राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 12
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में उनियारा शैली, जोधपुर शैली, कोटा शैली, मेवाड़ शैली, बीकानेर चित्रशैली, कोटा चित्रशैली, किशनगढ़ चित्रशैली, बूंदी चित्रशैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
- कुल प्रश्न: 20
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221. कोटा के किस शासक के काल को कोटा स्कूल की चित्रशैली का उत्कृष्ट काल माना जा सकता है?
- (A) महाराव शत्रुसाल सिंह प्रथम
- (B) महाराव किशोर सिंह
- (C) महाराव उम्मेद सिंह प्रथम
- (D) महाराव शत्रुसाल सिंह द्वितीय
कोटा शैली का उत्कृष्ट काल महाराव उम्मेद सिंह प्रथम का शासनकाल माना जाता है। इस काल में नूर मोहम्मद, रघुनाथ, गोविन्दराम, डालू और लच्छीराम जैसे प्रसिद्ध कलाकारों ने शिकार और दरबारी जीवन के चित्र बनाए। इसी समय कोटा शैली को स्वतंत्र पहचान मिली।
222. नारियों द्वारा शिकार चित्रण किस चित्रकला शैली की विशेषता है?
- (A) उनियारा शैली
- (B) जोधपुर शैली
- (C) कोटा शैली
- (D) मेवाड़ शैली
कोटा चित्रकला शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नारियों और रानियों को शिकार करते हुए चित्रित किया गया। महाराव उम्मेद सिंह के काल में यह विषय बहुत लोकप्रिय हुआ। इस शैली में ढोला-मारू और रागमाला जैसे धार्मिक और साहित्यिक विषयों के अलावा शिकार के सामूहिक दृश्य विशेष प्रसिद्ध हैं।
223. कोटा चित्रकारी शैली की विषयवस्तु मुख्यतः है-
- (A) हाथियों की लड़ाइयों के दृश्य
- (B) शिकार के दृश्य
- (C) दरबारी दृश्य
- (D) उत्सव दृश्य
कोटा चित्रकला शैली की मुख्य विषयवस्तु शिकार के दृश्य हैं। महाराव रामसिंह और उम्मेदसिंह के काल में इस शैली ने बहुत प्रगति की। चित्रकार नूर मोहम्मद, रघुनाथ और डालूराम ने बड़े-बड़े वसलों पर शिकार के सामूहिक दृश्य बनाए। इस शैली की यही विशिष्ट पहचान बन गई।
224. बीकानेर चित्र शैली में किस बीकानेर शासक के समय उस्ता परिवार ने हिन्दू कथाओं को आधार बनाकर बहुत चित्र बनाए?
- (A) करणसिंह
- (B) रायसिंह
- (C) अनूपसिंह
- (D) जैतसिंह
बीकानेर कला का स्वर्णकाल महाराजा अनूपसिंह (1669-98 ई.) का माना जाता है। इसी समय उस्ता परिवार के चित्रकार जैसे रामलाल, अलीराजा और हसन ने हिन्दू कथाओं, संस्कृत, हिन्दी और राजस्थानी काव्यों को आधार बनाकर अनेक चित्र बनाए। अन्य प्रमुख उस्ता चित्रकारों में शाह मोहम्मद, रूकनुद्दीन, हिसामुद्दीन और कायम उस्ता भी प्रसिद्ध रहे।
225. चित्रकार अली रजा, हामिद रूकनुद्दीन, रामलाल किस चित्रकला शैली से संबंधित है?
- (A) बीकानेर
- (B) जयपुर
- (C) जोधपुर
- (D) बूंदी
रामलाल, अली रजा और हामिद रूकनुद्दीन बीकानेर चित्रशैली के प्रसिद्ध कलाकार थे। बीकानेर चित्रकला पर मथेरण परिवार (जैन मिश्रित शैली) और उस्ता परिवार (मुगल शैली) का विशेष प्रभाव रहा। इस शैली का स्वर्णकाल महाराजा अनूपसिंह के समय माना जाता है।
226. निम्नलिखित में से कौन सा चित्रकार बीकानेर चित्रकला शैली से संबंधित नहीं है?
- (A) शाह मुहम्मद
- (B) रूकनुद्दीन
- (C) मनोहर
- (D) अलीरजा
चित्रकार मनोहर बीकानेर शैली से नहीं बल्कि मेवाड़ शैली से संबंधित थे। वे महाराणा जगतसिंह प्रथम के समय सक्रिय थे और उन्होंने रामायण व भागवत पुराण के चित्र बनाए। बीकानेर शैली से जुड़े प्रमुख कलाकारों में शाह मुहम्मद, रूकनुद्दीन और अलीरजा शामिल थे।
227. अमरदास भाटी एवं शिवदास किस चित्रकला शैली के चित्रकार है?
- (A) ढूंढाड़ शैली
- (B) मेवाड़ शैली
- (C) मारवाड़ शैली
- (D) हाड़ौती शैली
अमरदास भाटी और शिवदास मारवाड़ चित्रकला शैली से संबंधित थे। इस शैली में अनेक अन्य कलाकार जैसे शंकरदास, माधोदास, दाना, रामसिंह, जीतमल, कालूराम, वीरजी, नारायणदास, छज्जू, देवदास और किशनदास ने भी काम किया। इस परिवार को भाटी परिवार कहा जाता है और यह मारवाड़ चित्रशैली की रीढ़ माने जाते हैं।
228. आमेर के किस शासक ने अपने काल में विभिन्न कलाओं को बढ़ावा देने व सामग्री निर्माण के लिए 36 कारखानों की स्थापना की थी?
- (A) मानसिंह प्रथम
- (B) रामसिंह प्रथम
- (C) सवाई जयसिंह
- (D) माधोसिंह प्रथम
सवाई जयसिंह ने आमेर किले में 36 कारखाने स्थापित करवाए। इन कारखानों में विभिन्न प्रकार की कलाओं और निर्माण कार्यों को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने आमेर किले में गणेश पोल का निर्माण भी करवाया, जो सुंदर भित्ति चित्रों और अलंकरणों से सुसज्जित है। यह उनकी कला-प्रेमी प्रवृत्ति को दर्शाता है।
229. चित्रकला के संदर्भ में निम्न में से कौन सा विकल्प सही नहीं है?
- (A) सालिगराम, बकसाराम, नंदराम अलवर शैली के कलाकार हैं।
- (B) आलागीला पद्धति का सर्वप्रथम प्रारंभ आमेर में हुआ।
- (C) रघुनाथ, डालू, गोविंदराम कोटा शैली के चित्रकार हैं।
- (D) चोखेलाव महल' का संबंध बीकानेर शैली से है।
चोखेलाव महल' का संबंध बीकानेर शैली से नहीं है। बीकानेर चित्रकला की शुरुआत महाराजा रायसिंह के समय हुई थी और इसका स्वर्णकाल अनूपसिंह का माना जाता है। इस शैली में रागमाला और भागवत पुराण जैसे ग्रंथों का चित्रण हुआ। प्रमुख कलाकारों में आसीर खां, मोहम्मद खां, रूकनुद्दीन, मुन्नालाल, अलीरजा और शाह मुहम्मद शामिल थे।
230. नाथू, मुराद, रामलाल, अलीराजा चित्रकारों का सम्बंध किस चित्र शैली से रहा है?
- (A) बीकानेर चित्रशैली
- (B) कोटा चित्रशैली
- (C) किशनगढ़ चित्रशैली
- (D) बूंदी चित्रशैली
नाथू, मुराद, रामलाल और अलीराजा सभी बीकानेर चित्रशैली से जुड़े कलाकार थे। इस शैली का सबसे प्राचीन उपलब्ध चित्र भागवत पुराणहै, जो महाराजा रायसिंह के समय बना। बीकानेर शैली का स्वर्णकाल महाराजा अनूपसिंह के शासनकाल में आया।
231. आसीर खां, रूक्नुद्दीन, चन्दूलाल चित्रकला की किस शैली से संबंधित हैं?
- (A) ढूंढाड़ शैली
- (B) बूंदी शैली
- (C) उनियारा
- (D) बीकानेर शैली
आसीर खां, रूक्नुद्दीन और चन्दूलाल बीकानेर चित्रशैली के प्रमुख कलाकार थे। महाराजा अनूपसिंह ने लाहौर से मुगल कलाकारों को बुलाकर बीकानेर शैली को और अधिक समृद्ध किया। इन्हीं के समय यह शैली अपने स्वर्णकाल तक पहुँची।
232. झालावाड़ शैली की राजपूत पेंटिंग किस राजपूत पेंटिंग स्कूल का हिस्सा है?
- (A) मेवाड़
- (B) मारवाड़
- (C) हाड़ौती
- (D) ढूंढाड़
झालावाड़ शैली हाड़ौती स्कूल की उपशाखा है। 1838 ई. में कोटा से अलग होकर झालावाड़ स्वतंत्र रियासत बनी। यहाँ के मंदिरों और महलों की भित्ति चित्रकारी में श्रीनाथजी, राधा-कृष्ण लीला, रामलीला और राजसी वैभव का सुंदर चित्रण हुआ।
233. दुगारी किले की चित्रकला संबंधित है-
- (A) अलवर शैली से
- (B) बूंदी शैली से
- (C) किशनगढ़ शैली से
- (D) मेवाड़ शैली से
दुगारी किले की चित्रकला बूंदी शैली से संबंधित है। बूंदी शैली हाड़ौती स्कूल का भाग है और इसका स्वर्णकाल राव उम्मेद सिंह का काल था। दुगारी किले के चित्रों में पशु-पक्षियों और पौराणिक कथाओं का अद्भुत चित्रण मिलता है।
234. वर्षा में नाचते हुए मोर' राजस्थान की किस चित्रकला शैली की विशेषता है?
- (A) जयपुर
- (B) बूंदी
- (C) किशनगढ़
- (D) मारवाड़
बूंदी चित्रकला शैली का प्रमुख विषय पशु-पक्षियों का चित्रण था। इसमें हरे रंग तथा सोने और चांदी की स्याही का अधिक प्रयोग हुआ। नाचते हुए मोर का चित्रण केवल इसी शैली में मिलता है। महाराव उम्मेदसिंह का काल इस शैली का स्वर्णकाल माना जाता है। उनके समय निर्मित चित्रशाला को भित्ति चित्रों का स्वर्ग कहा जाता है। विद्वान कार्ल खण्डेलवाल ने इस शैली पर अध्ययन कर बूंदी ग्रन्थावली नामक ग्रंथ लिखा।
235. निम्न सभी शैलियां ढूंढाड़ चित्रकला स्कूल के अंतर्गत आती हैं, सिवाय—
- (A) आमेर शैली
- (B) जयपुर शैली
- (C) उनियारा शैली
- (D) बूंदी शैली
बूंदी चित्रशैली हाड़ौती स्कूल का भाग है, न कि ढूंढाड़ स्कूल का। यह मेवाड़ और मुगल शैली का मिश्रण मानी जाती है। महाराव उम्मेद सिंह का काल इस शैली का स्वर्णकाल था। इस शैली की विशेषता आम्र पत्ते जैसे नेत्र, शेर, हिरण, बतख और खजूर वृक्षों का अंकन है।
236. बूंदी राजमहलों में निर्मित चित्रशाला किस शासक की देन है?
- (A) महाराव राम सिंह
- (B) महाराव उम्मेद सिंह
- (C) महाराव किशोर सिंह
- (D) महाराव छत्रसाल
बूंदी शैली भित्ति चित्रों के लिए विश्वविख्यात है। महाराव उम्मेद सिंह के समय राजमहलों में बनी चित्रशाला को भित्ति चित्रों का स्वर्ग कहा जाता है। यह उनका स्वर्णकाल था। इस शैली में विशेषकर हरा रंग, सोने और चांदी की स्याही का प्रयोग मिलता है। नाचते हुए मोर का चित्रण भी केवल इसी शैली में हुआ है।
237. बूंदी के गढ़ पैलेस में चित्रशाला का निर्माण किसने करवाया?
- (A) राव सुर्जन
- (B) राव अनिरूद्ध सिंह
- (C) महाराव बुधसिंह
- (D) महाराव उम्मेदसिंह
गढ़ पैलेस, बूंदी में स्थित चित्रशाला का निर्माण महाराव उम्मेदसिंह (1749-73 ई.) ने करवाया। इसे भित्ति चित्रों का स्वर्ग कहा जाता है। इसमें राग-रागिनी, नायिका भेद, कृष्णलीलाएँ, शाही जलसे, तीज-त्योहार और शिकार के दृश्य चित्रित हैं।
238. चाँद, तैय्यब, रामसिंह भाटी, साहिबा एवं उस्ना चित्रकार निम्न में से किस चित्र शैली से संबंधित हैं?
- (A) देवगढ़
- (B) अजमेर
- (C) शाहपुरा
- (D) जैसलमेर
ये सभी चित्रकार अजमेर शैली से संबंधित थे। उदाहरण के लिए, जूनियां के चाँद, सावर के तैय्यब, नांद के रामसिंह भाटी, मसूदा के माधोजी, अजमेर के अल्लाबक्स, उस्ना और साहिबा (स्त्री चित्रकार) इस शैली से जुड़े रहे।
239. बणी-ठणी चित्र के चित्रकार का क्या नाम था?
- (A) निर्मल देव
- (B) मन मोहन
- (C) निहालचन्द
- (D) अमर सिंह
किशनगढ़ शैली के महान चित्रकार मोरध्वज निहालचन्द ने "बणी-ठणी" चित्र बनाया, जिसे नागरीदास की पासवान के रूप में चित्रित किया गया था। इस शैली में वल्लभ सम्प्रदाय का प्रभाव रहा और राधा-कृष्ण स्वरूप का अधिक चित्रण हुआ। सावंतसिंह (नागरीदास) कवि और शासक दोनों थे। एरिक डिक्सन ने बणी-ठणी को भारत की मोनालिसा कहा।
240. बणी-ठणी चित्र किस शैली का है?
- (A) मेवाड़
- (B) बूंदी
- (C) बीकानेर
- (D) किशनगढ़
बणी-ठणी चित्र किशनगढ़ शैली का है। इसे निहालचंद ने बनाया और यह नागरीदास (सावंतसिंह) की प्रेरणा से रचा गया। इस शैली में राधा-कृष्ण स्वरूपों का चित्रण प्रमुख रहा। सावंतसिंह को नागरीदास नाम से कवि के रूप में भी ख्याति मिली।
राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
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