राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 7
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में बीकानेर शैली, मेवाड़ शैली, किशनगढ़ शैली, अलवर शैली, जैसलमेर शैली, अजमेर शैली, शेखावाटी शैली, नाथद्वारा शैली, कोटा शैली, जोधपुर शैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
- कुल प्रश्न: 20
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(Since 2021)
121. रागमाला, ढोला मारू
- (A) 3412
- (B) 1234
- (C) 4321
- (D) 2314
बूँदी शैली का प्रमुख चित्र राग रागिनी-नायिका भेद, जोधपुर शैली का उजली-जेठवा, नाथद्वारा शैली का बाल ग्वाले-कदली वृक्ष और चावण्ड शैली का ढोला मारू व रागमाला प्रसिद्ध हैं। इन चित्रों से प्रत्येक शैली की विशेषता झलकती है।
122. राजस्थान चित्रकला का स्वर्ण युग माना जाता है?
- (A) 14वीं व 15वीं शताब्दी
- (B) 15वीं व 16वीं शताब्दी
- (C) 17वीं व 18वीं शताब्दी
- (D) 18वीं व 19वीं शताब्दी
राजस्थान चित्रकला का स्वर्ण युग 17वीं और 18वीं शताब्दी को माना जाता है। इस काल में विभिन्न शैलियों का विकास और उत्कर्ष हुआ। मेवाड़, मारवाड़, बूंदी, कोटा और किशनगढ़ जैसी शैलियों ने अपनी श्रेष्ठता प्राप्त की।
123. निम्न में से किस विद्वान ने राजस्थान की चित्रकला को 'राजपूत चित्रकला' नाम नहीं दिया?
- (A) रायकृष्ण दास
- (B) आनन्द कुमार स्वामी
- (C) ओ.सी. गांगुली
- (D) हैवल
रायकृष्ण दास ने राजस्थान की चित्रकला को 'राजस्थान चित्रकला' नाम दिया। जबकि आनन्द कुमार स्वामी, ओ.सी. गांगुली और हैवल जैसे विद्वानों ने इसे 'राजपूत चित्रकला' कहा। रायकृष्ण दास का दृष्टिकोण स्थानीय और प्रादेशिक पहचान को सामने लाने वाला था।
124. निम्न में से कौनसी शैली मेवाड़ स्कूल की उपशैली नहीं है?
- (A) देवगढ़ उपशैली
- (B) शाहपुरा उपशैली
- (C) सावर उपशैली
- (D) भिनाय उपशैली
भिनाय उपशैली, मारवाड़ स्कूल की उपशैली मानी जाती है, जबकि देवगढ़, शाहपुरा और सावर उपशैली मेवाड़ स्कूल की शाखाएँ हैं। भिनाय उपशैली में मारवाड़ की स्थानीय परंपरा और राजसी विषयों का गहरा प्रभाव देखने को मिलता है, इसलिए यह मेवाड़ से अलग है।
125. राजस्थान के किस क्षेत्र की हवेलियाँ 'फ्रेस्को पेंटिंग' के लिए प्रसिद्ध है?
- (A) मेवाड़
- (B) मारवाड़
- (C) बीकानेर
- (D) शेखावाटी
शेखावाटी क्षेत्र की हवेलियाँ फ्रेस्को पेंटिंग के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ 18वीं और 19वीं शताब्दी में बने भव्य भवनों और हवेलियों की दीवारों पर सुंदर चित्रांकन किया गया। मंडावा, नवलगढ़, रामगढ़, बिसाऊ और फतेहपुर जैसे स्थानों की हवेलियों पर बने भित्ति चित्र शेखावाटी को 'ओपन एयर आर्ट गैलरी' बनाते हैं।
126. गुलाम अली, बलदेव, सालिगराम, रामगोपाल चित्रकारों का सम्बंध किस चित्र शैली से रहा है?
- (A) नाथद्वारा
- (B) अलवर
- (C) बून्दी
- (D) बीकानेर
अलवर चित्रशैली ढूंढाड़ स्कूल का हिस्सा मानी जाती है। इसकी शुरुआत राव राजा प्रतापसिंह (1775 ई.) से हुई और इसका स्वर्णकाल महाराजा विनयसिंह के समय रहा। इस शैली में सीमाओं पर सुंदर बॉर्डर चित्रण, वेश्याओं (गणिकाओं) के चित्र तथा ईरानी, मुगल व जयपुर शैली का प्रभाव दिखाई देता है। प्रमुख कलाकारों में डालूराम, बलदेव, गुलाम अली, सालिगराम, नंदलाल, रामगोपाल, छोटे लाल, जमुनादास, मूलचंद और जगमोहन शामिल हैं।
127. मारवाड़ चित्रकला शैली के प्रसिद्ध चित्रकारों में था?
- (A) अमरदास
- (B) किसन दास
- (C) गंगाराम
- (D) कालू राम
मारवाड़ चित्रकला शैली राजस्थान की एक प्रमुख शाखा है। इस शैली के कई प्रसिद्ध चित्रकार हुए जिनमें अमरदास, दाना, जीतमल, बिशनदास, किशनदास, नाथो, वीरजी, रतनजी, छज्जू, उदयराम, देवदास, नारायणदास, सामसिंह, लादू, माधोदास, शंकरदास और बभूत (भाटी परिवार) प्रमुख थे। इनमें गंगाराम भी एक विख्यात चित्रकार था, जिसने अपने समय में मारवाड़ शैली को नई पहचान दी।
128. निम्नलिखित में से कौन सी चित्रशैली पंचतन्त्र चित्रांकन के लिये प्रसिद्ध है?
- (A) बूंदी
- (B) कोटा
- (C) मारवाड़
- (D) ढूंढाड़
जोधपुर चित्रशैली (मारवाड़ स्कूल का भाग) पंचतंत्र चित्रांकन के लिए प्रसिद्ध है। राजस्थान में अजंता शैली का प्रभाव सबसे पहले जोधपुर शैली पर पड़ा। सूरसिंह के काल में भागवत पुराण, ढोला-मारू और पंचतंत्र जैसे ग्रंथों का चित्रण हुआ। वीरजी भाटी और विट्ठलदास चपांवत जैसे चित्रकारों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। 19वीं शताब्दी में मतिराम चितेरे ने रसराज चित्रित किए।
129. निम्न में से कौनसी शैली मारवाड़ स्कूल की उपशैली नहीं है?
- (A) जैसलमेर शैली
- (B) किशनगढ़ शैली
- (C) अजमेर शैली
- (D) शेखावाटी शैली
शेखावाटी शैली ढूँढाड़ स्कूल की उपशैली है, जबकि जैसलमेर, किशनगढ़ और अजमेर शैलियाँ मारवाड़ स्कूल से संबंधित मानी जाती हैं। शेखावाटी क्षेत्र की चित्रकला भित्ति चित्रण और हवेलियों की साज-सज्जा के लिए प्रसिद्ध है। यह ढूँढाड़ स्कूल का विशिष्ट उदाहरण है।
130. आदमकद व्यक्ति चित्र
- (A) 3412
- (B) 1234
- (C) 4321
- (D) 2314
अलवर शैली वेश्याओं के चित्रण के लिए, जयपुर शैली आदमकद व्यक्ति चित्रों के लिए, कोटा शैली आखेट चित्रों के लिए और मारवाड़ शैली प्रेमाख्यान चित्रण के लिए प्रसिद्ध रही। इस प्रकार सही मिलान विकल्प (A) है।
131. मेवाड़ शैली में महाराणा उदयसिंह के काल में बना चित्र भागवत पुराण का 'पारिजात अवतरण' किस चित्रकार की कृति है?
- (A) नानाराम
- (B) मनोहर
- (C) जीवाराम
- (D) कृपाराम
मेवाड़ शैली में महाराणा उदयसिंह के काल में 'पारिजात अवतरण' नामक चित्र नानाराम द्वारा बनाया गया। यह चित्र भागवत पुराण का हिस्सा है और इसमें धार्मिक व पौराणिक कथाओं को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। नानाराम मेवाड़ शैली के श्रेष्ठ कलाकारों में गिने जाते हैं।
132. मेवाड़ शैली का आरम्भिक चित्र 'श्रावक प्रतिक्रमण सुत्र चूर्णि' किस महाराणा के समय चित्रित हुआ था?
- (A) महाराणा मोकल
- (B) महाराणा तेजसिंह
- (C) महाराणा कुम्भा
- (D) जगतसिंह प्रथम
श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' 1260 ई. में महाराणा तेजसिंह के काल में चित्रित हुआ। यह मेवाड़ शैली का सबसे प्रारंभिक चित्र है। इसका चित्रकार कमलचन्द्र था, जिसने जैन धार्मिक ग्रंथ को ताड़पत्र पर उकेरा। यह चित्र राजस्थान चित्रकला की नींव माना जाता है।
133. प्रसिद्ध कला समीक्षक हरमन गोइत्ज ने अपनी पुस्तक के द्वारा राजस्थान की किस चित्रकला शैली के चित्रों को संरक्षण व प्रसिद्धि दिलाई?
- (A) बीकानेर शैली
- (B) किशनगढ़ शैली
- (C) मेवाड़ शैली
- (D) अलवर शैली
हरमन गोइत्ज ने 'आर्ट एंड आर्किटेक्चर ऑफ बीकानेर' नामक पुस्तक में बीकानेर शैली के चित्रों को संरक्षण और प्रसिद्धि दिलाई। इस कृति ने बीकानेर शैली को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। बीकानेर शैली में नक्काशी, भित्ति चित्र और सूक्ष्म लघुचित्र प्रमुख रहे।
134. उस्ता कला' किस चित्रकला शैली की निजी विशेषता है?
- (A) नाथद्वारा शैली
- (B) कोटा शैली
- (C) अलवर शैली
- (D) बीकानेर शैली
उस्ता कला' बीकानेर शैली की विशेषता है। इसमें ऊँट की काठी, हड्डी, लकड़ी और चमड़े पर सुनहरी व रंगीन नक्काशी की जाती थी। यह कला बीकानेर के उस्ता परिवार के कारण प्रसिद्ध हुई और इसे लाहकारी कार्य के रूप में भी जाना जाता है।
135. राजस्थान की किस चित्रकला शैली में 'प्रेमाख्यान' का चित्रण प्रधान विषय रहा है?
- (A) बीकानेर शैली
- (B) मेवाड़ शैली
- (C) जोधपुर शैली
- (D) बूंदी शैली
जोधपुर शैली में प्रेमाख्यान चित्रण प्रमुख विषय रहा। इसमें ढोला-मारू, मूमल-महेन्द्र और उजली-जेठवा जैसे प्रेमाख्यानों का चित्रण देखने को मिलता है। इस शैली में लोककथाओं और प्रेम कथाओं का चित्रण कर सामाजिक जीवन को कला से जोड़ा गया।
136. किस शासक का शासनकाल 'राजस्थान में कलाओं का स्वर्णिम युग' माना जाता है?
- (A) महाराणा कुम्भा
- (B) महाराणा राजसिंह
- (C) महाराजा अनूपसिंह
- (D) सवाई जयसिंह
महाराणा कुम्भा का शासनकाल राजस्थान की कलाओं का स्वर्णिम युग माना जाता है। इस काल में स्थापत्य, संगीत, साहित्य और चित्रकला का जबरदस्त विकास हुआ। कुम्भा ने मेवाड़ को सांस्कृतिक ऊँचाई प्रदान की, इसलिए उन्हें 'राजस्थान में चित्रकला का जनक' भी कहा जाता है।
137. कृपाराम, भैरूराम व मनोहर किस चित्रकला शैली के चित्रकार थे?
- (A) मारवाड़ शैली
- (B) बीकानेर शैली
- (C) मेवाड़ शैली
- (D) देवगढ़ शैली
कृपाराम, भैरूराम और मनोहर मेवाड़ शैली के प्रसिद्ध चित्रकार थे। मेवाड़ शैली धार्मिक चित्रण और पौराणिक कथाओं के लिए जानी जाती है। इन चित्रकारों ने भागवत पुराण और रामायण जैसे ग्रंथों के सुंदर चित्र बनाए। इनके कार्यों में बारीक रेखाएँ और चमकीले रंग दिखाई देते हैं।
138. बीकानेर शैली का सबसे प्राचीन चित्र 'भागवत पुराण' किस शासक के समय का है?
- (A) कल्याणमल
- (B) रायसिंह
- (C) अनूपसिंह
- (D) राव जैतसी
बीकानेर शैली का सबसे प्राचीन चित्र 'भागवत पुराण' रायसिंह के समय का है। यह काल बीकानेर चित्रकला के प्रारंभिक विकास का समय माना जाता है। इस दौरान धार्मिक ग्रंथों के चित्रण को प्राथमिकता दी गई और चित्रों में मुगल शैली का भी प्रभाव दिखाई दिया।
139. राजस्थान का वह चित्रकार, जिसे 'गाँव का चितेरा' कहा जाता है?
- (A) गोवर्धन लाल जोशी
- (B) देवकीनन्दन शर्मा
- (C) भूर सिंह शेखावत
- (D) जगमोहन मथोड़िया
भूर सिंह शेखावत को 'गाँव का चितेरा' कहा जाता है। उनका चित्रण ग्रामीण जीवन, संस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है। उन्होंने लोक संस्कृति को जीवंत करने वाले चित्र बनाए, जिनमें ग्रामीण परिवेश, किसान और पशु-पक्षियों के दृश्य प्रमुख रहे।
140. राजस्थान में एकल चित्र प्रदर्शनी की परम्परा की शुरूआत करने वाले चित्रकार है?
- (A) रामगोपाल विजयवर्गीय
- (B) प्रतिभा पाण्डे
- (C) राजा रवि वर्मा
- (D) बद्रीलाल सोनी
रामगोपाल विजयवर्गीय राजस्थान में एकल चित्र प्रदर्शनी की परंपरा शुरू करने वाले पहले चित्रकार थे। इनका जन्म 1905 में सवाईमाधोपुर जिले के बालेर ठिकाने में हुआ। 1924 में इन्होंने जयपुर के महाराजा स्कूल ऑफ आर्ट्स से चित्रकला का डिप्लोमा किया। 1970 में इन्हें राजस्थान ललित कला अकादमी का 'कलाविद' सम्मान मिला।
राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
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