राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 15
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में किशनगढ़ शैली, बीकानेर शैली, अलवर शैली, नाथद्वारा शैली, मेवाड़ शैली, बूंदी शैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
- कुल प्रश्न: 15
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(Since 2021)
281. पिछवाई चित्रकला शैली कहाँ से संबंधित है?
- (A) नाथद्वारा
- (B) किशनगढ़
- (C) केलादेवी
- (D) प्रतापगढ़
पिछवाई कला का प्रमुख केन्द्र नाथद्वारा है। इसमें श्रीनाथजी के स्वरूप के पीछे सजावट हेतु बड़े आकार के कपड़े के पर्दे पर चित्र बनाए जाते हैं। इन्हें ही पिछवाई कहा जाता है। इनमें भगवान कृष्ण की लीलाओं का सुंदर चित्रण मिलता है। यह कला विशेषकर वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरोंमें विकसित हुई।
282. चित्रांकन की उणियारा शैली को किस चित्रशैली की उपशैली के रूप में माना जाता है?
- (A) किशनगढ़
- (B) ढूंढाड़
- (C) मारवाड़
- (D) मेवाड़
उणियारा शैली को ढूंढाड़ स्कूल की उपशैली माना जाता है। उणियारा जयपुर राज्य का ठिकाना था (वर्तमान टोंक)। यहाँ राव राजा सरदारसिंह के समय धीमा, मीरबख्श, काशी, रामलखन और भीम जैसे कलाकारों ने चित्रकारी की। जयपुर और बूंदी शैली का संयुक्त प्रभाव इसमें स्पष्ट दिखाई देता है।
283. निम्नलिखित में से कौनसी चित्रकला शैली से संबंधित नहीं थी?
- (A) शेखावटी
- (B) हाड़ौती
- (C) कांगड़ा
- (D) मारवाड़
कांगड़ा शैली राजस्थान की चित्रकला का हिस्सा नहीं है। राजस्थान की चित्रकला को 4 स्कूलों में बाँटा गया है –
284. राजस्थानी चित्र शैली विशुद्ध रुप से भारतीय है ऐसा किसने कहा है?
- (A) लारेन्स विल्लियम
- (B) पेट्रिक लारेन्स
- (C) साड्रिक खां
- (D) मनोहर स्वामी
आनन्द कुमारस्वामी (मनोहर स्वामी) ने 1916 ई. में अपनी पुस्तक "राजपूत पेंटिंग्स" में कहा कि राजस्थानी चित्रशैली विशुद्ध रूप से भारतीय है। इसे उन्होंने हिन्दू शैली कहा। अन्य विद्वानों में एन.सी. मेहता, रायकृष्ण दास, डब्ल्यू.एच. ब्राउन और ओ.सी. गांगुली ने भी इसे राजपूत या हिन्दू चित्रकला की संज्ञा दी।
285. किस चित्र शैली में मतिराम रचित, 19वीं शताब्दी की हिन्दी साहित्यिक रचना 'रसराज' का चित्रण हेतु विषय के रूप में प्रयोग किया गया है?
- (A) बूंदी
- (B) अलवर
- (C) मारवाड़
- (D) मेवाड़
19वीं शताब्दी में मतिराम की रचना 'रसराज' का चित्रण मारवाड़ स्कूल की उपशैली में किया गया। इसका चित्रण जोधपुर के महामंदिर (नाथ उपशैली) में मिलता है। राव राजा भावसिंह (1658–1681 ई.) के आश्रय में मतिराम के 'रसराज' और 'ललित ललाम' का प्रयोग चित्रण में हुआ। यह राजस्थान की साहित्य और कला के संयुक्त विकास का उदाहरण है।
286. अमरचंद द्वारा चित्रित 'चाँदनी रात की संगोष्ठी' किस चित्रकला शैली का चित्र है?
- (A) अलवर शैली
- (B) किशनगढ़ शैली
- (C) बीकानेर शैली
- (D) नाथद्वारा शैली
प्रसिद्ध चित्रकार अमरचंद किशनगढ़ शैली से संबंधित थे। इनकी कृति “चाँदनी रात की संगोष्ठी” इस शैली की विशेषता को दर्शाती है। किशनगढ़ शैली में सांवतसिंह (नागरीदास) और निहालचंद का भी विशेष योगदान रहा।
287. चावण्ड शैली की चित्रकला किसके शासन काल में प्रारम्भ हुई?
- (A) महाराणा प्रताप
- (B) अमरसिंह प्रथम
- (C) उदयसिंह
- (D) जगतसिंह प्रथम
चावण्ड शैली मेवाड़ स्कूल का भाग है, जिसका आरंभ महाराणा प्रताप के शासनकाल में हुआ। इसके स्वर्णकाल में अमरसिंह प्रथम के समय रागमाला और ढोला-मारु जैसे ग्रंथ चित्रित किए गए।
288. रामलाल, अली रजा एवं हसन जैसे विख्यात चित्रकारों का त्रिगुट किस चित्रशैली से संबंधित है?
- (A) मेवाड़ शैली
- (B) किशनगढ़ शैली
- (C) बूंदी शैली
- (D) बीकानेर शैली
रामलाल, अली रजा और हसन बीकानेर चित्रशैली से संबंधित प्रसिद्ध चित्रकार थे। बीकानेर शैली पर उस्ता और मथेरण परिवार का गहरा प्रभाव रहा और इसका स्वर्णकाल महाराजा अनूपसिंह (1669–1698 ई.) का माना जाता है।
289. राजस्थान की चित्रकला शैली व प्रमुख वृक्ष का कौनसा युग्म असुमेलित है?
- (A) कोटा व बूंदी शैली – खजूर वृक्ष
- (B) जयपुर शैली – पीपल व वट वृक्ष
- (C) जोधपुर व बीकानेर शैली – केला
- (D) मेवाड़ शैली – कदम्ब वृक्ष
जोधपुर और बीकानेर शैलियों में आम वृक्ष का अधिक चित्रण मिलता है, जबकि केले का चित्रण प्रायः नाथद्वारा और किशनगढ़ शैली में मिलता है।
290. राजस्थान की चित्रकला शैलियों व उनमें नायिकाओं के नेत्रों के चित्रण का निम्न में से असुमेलित युग्म है?
- (A) मेवाड़ शैली – मछली के समान नेत्र
- (B) नाथद्वारा शैली – तिरछे व चकोर के समान नेत्र
- (C) जोधपुर शैली – आम के पत्ते के समान नेत्र
- (D) बीकानेर शैली – मृग के समान नेत्र
जोधपुर शैली में नायिकाओं के नेत्र बादाम के समान चित्रित किए जाते हैं। आम के पत्ते जैसे नेत्र किशनगढ़ शैली में देखने को मिलते हैं।
291. शेखावाटी शैली के बारे में निम्न में से असत्य कथन है?
- (A) यहाँ के चित्रों में लोक जीवन की झांकी देखने को मिलती है।
- (B) शेखावाटी क्षेत्र 'ओपन एयर आर्ट गैलरी' कहलाता है।
- (C) यहाँ के चित्रों में लाल व पीले रंगों की प्रधानता मिलती है।
- (D) यहाँ के भित्ति चित्रों में तिथि व चित्रकारों के नाम मिलते हैं।
शेखावाटी चित्रों में लाल और पीले की अपेक्षा कत्थई, नीले और गुलाबी रंगों की प्रधानता अधिक मिलती है। यही कारण है कि विकल्प C असत्य है।
292. राजस्थान में सर्वाधिक प्राचीन उपलब्ध चित्रित ग्रन्थ किस संग्रहालय में उपलब्ध हैं?
- (A) अजमेर संग्रहालय
- (B) जैसलमेर संग्रहालय
- (C) पोथीखाना, जयपुर
- (D) अलवर संग्रहालय
राजस्थान के सर्वाधिक प्राचीन चित्रित ग्रंथ जैसलमेर संग्रहालय में संरक्षित हैं। इनमें जैन धर्म से संबंधित ताड़पत्रों पर लिखे गए ग्रंथ विशेष महत्व रखते हैं।
293. राजस्थान में चित्रकला के विकास हेतु कार्यरत संस्थाओं में कौनसा युग्म सुमेलित नहीं है?
- (A) आज – उदयपुर
- (B) माटीमानस कला दीर्घा – जयपुर
- (C) पैग – जयपुर
- (D) तुलिका कलाकार परिषद् – जयपुर
तुलिका कलाकार परिषद् संस्थान उदयपुर में स्थित है, न कि जयपुर में। अन्य तीन विकल्प अपने स्थानों के साथ सही सुमेलित हैं।
294. निम्न में से असुमेलित युग्म है-
- (A) ईरानी, मुगल व जयपुर शैली का समन्वय – अलवर शैली
- (B) मारवाड़ व मुगल शैली से प्रभावित – जैसलमेर शैली
- (C) कांगड़ा शैली व ब्रज साहित्य से प्रभावित – किशनगढ़ शैली
- (D) मेवाड़ शैली व मुगल शैली से प्रभावित – बूंदी शैली
जैसलमेर शैली अपेक्षाकृत सबसे स्वतंत्र रही है और उस पर मुगल या जोधपुर शैली का प्रभाव नहीं पड़ा। यह शैली स्थानीय परंपरा पर आधारित रही।
295. चित्रकला की किस शैली को प्रकाश में लाने का श्रेय डॉ. फैयाज अली को है?
- (A) अलवर शैली
- (B) किशनगढ़ शैली
- (C) बीकानेर शैली
- (D) नाथद्वारा शैली
किशनगढ़ शैली को प्रसिद्ध करने और ऐतिहासिक महत्व दिलाने का श्रेय एरिक डिक्सन और डॉ. फैयाज अली को जाता है। उन्होंने बणी-ठणी चित्र को "भारतीय मोनालिसा" कहकर प्रसिद्ध किया।
राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
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