राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ Questions with Answers

राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 11

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में मेवाड़ शैली, जयपुर शैली, कोटा शैली, मारवाड़ शैली, किशनगढ़ शैली, जोधपुर शैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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201. सावंतसिंह का संबंध किस चित्रकला शैली से था?

  • (A) ढूँढाड़ शैली
  • (B) हाड़ौती शैली
  • (C) चावंड शैली
  • (D) किशनगढ़ शैली

सावंतसिंह का संबंध किशनगढ़ शैली से था। वे नागरीदास नाम से प्रसिद्ध हुए और उन्होंने भक्तिमूलक कविताएँ भी लिखीं। उनके काल (1748-1764 ई.) को किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल कहा जाता है। इसी समय निहालचंद ने 'बणी-ठणी' जैसी अमर चित्रकृति बनाई।

202. उणियारा चित्रकला शैली किन शैलियों का मिश्रण है?

  • (A) जयपुर और बूंदी शैली
  • (B) अलवर और कोटा शैली
  • (C) कोटा और आमेर शैली
  • (D) बीकानेर और आमेर शैली

उणियारा चित्रकला शैली जयपुर और बूंदी शैली का मिश्रण है। इस शैली में दोनों शैलियों की विशेषताओं का सुंदर संगम दिखाई देता है। प्रमुख चित्रकारों में मीरबक्श, धीमा, काशी, रामलखन और भीम का नाम आता है। यह शैली विशेषकर धार्मिक और लोक विषयों पर केंद्रित रही।

203. अजारा की ओवरी' किस शैली का चित्र है?

  • (A) जोधपुर
  • (B) नाथद्वारा
  • (C) किशनगढ़
  • (D) देवगढ़

अजारा की ओवरी' और 'मोती महल' के भित्तिचित्र देवगढ़ शैली से संबंधित हैं। इस शैली का उद्भव रावत द्वारिकादास चुंडावत के संरक्षण में हुआ था। देवगढ़ शैली मेवाड़, मारवाड़ और जयपुर तीनों शैलियों का मिश्रित रूप मानी जाती है और इसे प्रकाश में लाने का श्रेय डॉ. श्रीधर अंधारे को जाता है।

204. प्रसिद्ध पेंटिंग "गीत गोविंद" किस शैली से संबंधित है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) कोटा शैली
  • (C) मारवाड़ शैली
  • (D) जयपुर शैली

प्रसिद्ध पेंटिंग "गीत गोविंद" मेवाड़ शैली से संबंधित है। इसका निर्माण 1629 ई. में महाराणा जगतसिंह प्रथम के समय हुआ। इस चित्र में राधा और कृष्ण की लीलाओं को भावपूर्ण रूप में दर्शाया गया है। जयपुर शैली में भी 'गीत गोविंद' पर चित्र बने, लेकिन मेवाड़ की मौलिकता और चटकीले रंग इसे खास बनाते हैं।

205. निम्नलिखित में से कौन सा एक लोक चित्रकला का अंग नहीं है?

  • (A) फड़
  • (B) बणी-ठणी
  • (C) सांझी
  • (D) पथवारी

फड़ चित्रकला राजस्थान की प्रसिद्ध लोक कला है, जिसमें पट पर देवी-देवताओं और लोकनायकों के चित्र बनाए जाते हैं। सांझी चित्रण उत्तर भारत से जुड़ा एक धार्मिक लोक चित्रण है। पथवारी माता की पूजा भी लोक परंपरा का अंग है। जबकि बणी-ठणी किशनगढ़ शैली की एक शास्त्रीय लघु चित्रकला है, इसे लोक चित्रकला का भाग नहीं माना जाता।

206. पिछवाई' कलाकृतियों में बने चित्र उद्धृत किए गए हैं-

  • (A) भगवान कृष्ण के जीवन से
  • (B) भगवान राम के जीवन से
  • (C) पांडवों के जीवन से
  • (D) भगवान शिव के जीवन से

पिछवाई चित्रकला नाथद्वारा शैली से संबंधित है और इसमें मुख्य विषय भगवान कृष्ण की बाल लीलाएँ होती हैं। इन चित्रों में राधा-कृष्ण, नंद-यशोदा और ग्वालबालों के जीवन दृश्य बनाए जाते हैं। इस शैली के प्रमुख कलाकार बाबा रामचन्द्र, चतुर्भुज, नारायण, रामगोपाल, घासीराम, कमला और इलायची रहे हैं।

207. चित्रकार निसारदीन और साहिबदीन किस चित्रकला शैली से संबंधित थे?

  • (A) बीकानेर
  • (B) जयपुर
  • (C) मेवाड़
  • (D) बूंदी

साहिबदीन मेवाड़ शैली के प्रमुख चित्रकार थे, जिन्होंने महाराणा जगतसिंह प्रथम के संरक्षण में रागमाला, गीत गोविन्द और रसिकप्रिया का चित्रण किया। निसारदीन (नसीरुद्दीन) भी इसी शैली के प्रसिद्ध कलाकार रहे। दोनों ने मेवाड़ शैली को एक नई पहचान दी और धार्मिक व पौराणिक ग्रंथों को अपने चित्रों के माध्यम से जीवंत किया।

208. हवेली चित्रकला किस शताब्दी की देन है?

  • (A) 17वीं शताब्दी
  • (B) 20वीं शताब्दी
  • (C) 18वीं शताब्दी
  • (D) 19वीं शताब्दी

हवेली चित्रकला मुख्यतः 19वीं शताब्दी की देन है। इस समय शेखावाटी क्षेत्र के नवलगढ़, रामगढ़, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, मुकुंदगढ़, मंडावा और बिसाऊ में हवेलियों पर अनूठे भित्ति चित्र बनाए गए। इन चित्रों में हाथियों, घोड़ों, दरबारी जीवन, धार्मिक कथाओं और चोबदारों का अंकन प्रमुख रहा। इसी कारण शेखावाटी को ओपन आर्ट गैलरी कहा जाता है।

209. सुहासनह चरित्रम क्या है?

  • (A) चित्रित ग्रंथ
  • (B) शिलालेख
  • (C) हथियार
  • (D) रथ

सुहासनह चरित्रम वास्तव में एक चित्रित ग्रंथ है। यह मेवाड़ शैली से संबंधित है। मेवाड़ में अनेक चित्रित ग्रंथ बनाए गए जैसे—श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चुर्णि (कमलचंद्र), सुपासनह चरियम (हीरानंद), पारिजात अवतरण (नाना राम), आर्ष रामायण (मनोहर), भागवत पुराण (साहिबदीन), पंचतंत्र (नुरूद्दीन) आदि। इन ग्रंथों ने राजस्थान की चित्रकला को धार्मिक और साहित्यिक आधार प्रदान किया।

210. राजपूत पेटिंग' शीर्षक से 1916 ई. में किसने पुस्तक लिखी?

  • (A) जयसिंह नीरज
  • (B) रायकृष्णदास
  • (C) वाचस्पति गैरोला
  • (D) आनन्द कुमारस्वामी

आनन्द कुमार स्वामी ने 1916 ई. में "Rajput Paintings" नामक पुस्तक लिखी। इसमें उन्होंने राजस्थानी चित्रकला का वैज्ञानिक अध्ययन और विभाजन प्रस्तुत किया। इस पुस्तक के माध्यम से राजस्थानी चित्रकला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। बाद में अन्य विद्वानों जैसे H.C. मेहता, ब्राउन और रायकृष्णदास ने भी इस विषय पर अध्ययन किया।

211. राजस्थानी चित्रकला का सबसे पहला वैज्ञानिक वर्गीकरण किसने प्रस्तुत किया?

  • (A) जी. आर्चर
  • (B) डॉ. फैयाज अली
  • (C) एरिक डिकिन्सन
  • (D) आनन्द कुमार स्वामी

राजस्थानी चित्रकला का पहला वैज्ञानिक वर्गीकरण आनन्द कुमार स्वामी ने 1916 ई. में अपनी पुस्तक 'Rajput Paintings' में प्रस्तुत किया। उन्होंने इसे "राजपूत चित्रकला" नाम दिया। वहीं, चमनलाल मेहता ने इसे "हिन्दू चित्रशैली", ब्राउन ने "राजपूत आर्ट" और रायकृष्णदास ने "राजस्थान चित्रकला" कहा। इस प्रकार स्वामी का कार्य सबसे मूलभूत माना जाता है।

212. किस विद्वान ने अपनी पुस्तक 'राजपूत पेंटिंग्स' में राजस्थानी चित्र शैलियों का वैज्ञानिक विभाजन किया?

  • (A) डॉ. श्रीधर अंधारे
  • (B) आनन्द कुमार स्वामी
  • (C) डॉ. फैयाज अली
  • (D) एरिक डिकिन्सन

राजस्थानी चित्रकला का सबसे पहला वैज्ञानिक विभाजन आनन्द कुमार स्वामी ने 1916 ई. में अपनी पुस्तक 'Rajput Paintings' में किया। उनके बाद O.C. गांगुली और हैवेल ने भी इसे "राजपूत चित्रकला" कहा। इस पुस्तक ने भारतीय कला इतिहास में राजस्थानी शैली को नई पहचान और विद्वानों के बीच विशेष महत्व दिलाया।

213. जयपुर चित्रकला शैली की विशेष प्रगति किस शासक के काल को माना जाता है?

  • (A) सवाई जयसिंह
  • (B) सवाई ईश्वरी सिंह
  • (C) सवाई रामसिंह
  • (D) सवाई प्रतापसिंह

जयपुर चित्रशैली की विशेष प्रगति सवाई प्रतापसिंह (1778-1803 ई.) के शासनकाल में हुई। इस काल को इसका स्वर्णकाल कहा जाता है। इस समय लगभग 50 से अधिक कलाकार सूरतखाने में चित्रण कार्य करते थे। प्रमुख विषय थे – राधा-कृष्ण लीला, बारहमासा, राग-रागिनी और नायिका भेद। इस शैली में लालचंद, साहिबराम, गोपाल, सालिगराम जैसे कलाकार प्रसिद्ध रहे।

214. त्रिलोक, हीरानन्द, साहिबराम एवं रामजीदास किस देशी रियासत के चित्रकार थे?

  • (A) जयपुर
  • (B) जोधपुर
  • (C) बीकानेर
  • (D) कोटा

ये सभी चित्रकार जयपुर चित्रशैली से संबंधित थे। जयपुर शैली ढूँढाड़ स्कूल का हिस्सा मानी जाती है और इसका स्वर्णकाल सवाई प्रतापसिंह का समय था। इस दौर में आदमकद पोट्रेट (व्यक्ति चित्र) बनाना शुरू हुआ। प्रमुख कलाकारों में साहिबराम, लालचंद, हीरानंद, त्रिलोक, रामजीदास, गोपाल, लक्ष्मण, सालिगराम आदि थे। इस शैली पर मुगल चित्रकला का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

215. चित्रकार जो अपने आदमकद व्यक्ति चित्रों के लिए जाना जाता है

  • (A) जयपुर का साहिबराम
  • (B) किशनगढ़ का निहालचंद
  • (C) बीकानेर का अहमद अली
  • (D) मेवाड़ का साहिबदीन

साहिबराम जयपुर शैली के प्रसिद्ध चित्रकार थे। उन्होंने महाराजा ईश्वरी सिंह का आदमकद चित्र बनाया, जिसे राजस्थान का पहला आदमकद पोट्रेट माना जाता है। जयपुर की ढूँढाड़ शैली में साहिबराम ने बड़े व्यक्ति चित्रण की नई परंपरा की शुरुआत की, जिसने इस शैली को अलग पहचान दिलाई।

216. निम्न में से कौनसी चित्रकला शैली मुगल चित्रकला से सर्वाधिक प्रभावित हुई?

  • (A) किशनगढ़ शैली
  • (B) जोधपुर शैली
  • (C) जयपुर शैली
  • (D) मेवाड़ शैली

जयपुर चित्रकला शैली, जिसे ढूँढाड़ स्कूल का भाग माना जाता है, पर मुगल चित्रकला का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा। इस शैली में दरबारी जीवन, व्यक्तिचित्र और धार्मिक कथाओं को मुगल ढंग से चित्रित किया गया। यही कारण है कि जयपुर शैली में आदमकद पोर्ट्रेट और दरबारी दृश्य विशेष प्रसिद्ध हुए।

217. अठारहवीं शताब्दी में जयपुर का प्रख्यात पोट्रेट चित्रकार कौन था?

  • (A) साहिबराम
  • (B) रामजीदास
  • (C) रामगोपाल
  • (D) हीरानन्द

अठारहवीं शताब्दी में साहिबराम जयपुर का सबसे प्रख्यात पोर्ट्रेट चित्रकार था। उसने महाराजा ईश्वरी सिंह का आदमकद चित्र बनाया। यह राजस्थान का पहला बड़ा पोर्ट्रेट माना जाता है। उसकी कला ने जयपुर शैली को नई ऊँचाई दी और इसे विशिष्ट पहचान दिलाई।

218. प्रसिद्ध चित्रकार साहिबराम राजस्थानी चित्रकला की किस शैली से संबंधित है?

  • (A) किशनगढ़
  • (B) नाथद्वारा
  • (C) जोधपुर
  • (D) जयपुर

साहिबराम जयपुर शैली के प्रसिद्ध चित्रकार थे। उन्होंने महाराजा ईश्वरी सिंह का आदमकद पोर्ट्रेट बनाया, जो राजस्थान का पहला आदमकद चित्र माना जाता है। उन्होंने जयपुर शैली में बड़े व्यक्ति चित्रण की परंपरा को शुरू किया। इस शैली के अन्य कलाकार लालचंद और गोपाल भी प्रसिद्ध रहे।

219. मुहम्मद शाह और साहिबराम किस राजस्थानी शैली के प्रसिद्ध चित्रकार थे?

  • (A) जयपुर
  • (B) बूंदी
  • (C) अलवर
  • (D) उदयपुर

मुहम्मद शाह और साहिबराम जयपुर शैली के प्रमुख चित्रकार थे। यह शैली ढूँढाड़ स्कूल का हिस्सा है और उस पर मुगल चित्रकला का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। साहिबराम ने आदमकद पोर्ट्रेट बनाए जबकि लालचंद ने जानवरों की लड़ाई के चित्र बनाए।

220. कोटा के किस शासक के काल में शिकार के दृश्य कोटा चित्रकला शैली की विशेषता बन गए?

  • (A) राव माधोसिंह
  • (B) राजा उम्मेदसिंह
  • (C) राजा रामसिंह
  • (D) महाराव भीमसिंह

कोटा शैली का स्वर्णकाल राजा उम्मेदसिंह (1771-1820 ई.) का काल माना जाता है। उनके शासनकाल में बड़ी-बड़ी वसलों पर शिकार के सामूहिक दृश्य बनाए गए। इनमें कई बार रानियों और नारियों को भी शिकार करते दिखाया गया।

राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
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