राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 4
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में किशनगढ़ शैली, बीकानेर शैली, नाथद्वारा शैली, बूंदी शैली, मेवाड़ शैली, अलवर शैली, जोधपुर शैली, जयपुर शैली, कोटा शैली, सांझी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
- कुल प्रश्न: 20
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(Since 2021)
61. निम्न में से किसे 'पहाड़ों के जादुई सम्मोहन का चितेरा' कहा जाता है?
- (A) जगमोहन माथोड़िया
- (B) परमानन्द चोयल
- (C) पं. सुरेश शर्मा
- (D) बी.सी. गुई
बी.सी. गुई (भवानी चरण गुई) को 'पहाड़ों के जादुई सम्मोहन का चितेरा' कहा जाता है। इनका जन्म वाराणसी में हुआ, लेकिन कार्यक्षेत्र राजस्थान रहा। उन्होंने प्रकृति, विशेषकर पहाड़ों और वनों की सुंदरता को चित्रित किया। उनके चित्रों में प्राकृतिक दृश्यों की जीवंतता और गहराई देखने को मिलती है।
62. राजस्थानी चित्रकला का सबसे पहले वैज्ञानिक विभाजन किसने किया-
- (A) डब्ल्यू एच. ब्राउन
- (B) एन.सी. मेहता
- (C) आनंद कुमार स्वामी
- (D) ओ.सी. गांगुली
राजस्थानी चित्रकला का पहला वैज्ञानिक विभाजन आनंद कुमार स्वामी ने किया। उन्होंने 1916 ई. में "राजपूत पेंटिंग्स" नामक पुस्तक लिखी। इसमें राजस्थान की विभिन्न चित्रशैलियों का वर्गीकरण और विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। यही कार्य आगे चलकर राजस्थानी चित्रकला के अध्ययन की नींव बना।
63. मण्डावा क्यों प्रसिद्ध है-
- (A) भित्ति चित्रों के कारण
- (B) पिछवाई कला के लिए
- (C) सांझी चित्रण के लिए
- (D) चमड़े पर चित्रकारी के लिए
मंडावा शेखावाटी क्षेत्र का कस्बा है, जो अपनी भित्ति चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की हवेलियों पर बने चित्र ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक जीवन की झलक प्रस्तुत करते हैं। इसे 'ओपन एयर आर्ट गैलरी' भी कहा जाता है। फतेहपुर और नवलगढ़ के साथ मंडावा शेखावाटी कला का प्रमुख केंद्र है।
64. नूर मोहम्मद राजपुताने के किस राज्य का मुख्य चित्रकार था-
- (A) कोटा
- (B) बूंदी
- (C) जयपुर
- (D) अलवर
नूर मोहम्मद कोटा राज्य का मुख्य चित्रकार था। कोटा शैली शिकार के दृश्यों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध रही। नूर मोहम्मद ने कोटा दरबार के संरक्षण में उत्कृष्ट चित्र बनाए। उनके चित्रों में वन्य जीवन और शिकार का जीवंत चित्रण दिखाई देता है, जिससे कोटा शैली की विशेष पहचान बनी।
65. पिछवाईयों के चित्रण का मुख्य विषय है-
- (A) प्रेमाख्यानों का चित्रण
- (B) श्रीकृष्ण लीला
- (C) प्रकृति चित्रण
- (D) सामंती वैभव
पिछवाई चित्रकला का मुख्य विषय भगवान श्रीकृष्ण और उनकी लीलाएँ होती हैं। यह नाथद्वारा शैली का प्रमुख अंग है। पिछवाई चित्र मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों के अवसर पर कपड़े पर बनाए जाते हैं। इनमें जन्माष्टमी, गोवर्धन पूजा और रासलीला जैसे प्रसंगों का जीवंत चित्रण किया जाता है। इन चित्रों में भक्ति और कला का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
66. चावंड़ चित्रकला शैली का विकास किस क्षेत्र में हुआ?
- (A) मेवाड़
- (B) हाड़ौती
- (C) शेखावाटी
- (D) मारवाड़
चावंड़ चित्रशैली मेवाड़ क्षेत्र में विकसित हुई थी। इसका विकास महाराणा प्रताप के समय हुआ जब उन्होंने राजधानी चावंड़ बसाई। इस शैली में धार्मिक ग्रंथों और रागमाला का चित्रण प्रमुख रहा। इसमें प्राकृतिक दृश्यों और जनजीवन का चित्रण भी किया गया। इस शैली की विशेषता गहरे रंगों और भावनात्मक अभिव्यक्ति का सुंदर संयोजन है।
67. कलीला दमना है?
- (A) अलवर शैली के चित्रकारों के नाम
- (B) अजमेर शैली की महिला चित्रकारों के नाम
- (C) शेखावाटी में भित्ति चित्रण की एक पद्धति
- (D) मेवाड़ चित्र शैली की कहानी के दो पात्रों के नाम
कलीला दमना एक रूपात्मक कहानी के दो पात्रों के नाम हैं। ये दोनों गीदड़ थे, जिनमें कलीला सरल स्वभाव का था और दमना चालाक व बुरे स्वभाव का। इस कहानी पर आधारित सचित्र पुस्तक सबसे पहले 1258 ई. में बगदाद में प्रकाशित हुई। मेवाड़ शैली में इस कहानी का सुंदर चित्रण किया गया, जिससे यह भारतीय कला का हिस्सा बनी।
68. उस्ताद' कहलाने वाले चित्रकारों ने भित्ति चित्र किस नगर में बनाए हैं?
- (A) जयपुर
- (B) जोधपुर
- (C) उदयपुर
- (D) बीकानेर
बीकानेर नगर में 'उस्ताद' कहलाने वाले चित्रकारों ने भित्ति चित्र बनाए। बीकानेर शैली पर मुगल कला का गहरा प्रभाव रहा, जिसके कारण यहाँ के चित्रों में बारीक रेखाओं और सूक्ष्मता की झलक दिखाई देती है। उस्ताद चित्रकारों ने दरबारी जीवन, युद्ध और धार्मिक कथाओं का सजीव चित्रण किया।
69. अलवर शैली का कौनसा चित्रकार हाथी दाँत पर चित्रकारी में प्रवीण था-
- (A) बलदेव
- (B) मूलचंद
- (C) डालूराम
- (D) साहिबराम
मूलचंद अलवर शैली का चित्रकार था, जो हाथी दाँत पर चित्रकारी में प्रवीण माना जाता है। अलवर शैली अपनी बारीकी और मुगल प्रभाव के लिए जानी जाती है। हाथी दाँत पर बनाए गए चित्र छोटे आकार के होने के बावजूद अत्यंत आकर्षक और कलात्मक होते थे। मूलचंद ने इस क्षेत्र में विशेष ख्याति प्राप्त की।
70. निम्न में से किसने मेवाड़ शैली का सर्वप्रथम मूल स्वरूप प्रतापगढ़ में (1540 ई.) चित्रित 'चौर पंचाशिखा' में माना है?
- (A) कर्नल जेम्स टॉड
- (B) विलियम लोरेन्स
- (C) डगलस बैरेट
- (D) डब्ल्यू एच. ब्राउन
डगलस बैरेट ने मेवाड़ शैली का सर्वप्रथम मूल स्वरूप प्रतापगढ़ (1540 ई.) में चित्रित 'चौर पंचाशिखा' में माना। यह ग्रंथ प्रेम और श्रृंगार विषयक चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। इस ग्रंथ के चित्रण ने मेवाड़ शैली को प्रारंभिक स्वरूप प्रदान किया और आगे चलकर यह धार्मिक विषयों में विकसित हुई।
71. बूंदी शैली में किस शासक को 1750 ई. में चित्रित 'जंगली सुअर का शिकार करते हुए' दिखाया गया है?
- (A) राव सुर्जन सिंह
- (B) महाराव उम्मेद सिंह
- (C) अनिरूद्ध सिंह
- (D) राव रतन सिंह
बूंदी शैली में 1750 ई. में महाराव उम्मेद सिंह को 'जंगली सुअर का शिकार करते हुए' चित्रित किया गया। बूंदी शैली विशेषकर शिकार दृश्यों और प्राकृतिक सुंदरता के चित्रण के लिए प्रसिद्ध थी। इसमें राजाओं और दरबारियों को शिकार के रोमांचक दृश्यों में दर्शाया गया, जिससे इस शैली को विशेष पहचान मिली।
72. किशनगढ़ शैली का समृद्ध काल (स्वर्णकाल) किनके शासनकाल को माना जाता है-
- (A) उदयसिंह
- (B) किशनसिंह
- (C) सावंत सिंह
- (D) रूपसिंह
किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल महाराजा सावंत सिंह (1748–1764 ई.) का काल माना जाता है। सावंत सिंह कवि भी थे और "नागरीदास" उपनाम से प्रसिद्ध हुए। उनके शासनकाल में निहालचंद जैसे महान चित्रकारों ने काम किया और बणी-ठणी जैसे कालजयी चित्र बनाए। इस काल में किशनगढ़ शैली ने अपनी चरम सीमा प्राप्त की।
73. किस चित्रशैली में पशु-पक्षियों की बहुतायत रहती है?
- (A) बूंदी चित्रशैली
- (B) नाथद्वारा चित्रशैली
- (C) बीकानेर चित्रशैली
- (D) जयपुर चित्रशैली
बूंदी चित्रशैली पशु-पक्षियों के बहुल चित्रण के लिए प्रसिद्ध है। इसमें कबूतर, बतख और अन्य पक्षियों का विस्तृत चित्रण मिलता है। बूंदी शैली की खासियत यह है कि इसमें प्राकृतिक वातावरण और जीव-जंतुओं को बड़े ही जीवंत ढंग से दर्शाया गया है। इसी कारण इसे 'पक्षी शैली' भी कहा जाता है।
74. शरीर की ऊपरी चमड़ी को गोदकर उसमें काला रंग भरने की कला का नाम है-
- (A) मांडणा
- (B) गोदना
- (C) थापा
- (D) बातीक
शरीर की ऊपरी चमड़ी को तीखे औजार से गोदकर उसमें काला रंग भरने की कला को गोदना (Tattoo) कहा जाता है। यह कला विशेष रूप से जनजातियों में प्रचलित रही। गोदना शरीर पर स्थायी निशान छोड़ता है और इसे सजावटी व धार्मिक मान्यताओं से जोड़ा जाता है। राजस्थान में यह प्रथा आज भी कुछ क्षेत्रों में देखने को मिलती है।
75. वर्षा में नाचते मोर, कलाबाजी दिखाते वानर व पहाड़ की तलहटी में विचरण करते वन्यजीवों का चित्रण किस शैली की विशेषता है-
- (A) किशनगढ़ शैली
- (B) बीकानेर शैली
- (C) नाथद्वारा शैली
- (D) बूंदी शैली
बूंदी शैली प्राकृतिक सौंदर्य और वन्य जीवन के चित्रण के लिए प्रसिद्ध है। इसमें वर्षा ऋतु में नाचते मोर, कलाबाजी करते वानर और पहाड़ों की तलहटी में घूमते वन्यजीवों का सुंदर चित्रण मिलता है। इस शैली में प्रकृति और जीव-जंतुओं का जीवंत और भावपूर्ण चित्रण किया गया है, जो इसे अन्य शैलियों से अलग बनाता है।
76. नारायण, चतुर्भुज, रामलिंग व चम्पालाल नामक चित्रकार किस शैली के हैं-
- (A) नाथद्वारा शैली
- (B) किशनगढ़ शैली
- (C) मेवाड़ शैली
- (D) अलवर शैली
नारायण, चतुर्भुज, रामलिंग और चम्पालाल नाथद्वारा शैली से संबंधित चित्रकार थे। इस शैली का मुख्य विषय भगवान श्रीनाथजी और उनकी लीलाएँ थीं। यहाँ के कलाकारों ने मंदिर की पिछवाई और श्रृंगारिक चित्रों में अपनी कला को प्रकट किया। नाथद्वारा चित्रशैली भक्ति और कला का अद्भुत संगम है।
77. रामा, नाथा, छज्जू और सेफू चित्रकला की किस शैली से संबंधित चित्रकार हैं-
- (A) जोधपुर शैली
- (B) बीकानेर शैली
- (C) जयपुर शैली
- (D) कोटा शैली
रामा, नाथा, छज्जू और सेफू जोधपुर शैली के चित्रकार थे। जोधपुर शैली, जिसे मारवाड़ शैली भी कहा जाता है, अपने दरबारी जीवन और युद्ध दृश्यों के चित्रण के लिए प्रसिद्ध है। इन चित्रकारों ने लोककथाओं, ढोला-मारू और धार्मिक ग्रंथों का भी जीवंत चित्रण किया।
78. रागिनी भैरव
- (A) 3412
- (B) 1234
- (C) 4321
- (D) 1432
इस प्रश्न में चार शैलियों के प्रमुख चित्रों का मिलान है। नाथद्वारा – पिछवाई, किशनगढ़ – बणी ठणी, जोधपुर – ढोला मारू और बूंदी – रागिनी भैरव। इन चित्रों ने अपनी-अपनी शैली को विशिष्ट पहचान दिलाई और राजस्थानी कला की विविधता को दर्शाया।
79. भील जनजाति में विवाह के अवसर पर दीवार पर बनाया जाने वाला मांगलिक चित्र क्या कहलाता है?
- (A) सांझी
- (B) भराड़ी
- (C) फड़
- (D) मोराकसी
भील जनजाति में विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर 'भराड़ी' नामक चित्र दीवार पर बनाया जाता है। इसमें देवी-देवताओं और प्रतीकात्मक आकृतियों का चित्रण किया जाता है। भराड़ी जनजातीय कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे शुभता का प्रतीक माना जाता है।
80. दीवार पर हाथ की अंगुलियों व हथेलियों के निशान बनाना क्या कहलाता है?
- (A) वार्तिक
- (B) वसली
- (C) थापा
- (D) पाना
हाथ की अंगुलियों और हथेलियों से दीवार पर बनाए गए निशान 'थापा' कहलाते हैं। यह कला ग्रामीण अंचलों और जनजातीय समाज में प्रचलित रही। थापा विशेषकर त्यौहारों और मांगलिक अवसरों पर बनाया जाता है। इसमें लाल या पीले रंग का उपयोग अधिक होता है।
राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
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