राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ (Handicrafts of Rajasthan) – Part 11
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में उस्ता कला, कोफ्तगिरी, थेवा कला, कारचोब, फड़चित्र, मथैरण कला, कुंदन, मीनाकारी, पिछवाई पेंटिंग' नाथद्वारा (राजसमंद), तीर-कमान निर्माण आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
- कुल प्रश्न: 20
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(Since 2021)
201. ऊँट की खाल पर स्वर्णिम नक्काशी का कार्य किस नाम से किया जाता है?
- (A) कारचोब
- (B) फड़चित्र
- (C) मथैरण कला
- (D) उस्ता कला
ऊँट की खाल पर स्वर्णिम नक्काशी का कार्य 'उस्ता कला' कहलाता है। यह कला बीकानेर में अत्यधिक प्रसिद्ध है और इसमें स्वर्णिम रंगों से बेहद बारीक डिज़ाइन बनाए जाते हैं।
202. किस हस्तशिल्पी को वर्ष 2021 का राजस्थान हस्तशिल्प रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया?
- (A) बाबूलाल मारोटिया
- (B) अयाज मोहम्मद
- (C) गंगासिंह गौतम
- (D) इकराम अहमद खान
वर्ष 2021 का राजस्थान हस्तशिल्प रत्न पुरस्कार बाबूलाल मारोटिया को प्रदान किया गया। यह सम्मान उन कलाकारों को दिया जाता है जिन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प कला को जीवित रखने में असाधारण योगदान दिया।
203. दुर्गासिंह एवं कृपालसिंह शेखावत किस क्षेत्र से सम्बद्ध रहे?
- (A) उस्ता कला, मीनाकारी
- (B) मीनाकारी, ब्ल्यू पॉटरी
- (C) ब्ल्यू पॉटरी, थेवा कला
- (D) मीनाकारी, मूर्तिकला
दुर्गासिंह मीनाकारी से और कृपालसिंह शेखावत ब्ल्यू पॉटरी से सम्बद्ध रहे। इन दोनों कलाकारों ने राजस्थान की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई।
204. धातु से बनी हुई वस्तुओं पर सोने के पतले तारों की जड़ाई को कहते हैं-
- (A) उस्ता कला
- (B) कोफ्तगिरी
- (C) कुंदन
- (D) मीनाकारी
धातु की वस्तुओं पर सोने के पतले तारों की जड़ाई की कला को कोफ्तगिरी कहा जाता है। यह कला मूल रूप से दमिश्क से आई और राजस्थान में लोकप्रिय हुई। उदयपुर की कोफ्तगिरी कला को 1 अगस्त 2023 को GI Tag प्राप्त हुआ है।
205. वह स्थान, जो अपने मृदा शिल्प (टेराकोटा) के लिए प्रसिद्ध है-
- (A) जावर (सलूम्बर)
- (B) शाहपुरा (भीलवाड़ा)
- (C) मोलेला (राजसमंद)
- (D) टांकला (नागौर)
राजसमंद का मोलेला गाँव मृदा शिल्प (टेराकोटा) के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कलाकार मिट्टी से देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तथा लोक कलाकृतियाँ बनाते हैं। विशेष बात यह है कि यहाँ की कला पूरी तरह हाथों से आकार दी जाती है, सांचों का प्रयोग कम होता है। इस कला को 2009 में GI Tag भी प्राप्त हुआ है।
206. राजस्थान में कौनसा स्थान 'नमदा' उत्पादन के लिये प्रसिद्ध है?
- (A) जयपुर
- (B) कोटा
- (C) टॉक
- (D) बून्दी
टोंक नमदा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। ऊन को कूटकर व दबाकर चादर जैसी वस्त्र सामग्री बनाई जाती है, जिसे 'नमदा' कहते हैं। यह सर्दी से बचाव के लिए उपयोगी होता है और टोंक में इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है।
207. पिछवाई पेन्टिंग' का सम्बन्ध निम्न में से किस स्थान से है-
- (A) नाथद्वारा
- (B) व्यावर
- (C) किशनगढ़
- (D) मोलेला
पिछवाई पेंटिंग' नाथद्वारा (राजसमंद) से जुड़ी हुई है। यह चित्रकारी मुख्य रूप से श्रीनाथजी के मंदिरों में की जाती है। कपड़े पर रंगों से बनाई जाने वाली पिछवाई विशेष धार्मिक अवसरों पर मंदिर की दीवारों को सजाने के लिए उपयोग की जाती है।
208. राजस्थान का कौनसा कलाकार 'उस्ता कला का जादूगर' कहलाता है?
- (A) हिसामुद्दीन उस्ता
- (B) कादर बख्श उस्ता
- (C) इलाही बख्श उस्ता
- (D) मोहम्मद हनीफ उस्ता
हिसामुद्दीन उस्ता 'उस्ता कला का जादूगर' कहलाते हैं। इनका जन्म 16 नवम्बर 1914 को बीकानेर के दुलमेरा में हुआ। इनके पिता मुराद बख्श भी श्रेष्ठ कलाकार थे। हिसामुद्दीन उस्ता ने बीकानेर स्थित 'उस्ता केमल हाइड ट्रेनिंग सेंटर' में निदेशक के रूप में भी कार्य किया।
209. चन्दूजी का गढ़ा तथा बोड़ीगामा' स्थान किसके लिए विख्यात है?
- (A) तीर-कमान निर्माण के लिए
- (B) मीनाकारी के लिए
- (C) कुन्दन कला के लिए
- (D) जाजम छपाई के लिए
चन्दूजी का गढ़ा (बांसवाड़ा) और बोड़ीगामा (डूंगरपुर) तीर-कमान निर्माण के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ आज भी परंपरागत शैली में धनुष-बाण बनाए जाते हैं, जिन्हें ग्रामीण खेलों और सांस्कृतिक आयोजनों में प्रयोग किया जाता है।
210. गोपाल सैनी का सम्बन्ध राजस्थान की किस हस्तकला से है?
- (A) टेराकोटा
- (B) काष्ठ कला
- (C) थेवा कला
- (D) ब्ल्यू पॉटरी
गोपाल सैनी ब्ल्यू पॉटरी के प्रसिद्ध कलाकार हैं। इस कला में चीनी मिट्टी पर नीले रंग की सुंदर चित्रकारी की जाती है। गोपाल सैनी ने ब्ल्यू पॉटरी को नई पहचान दिलाई और अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में इसे प्रस्तुत किया।
211. भोगलियां एवं कुलाबो क्या है?
- (A) तलवार के नाम
- (B) नृत्यों के नाम
- (C) चित्रों के नाम
- (D) बर्तनों के नाम
भोगलियां और कुलाबो राजस्थान की पारंपरिक तलवारों के नाम हैं। विशेष रूप से सिरोही जिला तलवार बनाने की कला के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहाँ की तलवारें मजबूती और धार के लिए जानी जाती थीं। सिरोही की अन्य प्रसिद्ध तलवारों में रोटी तलवार, सकिला, नालदार, लहरिया, मोती लहर आदि शामिल हैं। वर्तमान में भी महेन्द्र लोहार इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।
212. राजस्थान का कौनसा क्षेत्र बेल बूटे की छपाई की परंपरागत कला के लिए जाना जाता है?
- (A) सांगानेर
- (B) बस्सी
- (C) बगरू
- (D) मोलेला
बगरू (जयपुर) क्षेत्र पारंपरिक हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ लकड़ी के ठपों से बेल-बूटे, फूल-पत्तियाँ और पशु-पक्षियों के डिज़ाइन छापे जाते हैं। बगरू की मिट्टी और प्राकृतिक रंग इसके प्रिंट को खास बनाते हैं। बैगर (काला-लाल) छपाई यहाँ की विशेषता है। बगरू प्रिंट को 2012 में GI टैग मिला। रामकिशोर छीपा को इसके लिए 2006 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ।
213. किस वर्ष में राजस्थान की पहली हस्तशिल्प नीति जारी की गई?
- (A) 2018
- (B) 2021
- (C) 2022
- (D) 2019
राजस्थान सरकार ने पहली हस्तशिल्प नीति 17 सितम्बर 2022 को जारी की। इसका मुख्य उद्देश्य हस्तशिल्पियों को बेहतर मार्केटिंग सुविधाएँ, विलुप्त हो रही परंपरागत कलाओं को पुनर्जीवित करना और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। इस नीति के माध्यम से हस्तशिल्प को राज्य की अर्थव्यवस्था और संस्कृति दोनों से जोड़कर बढ़ावा दिया गया।
214. भरत', 'सूफ', 'हुरम जी', 'आरी' किससे संबंधित है-
- (A) पीतल नक्कासी
- (B) गलीचा व दरी उद्योग
- (C) ब्ल्यू पॉटरी
- (D) कढ़ाई व पैचवर्क
भरत, सूफ, हुरम जी और आरी कढ़ाई व पैचवर्क से संबंधित शब्द हैं। राजस्थान में कढ़ाई की विविध शैलियाँ प्रचलित हैं, जिनमें सोने-चाँदी के तारों से 'जरदोजी', धागों से चित्रकारी और रंग-बिरंगे डिजाइनों का उपयोग होता है।
215. राजसमन्द जिले में स्थित मोलेला गाँव किस लोक कला के लिए विख्यात है?
- (A) मृणमय मूर्तिकला
- (B) काष्ठ कला
- (C) वस्त्र छपाई
- (D) हस्तनिर्मित कागज
राजसमंद का मोलेला गाँव मृणमय मूर्तिकला (टेराकोटा) के लिए विख्यात है। यहाँ के कलाकार मिट्टी से खासकर देवनारायण जी की मूर्तियाँ बनाते हैं। मोहनलाल कुम्हार और खेमराज जैसे कलाकार इसी परंपरा से जुड़े रहे हैं।
216. राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मोहनलाल किस शिल्प कला से संबंधित हैं?
- (A) थेवा कला
- (B) उस्ता कला
- (C) बंधेज कला
- (D) मोलेला मृण्मूर्ति कला
मोहनलाल 'मोलेला मृण्मूर्ति कला' (टेराकोटा) के प्रसिद्ध कलाकार हैं। इन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है। मोलेला की इस कला में मिट्टी से देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनाई जाती हैं और यहाँ विशेष रूप से भगवान देवनारायण की मूर्तियाँ अधिक प्रसिद्ध हैं।
217. टेराकोटा मूर्तियाँ निम्नलिखित से किससे बनायी जाती है?
- (A) सिरेमिक जैसी से
- (B) लकड़ी
- (C) अयस्क से
- (D) प्लास्टिक
टेराकोटा मूर्तियाँ मिट्टी से बनाई जाती हैं, जो पकाकर कठोर की जाती है और सिरेमिक जैसी लगती है। राजस्थान में मोलेला (राजसमंद) और बू-नरावता (नागौर) जैसे स्थान इस कला के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ देवी-देवताओं व सांस्कृतिक कथाओं से जुड़ी मूर्तियाँ बनती हैं। यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और ग्रामीण जीवन में इसका धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व है।
218. श्री लाल जोशी का एक प्रमुख चित्रकार है-
- (A) चित्रकला
- (B) पिछवाई
- (C) माण्डणा
- (D) पट चित्रण फड़
श्रीलाल जोशी फड़ चित्रण (पट चित्रण) के प्रमुख कलाकार थे। इनका जन्म मार्च 1931 में शाहपुरा (भीलवाड़ा) में हुआ और 2018 में इनका निधन हुआ। इन्हें 2006 में पद्मश्री, 2007 में शिल्पगुरु सम्मान मिला। देवनारायण जी पर बनाई गई फड़ की वजह से ये विश्वप्रसिद्ध हुए और 1992 में भारत सरकार ने उन पर डाक टिकट भी जारी किया।
219. राजस्थान का कौन सा शहर 'अजरक प्रिंट' के लिए प्रसिद्ध है?
- (A) बाड़मेर
- (B) अजमेर
- (C) सांगानेर
- (D) भीलवाड़ा
अजरख प्रिंट बाड़मेर की प्रसिद्ध छपाई शैली है, जिसे खत्री जाति के लोग करते हैं। इसमें लाल और नीले रंगों का प्रयोग प्रमुख होता है। इसकी खासियत है कि दोनों तरफ छपाई की जाती है और ज्यामितीय अलंकरण बनाए जाते हैं। यह छपाई तुर्की टाइलों से मिलती-जुलती दिखाई देती है।
220. बाड़मेर प्रिंट किस नाम से जाना जाता है?
- (A) बादला
- (B) अजरक
- (C) फड़
- (D) पिछवाई
बाड़मेर प्रिंट 'अजरख प्रिंट' के नाम से जाना जाता है। इसे खत्री जाति के लोग करते हैं। इसमें लाल और नीले रंग का विशेष उपयोग होता है। खास बात यह है कि अजरख प्रिंट दोनों तरफ से छापा जाता है, जिससे यह बेहद आकर्षक और टिकाऊ होता है।
राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ – सभी भाग:
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