राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ – Rajasthan GK

राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ | Rajasthan Handicrafts Questions

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं, जो राजस्थान की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी हैं।

इन प्रश्नों में फड़ चित्रण, कांवड़, बादला, फड़, सांझी, वील, हस्तशिल्प/कला, उस्ता कला, उस्ता कैमल हाइड केन्द्र, बेल बूटे की छपाई आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ RPSC, RSMSSB, RSSB, REET, Patwar, Police, LDC, Teacher तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। प्रत्येक प्रश्न के साथ सही उत्तर और explanation दिया गया है, जिससे आपकी Rajasthan GK की तैयारी और मजबूत होगी।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
  • कुल प्रश्न: 20

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1. जोधपुर का प्रसिद्ध बादला निम्नलिखित में से क्या है?

  • (A) लकड़ी का मंदिर
  • (B) जस्ते से बनी पानी की बोतल
  • (C) जरी की साड़ी
  • (D) टेराकोटा की मूर्तियां

बादला जोधपुर की पारंपरिक कला है, जिसमें जस्ते से बनी पानी की बोतलें प्रसिद्ध हैं। यह धातु-शिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है। राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों की अन्य कलाएँ भी उल्लेखनीय हैं – मोलेला (राजसमंद) टेराकोटा मूर्तियों के लिए, बेवाण (बस्सी, चित्तौड़गढ़) लकड़ी (फाष्ट) मंदिरों के लिए तथा जयपुर जरी की साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। इस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र ने अपनी अलग पहचान बनाई।

2. फड़ चित्रण के लिए जाना जाता है।

  • (A) शाहपुरा
  • (B) चित्तौड़
  • (C) नाथद्वारा
  • (D) किशनगढ़

फड़ चित्रण राजस्थान की प्रसिद्ध लोककला है, जो मुख्यतः शाहपुरा (भीलवाड़ा) क्षेत्र में विकसित हुई। इसमें बड़े कपड़े पर धार्मिक और पौराणिक कथाएँ चित्रित की जाती हैं। यह कला चलित मंदिर के रूप में जानी जाती है और मेलों व जागरणों में सुनाई जाने वाली कहानियों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इसके प्रमुख कलाकारों में श्रीलाल जोशी और पार्वती जोशी का नाम लिया जाता है।

3. कांवड़' बनाने के लिए कौन प्रसिद्ध है?

  • (A) उस्ताद लालचन्द
  • (B) मांगीलाल मिस्त्री
  • (C) साहिबराम
  • (D) चम्पालाल

राजस्थान में कांवड़ बनाने की परंपरा विशेष रूप से मांगीलाल मिस्त्री (जांगिड़ समाज, द्वारिका) से जुड़ी है। कांवड़ लकड़ी से बने छोटे-छोटे मंदिर जैसे दिखते हैं, जिनमें धार्मिक कथाओं और देवी-देवताओं की झांकियाँ चित्रित होती हैं। यह कला लोक आस्था से गहराई से जुड़ी है और धार्मिक यात्राओं तथा पूजा-अर्चना में प्रयुक्त होती है।

4. लप्पा, लप्पी, किरण और गोखरू क्या है?

  • (A) राजस्थानी फिल्म 'सासु माँ' में किरदार
  • (B) गोटा की विभिन्न किस्में
  • (C) शेरवानी के नाम
  • (D) अधिक उपज देने वाले कीट

लप्पा, लप्पी, किरण और गोखरू राजस्थान की पारंपरिक सजावटी कला गोटा की विभिन्न किस्में हैं। गोटे का प्रयोग विशेष रूप से महिलाओं के वस्त्रों में किनारों और डिजाइनों को सुंदर बनाने के लिए किया जाता है। जयपुर, जोधपुर और अन्य क्षेत्रों में गोटे का व्यवसाय और कला अत्यधिक लोकप्रिय है। यह राजस्थान की लोकवेशभूषा की शान मानी जाती है।

5. किस लोक कला के निर्माण का पुश्तैनी व्यवसाय केवल चितौड़गढ़ जिले के ग्राम बस्सी में ही देखा जाता है?

  • (A) फड़
  • (B) सांझी
  • (C) वील
  • (D) कांवड़

चितौड़गढ़ जिले के बस्सी गाँव में कांवड़ निर्माण का पुश्तैनी व्यवसाय विशेष रूप से खेराड़ी जाति के लोगों द्वारा किया जाता है। कांवड़ लकड़ी का बना हुआ चल मंदिर है, जिसमें देवी-देवताओं और धार्मिक कथाओं के चित्र बनाए जाते हैं। इसे भक्तजन यात्रा या धार्मिक अवसरों पर अपने साथ ले जाते हैं। यह कला राजस्थान की अनूठी धार्मिक परंपरा को दर्शाती है।

6. राजस्थान सरकार द्वारा हस्तशिल्प/कला के क्षेत्र में राज्य स्तरीय पुरस्कार विजेता को कितनी राशि का पुरस्कार दिया जाता है?

  • (A) 5000
  • (B) 25000
  • (C) 50000
  • (D) 20000

राजस्थान सरकार द्वारा कला एवं हस्तशिल्प के क्षेत्र में राज्य स्तरीय पुरस्कार विजेताओं को 25,000 रुपये की राशि प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त भारत सरकार भी राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार देती है जिसकी राशि 50,000 रुपये होती है। हाल ही में राज्य में "राजस्थान हस्तशिल्प रत्न पुरस्कार" की शुरुआत की गई है, जिसकी राशि 1 लाख रुपये तक बढ़ाई गई है।

7. उस्ता कला' के लिए 'उस्ता कैमल हाइड केन्द्र' की स्थापना 1975 में कहाँ की गई थी?

  • (A) जैसलमेर
  • (B) बीकानेर
  • (C) नागौर
  • (D) बाड़मेर

राजस्थान की प्रसिद्ध उस्ता कला विशेष रूप से बीकानेर से जुड़ी है। इस कला में ऊँट की खाल पर सोने और रंगों से नक्काशी एवं चित्रण किया जाता है। इसके विकास हेतु 1975 में राजस्थान लघु उद्योग निगम द्वारा बीकानेर में उस्ता कैमल हाइड ट्रेनिंग केन्द्र स्थापित किया गया। यह कला बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।

8. भोगलियां एवं कुलाबो क्या है?

  • (A) तलवार के नाम
  • (B) नृत्यों के नाम
  • (C) चित्रों के नाम
  • (D) बर्तनों के नाम

भोगलियां और कुलाबो राजस्थान की पारंपरिक तलवारों के नाम हैं। विशेष रूप से सिरोही जिला तलवार बनाने की कला के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहाँ की तलवारें मजबूती और धार के लिए जानी जाती थीं। सिरोही की अन्य प्रसिद्ध तलवारों में रोटी तलवार, सकिला, नालदार, लहरिया, मोती लहर आदि शामिल हैं। वर्तमान में भी महेन्द्र लोहार इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।

9. राजस्थान का कौनसा क्षेत्र बेल बूटे की छपाई की परंपरागत कला के लिए जाना जाता है?

  • (A) सांगानेर
  • (B) बस्सी
  • (C) बगरू
  • (D) मोलेला

बगरू (जयपुर) क्षेत्र पारंपरिक हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ लकड़ी के ठपों से बेल-बूटे, फूल-पत्तियाँ और पशु-पक्षियों के डिज़ाइन छापे जाते हैं। बगरू की मिट्टी और प्राकृतिक रंग इसके प्रिंट को खास बनाते हैं। बैगर (काला-लाल) छपाई यहाँ की विशेषता है। बगरू प्रिंट को 2012 में GI टैग मिला। रामकिशोर छीपा को इसके लिए 2006 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ।

10. किस वर्ष में राजस्थान की पहली हस्तशिल्प नीति जारी की गई?

  • (A) 2018
  • (B) 2021
  • (C) 2022
  • (D) 2019

राजस्थान सरकार ने पहली हस्तशिल्प नीति 17 सितम्बर 2022 को जारी की। इसका मुख्य उद्देश्य हस्तशिल्पियों को बेहतर मार्केटिंग सुविधाएँ, विलुप्त हो रही परंपरागत कलाओं को पुनर्जीवित करना और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। इस नीति के माध्यम से हस्तशिल्प को राज्य की अर्थव्यवस्था और संस्कृति दोनों से जोड़कर बढ़ावा दिया गया।

11. जाजम / आजम छपाई प्रसिद्ध है।

  • (A) बाड़मेर
  • (B) चितौड़
  • (C) दौसा
  • (D) जोधपुर

जाजम चितौड़गढ़ की प्रसिद्ध कला है। यह सूती मोटे धागे की रेजा या रेजी द्वारा बनी मोटी दरी होती है, जिस पर हाथ से रंगीन छपाई की जाती है। इसे विशेष रूप से मांगलिक और धार्मिक अवसरों पर जमीन पर बिछाया जाता है। जाजम में सामान्यतः लाल और हरे रंग का प्रयोग होता है। यह कला राजस्थान की लोक परंपरा और सामूहिक सामाजिक जीवन का प्रतीक मानी जाती है।

12. जयपुर में मीनाकारी की कला महाराजा मानसिंह प्रथम द्वारा कहाँ से लाई गई?

  • (A) चीन
  • (B) लाहौर
  • (C) बलूचिस्तान
  • (D) बंगाल

जयपुर में प्रसिद्ध मीनाकारी की कला महाराजा मानसिंह प्रथम द्वारा लाहौर से लाई गई थी। यह कला सोने, चाँदी और तांबे पर रंगीन पच्चीकारी करके की जाती है। मीनाकारी का प्रमुख प्रयोग आभूषणों, पूजा सामग्री और सजावटी वस्तुओं में किया जाता है। जयपुर की मीनाकारी विश्व प्रसिद्ध है और इसे शाही संरक्षण मिलने के कारण यह कला और भी विकसित हुई।

13. मोती भारत' किस जिले में पारंपरिक कढ़ाई का नाम है?

  • (A) पाली
  • (B) सीकर
  • (C) बूंदी
  • (D) जालौर

मोती भारत जालौर जिले की प्रसिद्ध पारंपरिक कढ़ाई है। इसकी उत्पत्ति गुजरात से मानी जाती है और यह मुख्यतः मोची और काठी जाति की महिलाओं द्वारा की जाती है। इस कढ़ाई में मोतियों का प्रयोग करके आकर्षक डिज़ाइन तैयार किए जाते हैं। सीता बेन इस कला की प्रमुख कलाकार रही हैं। यह कला जालौर की लोक संस्कृति और महिलाओं की सृजनशीलता को दर्शाती है।

14. सूती या रेशमी कपड़े पर बादले से छोटी-छोटी बिंदकी की कढ़ाई कहलाती है-

  • (A) मुकेश का काम
  • (B) पेचवर्क
  • (C) चटापटी का कार्य
  • (D) ब्लॉक प्रिंटिंग

सूती या रेशमी कपड़े पर बादले (पतले तार) से छोटी-छोटी बिंदकी की कढ़ाई को मुकेश का काम कहा जाता है। यह कला विशेष रूप से दुपट्टों, चुनरियों और महिलाओं के परिधानों पर की जाती है। इसमें महीनता और चमक बहुत महत्वपूर्ण होती है। यह काम राजस्थान की पारंपरिक कढ़ाई शैलियों में से एक है, जो आज भी लोकप्रिय है।

15. जरी का काम सूरत से जयपुर किसके समय लाया गया?

  • (A) महाराज राम सिंह द्वितीय
  • (B) सवाई प्रतापसिंह
  • (C) सवाई जयसिंह
  • (D) सवाई ईश्वरी सिंह

जयपुर में जरी का काम विशेष रूप से सवाई जयसिंह के समय सूरत से लाया गया। जरी कार्य में सोने और चाँदी के तारों से सुंदर कढ़ाई की जाती है। यह कला विशेष रूप से राजसी परिधानों, शादी के वस्त्रों और धार्मिक कपड़ों में उपयोग की जाती थी। जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में जरी कला का आज भी महत्वपूर्ण स्थान है।

16. गलीचे निर्माण के लिए प्रसिद्ध है-

  • (A) जयपुर, बीकानेर
  • (B) जैसलमेर, बाड़मेर
  • (C) टोंक, कोटा
  • (D) भीलवाड़ा, अजमेर

राजस्थान में गलीचा निर्माण के लिए मुख्यतः जयपुर और बीकानेर प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा टोंक में भी गलीचे बनाने का कार्य होता है। रियासती काल में बीकानेर जेल में बनने वाले गलीचे अत्यधिक लोकप्रिय थे। जयपुर में बने गलीचे अपनी कलात्मकता और गुणवत्ता के कारण आज भी देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। यह कला हाथ से बुनाई और डिज़ाइन पर आधारित होती है।

17. लहरिया व पोमचा के लिए जाना जाता है-

  • (A) जयपुर
  • (B) बाड़मेर
  • (C) बीकानेर
  • (D) उदयपुर

लहरिया और पोमचा के लिए जयपुर प्रसिद्ध है। लहरिया में कपड़े को मोड़कर उस पर तिरछी धारियों वाली रंगाई की जाती है, जिससे लहरों जैसा सुंदर डिज़ाइन बनता है। पोमचा एक विशेष प्रकार का दुपट्टा होता है जिसे मांगलिक अवसरों पर महिलाएँ पहनती हैं। यह कला राजस्थान की रंगाई और छपाई परंपरा की प्रमुख पहचान है।

18. फड़ चित्रण में सिद्धहस्त है-

  • (A) शाहपुरा का जोशी परिवार
  • (B) प्रतापगढ़ का सोनी परिवार
  • (C) जयपुर का शेखावत परिवार
  • (D) नाथद्वारा का जांगिड़ परिवार

फड़ चित्रण में शाहपुरा का जोशी परिवार विशेष रूप से प्रसिद्ध है। फड़ एक चलित मंदिर के रूप में कपड़े पर पौराणिक कथाओं और देवताओं की झांकी प्रस्तुत करता है। यह कला धार्मिक अनुष्ठानों और मेलों में कहानी कहने की परंपरा से जुड़ी हुई है। जोशी परिवार ने पीढ़ियों तक इस कला को जीवित रखा और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

19. प्रतापगढ़ का सोनी परिवार प्रसिद्ध है -

  • (A) मीनाकारी के लिए
  • (B) मुरादाबादी के कार्य के लिए
  • (C) थेवा कला के लिए
  • (D) कोफ्तगिरी के लिए

प्रतापगढ़ का सोनी परिवार विशेष रूप से थेवा कला के लिए प्रसिद्ध है। थेवा कला में रंगीन काँच पर सोने और चाँदी की नक्काशी करके सुंदर चित्र बनाए जाते हैं। इसमें बेल्जियम के रंगीन काँच का प्रयोग किया जाता है। यह कला मीनाकारी का ही एक प्रकार है लेकिन इसका स्वरूप अलग और अनूठा है। आज यह कला प्रतापगढ़ की पहचान बन चुकी है।

20. कृषिगत औजारों के लिए प्रसिद्ध स्थान हैं-

  • (A) गजसिंहपुर (गंगानगर)
  • (B) नागौर
  • (C) झोटवाड़ा (जयपुर)
  • (D) उक्त सभी

राजस्थान में कृषिगत औजारों के निर्माण के लिए कई स्थान प्रसिद्ध हैं। गजसिंहपुर (गंगानगर) में हल और अन्य कृषि उपकरण बनते हैं, नागौर में कृषि उपकरणों की लोहे की कारीगरी विशेष रूप से प्रसिद्ध है तथा झोटवाड़ा (जयपुर) भी इस क्षेत्र में जाना जाता है। इसलिए सही उत्तर "उक्त सभी" है क्योंकि ये सभी स्थान कृषिगत औजारों के लिए उल्लेखनीय हैं।

❓ Question / Doubt / Correction?

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