राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ (Painting Styles of Rajasthan) – Part 8
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में बूंदी शैली, मेवाड़ शैली, कोटा शैली, किशनगढ़ शैली, बीकानेर शैली, जयपुर शैली, अलवर शैली, मारवाड़ शैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ
- कुल प्रश्न: 20
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141. मेवाड़ शैली का आरम्भिक चित्र 'श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' वर्तमान में किस संग्रहालय में रखा है?
- (A) अजमेर संग्रहालय
- (B) बड़ौदा संग्रहालय
- (C) बोस्टन संग्रहालय (अमेरिका)
- (D) दिल्ली संग्रहालय
श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' वर्तमान में बोस्टन संग्रहालय (अमेरिका) में सुरक्षित है। यह मेवाड़ शैली का सबसे प्राचीन चित्र है, जो 1260 ई. में महाराणा तेजसिंह के काल में चित्रित हुआ। इसे कमलचन्द्र ने ताड़पत्र पर बनाया था।
142. चित्रकला के विकास हेतु कार्यरत 'टखमण-28' नामक संस्था कहाँ पर स्थित है?
- (A) जयपुर
- (B) उदयपुर
- (C) बीकानेर
- (D) जोधपुर
टखमण-28' नामक संस्था उदयपुर में स्थित है। यह संस्था चित्रकला को प्रोत्साहित करने और कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए कार्य करती है। इस संस्था ने कई उभरते कलाकारों को पहचान दिलाने का काम किया है।
143. राजस्थान के पहले चित्रकार, जिन्हें पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ?
- (A) रामगोपाल विजयवर्गीय
- (B) भूरसिंह शेखावत
- (C) परमानन्द चोयल
- (D) कुन्दनलाल मिस्त्री
रामगोपाल विजयवर्गीय राजस्थान के पहले चित्रकार थे जिन्हें पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ। यह सम्मान उन्हें 1984 में मिला। उनकी चित्रकला में पारंपरिक और आधुनिक शैली का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
144. भित्ति चित्रण की 'आरायश' पद्धति भारत में कहाँ से आयी?
- (A) ईरान
- (B) जापान
- (C) इटली
- (D) जर्मनी
आरायश पद्धति इटली से भारत में आई। अकबर के समय जहाँगीर इसे भारत लाया। राजस्थान में इसका प्रयोग सर्वप्रथम आमेर (जयपुर) की हवेलियों और महलों में हुआ। इसे स्थानीय भाषा में 'आलागीला' या 'मोराकसी' भी कहा जाता है।
145. चित्रकला के विकास हेतु कार्यरत 'क्रिएटिव आर्टिस्ट ग्रुप' नामक संस्था कहाँ पर स्थित है?
- (A) जोधपुर
- (B) भीलवाड़ा
- (C) उदयपुर
- (D) जयपुर
क्रिएटिव आर्टिस्ट ग्रुप' जयपुर में स्थित है। यह संस्था कलाकारों को मंच उपलब्ध कराती है और विभिन्न प्रदर्शनियों का आयोजन करती है। इसका उद्देश्य पारंपरिक और आधुनिक चित्रकला को आगे बढ़ाना है।
146. राजस्थान के किस चित्रकार को 'मास्टर ऑफ नेचर एंड लिविंग ऑब्जेक्टस' कहा जाता है?
- (A) परमानन्द चोयल
- (B) देवकीनन्दन शर्मा
- (C) कैलाशचन्द्र शर्मा
- (D) भूरसिंह शेखावत
देवकीनन्दन शर्मा को 'मास्टर ऑफ नेचर एंड लिविंग ऑब्जेक्टस' कहा जाता है। उनकी कला में प्रकृति, जीव-जंतु और मानव जीवन का जीवंत चित्रण देखने को मिलता है। उन्होंने प्राकृतिक दृश्यों और लोक जीवन को बारीकी से उकेरा, जिससे उनकी कला को विशेष पहचान मिली।
147. निम्न में से कौनसा युग्म असुमेलित है?चित्रकार — जिला
- (A) गोवर्धन लाल 'बाबा' — उदयपुर
- (B) रामगोपाल विजयवर्गीय — सवाई माधोपुर
- (C) जगमोहन माथोड़िया — जयपुर
- (D) वीरबाला भावसार — बाँसवाड़ा
गोवर्धन लाल 'बाबा' उदयपुर जिले के नहीं बल्कि कांकरोली (राजसमंद) जिले के निवासी थे। इन्हें 'भीलों का चितेरा' कहा जाता है और इन्होंने आदिवासी जीवन को अपनी चित्रकला में उकेरा। उनके चित्रों में भील जनजाति की सामाजिक और सांस्कृतिक झलक देखने को मिलती है।
148. लाहौर के किस प्रसिद्ध चित्रकार को बीकानेर महाराजा गजसिंह ने अपना दरबारी चित्रकार नियुक्त किया?
- (A) शाह मोहम्मद
- (B) अली राजा उस्ता
- (C) नूर मोहम्मद
- (D) हिसामुद्दीन उस्ता
बीकानेर के महाराजा गजसिंह ने लाहौर के प्रसिद्ध चित्रकार शाह मोहम्मद को दरबारी चित्रकार नियुक्त किया। उनके आने से बीकानेर चित्रकला पर मुगल प्रभाव और गहराया। इसने बीकानेर चित्रशैली को एक नई पहचान दी और इसे अन्य शैलियों से अलग स्थापित किया।
149. चित्रकला के विकास हेतु कार्यरत 'अंकन' नामक संस्था कहाँ पर स्थित है?
- (A) उदयपुर
- (B) भीलवाड़ा
- (C) सलूम्बर
- (D) अजमेर
अंकन' नामक संस्था भीलवाड़ा में स्थित है। यह संस्था स्थानीय और उभरते कलाकारों को मंच प्रदान करती है। इसके माध्यम से चित्रकला के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान हुआ है।
150. बाँसवाड़ा की रहने वाली किस कलाकार ने रेत और फेविकॉल के माध्यम से चित्र बनाने की एक नई कला का ईजाद किया है?
- (A) डॉ. वीरबाला भावसार
- (B) बद्रीलाल सोनी
- (C) भूर सिंह शेखावत
- (D) ज्योति स्वरूप शर्मा
डॉ. वीरबाला भावसार बाँसवाड़ा की प्रसिद्ध कलाकार हैं। इन्होंने रेत और फेविकॉल के प्रयोग से चित्र बनाने की एक नई कला विकसित की। इस अनोखी कला शैली ने उन्हें पहचान दिलाई और राजस्थान की आधुनिक कला में एक विशिष्ट स्थान दिया।
151. बीकानेर के कौनसे शासक मुगल कलाकारों की दक्षता से प्रभावित होकर 7 उस्ता कलाकारों को अपने साथ बीकानेर लाये थे?
- (A) महाराजा गंगासिंह
- (B) महाराजा गजसिंह
- (C) महाराजा रायसिंह
- (D) महाराजा सुजानसिंह
महाराजा रायसिंह ने मुगल कलाकारों से प्रभावित होकर 7 उस्ता कलाकारों को बीकानेर लाया। इन्हीं कलाकारों के कारण बीकानेर में उस्ता कला का विकास हुआ। यह कला सोने की पॉलिश और सजावटी कार्यों के लिए प्रसिद्ध है।
152. चित्रकला के विकास हेतु कार्यरत 'तुलिका कलाकार परिषद्' नामक संस्था कहाँ पर स्थित है?
- (A) उदयपुर
- (B) जोधपुर
- (C) बीकानेर
- (D) भीलवाड़ा
तुलिका कलाकार परिषद्' उदयपुर में स्थित है। यह संस्था स्थानीय कलाकारों को सहयोग देती है और उनकी कलाकृतियों को प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान करती है। इसके माध्यम से मेवाड़ क्षेत्र की चित्रकला को बढ़ावा मिला।
153. भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध 'झाला हवेली' राजस्थान की किस चित्रकला शैली को प्रदर्शित करती है?
- (A) जयपुर
- (B) बीकानेर
- (C) जोधपुर
- (D) कोटा
झाला हवेली' कोटा चित्रशैली का प्रतिनिधित्व करती है। यहाँ भित्ति चित्रों में शिकार के दृश्य और प्राकृतिक चित्रण प्रमुखता से दिखाई देते हैं। कोटा शैली शिकार और वन्य जीवन के जीवंत चित्रों के लिए प्रसिद्ध रही है।
154. राजस्थान का वह चित्रकार, जिसे 'भीलों का चितेरा' कहा जाता है?
- (A) परमानन्द चोयल
- (B) गोवर्धन लाल जोशी
- (C) बद्रीलाल सोनी
- (D) सौभाग्यमल गहलोत
गोवर्धन लाल जोशी को 'भीलों का चितेरा' कहा जाता है। इनका जन्म 1914 में कांकरोली (राजसमंद) में हुआ। इन्होंने भील जनजातियों के जीवन, रीति-रिवाज और संस्कृति को चित्रों में दर्शाया। उनका प्रमुख चित्र 'बारात' भीलों की परंपराओं और जीवनशैली का जीवंत चित्रण करता है।
155. भित्ति चित्रण की वह विधि, जिसमें पलस्तर की हुई भित्ति के पूर्ण रूप से सूखने के बाद उस पर चित्रकारी की जाती है?
- (A) फ्रेस्को बुनो
- (B) फ्रेस्को सेको
- (C) साधारण फ्रेस्को
- (D) उपरोक्त सभी
जब पलस्तर की हुई दीवार पूरी तरह सूख जाती है और उसके बाद चित्रकारी की जाती है, तो उसे 'फ्रेस्को सेको' कहते हैं। इसके विपरीत यदि गीली दीवार पर चित्र बनाया जाए तो उसे 'फ्रेस्को बुनो' कहा जाता है। यह विधि यूरोप से भारत आई और राजस्थान की हवेलियों व महलों में खूब उपयोग हुई।
156. किस शैली को ‘राजस्थान की सबसे परिपूर्ण शैली’ कहा जाता है?
- (A) मेवाड़ शैली
- (B) किशनगढ़ शैली
- (C) बूंदी शैली
- (D) बीकानेर शैली
किशनगढ़ शैली को राजस्थान की सबसे परिपूर्ण शैली माना जाता है। इसमें चेहरे लम्बे, नाक नुकीली, आँखें बड़ी व आधी बंद, पतली कमर और सुरुचिपूर्ण अंग विशेषताओं के रूप में मिलते हैं। इस शैली में धार्मिकता, श्रृंगार और सौंदर्य का अद्भुत मेल दिखाई देता है। निहालचंद द्वारा चित्रित 'बणी-ठणी' इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है।
157. किस चित्रशैली को ‘पक्षी शैली’ भी कहा जाता है?
- (A) जयपुर शैली
- (B) बूंदी शैली
- (C) कोटा शैली
- (D) अलवर शैली
बूंदी शैली को 'पक्षी शैली' कहा जाता है। इसका कारण यह है कि बूंदी के चित्रों में पक्षियों का बहुतायत से चित्रण मिलता है। विशेष रूप से कबूतर और बतख के चित्र बनाए गए। यह शैली प्राकृतिक दृश्यों, शिकार, वन्य जीवन और पक्षी-प्रकृति के सुंदर चित्रण के लिए प्रसिद्ध रही है।
158. नाथद्वारा शैली में सर्वाधिक चित्रित विषय कौनसा है?
- (A) रागमाला चित्र
- (B) श्रीनाथजी व कृष्ण लीलाएँ
- (C) आदमकद चित्र
- (D) युद्ध दृश्य
नाथद्वारा शैली में श्रीनाथजी और कृष्ण लीलाओं का चित्रण प्रमुखता से किया गया। इस शैली में राधा-कृष्ण, गोप-गोपियाँ, यशोदा और बालकृष्ण की बाल लीलाओं के चित्र मिलते हैं। साथ ही 'पिछवाई' चित्रों में कृष्ण के सहस्रों स्वरूप अंकित किए गए, जो इस शैली की विशिष्ट पहचान हैं।
159. ‘बणी-ठणी’ चित्र का दूसरा नाम क्या है?
- (A) भारत की मोनालिसा
- (B) राजस्थान की शोभा
- (C) नायिका शिरोमणि
- (D) चित्रों की रानी
‘बणी-ठणी’ को भारत की मोनालिसा कहा जाता है। निहालचंद द्वारा सावंत सिंह के संरक्षण में चित्रित यह चित्र किशनगढ़ शैली की उत्कृष्ट कृति है। इसमें लंबा चेहरा, नुकीली नाक, आधी बंद आँखें और आकर्षक भाव प्रस्तुत हैं। इसकी सुंदरता और रहस्यमयी मुस्कान इसे मोनालिसा से तुलना योग्य बनाती है।
160. किस शैली में रानियों और नारियों को शिकार करते हुए दर्शाया गया है?
- (A) मेवाड़ शैली
- (B) कोटा शैली
- (C) बूंदी शैली
- (D) मारवाड़ शैली
कोटा शैली में रानियों और नारियों को शिकार करते हुए चित्रित किया गया। यह इसकी विशेषता रही है। कोटा के चित्रों में शिकार के दृश्य अत्यंत प्रमुख हैं। यहाँ शिकार में स्त्रियों की सक्रिय भागीदारी भी दिखाई देती है, जो अन्य शैलियों में नहीं मिलती। इससे कोटा शैली का अलग महत्व सिद्ध होता है।
राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ – सभी भाग:
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