राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ Questions with Answers

राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 2

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में किशनगढ़ शैली, मेवाड़ शैली, जैसलमेर शैली, नागौर शैली, देवगढ़ शैली, मारवाड़ी शैली, मूमल, ढोला मारू, रागमाला, बणी ठणी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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21. किशनगढ़ चित्रशैली के कलाकार निहालचंद द्वारा बनाया गया विख्यात चित्र का नाम है?

  • (A) चांदनी रात की संगोष्ठी
  • (B) सांझी लीला
  • (C) रागमाला
  • (D) बणी ठणी

निहालचंद किशनगढ़ चित्रशैली के महान कलाकार थे और उनका सबसे प्रसिद्ध चित्र "बणी ठणी" है। इसे "राजस्थान की मोनालिसा" कहा जाता है। इसमें स्त्री सौंदर्य का अद्भुत और आदर्शीकृत चित्रण किया गया है। बणी ठणी के चित्र में लंबी आँखें, नुकीली नाक और आकर्षक मुखाकृति दिखाई देती है। यह चित्र राजस्थान ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत की कला धरोहर का प्रतीक बन गया है।

22. राजस्थानी चित्रकला का प्राचीनतम केन्द्र माना जाता है-

  • (A) जयपुर
  • (B) मारवाड़
  • (C) नाथद्वारा
  • (D) मेवाड़

मेवाड़ चित्रशैली को राजस्थानी चित्रकला का प्राचीनतम केन्द्र माना जाता है। इसका आरंभ 13वीं शताब्दी में हुआ और यह धार्मिक चित्रण के लिए प्रसिद्ध रही। इसमें भागवत पुराण, गीत-गोविन्द और अन्य धार्मिक ग्रंथों के चित्र बनाए गए। मेवाड़ शैली की विशेषता गहरे रंग, धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति और सरल रेखांकन है। इससे ही राजस्थान की अन्य शैलियों का विकास हुआ।

23. जयपुर राज्य के उस कारखाने का नाम क्या था, जहाँ कलाकार चित्र और लघु चित्र बनाते थे?

  • (A) दरीखाना
  • (B) सूरतखाना
  • (C) चित्रशाला
  • (D) मालखाना

जयपुर राज्य में कलाकारों द्वारा चित्र और लघु चित्र बनाए जाने वाला प्रमुख स्थान "सूरतखाना" कहलाता था। यहाँ दरबारी जीवन, शाही समारोह और राजपरिवार से संबंधित चित्र बनते थे। सूरतखाना में अनेक प्रसिद्ध चित्रकार कार्यरत थे, जिन्होंने जयपुर शैली को विशिष्ट पहचान दी। यह स्थान जयपुर कला धरोहर का एक अहम हिस्सा माना जाता है।

24. 1973 में भारत सरकार द्वारा राजस्थानी चित्रशैली के किस चित्र पर स्मरणीय डाक टिकट जारी किया गया?

  • (A) मूमल
  • (B) ढोला मारू
  • (C) रागमाला
  • (D) बणी ठणी

भारत सरकार ने 5 मई 1973 को 'बणी ठणी' चित्र पर 20 पैसे का स्मारक डाक टिकट जारी किया। यह चित्र किशनगढ़ शैली का है, जिसे कलाकार निहालचंद ने बनाया था। बणी ठणी को उसकी सौंदर्यपूर्ण आकृति और भावपूर्ण चेहरे के कारण 'राजस्थान की मोनालिसा' भी कहा जाता है। डाक टिकट पर स्थान मिलने से इस चित्र ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति प्राप्त की।

25. चित्रकला शैली और प्रमुख चित्रकारों का कौनसा युग्म असुमेलित है?

  • (A) बूंदी शैली – रामलाल, सुरजन सिंह
  • (B) मेवाड़ शैली – चंपालाल, हीरालाल
  • (C) किशनगढ़ शैली – अमरचंद, निहालचंद
  • (D) मारवाड़ शैली – देवदास भाटी, शिवदास भाटी

चंपालाल और हीरालाल नाथद्वारा शैली के चित्रकार थे, न कि मेवाड़ शैली के। इसलिए यह युग्म असुमेलित है। मेवाड़ शैली में साहिबदीन, नसीरूद्दीन और मनोहर जैसे महान चित्रकारों ने महत्वपूर्ण कार्य किया। मेवाड़ शैली की विशेषता धार्मिक विषयों का चित्रण था, जबकि नाथद्वारा शैली मुख्यतः श्रीनाथजी की मूर्ति और भक्ति पर आधारित रही।

26. कौनसी शैली मारवाड़ स्कूल की उपशैली नहीं है?

  • (A) किशनगढ़ शैली
  • (B) जैसलमेर शैली
  • (C) नागौर शैली
  • (D) देवगढ़ शैली

देवगढ़ शैली, मेवाड़ स्कूल की उपशैली है, न कि मारवाड़ स्कूल की। मारवाड़ स्कूल की उपशैलियों में किशनगढ़, जैसलमेर और नागौर शैलियाँ आती हैं। देवगढ़ शैली मुख्यतः मेवाड़ से जुड़ी है, जहाँ धार्मिक और पौराणिक विषयों का चित्रण किया गया। इसलिए इसे मारवाड़ की उपशैली में शामिल नहीं किया जा सकता।

27. 1605 ई. में मेवाड़ के महाराणा अमर सिंह प्रथम के समय रागमाला का चित्रकार कौन था?

  • (A) बैजनाथ
  • (B) नारायण दास
  • (C) नूर मोहम्मद
  • (D) निसारदीन

महाराणा अमर सिंह प्रथम (1605 ई.) के शासनकाल में रागमाला चित्रित किया गया, जिसके चित्रकार निसारदीन थे। मेवाड़ शैली का यह महत्वपूर्ण उदाहरण संगीत और रागों के भावपूर्ण चित्रण को दर्शाता है। इसमें नृत्य, गायन और भावात्मक अभिव्यक्तियों का जीवंत चित्रण देखने को मिलता है। यह चित्र राजस्थान की कला धरोहर में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

28. कौनसा महल मारवाड़ चित्रशैली एवं जनजीवन के चित्रों की अभिव्यक्ति व युद्ध दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है?

  • (A) मोती महल, जोधपुर
  • (B) तहलटी महल, जोधपुर
  • (C) तख्त विलास, जोधपुर
  • (D) चोखेलाव महल, जोधपुर

चोखेलाव महल, जोधपुर मारवाड़ चित्रशैली के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ जनजीवन के दृश्य, दरबारी गतिविधियाँ और युद्ध के दृश्य चित्रित किए गए। मारवाड़ शैली अपनी कठोर रेखाओं और जीवंत रंगों के लिए जानी जाती है। चोखेलाव महल में चित्रकला का यह रूप स्पष्ट दिखाई देता है, जो इतिहास और संस्कृति का जीवंत दर्पण है।

29. ........... पर चित्रित पिछवाई नाथद्वारा चित्रकला शैली का सजीव उदाहरण है।

  • (A) चमड़े
  • (B) लकड़ी
  • (C) कागज
  • (D) कपड़े

नाथद्वारा शैली की पिछवाई प्रायः कपड़े पर चित्रित की जाती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य श्रीनाथजी की आराधना और धार्मिक अनुष्ठानों को सजाना होता था। पिछवाई चित्रों में भगवान कृष्ण की लीलाओं, त्यौहारों और ऋतु-विशेष की झलक मिलती है। कपड़े पर बनाई गई ये पिछवाई चित्रकला नाथद्वारा की विशिष्ट धार्मिक और कलात्मक धरोहर है।

30. महाराजा रायसिंह के समय चित्रित 'भागवत पुराण' चित्र किस चित्रकला शैली का है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) किशनगढ़ शैली
  • (C) जयपुर शैली
  • (D) बीकानेरी शैली

बीकानेर नरेश महाराजा रायसिंह के काल में 'भागवत पुराण' का चित्रण हुआ। यह बीकानेरी चित्रशैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। बीकानेर शैली पर मुगल प्रभाव अधिक रहा और यहाँ के चित्रों में बारीक रेखाओं और सूक्ष्म रंगों का उपयोग किया गया। 'भागवत पुराण' के चित्र धार्मिक और पौराणिक महत्व के कारण विशेष माने जाते हैं।

31. मेवाड़ शैली की चित्रकला का स्वर्णयुग निम्न में से कौन सा है?

  • (A) महाराणा जगतसिंह प्रथम के शासनकाल में
  • (B) महाराणा राजसिंह के शासनकाल में
  • (C) महाराणा जयसिंह के शासनकाल में
  • (D) अमरसिंह द्वितीय के शासनकाल में

महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628–1652 ई.) के शासनकाल को मेवाड़ शैली का स्वर्णयुग कहा जाता है। इस काल में साहिबदीन और मनोहर जैसे महान चित्रकार सक्रिय रहे। उन्होंने भागवत पुराण, गीत-गोविन्द और रामायण जैसे ग्रंथों का सुंदर चित्रण किया। इस समय के चित्रों में रंगों की गहराई और धार्मिक भावनाओं का अद्भुत मेल दिखाई देता है।

32. किस चित्रकला शैली में पुरुषों के चेहरों पर चोट व चेचक के दाग प्रदर्शित है?

  • (A) जयपुर
  • (B) मारवाड़
  • (C) नाथद्वारा
  • (D) मेवाड़

जयपुर शैली की एक विशेषता यह है कि इसमें चित्रकारों ने मानव चेहरों को वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया। चेहरों पर चोट, चेचक और अन्य प्राकृतिक दाग भी दिखाए गए। इससे यह शैली यथार्थवादी बन गई। जयपुर शैली में दरबारी जीवन, राजदरबार और शाही व्यक्तियों के आदमकद चित्र विशेष रूप से अंकित हुए।

33. राजस्थान में भित्ति चित्रों को चिरकाल तक जीवित रखने के लिए आलेखन पद्धति है, जिसे कहते है?

  • (A) बेवाण
  • (B) पाना
  • (C) वार्तिक
  • (D) आरायश

राजस्थान में भित्ति चित्रों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए आरायश पद्धति अपनाई जाती थी। इसे आरायश आलागीला या मोराकसी भी कहा जाता है। शेखावाटी क्षेत्र में इसे "पणा" नाम से भी जाना जाता था। इस तकनीक में विशेष पलस्तर और रंगों का प्रयोग किया जाता था, जिससे चित्र वर्षों तक चमकदार और टिकाऊ बने रहते थे।

34. सवाई रामसिंह द्वारा जयपुर में 'राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स' की स्थापना का वर्ष था-

  • (A) 1864 ई. में
  • (B) 1880 ई. में
  • (C) 1857 ई. में
  • (D) 1889 ई. में

सवाई रामसिंह द्वितीय ने 1857 ई. में जयपुर में 'महाराजा स्कूल ऑफ आर्ट्स' की स्थापना की। बाद में इसे 'राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स' के नाम से जाना जाने लगा। इस संस्थान ने लघुचित्रकला और पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह आज भी कला शिक्षा का प्रमुख केंद्र है।

35. प्रसिद्ध चित्रकार धीमा, मीरबक्स, काशी एवं रामलखन राजस्थान की किस चित्रशैली से सम्बन्धित रहे है?

  • (A) मारवाड़ी शैली
  • (B) किशनगढ़ शैली
  • (C) नागौर शैली
  • (D) उणियारा शैली

धीमा, मीरबक्स, काशी और रामलखन उणियारा शैली से जुड़े प्रसिद्ध चित्रकार थे। उणियारा शैली टोंक ज़िले के उणियारा क्षेत्र में विकसित हुई थी। इसमें धार्मिक, पौराणिक और दरबारी जीवन के चित्रों का समावेश देखने को मिलता है। इस शैली के चित्रों में चेहरे की स्पष्टता और वस्त्रों की सुंदर सजावट प्रमुख विशेषताएँ हैं।

36. निम्नलिखित में से कौन सा चित्रकार अलवर शैली की चित्रकला से संबंधित नहीं है?

  • (A) जमनादास
  • (B) नानकराम
  • (C) सालिगराम
  • (D) नंदराम

नानकराम अलवर शैली से नहीं, बल्कि किशनगढ़ शैली से संबंधित चित्रकार था। अलवर शैली में बलदेव, गुलाम अली, सालिगराम और जमुनादास जैसे चित्रकारों का योगदान रहा। वहीं किशनगढ़ शैली में नानकराम ने बणी ठणी जैसे आदर्शीकृत स्त्री सौंदर्य वाले चित्रों की परंपरा को आगे बढ़ाया।

37. 1426 ई. में चित्रित 'कल्पसूत्र' ग्रन्थ किस चित्रकला शैली के प्रारम्भिक चित्रों में से एक है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) मारवाड़ी शैली
  • (C) चावण्ड शैली
  • (D) देवगढ़ शैली

1426 ई. में चित्रित 'कल्पसूत्र' ग्रंथ मेवाड़ शैली के प्रारंभिक चित्रों में से एक माना जाता है। यह चित्रण मुख्य रूप से धार्मिक विषय पर आधारित था। इसमें जैन परंपरा और धार्मिक कथाओं का बारीकी से चित्रण हुआ। यह ग्रंथ मेवाड़ शैली की प्राचीनता और उसकी धार्मिक महत्ता को स्पष्ट करता है।

38. अजमेर लघु-चित्र शैली को समृद्ध करने वाले चित्रकारों में एक स्त्री चित्रकार का प्रमुख स्थान है, वह कौन है?

  • (A) कमला
  • (B) साहिब
  • (C) इलायची
  • (D) सुचिता

अजमेर लघुचित्र शैली को समृद्ध बनाने में महिला चित्रकार साहिब का प्रमुख योगदान रहा। स्त्रियों का चित्रकला में आना उस समय असाधारण माना जाता था। साहिब ने धार्मिक विषयों और स्त्रियों के जीवन से संबंधित चित्र बनाए। इस कारण उन्हें अजमेर चित्रशैली में विशेष पहचान मिली।

39. सीताराम, बदनसिंह और नानकराम चित्रकार किस शैली से सम्बद्ध थे?

  • (A) किशनगढ़ शैली
  • (B) जैसलमेर शैली
  • (C) मेवाड़ शैली
  • (D) कोटा शैली

सीताराम, बदनसिंह और नानकराम किशनगढ़ शैली से संबंधित चित्रकार थे। किशनगढ़ शैली आदर्श स्त्री सौंदर्य, राधा-कृष्ण प्रेम चित्रण और बणी ठणी जैसे उत्कृष्ट चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। इन चित्रकारों ने अपनी कला से इस शैली को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

40. मारवाड़ शैली में निर्मित चित्रांकन 'रागमाला चित्रावली' 1623 ई. का चित्रकार कौन था?

  • (A) मीर बक्श
  • (B) साहिबराम
  • (C) पुण्डरीक
  • (D) वीरजी

1623 ई. में 'रागमाला चित्रावली' का चित्रण वीरजी ने किया। यह पाली के वीर पुरुष विठ्ठलदास चाँपावत के लिए बनाया गया था। यह चित्रावली मारवाड़ चित्रशैली का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसमें संगीत रागों का चित्रण गहराई और भावनाओं के साथ किया गया, जिससे यह शैली अद्वितीय बन गई।

राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
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