राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ (Handicrafts of Rajasthan) – Part 10
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में मीनाकारी, बगरू प्रिन्ट, अजरख प्रिन्ट, पिछवाई कला, मुरादाबादी काम, कुन्दनकला, जरदौजी कला, तहनिशा, नांदणा, लूगड़ा आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
- कुल प्रश्न: 20
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(Since 2021)
181. राजस्थान में छाता निर्माण व रेडियो के निर्माण के लिए जाना जाने वाला स्थान है?
- (A) फालना (पाली)
- (B) रामसर (बीकानेर)
- (C) लाडनूं (नागौर)
- (D) व्यावर
फालना (पाली जिला) छाता निर्माण और रेडियो निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के कारीगर पारंपरिक रूप से छाते और रेडियो उपकरण बनाने में निपुण रहे हैं।
182. मरोड़ी शाह कलम, गुलाब छींट, मोर छींट, ईरानी व फरमा बिदर आदि किस हस्तकला के प्रकार हैं?
- (A) बगरू प्रिन्ट
- (B) अजरख प्रिन्ट
- (C) पिछवाई कला
- (D) मुरादाबादी काम
ये सभी प्रकार मुरादाबादी काम से जुड़े हैं। इसमें पीतल और अन्य धातुओं पर बारीक नक्काशी और कलात्मक डिजाइन बनाई जाती है। जयपुर इस कला का प्रमुख केंद्र है।
183. अलवर का कौनसा स्थान संगमरमर की मूर्तियों व अन्य सजावटी कलाकृतियों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है?
- (A) चिकानी गाँव
- (B) नीमराना
- (C) किशोरी गाँव
- (D) मातोर गाँव
अलवर जिले का किशोरी गाँव संगमरमर की मूर्तियों और सजावटी कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के कारीगर संगमरमर पर बारीक नक्काशी करके सुंदर कलाकृतियाँ बनाते हैं।
184. राजस्थान में किस स्थान की 'कठपुतली कला' प्रसिद्ध है?
- (A) बीकानेर
- (B) जयपुर
- (C) कोटा
- (D) चित्तौड़गढ़
जयपुर कठपुतली कला के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कठपुतली बनाने और नचाने की परंपरा लंबे समय से है। इस कला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में देवीलाल सामर का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। नट (भाट) जाति इस कला में विशेष दक्षता रखती है।
185. राजस्थान के जरी का काम (जरदीजी) कहाँ से जयपुर लाया गया?
- (A) बनारस
- (B) लाहौर
- (C) सूरत
- (D) ढ़ाका
राजस्थान में जरी का काम (जरदीजी) जयपुर में सूरत से लाया गया। यह काम धागों में सोने-चाँदी की बारीक पत्तियों को लपेटकर किया जाता है। इसका प्रयोग विशेष रूप से दुल्हन के कपड़ों और शाही परिधानों को सजाने में किया जाता है।
186. दूरी, कटारों की मूठ, डिब्बो, पानदान, उगालदान, हुक्कों व लैम्मों आदि पर किया जाने वाला वह काम, जिसमें डिजाइन को गहरा खोद कर उसमें पतला तार भर दिया जाता है, क्या कहलाता है?
- (A) कुन्दनकला
- (B) मीनाकारी
- (C) जरदौजी कला
- (D) तहनिशा
इस प्रकार का कार्य तहनिशा कहलाता है। इसमें धातु की वस्तुओं जैसे तलवार की मूठ, पानदान या हुक्के पर गहरी नक्काशी करके उनमें पतले तार भरे जाते हैं। यह काम राजस्थान में विशेष रूप से शाही परिवारों के संरक्षण में विकसित हुआ।
187. दौसा जिले का कौनसा गाँव 'तिरंगा' निर्माण के लिए प्रसिद्ध है?
- (A) लवाण
- (B) आलूदा
- (C) महवा
- (D) लालसौट
दौसा जिले का आलूदा गाँव तिरंगा निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। आज़ादी की पहली सुबह 15 अगस्त 1947 को लालकिले पर फहराया गया तिरंगा इसी गाँव के बुनकरों ने तैयार किया था। यह गाँव आज भी अपने वस्त्र निर्माण कौशल के लिए जाना जाता है।
188. नांदणा' क्या है?
- (A) आदिवासियों का वस्त्र
- (B) लाख की चूड़ियाँ
- (C) स्त्रियों की जूतियाँ
- (D) गोटे का प्रकार
नांदणा आदिवासियों का पारंपरिक वस्त्र है। यह विशेष रूप से आदिवासी समुदाय की पहचान का प्रतीक है। इसे खास अवसरों और उत्सवों पर पहना जाता है और इसमें स्थानीय डिज़ाइन और पारंपरिक कढ़ाई का प्रयोग किया जाता है।
189. राजस्थान में तहनिशा के काम के लिए प्रसिद्ध स्थान हैं?
- (A) अलवर, उदयपुर
- (B) जयपुर, जोधपुर
- (C) बीकानेर, चुरू
- (D) बाड़मेर, जैसलमेर
अलवर और उदयपुर तहनिशा कार्य के लिए प्रसिद्ध हैं। अलवर के तलवारसाज और उदयपुर के सिकलीगर इस काम में निपुण रहे हैं। यहाँ धातु की वस्तुओं पर गहरी नक्काशी करके उनमें महीन तार जड़ा जाता है।
190. आदिवासियों के वस्त्र 'नांदणा' निर्माण के लिए प्रसिद्ध स्थान है?
- (A) सलूम्बर
- (B) शाहपुरा
- (C) आकोला (चित्तौड़गढ़)
- (D) सोजत (पाली)
शाहपुरा (भीलवाड़ा) आदिवासियों के नांदणा वस्त्र निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। इसमें ब्लॉक प्रिंटिंग तकनीक का प्रयोग किया जाता है और डिज़ाइनों में फूल-पत्तियाँ, जानवर और लोक आकृतियाँ अंकित की जाती हैं।
191. फड़ वाचन / गायन करने वाला कलाकार कहलाता है?
- (A) जोशी
- (B) पटेल
- (C) भाट
- (D) भोपा
फड़ वाचन और गायन करने वाले कलाकार को भोपा कहा जाता है। फड़ एक चित्रित कपड़ा होता है जिस पर लोकदेवताओं की कथाएँ चित्रित रहती हैं। भोपा इसे गाते और सुनाते हैं, जबकि उनकी पत्नी (भोपिन) वाद्य बजाती है।
192. सीकर के 'पाटोदा' का लुगड़ा प्रसिद्ध है, लूगड़ा पहनावे की किस श्रेणी का वस्त्र है?
- (A) पुरुषों की धोती
- (B) पगड़ी
- (C) ओढ़नी
- (D) घाघरा
लूगड़ा एक प्रकार की ओढ़नी है। यह विशेष रूप से बंधेज शैली का परिधान है, जो सीकर के पाटोदा और झुंझुनूं के मुकुंदगढ़ क्षेत्र में प्रसिद्ध है। इसे महिलाएँ विवाह और मांगलिक अवसरों पर पहनती हैं।
193. आर. बी. रायजादा किस कला के सिद्धहस्त कलाकार हैं?
- (A) बातिक कला
- (B) कुन्दन कला
- (C) मीनाकारी
- (D) कोफ्तगिरी
आर. बी. रायजादा बातिक कला के सिद्धहस्त कलाकार हैं। बातिक कला में कपड़े पर मोम की परत लगाकर रंगाई की जाती है, जिससे सुंदर डिज़ाइन और आकृतियाँ उभरकर आती हैं।
194. राजस्थान में 'कुंदन कला' के लिए प्रसिद्ध शहर है?
- (A) कोटा
- (B) अलवर
- (C) अजमेर
- (D) जयपुर
जयपुर कुंदन कला के लिए सबसे प्रसिद्ध है। कुंदन कला में कीमती और अर्ध-कीमती पत्थरों को सोने की परत पर जड़कर आभूषण बनाए जाते हैं। जयपुर की कुंदन ज्वेलरी आज भी विश्वभर में प्रसिद्ध है।
195. जैन साधुओं के काम आने वाले लकड़ी के पात्र 'पातरे / तिरपणी' किस स्थान पर बनाये जाते हैं?
- (A) नापासर (बीकानेर)
- (B) रतनगढ़ (चुरू)
- (C) पीपाड़ सिटी (जोधपुर)
- (D) देसूरी (पाली)
जैन साधुओं के काम आने वाले लकड़ी के पात्र 'पातरे / तिरपणी' पीपाड़ सिटी (जोधपुर) में बनाए जाते हैं। ये पात्र पारंपरिक रूप से जैन साधुओं की दिनचर्या का हिस्सा होते हैं और भोजन तथा पानी ग्रहण करने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। इनका निर्माण पूरी तरह से हाथ से किया जाता है और इन पर हल्की नक्काशी भी की जाती है।
196. वर्ष 2021 में राजस्थान बुनकर रत्न पुरस्कार किसे प्रदान किया गया?
- (A) बाबूलाल मारोटिया
- (B) गंगासिंह गौतम
- (C) किशोरीलाल
- (D) पवन जाँगिड़
वर्ष 2021 का राजस्थान बुनकर रत्न पुरस्कार गंगासिंह गौतम को प्रदान किया गया। यह सम्मान उन बुनकरों को दिया जाता है जिन्होंने पारंपरिक बुनाई को आधुनिक समय में भी जीवित रखा है और स्थानीय शिल्पकला को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
197. राजस्थान में खेल का सामान बनाने के लिए प्रसिद्ध स्थान है?
- (A) सीकर
- (B) नागौर
- (C) राजसमंद
- (D) हनुमानगढ़
हनुमानगढ़ खेल का सामान बनाने के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ फुटबॉल, क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक, और अन्य खेल उपकरण बनाए जाते हैं। इन वस्तुओं की आपूर्ति राजस्थान के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी की जाती है।
198. लकड़ी से बनी तलवारनुमा आकृति, जो नृत्य या नाट्य कला में काम में ली जाती है, क्या कहलाती है?
- (A) बांकड़ी
- (B) वील
- (C) खांडे
- (D) कलाबतू
नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों में प्रयुक्त लकड़ी की तलवारनुमा आकृति 'खांडे' कहलाती है। इनका प्रयोग विशेष रूप से लोकनाट्य और पारंपरिक नृत्यों में किया जाता है, जिससे दृश्य अधिक रोचक और जीवंत हो जाता है।
199. राजस्थान में पशुओं के शरीर पर विभिन्न प्रकार के निशान या दाग लगाने की परम्परा है, पशुओं के शरीर पर बने ये दाग के निशान क्या कहलाते हैं?
- (A) गोड़लिया
- (B) हीड़
- (C) नक्शी
- (D) मांडणा
राजस्थान में पशुओं के शरीर पर दाग के निशान 'गोड़लिया' कहलाते हैं। यह परंपरा पहचान और स्वामित्व बताने के लिए होती थी। ग्रामीण समाज में गोड़लिया पशुपालन की एक खास पहचान है।
200. ऊनी बरड़ी, पट्टू, शॉल व लोई के लिए प्रसिद्ध है-
- (A) जयपुर
- (B) बाड़मेर
- (C) जैसलमेर
- (D) बीकानेर
बाड़मेर ऊनी बरड़ी, पट्टू, शॉल और लोई के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की बुनाई की शैली पारंपरिक है और ठंडे मौसम के लिए उपयुक्त गर्म वस्त्र तैयार किए जाते हैं।
राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ – सभी भाग:
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