्वरूप कमजोर हुआ।
189. राजस्थानी चित्रकला का प्रारम्भिक और मौलिक रूप किस चित्रकला शैली में मिलता है?
- (A) बीकानेर
- (B) जयपुर
- (C) मेवाड़
- (D) जैसलमेर
राजस्थानी चित्रकला का प्रारम्भिक और मौलिक रूप मेवाड़ शैली में मिलता है। यह सबसे प्राचीन शैली मानी जाती है। 'श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' (1260 ई.) और 'पारिजात अवतरण' जैसी कृतियाँ इसका उदाहरण हैं।
190. किस महाराजा के शासनकाल में बीकानेर शैली का विशुद्ध रूप दिखाई देता है?
- (A) राय सिंह
- (B) अनूप सिंह
- (C) गज सिंह
- (D) गंगा सिंह
बीकानेर शैली का विशुद्ध रूप महाराजा अनूप सिंह के शासनकाल में दिखाई देता है। इस काल में स्थानीय विशेषताओं को अपनाते हुए बीकानेर शैली स्वतंत्र पहचान के साथ विकसित हुई और मुगल प्रभाव कम हो गया।
191. ढोला-मारू, रूपमति-बाज बहादुर, कल्याण रागिनी चित्र किस शैली से सम्बन्धित हैं?
- (A) जोधपुर शैली
- (B) बीकानेर शैली
- (C) नागौर शैली
- (D) अलवर शैली
ढोला-मारू, रूपमति-बाज बहादुर और कल्याण रागिनी चित्र जोधपुर शैली से संबंधित हैं। यह शैली मारवाड़ स्कूल का हिस्सा है और इसमें लोककथाओं, प्रेमाख्यानों और राग-रागिनी का जीवंत चित्रण मिलता है।
192. चित्रकला की राजस्थानी शैली का उद्गम किससे माना जाता है?
- (A) जैन शैली
- (B) कांगड़ा शैली
- (C) अपभ्रंश शैली
- (D) द्रविड़ शैली
राजस्थानी चित्रकला का उद्गम अपभ्रंश शैली से माना जाता है। यह शैली जैन ग्रंथों और प्राचीन लघुचित्रों से विकसित हुई। अपभ्रंश शैली से ही धीरे-धीरे मेवाड़, मारवाड़ और अन्य राजस्थानी शैलियों का विकास हुआ।
193. ए.एच. मूलर द्वारा बनाया गया प्रसिद्ध चित्र, जिसमें 'पृथ्वीराज राठौड़ को महाराणा प्रताप को पत्र लिखते' दिखाया गया है, वर्तमान में किस संग्रहालय में प्रदर्शित है?
- (A) बीकानेर राजकीय संग्रहालय
- (B) अजमेर संग्रहालय
- (C) राजमहल संग्रहालय, उदयपुर
- (D) हल्दीघाटी संग्रहालय
ए.एच. मूलर द्वारा बनाया गया 'पृथ्वीराज राठौड़ को महाराणा प्रताप को पत्र लिखते' चित्र बीकानेर राजकीय संग्रहालय में सुरक्षित है।यह चित्र ऐतिहासिक घटना का कलात्मक रूप है और इसे राजस्थानी चित्रकला का अनोखा उदाहरण माना जाता है।
194. बणी-ठणी पेन्टिंग के चित्रकार थे -
- (A) नागरीदास
- (B) निहालचंद
- (C) एरिक डिक्शन
- (D) रामसिंह
बणी-ठणी चित्रकृति निहालचंद द्वारा बनाई गई थी। यह किशनगढ़ शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। सावंत सिंह के काल में चित्रित इस पेंटिंग को "भारत की मोनालिसा" कहा जाता है। इसकी रहस्यमयी मुस्कान और नाजुक विशेषताएँ इसे अद्वितीय बनाती हैं।
195. बूँदी स्थित रंगमहल, जो सुन्दर भित्तिचित्रों से सुसज्जित है, किसने बनवाया?
- (A) राव रतन सिंह
- (B) महाराव बुद्धसिंह
- (C) राव छत्रसाल
- (D) राव सुरजन सिंह
बूँदी स्थित रंगमहल का निर्माण राव छत्रसाल हाड़ा के समय में हुआ। यह महल अपने अद्वितीय और सुंदर भित्तिचित्रों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। बूँदी चित्रकला शैली का विकास भी इसी काल में हुआ। रंगमहल के चित्रों में वर्षा, मेघ, बिजली, पशु-पक्षी और प्राकृतिक दृश्यों का अद्भुत संयोजन मिलता है, जो बूँदी शैली की सबसे बड़ी विशेषता है।
196. किस क्षेत्र को राजस्थानी चित्रकला का जन्मस्थान माना जाता है?
- (A) हाड़ौती
- (B) मारवाड़
- (C) मेवाड़
- (D) ढूँढाड़
राजस्थानी चित्रकला का वास्तविक जन्मस्थान मेदपाट (मेवाड़) माना जाता है। प्रारंभिक दौर में यह अजंता चित्रकला से प्रभावित थी। बाद में इस पर जैन शैली, गुजरात शैली और अपभ्रंश शैली का प्रभाव दिखाई देता है। मेवाड़ शैली की आरंभिक चित्रकृतियाँ जैसे "श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि" और "सुपासनाह चरियम" इसकी मौलिकता को दर्शाती हैं।
197. रागमाला' किसके द्वारा रची गई है?
- (A) पुंडरीक विट्ठल
- (B) महाराणा कुम्भा
- (C) उस्ताद चाँद खान
- (D) पंडित भावभट्ट
रागमाला' की रचना पुंडरीक विट्ठल ने की थी। वे आमेर के कच्छवाहा शासक मिर्जा मानसिंह के दरबारी विद्वान थे। उन्होंने 'रागमाला' के साथ 'रागमंजरी' और 'रागचंद्रोदय प्रकाश' जैसे ग्रंथ भी लिखे। 'रागमाला' संगीत और चित्रकला का अद्भुत संगम है, जिसमें विभिन्न रागों और रागिनियों को कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
198. निम्नलिखित में कौनसी मेवाड़ चित्रकला शैली उपशैली है?
- (A) नागौर
- (B) किशनगढ़
- (C) देवगढ़
- (D) बीकानेर
देवगढ़ शैली, मेवाड़ स्कूल की उपशैली है। इसके अलावा मेवाड़ की अन्य उपशैलियाँ नाथद्वारा, चावंड, शाहपुरा और सावर शैली भी हैं। देवगढ़ शैली का उद्भव रावत द्वारिकादास चुंडावत के समय हुआ था। इसमें मेवाड़, मारवाड़ और जयपुर तीनों शैलियों का समन्वित रूप देखने को मिलता है।
199. श्रीधर अंधारे को किस चित्रशैली को प्रकाश में लाने का श्रेय दिया जाता है?
- (A) शाहपुरा
- (B) किशनगढ़
- (C) उणियारा
- (D) देवगढ़
डॉ. श्रीधर अंधारे को देवगढ़ शैली को प्रकाश में लाने का श्रेय जाता है। यह मेवाड़ स्कूल की एक महत्वपूर्ण उपशैली है, जिसका विकास 17वीं शताब्दी में हुआ। इसके प्रमुख चित्रकार बैजनाथ, चोखा और बख्ता थे। इस शैली में धार्मिक, पौराणिक और लोककथाओं का चित्रण विशेष रूप से मिलता है।
200. साहिबदीन नामक चित्रकार को मेवाड़ के किस शासक का संरक्षण प्राप्त था?
- (A) महाराणा अमरसिंह
- (B) महाराणा जगतसिंह प्रथम
- (C) महाराणा राजसिंह
- (D) महाराणा कुम्भा
साहिबदीन, मेवाड़ शैली के प्रसिद्ध चित्रकार थे और उन्हें महाराणा जगतसिंह प्रथम का संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने 'गीत गोविंद', 'भागवत पुराण' और 'रागमाला' जैसे विषयों पर चित्र बनाए। उनके चित्रों में रंगों की चटकीली छटा और सूक्ष्म आकृतियाँ देखने को मिलती हैं।
राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
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