राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ Questions with Answers

राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 6

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में बीकानेर शैली, जैसलमेर शैली, मेवाड़ शैली, किशनगढ़ शैली, नागौर शैली, देवगढ़ शैली, बूंदी शैली, अलवर शैली, कोटा शैली, नाथद्वारा शैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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101. किस शासक का काल नाथद्वारा शैली का स्वर्णकाल था?

  • (A) महाराणा कुम्भा
  • (B) अमरसिंह प्रथम
  • (C) महाराणा राजसिंह
  • (D) जगतसिंह प्रथम

नाथद्वारा शैली का स्वर्णकाल महाराणा राजसिंह का काल माना जाता है। 1672 ई. में उनके समय श्रीनाथजी की मूर्ति नाथद्वारा लाई गई, जिसके साथ इस शैली का उद्भव हुआ। इसमें कृष्ण भक्ति, रासलीला, उत्सव और पिछवाई चित्र प्रमुख विषय रहे। राजसिंह के संरक्षण में इस शैली ने विशेष ख्याति पाई।

102. राजस्थान की वह चित्रकला शैली, जो बाहरी शैलियों से सबसे कम प्रभावित रही है?

  • (A) कोटा शैली
  • (B) देवगढ़ शैली
  • (C) बीकानेर शैली
  • (D) जैसलमेर शैली

जैसलमेर शैली बाहरी शैलियों से सबसे कम प्रभावित रही। यह शैली स्थानीय संस्कृति और लोककथाओं पर आधारित रही। इसमें रेगिस्तानी जीवन, ऊँट, लोकदेवता और प्रेमकथाओं का चित्रण प्रमुख रहा। अन्य शैलियों पर मुगल प्रभाव देखा गया, जबकि जैसलमेर शैली ने अपनी मौलिकता लंबे समय तक बनाए रखी।

103. इंडियन मोनालिसा' के नाम से जाना जाने वाला चित्र राजस्थान की किस चित्र शैली से संबंधित है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) किशनगढ़ शैली
  • (C) बूंदी शैली
  • (D) नाथद्वारा शैली

इंडियन मोनालिसा' के नाम से प्रसिद्ध चित्र 'बणी-ठणी' किशनगढ़ शैली का है। इसे निहालचंद ने महाराजा सावंत सिंह के काल में चित्रित किया था। इसमें आदर्श स्त्री सौंदर्य का चित्रण किया गया है। लंबी आँखें, नुकीली नाक, पतली कमर और भावपूर्ण चेहरा इसकी विशेषता है।

104. राजस्थान का वह चित्रकार जो 'नीड़ का चितेरा' कहलाता है?

  • (A) सौभाग्य मल गहलोत
  • (B) कैलाशचन्द्र शर्मा
  • (C) बद्रीलाल सोनी
  • (D) गोवर्धन लाल जोशी

सौभाग्य मल गहलोत 'नीड़ का चितेरा' कहलाते हैं। उन्होंने अपने चित्रों में पक्षियों और उनके घोंसलों का सुंदर चित्रण किया। उनकी कला में प्रकृति और जीव-जंतुओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। इस कारण उन्हें 'नीड़ का चितेरा' के नाम से विशेष पहचान मिली।

105. साहिबदीन, कायम उस्ता

  • (A) 3412
  • (B) 1234
  • (C) 4321
  • (D) 1432

इस प्रश्न में विभिन्न शैलियों के प्रमुख चित्रकारों का मिलान कराया गया है। बीकानेर शैली से साहिबदीन और कायम उस्ता, जोधपुर शैली से अमरदास व शंकरदास, देवगढ़ शैली से बैजनाथ व चोखा और नाथद्वारा शैली से घासीराम व हीरालाल जुड़े रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रत्येक शैली के विकास में विभिन्न कलाकारों का गहरा योगदान रहा है।

106. मेवाड़ शैली का आरम्भिक चित्र 'श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' किस वर्ष चित्रित किया गया था?

  • (A) 1260 ई.
  • (B) 1275 ई.
  • (C) 1310 ई.
  • (D) 1340 ई.

श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' 1260 ई. में चित्रित हुआ, जो मेवाड़ शैली का सबसे प्राचीन चित्र माना जाता है। यह महाराणा तेजसिंह के समय जैन धार्मिक ग्रंथ के रूप में चित्रित हुआ। चित्रकार कमलचन्द्र ने इसे बनाया। इसमें धार्मिकता और लोकजीवन के मेल की झलक मिलती है। यह मेवाड़ शैली के प्रारंभिक स्वरूप का प्रतीक है।

107. कौनसी चित्रकला शैली मारवाड़, मेवाड़ और जयपुर शैलियों का समन्वित रूप है?

  • (A) किशनगढ़ शैली
  • (B) अलवर शैली
  • (C) बीकानेर शैली
  • (D) देवगढ़ शैली

देवगढ़ शैली को मारवाड़, मेवाड़ और जयपुर शैलियों का समन्वित रूप माना जाता है। इसका उद्भव 1680 ई. में रावत द्वारिकादास चुंडावत के समय हुआ। इसमें सभी शैलियों के रंग, भाव और संरचना का सम्मिलन देखने को मिलता है। इसी कारण इसे एक विशेष मिश्रित शैली कहा जाता है।

108. घाणेराव शैली किस चित्रकला शैली की उपशैली है?

  • (A) बीकानेर शैली
  • (B) मारवाड़ शैली
  • (C) किशनगढ़ शैली
  • (D) मेवाड़ शैली

घाणेराव शैली मारवाड़ चित्रकला की उपशैली है। यह पाली जिले में विकसित हुई। यहाँ के चित्रकार नारायण, छज्जू और कृपाराम ने इस शैली को पहचान दी। इसमें स्थानीय लोकजीवन और दरबारी प्रसंगों का चित्रण किया गया। मारवाड़ की अन्य उपशैलियों की तरह इसमें भी लोक तत्व प्रमुख रूप से शामिल हैं।

109. राजस्थानी चित्रकला का प्रथम चित्रकार किसे माना जाता है?

  • (A) कमलचन्द्र
  • (B) हीरानंद
  • (C) श्रृंगधर
  • (D) नुरूद्दीन

राजस्थानी चित्रकला का प्रथम चित्रकार श्रृंगधर को माना जाता है। उन्होंने सबसे पहले इस क्षेत्र में चित्रकला की नींव रखी। श्रृंगधर के कार्यों ने आने वाले चित्रकारों को प्रेरणा दी। इनके बनाए चित्र धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण हैं।

110. राजस्थान की किस चित्रकला शैली में बूझे हुए तथा हल्के रंगों का प्रयोग किया गया है?

  • (A) बीकानेर शैली
  • (B) बूंदी शैली
  • (C) नागौर शैली
  • (D) जैसलमेर शैली

नागौर शैली में हल्के और बूझे हुए रंगों का प्रयोग किया गया। इस शैली में चमकीले रंगों की अपेक्षा साधारण और मृदु रंगों का अधिक प्रयोग मिलता है। यह विशेषता नागौर शैली को अन्य शैलियों से अलग करती है। साथ ही, इसमें जीवन और दरबारी प्रसंगों का सुंदर चित्रण किया गया।

111. अलवर के किस शासक के समय 'कामकला' पर आधारित सैकड़ों चित्रों का निर्माण हुआ?

  • (A) बलवन्त सिंह
  • (B) विनय सिंह
  • (C) मंगल सिंह
  • (D) शिवदान सिंह

अलवर के महाराजा शिवदान सिंह के समय 'कामकला' पर आधारित सैकड़ों चित्रों का निर्माण हुआ। इस काल में श्रृंगार, प्रेम और कामकला पर विस्तृत चित्रांकन देखने को मिला। 'नफीरी वादन' का चित्र इसी शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस काल में अलवर चित्रकला ने नई पहचान बनाई।

112. प्रसिद्ध 'चित्रशाला' किस गढ़ राजप्रासाद में स्थित है?

  • (A) जयपुर
  • (B) जोधपुर
  • (C) बूंदी
  • (D) बीकानेर

प्रसिद्ध चित्रशाला बूंदी के गढ़ राजप्रासाद में स्थित है। इसे महाराव उम्मेदसिंह ने बनवाया था। यहाँ बूंदी शैली के भित्ति चित्र बनाए गए हैं, जिन्हें 'भित्ति चित्रों का स्वर्ग' भी कहा जाता है। इसमें रामायण, महाभारत और शिकार प्रसंगों का चित्रण मिलता है।

113. जोधपुर शैली का प्रमुख चित्र 'उत्तराध्ययन' (1591 ई.) वर्तमान में किस संग्रहालय में सुरक्षित है?

  • (A) अजमेर संग्रहालय
  • (B) बड़ौदा संग्रहालय
  • (C) जैसलमेर संग्रहालय
  • (D) जोधपुर संग्रहालय

जोधपुर शैली का प्रमुख चित्र 'उत्तराध्ययन' (1591 ई.) बड़ौदा संग्रहालय में सुरक्षित है। यह चित्र जैन परंपरा और धार्मिकता का सुंदर उदाहरण है। इसमें बारीक रेखाओं और गहरे रंगों का प्रयोग हुआ है। यह जोधपुर शैली के शुरुआती महत्त्वपूर्ण चित्रों में गिना जाता है।

114. राजस्थान में आधुनिक चित्रकला को प्रारम्भ करने का श्रेय किसे दिया जाता है?

  • (A) परमानन्द चोयल
  • (B) देवकीनन्दन शर्मा
  • (C) भूर सिंह शेखावत
  • (D) कुन्दनलाल मिस्त्री

राजस्थान में आधुनिक चित्रकला का श्रेय कुन्दनलाल मिस्त्री को दिया जाता है। उन्होंने पश्चिमी तकनीकों को अपनाकर राजस्थान में आधुनिक चित्रशैली की शुरुआत की। उनके कार्यों में नई सोच, प्रयोग और आधुनिकता दिखाई देती है। इस कारण वे आधुनिक चित्रकला के प्रवर्तक माने जाते हैं।

115. अजंता शैली का प्रभाव सर्वप्रथम राजस्थान की किस चित्रकला शैली पर पड़ा?

  • (A) जोधपुर शैली
  • (B) नागौर शैली
  • (C) जैसलमेर शैली
  • (D) बीकानेर शैली

अजंता शैली का प्रभाव सर्वप्रथम जोधपुर चित्रशैली पर पड़ा। इस शैली के शुरुआती चित्रों में रंगों की गहराई, बारीक रेखांकन और धार्मिक कथाओं का प्रभाव दिखाई देता है। इसमें लोकजीवन और धार्मिक विषयों का चित्रण किया गया, जो अजंता शैली की विशेषताओं से मेल खाता है। जोधपुर शैली ने बाद में स्थानीय परंपराओं को भी शामिल किया।

116. महाराजा अनूपसिंह

  • (A) 3412
  • (B) 1234
  • (C) 4321
  • (D) 2314

नाथद्वारा शैली का स्वर्णकाल महाराणा राजसिंह का, चावण्ड शैली का अमरसिंह प्रथम का, जोधपुर शैली का स्वर्णकाल महाराजा मानसिंह का और बीकानेर शैली का स्वर्णकाल महाराजा अनूपसिंह का था। इन शासकों के संरक्षण में इन शैलियों ने अपनी सर्वोच्चता प्राप्त की और उत्कृष्ट चित्र बनाए गए।

117. सावंत सिंह

  • (A) 3412
  • (B) 1234
  • (C) 4321
  • (D) 2314

किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल सावंत सिंह का काल था, जैसलमेर शैली का मूलराज द्वितीय के समय, बूँदी शैली का उम्मेद सिंह प्रथम के समय और कोटा शैली का स्वर्णकाल महाराव उम्मेद सिंह के शासन में रहा। इन शासकों के संरक्षण में इन शैलियों का विकास हुआ और उत्कृष्ट चित्रकृतियाँ बनीं।

118. नारियों की तैराकी मुद्रा में चित्र और पारदर्शी वेशभूषा किस चित्रकला शैली की प्रमुख विशेषता है?

  • (A) मेवाड़ शैली
  • (B) नागौर शैली
  • (C) बीकानेर शैली
  • (D) अलवर शैली

नागौर शैली की प्रमुख विशेषता नारियों की तैराकी मुद्रा और पारदर्शी वेशभूषा का चित्रण है। इसमें स्त्रियों की सुंदरता को कोमल और आकर्षक रूप में दर्शाया गया। इस शैली में नारी जीवन, श्रृंगार और सांस्कृतिक परंपराओं का बहुत ही सुंदर चित्रण मिलता है।

119. अलवर शैली में महाराजा मंगलसिंह के समय वे चित्रकार जिन्होने हाथीदाँत के फलकों पर सूक्ष्म चित्रांकन किया?

  • (A) जगमोहन व रामसहाय
  • (B) शिवकुमार व डालूराम
  • (C) मूलचंद व उदयराम
  • (D) छोटेलाल व नंदराम

अलवर शैली में महाराजा मंगलसिंह के समय मूलचंद और उदयराम ने हाथीदाँत के फलकों पर सूक्ष्म चित्रांकन किया। चित्रकार मूलचंद हाथीदाँत पर चित्र बनाने में प्रवीण था। इस प्रकार के सूक्ष्म चित्रांकन ने अलवर शैली को विशिष्ट स्थान दिलाया।

120. मेवाड़ शैली में किस शासक के काल में पहली बार मुगल शैली का प्रभाव पड़ा?

  • (A) महाराणा जयसिंह
  • (B) संग्राम सिंह द्वितीय
  • (C) महाराणा तेजसिंह
  • (D) महाराणा जगतसिंह प्रथम

मेवाड़ शैली में मुगल प्रभाव पहली बार महाराणा जगतसिंह प्रथम के समय दिखाई दिया। इस काल में चित्रों में अधिक सजावट, परिधान और दरबारी जीवन के चित्रण में मुगल प्रभाव देखा गया।

राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10 | Part 11 | Part 12 | Part 13 | Part 14 | Part 15

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