राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ Questions with Answers

राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 14

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में अलवर शैली, कोटा शैली, किशनगढ़ शैली, नाथद्वारा शैली, बूंदी शैली, शेखावाटी शैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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261. निम्नलिखित में से कौन सा (शासक–चित्रकला शैली) सही सुमेलित नहीं है?

  • (A) अनूपसिंह – बीकानेर
  • (B) राजसिंह प्रथम – नाथद्वारा
  • (C) सावंत सिंह – किशनगढ़
  • (D) विजयसिंह – देवगढ़

देवगढ़ शैली मेवाड़ स्कूल की उपशैली है, जो वर्तमान में राजसमंद जिले में स्थित है। इसे महाराणा जयसिंह के काल में द्वारकादास चूण्डावत ने प्रारंभ किया। उन्होंने देवगढ़ ठिकाने की स्थापना की और मोती महल पर भित्तिचित्र बनवाए। इस शैली को प्रकाश में लाने का श्रेय डॉ. श्रीधर अंधारे को जाता है।

262. पिछवाई चित्रांकन' किस चित्रकला शैली से संबंधित है?

  • (A) किशनगढ़ शैली
  • (B) नाथद्वारा शैली
  • (C) अलवर शैली
  • (D) कोटा शैली

पिछवाई चित्रांकन का प्रमुख केंद्र नाथद्वारा (राजसमंद) है। यहाँ श्रीनाथजी मंदिर की दीवारों और पर्दों पर भगवान कृष्ण की लीलाओं का चित्रण होता है। इसके अन्य केंद्र कांकरोली, कोटा और अलवर भी रहे हैं। प्रसिद्ध कलाकारों में लच्छीराम, घनश्याम, कैलाश शर्मा और नरोत्तम शर्माशामिल हैं।

263. निम्नलिखित में से कौन सी मारवाड़ शैली की उपशैली नहीं है?

  • (A) किशनगढ़
  • (B) बीकानेर
  • (C) देवगढ़
  • (D) नागौर

मारवाड़ स्कूल की उपशैलियाँ हैं – जोधपुर, बीकानेर, किशनगढ़, जैसलमेर, नागौर, अजमेर, सिरोही, घाणेराव, रियां, भिनाय और जूनियां। जबकि देवगढ़ शैली मेवाड़ स्कूल की उपशैली है।

264. कमला और इलाइची किस चित्रकला शैली की अग्रगण्य महिला चित्रकार हैं?

  • (A) बूंदी
  • (B) नाथद्वारा
  • (C) किशनगढ़
  • (D) जोधपुर

नाथद्वारा शैली, जो 1671-72 ई. में श्रीनाथजी मंदिर की स्थापना के साथ आरंभ हुई, में कमला और इलाइची अग्रणी महिला चित्रकार थीं। इस शैली का स्वर्णकाल महाराणा राजसिंह का काल माना जाता है। इसमें नाथद्वारा और ब्रज शैली का मिश्रण देखने को मिलता है।

265. “पिछवाई पेन्टिंग" का सम्बन्ध निम्न में से किससे है?

  • (A) मेड़ता
  • (B) वृन्दावन
  • (C) पुष्कर
  • (D) नाथद्वारा

पिछवाई पेंटिंग नाथद्वारा (राजसमंद) से संबंधित है। इसका उद्गम लगभग 1700 ई. में हुआ। वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों में भगवान कृष्ण के जीवन चरित्र से जुड़ी घटनाओं का चित्रण मूर्ति के पीछे की दीवार या पर्दे पर किया जाता है।

266. पिछवाई चित्रशैली का मुख्य विषय है?

  • (A) युद्ध
  • (B) राजदरबार
  • (C) श्रीकृष्ण लीला
  • (D) प्रणय प्रसंग

पिछवाई चित्रकला का मुख्य विषय श्रीकृष्ण की लीलाएँ हैं। मंदिरों में मूर्ति के पीछे लगाए गए कपड़ों पर भगवान कृष्ण के जीवन प्रसंगों का चित्रण किया जाता था। इस कला का विकास 1700 ई. के आसपास हुआ और इसके प्रमुख कलाकारों में लच्छीराम, घनश्याम, कैलाश शर्मा और विट्ठलदास शर्मा शामिल हैं।

267. नाथद्वारा चित्रकला शैली' में चित्रण मिलता है—

  • (A) शिव के स्वरूप श्रीनाथजी का चित्रण
  • (B) कृष्ण के स्वरूप श्रीनाथजी का चित्रण
  • (C) विष्णु के स्वरूप श्रीनाथजी का चित्रण
  • (D) गणेश के स्वरूप श्रीनाथजी का चित्रण

नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की उपशैली है। इसका उद्गम महाराणा राजसिंह (1672 ई.) के समय श्रीनाथजी की स्थापना से हुआ। इसमें विशेष रूप से कृष्ण के स्वरूप श्रीनाथजी का चित्रण मिलता है। नाथद्वारा चित्रों में पिछवाई का विशेष महत्व है।

268. नाथद्वारा शैली के पेंटिंग्स को सामान्यतः क्या कहा जाता है?

  • (A) पिछवाई
  • (B) लहरिया
  • (C) बणी-ठनी
  • (D) रस-माला

नाथद्वारा शैली के पेंटिंग्स को सामान्यतः पिछवाई कहा जाता है। यह बड़े कपड़ों पर भगवान कृष्ण की लीलाओं को दर्शाते हैं। इन्हें प्रायः वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों में श्रीनाथजी की मूर्ति के पीछे लगाया जाता है।

269. अलवर चित्रशैली के वे कौन से कलाकार थे जिन्होंने महाराज मंगलसिंह के समय हाथीदाँत के फलकों पर सूक्ष्म चित्र बनाए?

  • (A) रामगोपाल और जगमोहन
  • (B) मूलचंद और उदयराम
  • (C) जमनादास और सालिगराम
  • (D) नन्दराम और शिवदान सिंह

अलवर शैली ढूंढाड़ स्कूल का हिस्सा है। इसका प्रारंभ राव राजा प्रतापसिंह (1775 ई.) के समय हुआ। महाराज मंगलसिंह के काल में मूलचंद और उदयराम ने हाथीदाँत के फलकों पर सूक्ष्म चित्रांकन कर इस शैली को समृद्ध किया।

270. शेखावाटी में, 1850 ई. का चित्र जिसमें कृष्ण की 8 गोपियों का एक हाथी के रूप में सुंदर भित्ति चित्र चित्रित मिलता है—

  • (A) गोयनका की हवेली (फतेहपुर)
  • (B) पौद्दार की हवेली (नवलगढ़)
  • (C) केडिया हवेली (लक्ष्मणगढ़)
  • (D) केजरीवाल हवेली (अलसीसर)

शेखावाटी की गोयनका हवेली, फतेहपुर में 1850 ई. का एक अद्भुत भित्तिचित्र मिलता है। इसमें कृष्ण की 8 गोपियों को मिलाकर एक हाथी का रूप चित्रित किया गया है। शेखावाटी की हवेली चित्रकला अपनी विशाल भित्तिचित्रों और अनोखे विषयों के कारण प्रसिद्ध है।

271. निम्नलिखित में से किस चित्रशैली में 'फरूखफाल का चित्र' मिलता है?

  • (A) जयपुर
  • (B) अलवर
  • (C) जैसलमेर
  • (D) उदयपुर

फरूखफाल का चित्र' उदयपुर (मेवाड़ शैली) में मिलता है। मेवाड़ शैली अपनी मौलिकता, धार्मिक चित्रण और सूक्ष्म रेखांकन के लिए जानी जाती है। इस शैली में कई ऐतिहासिक और धार्मिक प्रसंगों का चित्रांकन किया गया है।

272. किसके कथनानुसार "राजस्थानी चित्रशैली स्त्रियों की सुंदरता की खान है, भारतीय नारी के आदर्श सौंदर्य की उसमें पूरी छटा है"?

  • (A) डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल
  • (B) आनन्द कुमार स्वामी
  • (C) हरमन गोइत्ज
  • (D) देव किशन स्वामी

डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल ने कहा कि राजस्थानी चित्रशैली भारतीय नारी के आदर्श सौंदर्य की खान है। इसमें नारी के रूप, भाव, अलंकरण और साज-सज्जा का अत्यंत सुंदर और आदर्श चित्रण मिलता है।

273. जर्मनी मूल के प्रसिद्ध चित्रकार जिन्हें महाराजा गंगासिंह ने 1932 ई. में राजकीय चित्रकार नियुक्त किया था—

  • (A) हामिद रूकनुद्दीन
  • (B) ए.एच. मूलर
  • (C) हरमन गोइत्ज
  • (D) नूर मोहम्मद

ए.एच. मूलर (पूरा नाम – आर्चिबाल्ड हरमन मूलर) जर्मनी मूल के प्रसिद्ध चित्रकार थे। 1932 ई. में महाराजा गंगासिंह ने उन्हें बीकानेर का राजकीय चित्रकार नियुक्त किया। इनके बनाए चित्र आज भी बीकानेर संग्रहालय और मेहरानगढ़ संग्रहालय में सुरक्षित हैं।

274. निम्न में से किस शैली में ईरानी, मुगल और जयपुर शैली का आश्चर्यजनक संतुलित समन्वय पाया जाता है?

  • (A) बूंदी शैली
  • (B) शेखावाटी शैली
  • (C) अलवर शैली
  • (D) कोटा शैली

अलवर शैली में ईरानी, मुगल और जयपुर शैली का अद्भुत मिश्रण दिखाई देता है। इस शैली पर अंग्रेज़ी प्रभाव भी पड़ा। अलवर शैली ढूंढाड़ स्कूल का भाग मानी जाती है और यहाँ सूक्ष्म व आकर्षक चित्रकला देखने को मिलती है।

275. दुगारी चित्रशैली' का सम्बन्ध है—

  • (A) बीकानेर
  • (B) नाथद्वारा
  • (C) जोधपुर
  • (D) बूंदी

दुगारी चित्रशैली बूंदी स्कूल ऑफ आर्ट से संबंधित है। यह हाड़ौती स्कूल का हिस्सा है। दुगारी में "राम मंदिर चित्रशाला" प्रसिद्ध है। यह स्थान लोकदेवता तेजाजी की कर्मस्थली भी माना जाता है।

276. निम्नलिखित में से किस शैली में मध्यकालीन साहित्यिक रचना 'रसराज' को चित्रण के विषय के रूप में प्रयुक्त किया गया है?

  • (A) मेवाड़
  • (B) मारवाड़
  • (C) ढूंढाड़
  • (D) बूंदी

बूंदी शैली में मध्यकालीन साहित्यिक रचना 'रसराज' का चित्रण मिलता है। मतिराम प्रथम ने 'रसराज, ललित ललाम, फूलमंजरी और सतसई' की रचनाएँ कीं। बूंदी शैली में साहित्य और चित्रकला का सुंदर संगम देखने को मिलता है।

277. मारवाड़ शैली में निर्मित "रागमाला चित्रावली" 1623 ई. का चित्रांकन किसने किया?

  • (A) पुण्डरीक
  • (B) मीर वक्श
  • (C) वीर जी
  • (D) साहिब राम

1623 ई. में वीर जी भाटी ने "रागमाला चित्रावली" का चित्रण किया। यह चित्र महाराजा गजसिंह (1619–1638) के समय पाली के विट्ठलदास चाँपावत के लिए बनाए गए थे। यह चित्र शुद्ध राजस्थानी शैली में एकहरी वसली पर बने थे।

278. गोपाल, उदय, हुकमा, जीवन चित्रकला की किस शैली में संबंधित थे?

  • (A) जोधपुर शैली
  • (B) मेवाड़ शैली
  • (C) बीकानेर शैली
  • (D) आमेर जयपुर शैली

ये सभी कलाकार आमेर–जयपुर शैली से संबंधित थे। इस शैली का स्वर्णकाल सवाई प्रतापसिंह का काल माना जाता है। इसमें मुगल और राजस्थानी प्रभाव दोनों का मिश्रण मिलता है। प्रसिद्ध कलाकारों में साहिबराम, लालचंद, गोपाल, उदय, हुक्मा और जीवन शामिल थे।

279. मौजमाबाद निम्नलिखित में से किस चित्रकला शैली का केन्द्र था?

  • (A) अलवर
  • (B) आमेर
  • (C) किशनगढ़
  • (D) देवगढ़

मौजमाबाद (जयपुर) ढूंढाड़ स्कूल का भाग था। जनवरी 1708 ई. में बादशाह बहादुरशाह (मुअज्जम) ने आमेर का नाम बदलकर मोमिनाबादरखा। यहाँ मानसिंह कालीन चित्रों में आदिपुराण और यशोधरा चरित्र विशेष प्रसिद्ध हैं।

280. जमनादास, छोटेलाल, बक्साराम व नन्दराम चित्रकला की किस शैली से सम्बद्ध है?

  • (A) अलवर शैली
  • (B) किशनगढ़ शैली
  • (C) बीकानेर शैली
  • (D) नाथद्वारा शैली

जमनादास, छोटेलाल, बक्साराम और नन्दराम अलवर शैली से संबंधित प्रमुख चित्रकार थे। अलवर शैली ढूंढाड़ स्कूल का भाग है। इस शैली की विशेषता यह रही कि इसमें मुगल, ईरानी और जयपुर शैली का मिश्रण देखने को मिलता है। अलवर के महाराजा विनयसिंह और मंगलसिंह के काल में यह शैली अपने उत्कर्ष पर पहुँची।

राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10 | Part 11 | Part 12 | Part 13 | Part 14 | Part 15

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