राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 13
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में किशनगढ़ शैली, बीकानेर शैली, मेवाड़ शैली, जोधपुर शैली, नाथद्वारा शैली, मारवाड़ शैली, हाड़ौती शैली, ढूंढाड़ शैली, बूंदी शैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
- कुल प्रश्न: 20
- Last Updated:
✍️ Prepared & Reviewed by:
Shiksha247 Rajasthan GK
Faculty & Content Team
(Since 2021)
241. कवि एवं चित्रकार नागरीदास के रूप में कौन प्रसिद्ध था?
- (A) राजा कृष्ण देव
- (B) राजा वृन्दावनदास
- (C) राजा सांवत सिंह
- (D) राणा कुम्भा
राजा सावंतसिंह, किशनगढ़ के शासक, कवि और चित्रकला संरक्षक थे। वे नागरीदास नाम से प्रसिद्ध हुए। उनके काल (1748–64 ई.) में किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल माना जाता है। "बणी-ठणी" इसी काल का प्रसिद्ध चित्र है, जिसे भारत की मोनालिसा कहा गया।
242. किशनगढ़ शैली का स्वर्णिम युग कौन सा था?
- (A) राणा कुंभा का शासनकाल
- (B) राजा सावंतसिंह का शासनकाल
- (C) पृथ्वीराज चौहान का शासनकाल
- (D) राजा किशनसिंह का शासनकाल
किशनगढ़ शैली का स्वर्णिम युग राजा सावंतसिंह का शासनकाल (1748-64 ई.) माना जाता है। वे नागरीदास नाम से कवि भी थे और राधा-कृष्ण भक्ति के चित्रण को विशेष बढ़ावा दिया। बणी-ठणी का निर्माण इन्हीं के समय हुआ और यह चित्रकला शैली देश-विदेश में प्रसिद्ध हुई।
243. चित्रकला शैली "बणी-ठणी" संबंधित है?
- (A) मृगावती
- (B) शिव-पार्वती
- (C) नागरीदास
- (D) सतवन्त प्रसाद
बणी-ठणी चित्र किशनगढ़ शैली से संबंधित है। यह चित्र राजा सावंतसिंह (नागरीदास) की प्रेयसी (पासवान) का चित्रण था। चित्रकार मोरध्वज निहालचंद ने इसे बनाया। सावंतसिंह स्वयं कृष्ण रूप में चित्रित हुए, जबकि बणी-ठणी को राधा के स्वरूप में चित्रित किया गया। बणी-ठणी "रसिक बिहारी" नाम से कविताएँ भी लिखती थीं।
244. सीताराम, बदनसिंह और नानकराम चित्रकार चित्रकला की किस शैली से संबद्ध थे?
- (A) किशनगढ़ शैली
- (B) जोधपुर शैली
- (C) बीकानेर शैली
- (D) नाथद्वारा शैली
सीताराम, बदनसिंह और नानकराम किशनगढ़ शैली से जुड़े चित्रकार थे। इस शैली में कलाकार निहालचंद, अमरचंद, मूलराज, सूरध्वज, धन्ना, छोटू, रामनाथ और लाडलीदास भी प्रसिद्ध रहे। किशनगढ़ चित्रशैली का विकास सावंतसिंह (नागरीदास) के समय स्वर्णकाल पर पहुँचा।
245. बणी-ठणी' किस स्थान की चित्रकला शैली है?
- (A) बूंदी
- (B) किशनगढ़
- (C) कोटा
- (D) नाथद्वारा
बणी-ठणी चित्र किशनगढ़ शैली का है, जिसे भारत की मोनालिसा भी कहा जाता है। चित्रकार मोरध्वज निहालचंद ने इसे बनाया। यह चित्र सावंतसिंह (नागरीदास) की प्रेयसी का था। मूल प्रति किशनगढ़ संग्रहालय में है, जबकि अन्य प्रतियाँ अजमेर संग्रहालय और पेरिस के अल्बर्ट हॉल में सुरक्षित हैं।
246. किशनगढ़ चित्रकला शैली के संरक्षक सावंत सिंह की मृत्यु कहाँ हुई?
- (A) किशनगढ़
- (B) आगरा
- (C) जोधपुर
- (D) वृंदावन
किशनगढ़ शैली के संरक्षक सावंतसिंह (नागरीदास) वृंदावन में बस गए थे और वहीं उनकी मृत्यु हुई। वे वल्लभ सम्प्रदाय के अनुयायी थे और कविताएँ भी लिखते थे। उनकी प्रेयसी बणी-ठणी "रसिक बिहारी" नाम से कविताएँ लिखती थीं। नागरीदास की कविताओं का संग्रह "नागर समुच्चय"प्रसिद्ध है।
247. किसके दरबार में निहालचंद आधिकारिक/दरबारी चित्रकार के रूप में कार्यरत थे?
- (A) रामसिंह
- (B) जयसिंह
- (C) सावंत सिंह
- (D) महाराणा प्रताप
मोरध्वज निहालचंद किशनगढ़ के राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के दरबारी चित्रकार थे। उन्हीं के समय किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल रहा। निहालचंद ने ही बणी-ठणी का चित्र बनाया। सावंतसिंह कवि भी थे और उन्होंने लगभग 75 ग्रंथ "नागर समुच्चय" नाम से लिखे।
248. निम्नलिखित में से कौनसी राजस्थानी चित्रकला शैली चौरापंचासिका शैली से मिलती-जुलती है?
- (A) किशनगढ़ शैली
- (B) जोधपुर शैली
- (C) बीकानेर शैली
- (D) मेवाड़ शैली
मेवाड़ शैली को चौरापंचासिका शैली से मिलती-जुलती माना गया है। इस शैली के प्रारंभिक चित्र महाराणा उदयसिंह और जगतसिंह प्रथम के समय बने। विद्वान बैरेट और बेसिल ने चौरापंचासिका को मेवाड़ शैली का उद्गम माना।
249. चावण्ड चित्रकला शैली का विकास किस क्षेत्र में हुआ?
- (A) मेवाड़
- (B) हाड़ौती
- (C) मारवाड़
- (D) शेखावटी
चावण्ड शैली मेवाड़ स्कूल का भाग है। इसका प्रारंभ महाराणा प्रताप ने किया और स्वर्णकाल महाराणा अमरसिंह प्रथम का रहा। प्रमुख चित्रों में ढोला-मारू (1592 ई.) और रागमाला (1605 ई.) शामिल हैं। प्रमुख चित्रकार निसारुद्दीन थे।
250. मेवाड़ चित्र शैली का सबसे प्राचीन चित्रित ग्रंथ कौन सा है?
- (A) गीत गोविन्द
- (B) रागमाला
- (C) जयानक विजय
- (D) श्रावक पदिक्कमनासूत्त चुन्नी
मेवाड़ चित्रशैली का सबसे प्राचीन ग्रंथ "श्रावक पदिक्कमनासूत्त चुन्नी" है, जिसे आहड़ (उदयपुर) में 1260 ई. में रावल तेजसिंह के काल में चित्रित किया गया। चित्रकार कमलचंद्र थे। यह ग्रंथ वर्तमान में जैसलमेर संग्रहालय में सुरक्षित है।
251. वर्ष 1628 ई. में मेवाड़ में रागमाला चित्रांकन को किसने चित्रित किया था?
- (A) साहिबदीन
- (B) शफी मुहम्मद
- (C) श्रीरंगधर
- (D) बिशनदास
मेवाड़ चित्रशैली का स्वर्णकाल महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628–1652 ई.) का था। इस काल में प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन ने रागमाला, गीतगोविंद और रसिकप्रिया का चित्रण किया। मनोहर और साहिबदीन ने आर्ष रामायण भी चित्रित की। इस समय "चितेरो री ओवरी" यानी चित्रण कार्यशालाएँ स्थापित की गईं, जिनमें जीवा, नगा शिवा, भोपा और कृपाराम जैसे कलाकार कार्यरत थे।
252. प्रतिक्रमण चूर्णि' ग्रंथ किस चित्रशैली से संबंधित है?
- (A) मेवाड़ शैली
- (B) मारवाड़ शैली
- (C) हाड़ौती शैली
- (D) ढूंढाड़ शैली
प्रतिक्रमण चूर्णि' ग्रंथ मेवाड़ शैली से संबंधित है। इसे रावल तेजसिंह (1260 ई.) के समय चित्रकार कमलचंद्र ने ताड़पत्र पर चित्रित किया। यह मेवाड़ स्कूल का सबसे प्राचीन उपलब्ध चित्र है और राजस्थान की चित्रकला परंपरा में इसे अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
253. चित्रकला की जन्मभूमि है—
- (A) मारवाड़
- (B) आम्बेर
- (C) शेखावाटी
- (D) मेवाड़
मेवाड़ को राजस्थान चित्रकला की जन्मभूमि कहा जाता है। यहाँ की चित्रकला अजंता शैली, जैन परंपरा और गुजरात-अपभ्रंश प्रभाव से विकसित हुई। बाद में इस पर मुगल शैली का प्रभाव भी पड़ा। मेवाड़ शैली को आगे चलकर "राजपूत चित्रकला शैली" कहा गया।
254. सावर व शाहपुरा किस चित्रकला शैली की उपशैलियाँ हैं?
- (A) मारवाड़
- (B) अजमेर
- (C) मेवाड़
- (D) हाड़ौती
सावर और शाहपुरा मेवाड़ शैली की उपशैलियाँ हैं। मेवाड़ स्कूल में उदयपुर, नाथद्वारा, देवगढ़ और चावंड भी उपशैलियाँ शामिल हैं। वहीं मारवाड़ स्कूल में जोधपुर, बीकानेर, किशनगढ़, जैसलमेर और नागौर की शैलियाँ आती हैं। ढूंढाड़ स्कूल में जयपुर, आमेर, अलवर और उणियारा तथा हाड़ौती स्कूल में बूंदी, कोटा और झालावाड़ की शैलियाँ सम्मिलित हैं।
255. गीत गोविंदसार का संबंध निम्न में से किस चित्रशैली से है?
- (A) मारवाड़
- (B) किशनगढ़
- (C) मेवाड़
- (D) ढूंढाड़
गीत गोविंदसार का संबंध मेवाड़ चित्रशैली से है। इसे प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन ने महाराणा जगतसिंह प्रथम के काल में चित्रित किया। साहिबदीन ने रागमाला, गीत गोविंद, रसिकप्रिया और शूकर क्षेत्र माहात्म्य जैसे ग्रंथ भी चित्रित किए।
256. श्रावक प्रतिक्रमण चूर्णि नामक चित्रित ग्रंथ राजस्थान की किस शैली में है?
- (A) मारवाड़
- (B) मेवाड़
- (C) कोटा
- (D) ढूंढाड़
श्रावक प्रतिक्रमण चूर्णि ग्रंथ मेवाड़ चित्रशैली का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। इसे रावल तेजसिंह (1260 ई.) के शासनकाल में चित्रकार कमलचंद्र द्वारा ताड़पत्र पर चित्रित किया गया। यह ग्रंथ आज भी राजस्थान की प्राचीन कला परंपरा का अमूल्य प्रमाण है।
257. मालतीमाधव' के चित्र किस शैली से संबंधित हैं?
- (A) मेवाड़ शैली
- (B) बूंदी शैली
- (C) किशनगढ़ शैली
- (D) बीकानेर शैली
मालतीमाधव' भवभूति की रचना है और इसके चित्रण मेवाड़ शैली में हुए। उदयपुर उपशैली के अंतर्गत सूरसागर, रसिकप्रिया, नल-दमयंती, कादंबरी और भागवत पुराण जैसे ग्रंथों का भी सुंदर चित्रण किया गया।
258. रागमाला का चित्रकार कौन था?
- (A) निसारदीन
- (B) हिसामुद्दीन
- (C) बाहीरूद्दीन
- (D) जलालुद्दीन
रागमाला का चित्रण निसारदीन द्वारा किया गया था। यह मेवाड़ स्कूल की उदयपुर शैली से संबंधित है। महाराणा जगतसिंह प्रथम के काल (1628–1652 ई.) में निसारदीन और साहिबदीन जैसे कलाकारों ने कई धार्मिक एवं सांस्कृतिक ग्रंथों का चित्रण किया।
259. सावग-पडिकमण सुत्त चुन्नी (श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि) ग्रंथ किसके राजकाल के समय चित्रित हुआ?
- (A) मोकल
- (B) तेजसिंह
- (C) कुम्भा
- (D) जयदेव सिंह
सावग-पडिकमण सुत्त चुन्नी (श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि) मेवाड़ स्कूल का सबसे प्राचीन चित्रित ग्रंथ है। यह 1260 ई. में रावल तेजसिंहके काल में चित्रकार कमलचंद्र द्वारा ताड़पत्र पर चित्रित किया गया था।
260. निम्नलिखित में से कौन-सा चित्रकार चित्रकला की मेवाड़ शैली से सम्बद्ध था?
- (A) रूकनुद्दीन
- (B) कासिम
- (C) साहिबदीन
- (D) शाह मुहम्मद
मेवाड़ शैली के प्रमुख चित्रकारों में साहिबदीन, हीरानंद, मनोहर, जगन्नाथ, कमलचंद्र, धनसार, कृपाराम, जीवा और अमरा शामिल हैं। साहिबदीन ने रागमाला, गीतगोविंद और रसिकप्रिया जैसे ग्रंथों का चित्रण किया। जबकि रूकनुद्दीन, कासिम और शाह मुहम्मद बीकानेर शैली से संबंधित चित्रकार थे।
राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10 | Part 11 | Part 12 | Part 13 | Part 14 | Part 15
Agar aapko kisi MCQ me doubt, correction ya suggestion lagta hai, to please is post ke comment section ki jagah humare YouTube channel par dedicated discussion video ke comment box me post link ke sath comment karein.
📝 Comment karne ka format:
• MCQ Post ka link
• Question number
• Short doubt / correction
✔ Link Copied
👉 Official Discussion Video:
Shiksha247 YouTube Channel